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  "title": "मऊ के राजकीय आयुर्वेदिक अस्पताल में कागजों पर हैं 15 बेड, ज़मीन पर एक भी नहीं मिलने से मरीज परेशान",
  "summary": "उत्तर प्रदेश के मऊ जिले के एक राजकीय आयुर्वेदिक अस्पताल में कागजों पर 15 बेड की सुविधा दर्ज है, लेकिन ज़मीन पर एक भी बेड न होने के कारण मरीजों को मजबूरन महंगे निजी अस्पतालों का रुख करना पड़ रहा है।",
  "content": "उत्तर प्रदेश के मऊ जनपद में स्थित एक राजकीय आयुर्वेदिक अस्पताल बदइंतोमी की एक बड़ी मिसाल पेश कर रहा है। कागजों पर इस अस्पताल के भीतर इलाज के लिए 15 बेड स्थापित होने का दावा किया जाता है, लेकिन हकीकत यह है कि ज़मीन पर एक भी बेड मौजूद नहीं है। इस बुनियादी कमी के चलते दूर-दूर से इलाज की उम्मीद लेकर आने वाले मरीजों और उनके परिजनों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। बेड न होने की वजह से गंभीर रूप से बीमार लोगों को अस्पताल में भर्ती नहीं किया जा सकता, जिससे उन्हें मजबूरन महंगे निजी क्लीनिकों और अस्पतालों का सहारा लेना पड़ता है। स्थानीय लोगों और मरीजों की अब केवल एक ही मांग है कि इस अस्पताल में जल्द से जल्द बेड की मु मुकम्मल व्यवस्था की जाए, ताकि उन्हें राहत मिल सके।\n\nमरीजों को उठाना पड़ता है निजी अस्पतालों का भारी खर्च\nअस्पताल में उपचार कराने पहुंचे प्रेमचंद प्रजापति ने बताया कि जो लोग अत्यधिक बीमार या गंभीर स्थिति में होते हैं, वे यहां डॉक्टर के पास आते तो हैं लेकिन बेड न होने के कारण उन्हें भर्ती नहीं किया जा सकता। ऐसी स्थिति में उन्हें बाहर के प्राइवेट अस्पतालों की शरण लेनी पड़ती है, जहां उनकी जेब पर भारी आर्थिक बोझ पड़ता है। यदि इसी आयुर्वेदिक अस्पताल परिसर में मरीजों को भर्ती करने की मुकम्मल व्यवस्था होती, तो लोगों को अपनी गाढ़ी कमाई महंगे इलाज में खर्च नहीं करनी पड़ती। मरीजों का यह भी मानना है कि आयुर्वेदिक औषधियां बीमारी को जड़ से खत्म करने का काम करती हैं, जिसके कारण इस केंद्र पर प्रतिदिन बड़ी संख्या में लोग इलाज के लिए पहुंचते हैं, लेकिन सुविधाओं के अभाव में उन्हें निराशा हाथ लगती है।\n\nडॉक्टर रहते हैं मौजूद, पर संसाधनों का है भारी अभाव\nस्थानीय मरीज प्रेमचंद का यह भी कहना है कि अस्पताल के डॉक्टर अपनी ड्यूटी पर मुस्तैद रहते हैं और समय पर आते हैं। वे आने वाले मरीजों की जांच करके उन्हें सही दवाइयां भी लिखते हैं और वितरित करते हैं। हालांकि, गंभीर मरीजों के मामले में डॉक्टर केवल दवाएं देकर ही काम चला सकते हैं क्योंकि उन्हें अस्पताल में एडमिट करने का कोई विकल्प ही नहीं है। यही कारण है कि मरीजों को मजबूरी में आयुर्वेद छोड़कर दूसरी चिकित्सा पद्धतियों और बाहर के प्राइवेट अस्पतालों का रुख करना पड़ता है। यदि इस चिकित्सालय के भीतर बेड की उचित सुविधा मुहैया करा दी जाए, तो इस इलाके के लोगों को आयुर्वेदिक उपचार का पूरा और बेहतर लाभ मिल सकेगा। स्थानीय नागरिकों की ओर से लगातार यह मांग उठाई जा रही है कि प्रशासन कागजों पर दर्ज इन 15 बेडों को धरातल पर उतारे।\n\nस्टाफ की कमी और बुनियादी सुविधाओं का रोड़ा\nएक अन्य स्थानीय निवासी राज नारायण यादव ने अपनी बात रखते हुए बताया कि अस्पताल की इमारत तो खड़ी कर दी गई है और कागजों में 15 बेड की बात भी कही गई है, लेकिन धरातल पर भर्ती के लिए एक अदद बेड भी नजर नहीं आता। इस व्यवस्था के न होने से स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ लेने आए लोगों को दर-दर भटकना पड़ता है। स्वास्थ्य विभाग से यह अपेक्षा की जाती है कि वह अविलंब यहां बेड की व्यवस्था करे, ताकि मरीजों को इधर-उधर न भटकना पड़े। इसके साथ ही अस्पताल में केवल बेड ही नहीं, बल्कि अतिरिक्त स्टाफ की भी सख्त जरूरत है क्योंकि मौजूदा समय में कर्मचारियों की भी कमी बनी हुई है। यदि अस्पताल प्रशासन यहाँ पर्याप्त स्टाफ और बेड दोनों की व्यवस्था सुनिश्चित कर दे, तो क्षेत्र के तमाम जरूरतमंद मरीजों को बड़ी राहत मिल जाएगी।\n\nचिकित्सा प्रभारी ने बताई जगह की कमी की समस्या\nपूरे मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए आयुर्वेदिक चिकित्सा प्रभारी सत्येंद्र साहू ने स्पष्ट किया कि अस्पताल के लिए 15 बेड की स्थापना हेतु जगह को चिन्हित करने का प्रयास किया जा रहा है। हालांकि, उनकी मुख्य अड़चन यह है कि नगर पंचायत की तरफ से अभी तक इसके लिए भूमि का आवंटन नहीं किया जा रहा है। जैसे ही जमीन की यह प्रक्रिया पूरी हो जाएगी, अस्पताल को उस नई जगह पर स्थानांतरित कर दिया जाएगा और सभी 15 बेड सुचारू रूप से स्थापित कर दिए जाएंगे। इस क्षेत्र में एक बड़ा आयुर्वेदिक अस्पताल खोलने और मरीजों को तमाम जरूरी आधुनिक सुविधाएं देने की योजना है। इस सिलसिले में कई बार प्रशासनिक स्तर पर आवेदन भी दिए जा चुके हैं, लेकिन नगर पंचायत द्वारा अब तक जगह चिन्हित न किए जाने के कारण काम अटका हुआ है। जमीन मिलते ही अस्पताल का निर्माण कार्य और अन्य सुविधाएं वहां स्थापित कर दी जाएंगी।\n\nइसका आप पर असर\nमऊ के इस राजकीय आयुर्वेदिक अस्पताल में बेड न होने से स्थानीय मरीजों को गंभीर स्थिति में निजी अस्पतालों का महंगा खर्च उठाना पड़ता है।\n\n• मऊ में: स्थानीय मरीजों को गंभीर बीमारी के इलाज के लिए प्राइवेट क्लीनिकों में भारी रकम चुकानी पड़ रही है। नगर पंचायत द्वारा जमीन अलॉट होने के बाद ही अस्पताल में बेड और अन्य सुविधाएं मिल सकेंगी।\n• भारत में: देश के कई ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों में सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर बुनियादी सुविधाओं और बुनियादी ढांचे का अभाव बना हुआ है। इससे आम जनता को समय पर और किफायती चिकित्सा मिलने में बाधा उत्पन्न होती है।\n\nऐसा क्यों हुआ\nअस्पताल में बेड की अनुपलब्धता प्रशासनिक और भूमि आवंटन से जुड़ी अड़चनों के कारण है।\n\n• भूमि आवंटन में देरी: आयुर्वेदिक चिकित्सा प्रभारी सत्येंद्र साहू के अनुसार, 15 बेड स्थापित करने के लिए जगह चिन्हित करने का प्रयास जारी है, लेकिन नगर पंचायत द्वारा अभी तक भूमि अलॉट नहीं की गई है।\n• बुनियादी ढांचे की कमी: अस्पताल की इमारत बनने के बावजूद कागजी दावों और ज़मीनी हकीकत के बीच बड़ा अंतर है, जिसके कारण डॉक्टर चाहकर भी गंभीर मरीजों को भर्ती नहीं कर पा रहे हैं।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. मऊ के राजकीय आयुर्वेदिक अस्पताल में कागजों पर कितने बेड स्थापित बताए गए हैं?\nकागजों पर इस अस्पताल में 15 बेड स्थापित बताए गए हैं।\n\n2. धरातल पर अस्पताल में कितने बेड मौजूद हैं?\nधरातल पर इस अस्पताल में एक भी बेड मौजूद नहीं है।\n\n3. मरीजों को निजी अस्पतालों का सहारा क्यों लेना पड़ता है?\nअस्पताल में भर्ती होने के लिए बेड की कोई सुविधा न होने के कारण मरीजों को मजबूरन महंगे निजी अस्पतालों में जाना पड़ता है।\n\n4. अस्पताल के आयुर्वेदिक चिकित्सा प्रभारी कौन हैं?\nअस्पताल के आयुर्वेदिक चिकित्सा प्रभारी सत्येंद्र साहू हैं।\n\n5. बेड और अस्पताल को शिफ्ट करने में क्या बाधा आ रही है?\nनगर पंचायत द्वारा अभी तक अस्पताल के लिए भूमि अलॉट नहीं की गई है, जिससे जगह चिन्हित करने में देरी हो रही है।",
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  "category": "उत्तर प्रदेश",
  "publishedAt": "2026-10-22",
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