# मथुरा में बीजेपी और कांग्रेस की ऐतिहासिक टक्कर, क्या 2027 के चुनाव में बरकरार रहेगा भगवा दबदबा?

> उत्तर प्रदेश की हॉट सीटों में शामिल मथुरा विधानसभा सीट का राजनीतिक इतिहास बीजेपी और कांग्रेस के बीच कड़े मुकाबले की कहानी बयां करता है, जहां पिछले दो चुनावों में जीत का अंतर एक लाख वोटों से अधिक रहा है।

**Type:** article · **Category:** उत्तर प्रदेश · **Published:** 2026-10-25 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/uttar-pradesh/mathura-men-bjp-aura-congress-ki-aitihasika-takkara-kya-2027-ke-chunava-men-barakarara-rahega-bhagava-dabadaba-51646 · **Language:** Hindi
**Tags:** मथुरा विधानसभा, उत्तर प्रदेश चुनाव, श्रीकांत शर्मा, प्रदीप माथुर, राजनीतिक इतिहास, यूपी विधानसभा चुनाव

उत्तर प्रदेश की राजनीति में मथुरा विधानसभा सीट हमेशा से ही एक अत्यंत महत्वपूर्ण और हॉट सीट मानी जाती रही है। इस निर्वाचन क्षेत्र का चुनावी इतिहास मुख्य तौर पर भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस के बीच चले आ रहे लंबे और कड़े सियासी संघर्ष की पूरी दास्तान कहता है। साल 1991 से लेकर 2022 तक के बीच हुए कुल आठ विधानसभा चुनावों के आंकड़ों पर नजर डालें तो यहाँ भगवा पार्टी ने पाँच बार जीत हासिल की है, जबकि तीन बार कांग्रेस के उम्मीदवारों ने बाजी अपने नाम की है। हैरानी की बात यह है कि इस पूरे दौर में समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी जैसी प्रमुख पार्टियां अपना खाता खोलना तो दूर, कभी रनरअप तक की स्थिति में भी नहीं पहुँच पाईं।

## नब्बे के दशक में रविकांत गर्ग और रामस्वरूप शर्मा का दौर

साल 1991 के विधानसभा चुनाव के दौरान मथुरा की इस सीट पर भारतीय जनता पार्टी के रविकांत गर्ग ने शानदार सफलता हासिल की थी। उन्होंने कुल 45,753 वोट हासिल किए और कांग्रेस उम्मीदवार प्रदीप माथुर को 22,207 वोटों के भारी अंतर से शिकस्त दी थी। इस चुनाव में प्रदीप माथुर सिर्फ 23,546 वोट ही जुटा पाए थे। आपको बता दें कि रविकांत गर्ग ने इससे पहले 1989 का चुनाव भी इसी सीट से जीता था और 1991 में उन्होंने लगातार दूसरी बार जीत दर्ज की थी। जनता दल के नरेंद्र सिंह उस चुनाव में 18,214 वोट पाकर तीसरे स्थान पर रहे थे। इसके बाद 1993 के चुनावी मैदान में बीजेपी ने अपना प्रत्याशी बदलते हुए रामस्वरूप शर्मा को चुनावी समर में उतारा। उन्होंने 55,138 वोट प्राप्त करके कांग्रेस के विजय कुमार को 14,096 वोटों के अंतर से करारी मात दी। विजय कुमार 41,042 वोट पाकर दूसरे पायदान पर रहे थे, जबकि समाजवादी पार्टी के ब्रजेश 7,031 वोट लेकर तीसरे स्थान पर रहे थे।

## लगातार जीत और हार का सिलसिला

वर्ष 1996 के विधानसभा चुनाव में भी बीजेपी के रामस्वरूप शर्मा ने मथुरा सीट पर अपना कब्जा बरकरार रखा। भाजपा प्रत्याशी को इस बार 39,605 वोट मिले, जबकि कांग्रेस के विजय कुमार 34,365 वोटों पर ही सिमट गए। इस बार दोनों प्रत्याशियों के बीच हार-जीत का अंतर महज 5,240 वोटों का रहा था। इस चुनाव में दिलचस्प मोड़ तब आया जब पिछले चुनावों के विजेता रविकांत गर्ग ने निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर ताल ठोकी और वह 23,288 वोट ही हासिल कर सके। हालांकि, साल 2002 के विधानसभा चुनाव में राजनीतिक समीकरण पूरी तरह पलट गए और कांग्रेस के दिग्गज नेता प्रदीप माथुर ने बीजेपी के इस विजयी रथ को रोक दिया। प्रदीप माथुर ने 40,297 वोट पाकर बीजेपी के रविकांत गर्ग को 6,537 वोटों के अंतर से हरा दिया। रविकांत गर्ग को इस चुनाव में 33,760 वोटों से संतोष करना पड़ा था। उस दौरान बहुजन समाज पार्टी तीसरे और समाजवादी पार्टी चौथे स्थान पर रही थी।

## कांग्रेस की पकड़ और प्रदीप माथुर की हैट्रिक

साल 2007 में उत्तर प्रदेश में बहुजन समाज पार्टी की पूर्ण बहुमत वाली सरकार का गठन हुआ था, लेकिन इसके बावजूद मथुरा विधानसभा सीट पर कांग्रेस का दबदबा कायम रहा। कांग्रेस प्रत्याशी प्रदीप माथुर ने लगातार दूसरी बार जीत दर्ज करते हुए 45,383 वोट हासिल किए, जबकि बीजेपी के मुरारी लाल 24,293 वोटों पर ही रुक गए। प्रदीप माथुर ने यह मुकाबला 21,090 वोटों के बड़े अंतर से अपने नाम किया। इसके बाद 2012 के विधानसभा चुनाव में मथुरा सीट पर एक बेहद रोमांचक और कांटे की टक्कर देखने को मिली। कांग्रेस उम्मीदवार प्रदीप माथुर ने 54,498 वोट पाकर बीजेपी के देवेंद्र कुमार शर्मा को मात्र 501 वोटों के बेहद मामूली अंतर से पराजित कर दिया। देवेंद्र कुमार शर्मा 53,997 वोट ही जुटा सके थे। इस बेहद करीबी जीत के साथ ही प्रदीप माथुर ने मथुरा के चुनावी इतिहास में जीत की ऐतिहासिक हैट्रिक पूरी कर ली थी। इस चुनाव में समाजवादी पार्टी तीसरे और बहुजन समाज पार्टी चौथे स्थान पर रही थी।

## श्रीकांत शर्मा की एंट्री और बड़े अंतर से जीत

वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने रणनीति बदलते हुए श्रीकांत शर्मा को अपना उम्मीदवार बनाया और इस फैसले ने सीट का पूरा राजनीतिक परिदृश्य ही बदल दिया। उन्हें कुल 1,43,361 वोट मिले, जबकि कांग्रेस के अनुभवी नेता प्रदीप माथुर 42,200 वोटों पर ही थम गए। श्रीकांत शर्मा ने यह चुनाव 1,01,161 वोटों के भारी-भरकम अंतर से जीतकर इतिहास रच दिया और इसके साथ ही कांग्रेस के विजयी सिलसिले पर पूरी तरह ब्रेक लग गया। इसके बाद साल 2022 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने एक बार फिर श्रीकांत शर्मा पर पूरा भरोसा जताया। उन्होंने इस बार और भी बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए 1,58,859 वोट हासिल किए और कांग्रेस के प्रदीप माथुर को 1,09,803 वोटों के रिकॉर्ड अंतर से करारी शिकस्त दी। प्रदीप माथुर को इस बार 49,056 वोटों से संतोष करना पड़ा। अब तक के मथुरा के चुनावी इतिहास में वोटों के लिहाज से यह सबसे बड़ी और ऐतिहासिक जीत साबित हुई।

## साल 2027 के चुनाव के संभावित सियासी समीकरण

आगामी 2027 के विधानसभा चुनावों में भारतीय जनता पार्टी के पास मथुरा सीट पर अपनी जीत की हैट्रिक पूरी करने का सुनहरा अवसर होगा। वहीं दूसरी ओर, कांग्रेस पार्टी अपनी खोई हुई सियासी जमीन और पुराना वजूद वापस पाने के लिए पूरी ताकत झोंकती नजर आएगी। साल 1991 से लेकर 2022 तक हुए कुल आठ आम चुनावों का रिकॉर्ड बताता है कि यहाँ हमेशा से सीधा मुकाबला बीजेपी और कांग्रेस के बीच ही रहा है, और क्षेत्रीय दल जैसे सपा व बसपा कभी रनरअप तक नहीं बन पाए हैं। मथुरा की अपनी एक खास धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान है, जो इसे राजनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील और महत्वपूर्ण बनाती है। आगामी चुनाव में स्थानीय विकास कार्यों, बुनियादी इन्फ्रास्ट्रक्चर, व्यापारिक गतिविधियों, पर्यटन और धार्मिक स्थलों से जुड़े मुद्दे मतदाताओं के बीच मुख्य चर्चा का विषय बन सकते हैं। हालांकि, राजनीतिक दलों द्वारा प्रत्याशियों के सही चयन, संभावित गठबंधनों और चुनाव के वक्त बनने वाली परिस्थितियों का सीधा असर 2027 के सियासी समीकरणों पर देखने को मिलेगा।

## इसका आप पर असर
मथुरा विधानसभा सीट के पिछले चुनावी नतीजों और आगामी राजनीतिक समीकरणों का सीधा असर यहाँ के स्थानीय निवासियों, मतदाताओं और आगामी चुनावों की तैयारियों पर पड़ेगा।

- **भारत में:** उत्तर प्रदेश के इस प्रमुख चुनावी क्षेत्र के आंकड़े राज्य की कुल राजनीतिक दिशा और क्षेत्रीय प्राथमिकताओं को समझने का पैमाना बनते हैं। इन परिणामों से यह संकेत मिलता है कि कैसे पारंपरिक गढ़ समय के साथ सत्ता परिवर्तन का गवाह बनते हैं।

- **मथुरा में:** स्थानीय मतदाताओं के लिए आगामी 2027 के चुनाव स्थानीय विकास, पर्यटन और बुनियादी ढांचे से जुड़े मुद्दों के इर्द-गिर्द घूमेंगे। यहाँ के निवासियों को अपने प्रतिनिधियों से व्यापार, धार्मिक पर्यटन और शहरी सुविधाओं के विस्तार पर ठोस काम की उम्मीद रहेगी।

- **राजनीतिक दलों के लिए:** सभी प्रमुख राजनीतिक संगठनों को इस सीट पर अपनी रणनीति नए सिरे से तय करनी होगी क्योंकि पिछले दो चुनावों में हार-जीत का अंतर एक लाख वोटों से अधिक रहा है। विपक्षी दलों को भगवा दल के मजबूत होते जनाधार को चुनौती देने के लिए मजबूत ध्रुव और नए समीकरण तलाशने होंगे।

- **स्थानीय व्यापार पर:** मथुरा के धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व के कारण यहाँ के व्यापारियों और पर्यटन से जुड़े लोगों की नजरें हमेशा चुनावी वादों पर टिकी रहती हैं। आगामी चुनाव में मिलने वाले विकास के आश्वासन सीधे तौर पर स्थानीय अर्थव्यवस्था और रोजगार के अवसरों को प्रभावित करेंगे।

- **मतदाता भागीदारी:** पिछले कुछ चुनावों में भारी अंतर से जीत दर्ज होने के बाद स्थानीय नागरिकों में मतदान के प्रति उत्साह और राजनीतिक दलों की सक्रियता दोनों बढ़ जाती हैं। मतदाताओं के लिए यह जरूरी है कि वे अपने क्षेत्र के विकास कार्यों की समीक्षा करके अपने मताधिकार का सही उपयोग करें।

## ऐसा क्यों हुआ
मथुरा विधानसभा सीट पर पिछले तीन दशकों में राजनीतिक समीकरणों के बदलने और चुनावों में बड़े अंतर से हार-जीत होने के पीछे कई ऐतिहासिक और सामाजिक कारण रहे हैं।

- **सीधी चुनावी टक्कर:** साल 1991 से 2022 के बीच हुए आठ आम चुनावों में हमेशा मुख्य मुकाबला भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस के बीच ही केंद्रित रहा है। क्षेत्रीय दलों के मजबूत विकल्प के रूप में उभर न पाने के कारण यहाँ हमेशा द्विपीय राजनीतिक मुकाबला देखने को मिला है।

- **नेतृत्व और प्रत्याशी का प्रभाव:** पिछले दो चुनावों में स्थानीय विधायक श्रीकांत शर्मा के नेतृत्व में भारी-भरकम वोटों से जीत दर्ज होना इस बात का प्रमाण है कि मजबूत और प्रभावी चेहरे मतदाताओं को आकर्षित करने में सफल रहे हैं। इसके विपरीत शुरुआती दौर में प्रदीप माथुर ने लगातार जीत हासिल कर कांग्रेस के प्रभाव को लंबे समय तक बचाए रखा था।

- **धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान:** मथुरा का भगवान कृष्ण की जन्मस्थली होना इसे एक अत्यंत विशिष्ट धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान देता है। यह पहचान यहाँ के राजनीतिक माहौल, विकास के एजेंडे और मतदाताओं की प्राथमिकताओं को सीधे तौर पर प्रभावित करती है।

- **बदलते राजनीतिक दल:** नब्बे के दशक में रविकांत गर्ग और रामस्वरूप शर्मा के जरिए बीजेपी ने अपनी जड़ें मजबूत कीं, जबकि बाद के दशकों में कांग्रेस के प्रभुत्व को चुनौती देते हुए भगवा दल ने बड़े अंतर से जीत हासिल करने का नया रिकॉर्ड बनाया।

## सवाल-जवाब

### 1. मथुरा विधानसभा सीट पर 1991 से 2022 के बीच बीजेपी ने कितनी बार जीत दर्ज की है?
इस अवधि के दौरान हुए 8 विधानसभा चुनावों में बीजेपी ने कुल 5 बार जीत हासिल की है।

### 2. मथुरा सीट से वर्तमान विधायक कौन हैं?
मथुरा से उत्तर प्रदेश सरकार के पूर्व ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा विधायक हैं।

### 3. कांग्रेस उम्मीदवार प्रदीप माथुर ने मथुरा में जीत की हैट्रिक कब लगाई थी?
प्रदीप माथुर ने 2012 के विधानसभा चुनाव में जीत हासिल करके मथुरा सीट पर अपनी जीत की हैट्रिक पूरी की थी।

### 4. साल 2022 के चुनाव में श्रीकांत शर्मा ने कितने वोटों के अंतर से जीत दर्ज की थी?
श्रीकांत शर्मा ने 2022 के चुनाव में कांग्रेस के प्रदीप माथुर को 1,09,803 वोटों के भारी अंतर से हराया था।

### 5. मथुरा सीट पर मुख्य मुकाबला किन दो दलों के बीच रहा है?
यहाँ हमेशा मुख्य मुकाबला भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस के बीच ही देखने को मिला है।

### 6. साल 2012 के चुनाव में प्रदीप माथुर ने अपने प्रतिद्वंद्वी को कितने वोटों से हराया था?
2012 के चुनाव में प्रदीप माथुर ने बीजेपी के देवेंद्र कुमार शर्मा को मात्र 501 वोटों के अंतर से हराया था।

### 7. साल 2027 के चुनाव में किस पार्टी के सामने जीत की हैट्रिक का मौका होगा?
आगामी 2027 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी के सामने इस सीट पर अपनी लगातार तीसरी जीत दर्ज करने का मौका होगा।

---
_TrendKia — Har trend, sabse pehle.. Machine-readable view; canonical HTML at the URL above._