# माताओं संग बंदी बच्चों का जीवन संवार रहा मुरादाबाद कारागार, पढ़ाई से लेकर खेल और सेहत का रखा जा रहा ध्यान

> मुरादाबाद जिला कारागार में अपनी माताओं के साथ रह रहे 6 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए जेल प्रशासन ने शिक्षा, स्वास्थ्य और खेलकूद के विशेष इंतजाम किए हैं। वर्तमान में दो बच्चे जेल में अपनी माताओं के साथ रह रहे हैं।

**Type:** article · **Category:** उत्तर प्रदेश · **Published:** 2026-09-09 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/uttar-pradesh/mataon-snga-bndi-bachchon-ka-jivana-snvara-raha-moradabad-karagara-parhai-se-lekara-khela-aura-sehata-ka-rakha-ja-raha-dhyana-30276 · **Language:** Hindi
**Tags:** मुरादाबाद जेल, जिला कारागार मुरादाबाद, महिला बंदी, बाल कल्याण, उत्तर प्रदेश जेल, बृजेंद्र सिंह

उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद स्थित जिला कारागार में अपनी माताओं के साथ दिन बिता रहे मासूम बच्चों के शारीरिक, मानसिक और बौद्धिक विकास को ध्यान में रखते हुए विशेष कल्याणकारी कदम उठाए गए हैं। ऐसे बच्चे जिनकी उम्र छह साल से कम है और जिनकी माताएं विभिन्न अपराधों के तहत जेल में सजा काट रही हैं या विचाराधीन बंदी हैं, उन्हें मजबूरीवश अपनी मां के साथ ही रहना पड़ता है। वर्तमान में मुरादाबाद जिला कारागार में दो मासूम बच्चे अपनी माताओं के साथ निवास कर रहे हैं। इन बच्चों के बचपन पर जेल के माहौल का कोई विपरीत प्रभाव न पड़े, इसके लिए जेल प्रशासन द्वारा नियमावली के अनुरूप स्वास्थ्य, आहार, खेलकूद और शिक्षा से जुड़ी तमाम सुविधाएं प्राथमिकता के आधार पर उपलब्ध कराई जा रही हैं।

## जेल नियमावली के अंतर्गत स्वास्थ्य और पोषण की विशेष व्यवस्था
वरिष्ठ जेल अधीक्षक बृजेंद्र सिंह ने इस संबंध में विस्तृत जानकारी साझा करते हुए बताया कि कारागार परिसर में रह रहे मासूम बच्चों और उनकी माताओं की देखभाल पूरी तरह से निर्धारित जेल मैनुअल के नियमों के अधीन की जाती है। जेल नियमावली में बच्चों के स्वास्थ्य, दैनिक खान-पान और नियमित डॉक्टरी जांच से संबंधित सभी व्यवस्थाएं स्पष्ट रूप से परिभाषित हैं। प्रशासन इन नियमों का पूरी निष्ठा से पालन करा रहा है। इसके साथ ही, स्तनपान कराने वाली महिला बंदियों के स्वास्थ्य और शिशुओं के पोषण को ध्यान में रखते हुए उनके लिए विशेष पौष्टिक आहार का प्रावधान किया गया है। इसके तहत माताओं को नियमानुसार दूध, फल और सभी आवश्यक पौष्टिक सामग्रियां नियमित रूप से प्रदान की जाती हैं ताकि बच्चा और मां दोनों पूरी तरह स्वस्थ रहें।

## छह वर्ष की अधिकतम आयु सीमा और परिजनों को सुपुर्दगी की प्रक्रिया
कारागार प्रशासन द्वारा बच्चों को जेल में रखे जाने के संदर्भ में समय-सीमा के नियमों का भी कड़ाई से पालन कराया जाता है। नियमों के अनुसार, कोई भी बच्चा अधिकतम छह वर्ष की आयु तक ही अपनी मां के साथ जेल के अंदर रह सकता है। जैसे ही किसी बच्चे की उम्र छह वर्ष पूर्ण हो जाती है, उसे कारागार परिसर में आगे रहने की अनुमति नहीं दी जाती है। ऐसी स्थिति निर्मित होने पर जेल प्रशासन द्वारा नियमानुसार कार्रवाई शुरू की जाती है। बच्चे को संबंधित महिला बंदी के परिजनों अथवा उनके कानूनी संरक्षकों के सुपुर्द कर दिया जाता है। बच्चे को परिजनों के हवाले करने के साथ ही संपूर्ण मामले की औपचारिक लिखित सूचना संबंधित माननीय न्यायालय को प्रेषित की जाती है ताकि सभी कानूनी अभिलेख अद्यतन रहें।

## क्रेच और चिल्ड्रेंस पार्क के जरिए सर्वांगीण विकास का प्रयास
जेल की चारदीवारी के भीतर रहते हुए भी बच्चों का स्वाभाविक बचपन प्रभावित न हो, इसके लिए मुरादाबाद जेल प्रशासन ने विशेष भौतिक सुविधाएं विकसित की हैं। बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास को बढ़ावा देने के लिए कारागार परिसर के भीतर ही एक समर्पित क्रेच यानी शिशु गृह और एक सुंदर चिल्ड्रेंस पार्क की स्थापना की गई है। इस पार्क और क्रेच में बच्चों के मनोरंजन, खेलने-कूदने और आपस में घुलने-मिलने के पर्याप्त साधन उपलब्ध कराए गए हैं। इन व्यवस्थाओं का मुख्य ध्येय यह सुनिश्चित करना है कि बच्चे जेल के नीरस और तनावपूर्ण वातावरण से दूर रहकर एक सामान्य, खुशहाल और भयमुक्त परिवेश में अपना शुरुआती बचपन बिता सकें।

## प्रारंभिक शिक्षा और बाहरी विद्यालयों में प्रवेश का प्रबंध
मासूम बच्चों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए उनकी शिक्षा-दीक्षा का भी व्यापक खाका तैयार किया गया है। जेल परिसर में रह रहे बच्चों को बुनियादी शिक्षा और संस्कार देने के उद्देश्य से जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी के सहयोग से एक योग्य शिक्षिका की नियुक्ति की गई है। यह शिक्षिका नियमित रूप से कारागार का दौरा कर बच्चों की प्रारंभिक पढ़ाई-लिखाई और देखरेख का कार्य संभालती हैं। इसके अतिरिक्त, यदि कारागार में रह रहे किसी बच्चे की उम्र चार वर्ष से अधिक हो जाती है, तो जेल प्रशासन आगे बढ़कर उसकी औपचारिक शिक्षा की व्यवस्था करता है। इसके तहत बच्चे का दाखिला कारागार के बाहर स्थित किसी मान्यता प्राप्त विद्यालय में कराया जाता है, जिससे बच्चा नियमित रूप से बाहर जाकर स्कूली शिक्षा प्राप्त कर सके और मुख्यधारा से जुड़ा रहे।

## इसका आप पर असर
यह पहल जेल प्रणाली में बंदियों के साथ रह रहे मासूम बच्चों के मूलभूत अधिकारों और उनके सर्वांगीण विकास को सुरक्षित करने की एक महत्वपूर्ण मिसाल प्रस्तुत करती है।

- **उत्तर प्रदेश में:** राज्य के सभी जिला कारागारों में बंदियों के आश्रित बच्चों के लिए जेल नियमावली के तहत स्वास्थ्य और शिक्षा सुविधाएं अनिवार्य की गई हैं। इससे जेल परिसर में रह रहे सैकड़ों बच्चों का भविष्य संवरने की राह आसान हुई है।
- **मुरादाबाद में:** स्थानीय जिला कारागार में निरुद्ध दो बच्चों को परिसर के भीतर क्रेच और पार्क जैसी आधुनिक सुविधाएं मिल रही हैं। इससे उनके मानसिक और शारीरिक विकास पर जेल के वातावरण का नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ता।
- **शिक्षा व्यवस्था के तहत:** 4 वर्ष की आयु पार कर चुके बच्चों के लिए जेल से बाहर नियमित स्कूलों में प्रवेश सुनिश्चित कराया जा रहा है। बुनियादी शिक्षा अधिकारी द्वारा नियुक्त अध्यापिका जेल के भीतर ही प्रारंभिक ज्ञान दे रही हैं।
- **पोषण और स्वास्थ्य के लिए:** स्तनपान कराने वाली महिला बंदियों और शिशुओं के लिए विशेष पौष्टिक आहार का कोटा निर्धारित किया गया है। जेल प्रशासन नियमित स्वास्थ्य जांच के माध्यम से माताओं और बच्चों की सेहत पर नजर रखता है।
- **पारिवारिक पुनर्मिलन के तहत:** 6 वर्ष की आयु पूरी होने पर बच्चों को न्यायालय की पूर्व अनुमति से परिजनों के सुपुर्द किया जाता है। इससे बच्चा जेल की सीमाओं से बाहर निकलकर सामान्य सामाजिक जीवन में लौट पाता है।

## ऐसा क्यों हुआ
भारतीय न्याय व्यवस्था और जेल नियमावली के अंतर्गत 6 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को उनकी मां से अलग न करने का मानवीय प्रावधान है।

- **कानूनी प्रावधान:** कानून के मुताबिक नवजात और छोटे बच्चे अपनी माता की देखभाल पर निर्भर होते हैं। इसी वजह से विचाराधीन या सजायाफ्ता महिला बंदियों के 6 साल तक के बच्चों को जेल में साथ रहने की अनुमति दी जाती है।
- **विकास की आवश्यकता:** जेल का एकाकी माहौल बच्चों के कोमल मन को प्रभावित कर सकता है। इसी पृष्ठभूमि में जेल प्रशासन द्वारा परिसर के अंदर क्रेच, पार्क और शिक्षिका की तैनाती का फैसला लिया गया।
- **आयु सीमा का नियम:** 6 वर्ष के बाद बच्चों की सामाजिक और नैतिक समझ विकसित होने लगती है। इसलिए नियमावली के तहत 6 साल की उम्र पूरी होते ही बच्चे को परिजनों को सौंपने का अनिवार्य नियम बनाया गया है।

## सवाल-जवाब

### 1. मुरादाबाद जेल में बच्चे अपनी मां के साथ अधिकतम कितने समय तक रह सकते हैं?
जेल नियमावली के अनुसार बच्चे अधिकतम 6 वर्ष की आयु तक ही अपनी मां के साथ कारागार में रह सकते हैं।

### 2. बच्चे की उम्र 6 वर्ष पूरी होने पर क्या प्रक्रिया अपनाई जाती है?
6 साल की उम्र पूरी होने पर बच्चे को महिला बंदी के परिजनों को सौंप दिया जाता है और इसकी लिखित जानकारी संबंधित न्यायालय को भेजी जाती है।

### 3. वर्तमान में मुरादाबाद जिला कारागार में माताओं के साथ कितने बच्चे रह रहे हैं?
वरिष्ठ जेल अधीक्षक बृजेंद्र सिंह के अनुसार वर्तमान में दो बच्चे अपनी माताओं के साथ जिला कारागार मुरादाबाद में रह रहे हैं।

### 4. 4 वर्ष से अधिक उम्र के बच्चों की शिक्षा के लिए क्या व्यवस्था है?
4 साल से अधिक उम्र के बच्चों का दाखिला जेल प्रशासन द्वारा कारागार के बाहर किसी स्कूल में कराया जाता है, जबकि शुरुआती पढ़ाई के लिए जेल के भीतर शिक्षिका तैनात हैं।

### 5. जेल में बच्चों के खेलने और शारीरिक विकास के लिए क्या सुविधाएं हैं?
जेल परिसर के भीतर ही बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास के लिए एक क्रेच (शिशु गृह) और एक चिल्ड्रेंस पार्क बनाया गया है।

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