# लखनऊ कोचिंग आग: न इमरजेंसी एग्जिट, न दूसरा रास्ता, और 15 छात्रों की जान चली गई

> लखनऊ के अलीगंज इलाके में एक कोचिंग और एनीमेशन संस्थान में लगी भीषण आग में 15 छात्रों और ट्रेनीज़ की मौत हो गई। जांच में सामने आया है कि इमारत में कोई इमरजेंसी एग्जिट नहीं था और यह रिहायशी भवन बिना जरूरी सुरक्षा इंतजामों के व्यावसायिक कोचिंग सेंटर में बदल दिया गया था।

**Type:** article · **Category:** उत्तर प्रदेश · **Published:** 2026-06-23 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/uttar-pradesh/lucknow-kochinga-aga-na-imarajensi-egjita-na-dusara-rasta-aura-15-chhatron-ki-jana-chali-gai-2387 · **Language:** Hindi
**Tags:** लखनऊ कोचिंग सेंटर आग, अग्निकांड 15 मौतें, SIT जांच उत्तर प्रदेश, इमरजेंसी एग्जिट नहीं, अलीगंज आग, योगी आदित्यनाथ, LDA लखनऊ, फायर सेफ्टी नियम

लखनऊ के अलीगंज इलाके में एक कोचिंग और एनीमेशन संस्थान में भड़की आग ने 15 छात्रों और ट्रेनीज़ की जिंदगी छीन ली। जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ रही है, यह साफ होता जा रहा है कि असली सवाल आग लगने की वजह नहीं, बल्कि यह है कि इतने लोग बच क्यों नहीं सके।

## एक सीढ़ी, कोई एग्जिट नहीं, बस मौत का इंतजार
शुरुआती जांच में सामने आया है कि पूरी इमारत में आने-जाने के लिए सिर्फ एक सीढ़ी थी, जो एंट्री और एग्जिट दोनों का काम करती थी। इमरजेंसी एग्जिट की कोई व्यवस्था नहीं थी। जब आग लगी, तो सैकड़ों लोगों के सामने बाहर निकलने का यही एकमात्र रास्ता था, जिसकी वजह से भगदड़ की स्थिति पैदा हो गई। इसके अलावा, यह भी आशंका जताई जा रही है कि ऑटोमैटिक गेट सिस्टम ने भी छात्रों को वक्त पर बाहर निकलने से रोका।

दमकल विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, "बचाव अभियान के दौरान सबसे बड़ी चुनौती वहां तक पहुंचना था। अंदर फंसे लोगों तक पहुंचने के लिए हमें वैकल्पिक रास्ते बनाने पड़े और इमारत के कुछ हिस्सों को तोड़ना पड़ा।"

## रिहायशी मकान कब बन गया कमर्शियल कोचिंग सेंटर
जांच में एक और अहम खुलासा हुआ है। इस इमारत को मूल रूप से रिहायशी उपयोग के लिए ही मंजूरी मिली थी। बाद में यहां कोचिंग सेंटर, एनीमेशन स्टूडियो, लाइब्रेरी और दूसरी व्यावसायिक गतिविधियां शुरू हो गईं। LDA यानी लखनऊ विकास प्राधिकरण के अधिकारियों ने भी इस बात की पुष्टि की है कि यह भवन आवासीय उपयोग के लिए स्वीकृत था।

बिल्डिंग नियमों की जानकारी रखने वाले एक पूर्व फायर सेफ्टी कंसल्टेंट ने कहा, "जब रिहायशी इमारतों को बिना जरूरी सुरक्षा इंतजाम के एजुकेशनल या कमर्शियल जगहों में बदला जाता है, तो खतरा कई गुना बढ़ जाता है। लोगों की संख्या बहुत बढ़ जाती है, लेकिन बाहर निकलने के सिस्टम में कोई बदलाव नहीं किया जाता।"

अब सवाल उठ रहे हैं कि संबंधित विभागों ने समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं की और सुरक्षा मानकों की निगरानी में कहां चूक हुई।

## धुएं में छिपे, ऊपर से कूदे, वॉशरूम में मिले शव
बचाव दलों को इमारत के अलग-अलग हिस्सों, वॉशरूम और बंद कमरों से शव बरामद हुए। कहा जा रहा है कि कई छात्र घने धुएं से बचने के लिए इन जगहों पर छिप गए थे। घटनास्थल पर मौजूद चश्मदीदों ने बताया कि आग फैलते ही इमारत में अफरा-तफरी मच गई। कुछ छात्र खिड़कियों और बालकनियों के रास्ते भागने की कोशिश करते दिखे। सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो में कुछ लोग जान बचाने के लिए ऊपरी मंजिलों से छलांग लगाते भी नजर आए।

इस हादसे में मारे गए 15 लोगों में ज्यादातर युवा छात्र और ट्रेनी थे, जो किसी आम दिन की तरह क्लास और इंटर्नशिप के लिए वहां पहुंचे थे। इनमें से कई पहली पीढ़ी के पढ़ाई करने वाले छात्र थे, जो बेहतर नौकरी की उम्मीद में प्रोफेशनल कोर्स कर रहे थे।

## SIT का गठन और मुख्यमंत्री का कड़ा संदेश
उत्तर प्रदेश सरकार ने हादसे की विस्तृत जांच के लिए SIT यानी विशेष जांच दल का गठन किया है। यह टीम आग लगने के कारणों के साथ-साथ उन प्रशासनिक खामियों की भी पड़ताल करेगी, जिनकी वजह से यह हादसा इतना भयावह रूप ले सका।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने घटनास्थल और अस्पताल का दौरा किया और अधिकारियों को दोषियों की पहचान कर सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए। उन्होंने साफ कहा कि लापरवाही बरतने वाले किसी भी व्यक्ति को नहीं छोड़ा जाएगा।

> किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। हर स्तर पर जवाबदेही तय की जाएगी।

## घंटों भटकते रहे पीड़ित परिवार
पीड़ित परिवारों के लिए यह रात किसी दर्दनाक सपने जैसी थी। कई लोग अस्पतालों और घटनास्थल के बाहर घंटों तक अपने करीबियों की खबर का इंतजार करते रहे। जो बच्चे सुबह किसी आम दिन की तरह घर से पढ़ने निकले थे, वे वापस नहीं लौटे। उनकी मौत ने इस हादसे को प्रशासनिक नाकामी का एक बड़ा प्रतीक बना दिया है।

अब जब SIT जांच शुरू हो चुकी है, सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या यह त्रासदी उन नियमों के उल्लंघनों और चेतावनियों का नतीजा थी, जिन्हें बरसों से नजरअंदाज किया जाता रहा।

## इसका आप पर असर
- **भारत में:** यह हादसा देशभर के कोचिंग सेंटरों और शैक्षणिक संस्थानों में फायर सेफ्टी नियमों की अनदेखी पर गंभीर सवाल उठाता है। अभिभावकों को चाहिए कि जहां उनके बच्चे पढ़ रहे हैं, वहां इमरजेंसी एग्जिट और सुरक्षा इंतजामों की जानकारी जरूर लें।
- **लखनऊ में:** LDA और दमकल विभाग के सख्त होने की उम्मीद है, जिससे शहर में रिहायशी भवनों में चल रहे अवैध कमर्शियल संस्थानों पर कार्रवाई हो सकती है।

## सवाल-जवाब

### 1. लखनऊ में कोचिंग सेंटर की आग कहां लगी थी?
आग लखनऊ के अलीगंज इलाके में स्थित एक कोचिंग और एनीमेशन संस्थान की इमारत में लगी।

### 2. इस अग्निकांड में कितने लोगों की मौत हुई?
इस हादसे में 15 छात्रों और ट्रेनीज़ की मौत हो गई।

### 3. इमारत में इमरजेंसी एग्जिट की क्या स्थिति थी?
जांच में सामने आया कि इमारत में कोई इमरजेंसी एग्जिट नहीं था और पूरी बिल्डिंग में आने-जाने के लिए सिर्फ एक सीढ़ी थी, जो एंट्री और एग्जिट दोनों का काम करती थी।

### 4. यह बिल्डिंग किस उपयोग के लिए स्वीकृत थी?
LDA ने पुष्टि की है कि यह भवन आवासीय उपयोग के लिए स्वीकृत था, लेकिन बाद में वहां कोचिंग सेंटर, एनीमेशन स्टूडियो और लाइब्रेरी जैसी व्यावसायिक गतिविधियां शुरू हो गईं।

### 5. उत्तर प्रदेश सरकार ने जांच के लिए क्या कदम उठाए?
सरकार ने SIT यानी विशेष जांच दल का गठन किया है, जो आग लगने के कारणों और प्रशासनिक खामियों दोनों की जांच करेगा।

### 6. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस हादसे पर क्या कहा?
उन्होंने घटनास्थल और अस्पताल का दौरा करने के बाद कहा कि किसी भी दोषी को नहीं बख्शा जाएगा और हर स्तर पर जवाबदेही तय की जाएगी।

### 7. मारे गए छात्र कौन थे?
मृतकों में ज्यादातर युवा छात्र और ट्रेनी थे, जिनमें कई पहली पीढ़ी के पढ़ाई करने वाले थे जो बेहतर नौकरी की उम्मीद में प्रोफेशनल कोर्स और इंटर्नशिप कर रहे थे।

### 8. बचाव दल को क्या चुनौतियां आईं?
दमकल कर्मियों को अंदर फंसे लोगों तक पहुंचने के लिए वैकल्पिक रास्ते बनाने पड़े और इमारत के कुछ हिस्सों को तोड़ना पड़ा।

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