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  "title": "मैनपुरी विधानसभा सीट का तीन दशक का इतिहास और 2027 के भावी सियासी समीकरण",
  "summary": "समाजवादी पार्टी के दुर्ग माने जाने वाले मैनपुरी जिले की सदर विधानसभा सीट पर पिछले आठ चुनावों में भाजपा का पलड़ा भारी रहा है। जानिए 1991 से 2022 तक के सभी चुनावी आंकड़े और आगामी विधानसभा चुनाव की सियासी बिसात।",
  "content": "उत्तर प्रदेश की राजनीति में मैनपुरी जिले को समाजवादी पार्टी का सबसे मजबूत गढ़ माना जाता है, क्योंकि यह क्षेत्र पार्टी नेतृत्व के पैतृक आवास से जुड़ा हुआ है। हालांकि, मैनपुरी लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली सदर विधानसभा सीट संख्या 107 का ऐतिहासिक रिपोर्ट कार्ड एक बेहद दिलचस्प और अलग सियासी कहानी बयां करता है। इस प्रतिष्ठित सीट पर किसी एक राजनीतिक दल का स्थायी वर्चस्व नहीं रहा है। वर्ष 1991 से लेकर 2022 तक आयोजित हुए आठ विधानसभा चुनावों के परिणामों का विश्लेषण करें तो भारतीय जनता पार्टी ने पांच बार जीत हासिल की है, जबकि समाजवादी पार्टी केवल तीन बार इस सीट पर परचम लहराने में सफल रही है। वर्तमान में उत्तर प्रदेश सरकार में पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह इस सीट का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। आने वाले 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए दोनों ही प्रमुख दलों ने अभी से अपनी रणनीतिक बिसात बिछाना शुरू कर दिया है।\n\nराम लहर के दौर में 1991 और 1993 के चुनावी नतीजे\nउत्तर प्रदेश में 1990 के दशक की शुरुआत में राम मंदिर आंदोलन के चरम पर होने के दौरान 1991 के विधानसभा चुनाव आयोजित किए गए थे। इस चुनाव में भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार नरेंद्र सिंह ने मैनपुरी सीट पर बड़ी जीत हासिल की थी। उन्होंने कुल 34,014 मत प्राप्त किए थे। उन्होंने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी जनता पार्टी के प्रत्याशी कालीचरण यादव को 8,535 वोटों के अंतर से पराजित किया था, जिन्हें 25,479 वोट मिले थे। इस मुकाबले में जनता दल के उम्मीदवार इंदल सिंह चौहान तीसरे स्थान पर रहे थे और उन्हें 9,881 वोट प्राप्त हुए थे।\n\nइसके बाद 1993 में हुए अगले विधानसभा चुनाव में भाजपा ने एक बार फिर अपने निवर्तमान विधायक नरेंद्र सिंह पर भरोसा जताया। नरेंद्र सिंह इस चुनाव में भी पार्टी की उम्मीदों पर खरे उतरे और लगातार दूसरी बार जीत दर्ज करने में सफल रहे। उन्हें कुल 38,720 वोट मिले। इस चुनाव में समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार कुंवर सत्येंद्र सिंह 35,615 वोट हासिल करके दूसरे स्थान पर रहे थे। हालांकि, भाजपा की जीत का अंतर 1991 की तुलना में घटकर 3,105 वोट रह गया था। इस चुनाव में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के प्रत्याशी किशन चंद यादव तीसरे स्थान पर रहे, जिन्हें 16,364 वोट मिले थे।\n\n1996 में सपा का कब्जा और जीत का ऐतिहासिक रिकॉर्ड\nलगातार दो बार पराजय झेलने के बाद 1996 के विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी ने जोरदार वापसी की। सपा प्रत्याशी माणिक चंद यादव ने भाजपा के विजय अभियान को रोकते हुए मैनपुरी सीट पर कब्जा जमाया। माणिक चंद यादव ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 64,973 वोट हासिल किए और भाजपा के दो बार के विधायक नरेंद्र सिंह को 24,342 वोटों के भारी अंतर से पराजित कर दिया। नरेंद्र सिंह को इस चुनाव में 40,631 वोट मिले थे। वर्ष 1991 से 2022 तक के पूरे तीन दशकों के दौरान वोटों के अंतर के लिहाज से यह इस सीट पर दर्ज की गई सबसे बड़ी जीत का रिकॉर्ड है। इस चुनाव में बहुजन समाज पार्टी और कांग्रेस का गठबंधन था, जिसके उम्मीदवार भगवत दास शाक्य 32,098 वोट पाकर तीसरे स्थान पर रहे थे।\n\n2002 और 2007 में भाजपा की वापसी और कड़ा मुकाबला\nवर्ष 2002 के विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने अशोक सिंह चौहान को अपना उम्मीदवार बनाकर दांव खेला, जो बेहद सफल साबित हुआ। अशोक सिंह चौहान ने 36,239 वोट प्राप्त करके सपा के निवर्तमान विधायक माणिक चंद यादव को मात दी। माणिक चंद यादव को 34,410 वोट मिले थे। भाजपा ने यह चुनाव महज 1,829 वोटों के अत्यंत सूक्ष्म अंतर से जीता था। यह पिछले तीन दशकों में इस सीट पर सबसे कम अंतर वाली जीत दर्ज की गई है। इस चुनाव में बहुजन समाज पार्टी के प्रत्याशी अश्विनी कुमार उर्फ बब्लू पांडे 22,832 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहे, जबकि पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह की राष्ट्रीय क्रांति पार्टी के उम्मीदवार विनोद कुमार कश्यप 20,295 वोट हासिल करके चौथे स्थान पर रहे थे।\n\nवर्ष 2007 के चुनाव में जब पूरे राज्य में बहुजन समाज पार्टी की पूर्ण बहुमत की सरकार बन रही थी, उस समय भी मैनपुरी सीट पर भाजपा का परचम लहराता रहा। अशोक सिंह चौहान ने लगातार दूसरी बार जीत हासिल की। उन्हें 49,367 वोट मिले, जबकि उनके मुख्य प्रतिद्वंद्वी सपा के प्रोफेसर कालीचरण यादव को 44,898 वोट प्राप्त हुए। भाजपा ने यह मुकाबला 4,469 वोटों के अंतर से जीता। पूरे प्रदेश में लहर बनाने वाली बसपा इस सीट पर तीसरे स्थान पर खिसक गई और उसके उम्मीदवार सुनील वर्मा उर्फ लालू केवल 24,352 वोट ही हासिल कर सके।\n\n2012 और 2017 में सपा का दबदबा\nवर्ष 2012 के चुनाव में समाजवादी पार्टी ने फिर से वापसी की और उसके प्रत्याशी राजकुमार उर्फ राजू यादव ने जीत हासिल की। उन्होंने 54,990 वोट हासिल करके बहुजन समाज पार्टी की प्रत्याशी रमा शाक्य को 14,209 वोटों के अंतर से हराया, जिन्हें 40,781 वोट मिले थे। इस चुनाव में कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़े प्रोफेसर कालीचरण यादव 24,280 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहे, जबकि भाजपा के पूर्व विधायक नरेंद्र सिंह 20,040 वोट पाकर चौथे स्थान पर खिसक गए थे।\n\nवर्ष 2017 के चुनाव में पूरे प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी की प्रचंड लहर के बावजूद समाजवादी पार्टी के राजकुमार उर्फ राजू यादव अपनी सीट बचाने में कामयाब रहे। उन्होंने 75,787 वोट हासिल किए और भाजपा के अशोक कुमार को 8,831 वोटों से हराया, जिन्हें 66,956 वोट मिले थे। यद्यपि सपा की जीत का अंतर 2012 के मुकाबले कम हो गया था, लेकिन लहर के विपरीत मिली यह जीत सपा के लिए बेहद अहम थी। इस चुनाव में बसपा के उम्मीदवार महाराज सिंह 48,314 वोट हासिल करके तीसरे स्थान पर रहे थे।\n\n2022 में जयवीर सिंह की जीत और योगी सरकार में मंत्री पद\nवर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने अपनी रणनीति बदलते हुए वरिष्ठ नेता जयवीर सिंह को मैदान में उतारा। इस कांटे के मुकाबले में जयवीर सिंह ने बाजी पलट दी और 99,814 वोट हासिल करके जीत दर्ज की। उन्होंने दो बार के विधायक रहे सपा के राजकुमार उर्फ राजू यादव को 6,766 वोटों के अंतर से हराया। राजू यादव को 93,048 वोट मिले थे। बसपा उम्मीदवार गौरव नंद इस चुनाव में केवल 17,216 वोट पाकर तीसरे स्थान पर रहे। इस महत्वपूर्ण जीत के बाद जयवीर सिंह को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मंत्रिमंडल में स्थान दिया गया और वर्तमान में वे उत्तर प्रदेश सरकार में पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री का कार्यभार संभाल रहे हैं।\n\n2027 के चुनाव के सामाजिक और राजनीतिक समीकरण\nमैनपुरी विधानसभा क्षेत्र का सामाजिक ताना-बाना बेहद जटिल और प्रतिस्पर्धी है। इस क्षेत्र में यादव, क्षत्रिय और शाक्य बिरादरी के मतदाताओं की संख्या सबसे अधिक है, जो किसी भी चुनाव का परिणाम तय करने में मुख्य भूमिका निभाते हैं। इनके अलावा अनुसूचित जाति वर्ग के साथ-साथ लोधी, निषाद और बघेल जैसी अन्य पिछड़ा वर्ग की जातियां भी निर्णायक भूमिका में रहती हैं। 1991 से 2022 तक के आंकड़ों से स्पष्ट है कि यह सीट न तो भाजपा का स्थायी किला है और न ही सपा की सुरक्षित जागीर। आगामी 2027 के विधानसभा चुनाव में दोनों ही दलों के बीच एक बार फिर सीधी और कड़ी टक्कर होने के पूरे आसार हैं, जहां उम्मीदवारों के चयन और जातीय गोलबंदी पर ही जीत का दारोमदार टिकेगा।\n\nइसका आप पर असर\nमैनपुरी विधानसभा सीट के चुनावी नतीजे और सियासी समीकरण उत्तर प्रदेश की राजनीति में शक्ति संतुलन को प्रभावित करते हैं।\n\n• भारत में: उत्तर प्रदेश का सबसे बड़ा राजनीतिक राज्य होना देश की राष्ट्रीय राजनीति की दिशा तय करता है। मैनपुरी जैसी हाई प्रोफाइल सीटों पर मुकाबले राजनीतिक दलों की जमीनी पकड़ का स्पष्ट संकेत देते हैं।\n• मैनपुरी और यूपी में: क्षेत्र के निवासियों के लिए स्थानीय विधायक का सत्ताधारी दल से होना विकास योजनाओं और बुनियादी ढांचे के बजट आवंटन को सीधे प्रभावित करता है। जयवीर सिंह के कैबिनेट मंत्री होने से क्षेत्र में पर्यटन और सांस्कृतिक परियोजनाओं को प्राथमिकता मिल रही है।\n• राजनीतिक कार्यकर्ताओं के लिए: 2027 के चुनाव से पहले कैडर की सक्रियता और बूथ प्रबंधन पर दोनों ही दल भारी ध्यान केंद्रित करेंगे। स्थानीय कार्यकर्ताओं के लिए चुनाव की तैयारियां अभी से तेज हो जाएंगी।\n• मतदाताओं की भूमिका: क्षेत्र के यादव, क्षत्रिय, शाक्य और अन्य पिछड़ा वर्ग के मतदाताओं की गोलबंदी आगामी चुनाव के परिणाम तय करने में केंद्रीय भूमिका निभाएगी। स्थानीय नागरिक विकास कार्यों और प्रतिनिधित्व के आधार पर अपनी पसंद चुन सकते हैं।\n\nऐसा क्यों हुआ\nमैनपुरी सदर सीट पर पिछले तीन दशकों के दौरान चुनावों में बार-बार हुए बदलाव के पीछे मुख्य रूप से सामाजिक समीकरण और दलीय रणनीतियां जिम्मेदार रही हैं।\n\n• सामजिक संतुलन: क्षेत्र में यादव, क्षत्रिय और शाक्य मतदाताओं की बड़ी आबादी है, जिनके वोटों का विभाजन ही चुनाव परिणाम तय करता है। जब भी गैर-यादव वोटों का ध्रुवीकरण हुआ है, वहां भाजपा को बढ़त हासिल हुई है।\n• उम्मीदवार का चयन: 2022 में भाजपा द्वारा वरिष्ठ नेता जयवीर सिंह को उम्मीदवार बनाने से समीकरण बदले और उन्होंने 6,766 वोटों से जीत हासिल की। सही प्रत्याशी का चुनाव सीट के नतीजों को प्रभावित करता रहा है।\n• राज्यव्यापी लहरें: 1991 की राम लहर में भाजपा ने जीत दर्ज की, जबकि 1996 और 2012 में सपा की मजबूत स्थिति ने उसे जीत दिलाई। 2017 में भाजपा की राज्यव्यापी लहर के बावजूद सपा ने यह सीट बरकरार रखी थी।\n• बसपा का वोट शेयर: बहुजन समाज पार्टी के उम्मीदवार को मिलने वाले वोटों का घटने-बढ़ने का सीधा असर सपा और भाजपा के बीच जीत के अंतर पर पड़ता है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. मैनपुरी विधानसभा सीट (संख्या 107) से वर्तमान विधायक कौन हैं?\nवर्तमान में भारतीय जनता पार्टी के जयवीर सिंह मैनपुरी सीट से विधायक हैं, जो योगी सरकार में पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री हैं।\n\n2. 1991 से 2022 तक भाजपा और सपा ने मैनपुरी सीट पर कितनी बार जीत दर्ज की है?\nइस अवधि के दौरान हुए 8 विधानसभा चुनावों में भाजपा ने 5 बार और समाजवादी पार्टी ने 3 बार जीत हासिल की है।\n\n3. मैनपुरी सीट पर 1991 से 2022 के बीच सबसे बड़ी जीत का अंतर क्या रहा है?\nसबसे बड़ी जीत 1996 में सपा के माणिक चंद यादव ने दर्ज की थी, जब उन्होंने भाजपा के नरेंद्र सिंह को 24,342 वोटों से हराया था।\n\n4. 2022 के विधानसभा चुनाव में मैनपुरी सीट पर जीत का अंतर कितना था?\n2022 के चुनाव में भाजपा के जयवीर सिंह ने सपा के राजकुमार उर्फ राजू यादव को 6,766 वोटों के करीबी अंतर से हराया था।\n\n5. मैनपुरी विधानसभा क्षेत्र में कौन से सामाजिक वर्ग मुख्य रूप से निर्णायक भूमिका निभाते हैं?\nइस सीट पर यादव, क्षत्रिय और शाक्य मतदाताओं की संख्या सर्वाधिक है, साथ ही अनुसूचित जाति और अन्य पिछड़ा वर्ग जैसे लोधी, निषाद और बघेल भी निर्णायक भूमिका निभाते हैं।",
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  "category": "उत्तर प्रदेश",
  "publishedAt": "2026-10-28",
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