मथुरा में बाबा रामदेव ने भारतीय मुसलमानों को बताया पूर्वजों से जुड़ा, कहा राम और कृष्ण सभी के पूर्वज मथुरा में योग गुरु बाबा रामदेव ने भारतीय मुस्लिमों को धर्मांतरित बताते हुए कहा कि प्राचीन ऋषि-मुनि और राम-कृष्ण भी उनके पूर्वज हैं। उत्तर प्रदेश में 2027 के चुनाव से पहले आए इस बयान ने राजनीतिक सरगर्मी बढ़ा दी है। उत्तर प्रदेश में वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव की रणनीतिक बिसात काफी पहले से सजने लगी है, और सांस्कृतिक विरासत से जुड़े विमर्श एक बार फिर प्रदेश के राजनीतिक गलियारों में उभर कर सामने आ रहे हैं। इसी क्रम में मथुरा की पावन धरा पर योग गुरु बाबा रामदेव द्वारा मुस्लिम समुदाय को लेकर की गई एक विस्तृत टिप्पणी ने राज्य के सियासी तापमान को अचानक बढ़ा दिया है। बाबा रामदेव ने जोर देकर कहा कि भारत के ऐतिहासिक ऋषि-मुनि, चाहे वे पुरुष हों या विदुषी महिलाएं, और भगवान राम तथा कृष्ण भी देश के मुस्लिम समुदाय के ही पूर्वज हैं। उन्होंने अपील की कि यदि भारतीय मुस्लिम समाज अपनी ऐतिहासिक जड़ों को अंगीकार करेगा, तो वे स्वयं को कभी निर्बल अनुभव नहीं करेंगे। इसके साथ ही उन्होंने दोनों समुदायों के परस्पर तालमेल से राष्ट्र को मजबूत बनाने का आह्वान किया और समाज के संपन्न तथा वंचित वर्गों के ईश्वरीय दृष्टिकोण पर भी तंज कसा। ओवैसी की सक्रियता और गठबंधन की चर्चाओं के बीच आया बयान योग गुरु का यह वक्तव्य एक ऐसे अहम राजनीतिक मोड़ पर सामने आया है, जब एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी उत्तर प्रदेश में अपनी मौजूदगी और सक्रियता को धार देने में जुटे हुए हैं। सितंबर के अंतिम पखवाड़े में असदुद्दीन ओवैसी ने मुख्यधारा के राजनीतिक दलों पर अल्पसंख्यक वर्ग को मात्र चुनावी वोट बैंक बनाकर रखने का खुला आरोप लगाया था। इसके साथ ही उन्होंने प्रदेश में भाजपा को चुनावी शिकस्त देने के मकसद से समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के समक्ष एक साझा गठबंधन तैयार करने का औपचारिक प्रस्ताव रखने की बात भी कही थी। ओवैसी के इस पैंतरे के बाद राज्य में राजनीतिक समीकरणों की नई व्याख्या शुरू हो गई थी, जिसके तुरंत बाद मथुरा से बाबा रामदेव की यह टिप्पणी सामने आई। रामदेव की टिप्पणी के प्रमुख अंश मथुरा में संवाद के दौरान बाबा रामदेव ने अपनी बात रखते हुए कहा, "मैं अपने सभी मुस्लिम भाइयों से आग्रह करूंगा कि वे यह स्वीकार करें कि हमारे प्राचीन ऋषि-मुनि चाहे वे पुरुष हों या महिलाएं उनके भी पूर्वज हैं।" उन्होंने आगे कहा कि राम और कृष्ण भी उनके ही पूर्वज हैं, और जब तक लोग अपनी मूल परंपरा और पूर्वजों की स्मृति से जुड़े रहेंगे, तब तक समाज में कोई वर्ग असुरक्षित महसूस नहीं करेगा। रामदेव का तर्क था कि भारत का प्रत्येक मुस्लिम मूल रूप से धर्मांतरित है। उन्होंने यह विचार साझा किया कि जब हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदाय आपसी सहयोग और बंधुत्व की भावना के साथ मिलकर कदम बढ़ाएंगे, तो इससे न केवल समाज को आंतरिक बल मिलेगा, बल्कि समूचा देश भी वैश्विक मंच पर अत्यधिक सशक्त बनकर उभरेगा। सांस्कृतिक राष्ट्रवाद और भाजपा के कोर एजेंडे का विस्तार राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बाबा रामदेव द्वारा दिया गया यह संदेश भाजपा के उस दीर्घकालिक सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के एजेंडे को मजबूत आधार देता है, जिसका मुख्य लक्ष्य बहुसंख्यक हिंदू मतदाताओं में वैचारिक एकजुटता बनाए रखना है। इसके साथ ही, यह विमर्श मुस्लिम समुदाय के एक बड़े तबके, विशेषकर पसमांदा और उदारवादी वर्ग को राष्ट्रीय मुख्यधारा से जोड़ने की मुहिम को भी आगे बढ़ाता है। अयोध्या में भव्य राम मंदिर के लोकार्पण के बाद अब हिंदू आस्था के दो अन्य प्रमुख केंद्र, काशी और मथुरा, प्रदेश तथा देश की राजनीति में अत्यंत संवेदनशील और रणनीतिक विषय बने हुए हैं। ऐसे में भगवान श्रीकृष्ण की जन्मस्थली मथुरा से दिया गया यह संदेश भाजपा के पारंपरिक समर्थकों में एक नया वैचारिक संचार करने की क्षमता रखता है। धार्मिक पहचान बनाम साझी विरासत पर पहले भी उठ चुके हैं सवाल हालांकि बाबा रामदेव के अनुयायी और समर्थक इसे सौहार्द तथा राष्ट्रीय एकता की एक मिसाल बता रहे हैं, लेकिन अल्पसंख्यक संगठनों और उलेमाओं का दृष्टिकोण इससे काफी भिन्न रहा है। मुस्लिम बुद्धिजीवियों और धार्मिक नेताओं की ओर से पूर्व में भी ऐसे बयानों पर गहरी असहमति जताई जाती रही है। उनका तर्क रहा है कि किसी भी नागरिक या समुदाय की वर्तमान आस्था और धार्मिक पहचान को सदियों पुराने ऐतिहासिक मूल या वंशावली के आधार पर पुनः परिभाषित करने का प्रयास अनुचित है। इसी क्रम में जुलाई 2026 में जब बाबा रामदेव ने इसी तरह का विचार सार्वजनिक रूप से रखा था, तब लखनऊ स्थित प्रसिद्ध ईदगाह के इमाम मौलाना खालिद रशीद फिरंगी महली ने उनके उस बयान पर कड़ा ऐतराज दर्ज कराया था। विपक्षी दलों के चुनावी समीकरणों पर पड़ने वाला असर इस ताजा बयानबाजी से उत्तर प्रदेश में मुख्य विपक्षी दलों की भावी रणनीतियों पर भी सीधा असर पड़ने की संभावना है। एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ऐसे बयानों को सीधे तौर पर मुस्लिम पहचान और संविधान प्रदत्त धार्मिक स्वतंत्रता पर आघात के रूप में पेश करने की कोशिश करते रहे हैं। रामदेव के इस धर्मांतरण और पूर्वजों से जुड़े विमर्श पर तीखा प्रतिरोध जताकर ओवैसी मुस्लिम बहुल क्षेत्रों में खुद को अल्पसंख्यकों का सबसे प्रखर और एकमात्र विश्वसनीय हितैषी स्थापित करने का प्रयास करेंगे। दूसरी ओर, समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव वर्ष 2027 के चुनाव के लिए अपने बहुचर्चित 'पीडीए' यानी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक के सामाजिक गठबंधन को मजबूती से आगे बढ़ा रहे हैं। यदि आगामी दिनों में इस सांस्कृतिक बहस के कारण प्रदेश में धार्मिक ध्रुवीकरण तेज होता है, तो सपा के गठबंधन में शामिल गैर-यादव पिछड़ा और अति-पिछड़ा मतदाता वर्ग भाजपा के सांस्कृतिक एजेंडे के इर्द-गिर्द एकजुट हो सकता है, जिससे सपा की चुनावी रणनीति को झटका लग सकता है। उत्तर प्रदेश का 19 प्रतिशत मुस्लिम मतदाता और ध्रुवीकरण की राजनीति उत्तर प्रदेश की जनसांख्यिकी में लगभग 19 प्रतिशत मुस्लिम मतदाता हैं, जो दर्जनों विधानसभा सीटों के चुनावी नतीजों को प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित करने की क्षमता रखते हैं। सवर्ण और अन्य पिछड़ा वर्ग के जटिल सामाजिक समीकरणों के बीच इस तरह की बहसें चुनावी ध्रुवीकरण की नई पटकथा लिखती नजर आ रही हैं। एक तरफ जहां सांस्कृतिक समानता और साझा डीएनए का सिद्धांत रखकर बहुसंख्यक समुदाय को लामबंद करने और उदारवादी मुसलमानों में स्वीकार्यता बनाने का प्रयास चल रहा है, वहीं दूसरी तरफ आक्रामक राजनीति के जरिए पहचान के संकट को मुद्दा बनाया जा रहा है। इसका सीधा परिणाम यह होगा कि 2027 के आम चुनाव में विकास कार्यों, रोजगार और स्थानीय समस्याओं के साथ-साथ सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान का सवाल एक बार फिर मतदाताओं के बीच सबसे गरमागरम विमर्श बनकर उभरेगा। अब यह प्रदेश के मतदाताओं के विवेक पर निर्भर करेगा कि वे विकास के एजेंडे को चुनते हैं या इन सांस्कृतिक आख्यानों को प्राथमिकता देते हैं। इसका आप पर असर उत्तर प्रदेश की चुनावी राजनीति में उभरी इस नई सांस्कृतिक बहस का सीधा प्रभाव राज्य के सामाजिक ताने-बाने और चुनावी प्राथमिकताओं पर पड़ेगा। • उत्तर प्रदेश में: प्रदेश के करीब 19 प्रतिशत मुस्लिम मतदाताओं और पिछड़े वर्गों के बीच राजनीतिक गोलबंदी तेज हो सकती है। आम नागरिकों को आने वाले महीनों में स्थानीय विकास और रोजगार के मुद्दों के साथ-साथ पहचान से जुड़े राजनीतिक विमर्श का सामना करना पड़ेगा। • भारत में: देश भर में विभिन्न समुदायों के बीच साझी विरासत और धार्मिक पहचान को लेकर सार्वजनिक चर्चाएं नए सिरे से शुरू होंगी। इससे राष्ट्रीय स्तर पर राजनीतिक दलों के चुनावी गठबंधन और वैचारिक रुख में बदलाव देखने को मिल सकता है। • मतदाताओं के लिए: चुनावी बहस विकास और नागरिक सुविधाओं से भटककर सांस्कृतिक मुद्दों की ओर मुड़ सकती है। मतदाताओं को अपने स्थानीय प्रतिनिधियों से ठोस नागरिक मुद्दों पर जवाबदेही मांगने के लिए अधिक सतर्क रहना होगा। • राजनीतिक समीकरणों पर: समाजवादी पार्टी के पीडीए फॉर्मूले और एआईएमआईएम की रणनीतियों में नए सिरे से बदलाव देखने को मिलेगा। क्षेत्रीय दलों को अपने पारंपरिक सामाजिक आधार को एकजुट रखने के लिए अतिरिक्त प्रयास करने होंगे। ऐसा क्यों हुआ मथुरा में योग गुरु का यह बयान उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर बदलते राजनीतिक समीकरणों और गठबंधन की कवायदों के चलते सामने आया है। • ओवैसी की गठबंधन पहल: एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी द्वारा यूपी में मुस्लिमों को वोट बैंक बताने और सपा-कांग्रेस को गठबंधन का प्रस्ताव देने के तुरंत बाद यह वैचारिक प्रतिक्रिया देखने को मिली। ओवैसी की इस सक्रियता ने राजनीतिक धड़ों को अपने-अपने एजेंडे को धार देने पर मजबूर किया। • सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की रणनीति: अयोध्या के बाद मथुरा और काशी के मुद्दों के रणनीतिक महत्व को देखते हुए मथुरा से साझी विरासत और पूर्वजों का विमर्श उठाना बहुसंख्यक आधार को एकजुट रखने की दिशा में एक कदम माना जा रहा है। इसका उद्देश्य मतदाताओं को एक बड़े सांस्कृतिक मंच पर जोड़ना है। • धार्मिक पहचान पर पुराना विवाद: ऐतिहासिक जड़ों और वर्तमान धार्मिक आस्था के संबंधों को लेकर यह बहस पहले भी उठ चुकी है, जैसे जुलाई 2026 में लखनऊ के इमाम द्वारा ऐसे ही बयानों पर आपत्ति जताई गई थी। इन अनसुलझे वैचारिक मतभेदों के कारण चुनावी दौर शुरू होते ही यह मुद्दा पुनः सतह पर आ गया। सवाल-जवाब 1. मथुरा में बाबा रामदेव ने भारतीय मुस्लिमों को लेकर क्या कहा? बाबा रामदेव ने कहा कि प्राचीन ऋषि-मुनि और राम-कृष्ण भी भारतीय मुसलमानों के पूर्वज हैं, और देश के सभी मुस्लिम मूल रूप से धर्मांतरित हैं। 2. बाबा रामदेव का यह बयान किस राजनीतिक घटनाक्रम के बाद आया? यह बयान असदुद्दीन ओवैसी द्वारा यूपी में मुस्लिमों को वोट बैंक बताए जाने और सपा-कांग्रेस को भाजपा के खिलाफ गठबंधन का प्रस्ताव देने के बाद आया। 3. जुलाई 2026 में रामदेव के बयान पर किसने आपत्ति जताई थी? जुलाई 2026 में लखनऊ ईदगाह के इमाम मौलाना खालिद रशीद फिरंगी महली ने रामदेव के इसी तरह के बयान पर ऐतराज जताया था। 4. उत्तर प्रदेश में मुस्लिम मतदाताओं की आबादी कितनी है? उत्तर प्रदेश की कुल जनसंख्या में मुस्लिम समुदाय की हिस्सेदारी लगभग 19 प्रतिशत है। 5. अखिलेश यादव 2027 के चुनाव में किस फॉर्मूले पर काम कर रहे हैं? अखिलेश यादव 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए 'पीडीए' यानी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक फॉर्मूले पर काम कर रहे हैं। https://trendkia.com/uttar-pradesh/mathura-men-baba-ramdev-ne-bharatiya-musalamanon-ko-bataya-purvajon-se-jura-kaha-ram-aura-krishna-sabhi-ke-purvaja-40274 TrendKia — Har trend, sabse pehle.