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  "type": "article",
  "title": "मेरठ में सनसनीखेज मर्डर केस: पति को मारकर सांप से कटवाने वाले रविता और अमरदीप को फांसी, अब बने कैदी नंबर 399 और 400",
  "summary": "मेरठ की एक अदालत ने पति की हत्या कर शव को सांप से कटवाने के जुर्म में रविता और उसके प्रेमी अमरदीप को फांसी की सजा सुनाई है। सजा के बाद दोनों को जिला जेल में अलग-अलग बैरकों में रखा गया है, जहां उनकी रात बेचैनी में कटी।",
  "content": "अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश जयवीर सिंह नागर की अदालत ने शुक्रवार को एक सनसनीखेज हत्याकांड में कड़ा फैसला सुनाते हुए रविता और उसके प्रेमी अमरदीप को मौत की सजा से दंडित किया है। इन दोनों ने मिलकर रविता के पति अमित कश्यप की बेरहमी से हत्या कर दी थी और इस जघन्य अपराध को प्राकृतिक मौत का रूप देने के लिए शव के पास एक जिंदा सांप छोड़ दिया था, ताकि सबको लगे कि उसकी मौत सर्पदंश से हुई है। अदालत का यह फैसला सामने आने के बाद दोनों दोषियों को मेरठ की चौधरी चरण सिंह जिला जेल भेज दिया गया है, जहां कानूनी प्रक्रियाओं के तहत उन्हें नए कैदी नंबर आवंटित किए गए हैं और कड़ी सुरक्षा के बीच अलग-अलग बैरकों में रखा गया है। जेल प्रशासन से मिली जानकारी के अनुसार, इन दोनों ने सजा मिलने के बाद अपनी पहली रात बेहद तनाव और बेचैनी के माहौल में बिताई है।\n\n \n\nअदालत में फूट-फूट कर रोए दोषी\n\nशुक्रवार को जब न्यायाधीश ने इस बहुचर्चित मामले में फैसला सुनाया, तो उस समय खचाखच भरी अदालत के भीतर माहौल काफी तनावपूर्ण और भावनात्मक हो गया। जैसे ही मौत की सजा का ऐलान हुआ, दोनों दोषी न्यायालय कक्ष में ही फफक-फफक कर रो पड़े। दूसरी ओर, अदालत कक्ष में मौजूद आम जनता और अन्य लोग न्यायपालिका के इस सख्त रुख के समर्थन में लगातार नारेबाजी कर रहे थे। वरिष्ठ जेल अधीक्षक वीरेश राज शर्मा ने मीडिया को जानकारी दी कि फैसला आने के बाद से जेल में इन दोनों से मिलने के लिए अभी तक कोई भी परिजन या परिचित नहीं पहुंचा है। जेल नियमावली के मुताबिक दोनों को विशेष निगरानी में रखा गया है।\n\n \n\nअलग बैरकों में कटेगी दोषियों की रातें\n\nजेल अधिकारियों द्वारा दी गई आधिकारिक प्रविष्टि के अनुसार, रविता को जेल में कैदी नंबर 399/2026 दिया गया है और उसे महिला विंग की बैरक नंबर 12A के भीतर रखा गया है। वहीं दूसरी तरफ, उसके प्रेमी और सह-अपराधी अमरदीप को कैदी नंबर 400/2026 आवंटित किया गया है और उसे पुरुष बैरक नंबर 1A के अंदर भेजा गया है। गौर करने वाली बात यह है कि अमरदीप को उसी विशेष बैरक में ठहराया गया है जहां इसी हफ्ते मेरठ की एक अन्य अदालत द्वारा हत्या के एक दूसरे हाई-प्रोफाइल मामले में फांसी की सजा पाने वाला कैदी साहिल शुक्ला भी बंद है।\n\n \n\nसाहिल शुक्ला वाली बैरक में बंद हुआ अमरदीप\n\nअमरदीप के साथ बैरक साझा कर रहा साहिल शुक्ला वही अपराधी है जिसे गत 14 अक्टूबर को मेरठ की अदालत ने एक बेहद क्रूर हत्याकांड में मौत की सजा सुनाई थी। उस चर्चित प्रकरण में मुस्कान रस्तोगी और उसके प्रेमी साहिल शुक्ला ने मिलकर मुस्कान के पति तथा मर्चेंट नेवी के अधिकारी सौरभ राजपूत की हत्या कर दी थी और क्रूरता की हदें पार करते हुए शव के टुकड़े करके उन्हें सीमेंट से भरे एक नीले ड्रम के अंदर ठिकाने लगा दिया था। अब उसी श्रेणी के एक अन्य सनसनीखेज मामले का दोषी अमरदीप भी उसी जेल परिसर में कड़ी सुरक्षा के दायरे में रखा गया है।\n\n \n\nक्या था पूरा खौफनाक मामला\n\nयह पूरा खौफनाक वाकया मेरठ के अकबरपुर सादात गांव से जुड़ा हुआ है, जहां मृतक अमित कश्यप उर्फ मिक्की कश्यप अपने घर में रहता था। बीते साल 13 अप्रैल को अमित अपने ही घर के भीतर एक खाट पर मृत अवस्था में पाया गया था और उसके शव के ठीक पास एक जिंदा सांप घूम रहा था, जिसे देखकर शुरुआत में परिवार के सभी सदस्यों और रिश्तेदारों को यही लगा कि उसकी मौत किसी जहरीले सांप के काटने से हुई है। हालांकि, पुलिस की गहरी छानबीन और पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने इस पूरी साजिश का पर्दाफाश कर दिया। पोस्टमार्टम के दौरान मृतक की गर्दन और नाक पर स्पष्ट चोट के निशान पाए गए, जिससे यह साबित हो गया कि उसकी मौत सांप के डंसने से नहीं बल्कि गला घोंटकर की गई थी। इस मामले से जुड़ी विस्तृत जानकारी मेरठ कोर्ट जज ने मनुस्मृति का हवाला दिया रिपोर्ट में देखी जा सकती है। इसके अलावा, एक अन्य दर्दनाक घटना का जिक्र बोकारो में पिस्तौल से बच्चे की मौत मामले में मिलता है।\n\nइसका आप पर असर\nयह फैसला गंभीर आपराधिक मामलों और न्याय प्रक्रिया की गति को लेकर एक कड़ा संदेश देता है।\n\n• भारत में: यह फैसला इस बात को रेखांकित करता है कि सुनियोजित तरीके से किए गए गंभीर अपराधों में न्यायपालिका तेजी से कड़े दंड दे रही है। इससे समाज में कानून का डर और विश्वास दोनों मजबूत होते हैं।\n\n• मेरठ में: स्थानीय स्तर पर पिछले कुछ हफ्तों में यह दूसरा ऐसा बड़ा मामला है जिसमें अदालत ने जघन्य हत्याकांड के दोषियों को मौत की सजा सुनाई है। इससे क्षेत्र में सुरक्षा और न्याय व्यवस्था को लेकर लोगों के बीच बड़ी चर्चा छिड़ गई है।\n\nऐसा क्यों हुआ\nअदालत द्वारा दोषियों को फांसी की सजा सुनाए जाने और उन्हें जेल की अलग बैरकों में शिफ्ट किए जाने के पीछे की वजहें स्थापित हो चुकी हैं।\n\n• हत्या का तरीका: आरोपियों ने अमित कश्यप की गला घोंटकर हत्या की थी और इस जुर्म को छुपाने के लिए शव के पास एक जिंदा सांप छोड़ दिया था ताकि सबको सर्पदंश लगे।\n\n• पोस्टमार्टम रिपोर्ट: पुलिस जांच और पोस्टमार्टम के दौरान मृतक की गर्दन और नाक पर चोट के स्पष्ट निशान पाए गए, जिससे हत्या का यह पर्दाफाश हुआ।\n\n• जेल सुरक्षा नियम: जेल प्रशासन ने सुरक्षा और प्रशासनिक कारणों के चलते दोनों दोषियों को अलग-अलग बैरकों में रखा है ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति से बचा जा सके।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. रविता और अमरदीप को किस अदालत ने सजा सुनाई है?\nमेरठ की एक अदालत के अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश जयवीर सिंह नागर ने यह सजा सुनाई है।\n\n2. दोषियों को कौन से नए कैदी नंबर दिए गए हैं?\nरविता को कैदी नंबर 399/2026 और अमरदीप को कैदी नंबर 400/2026 दिया गया है।\n\n3. मृतक का नाम क्या था और वह कहां का रहने वाला था?\nमृतक का नाम अमित कश्यप उर्फ मिक्की कश्यप था, जो मेरठ के अकबरपुर सादात गांव का रहने वाला था।\n\n4. हत्या को किस तरह छुपाने की कोशिश की गई थी?\nदोषियों ने गला घोंटने के बाद शव के पास एक जिंदा सांप छोड़ दिया था ताकि लगे कि मौत सांप के काटने से हुई है।\n\n5. अमरदीप को किस बैरक में रखा गया है?\nअमरदीप को बैरक नंबर 1A में रखा गया है, जहां इसी हफ्ते फांसी की सजा पाने वाला साहिल शुक्ला भी बंद है।",
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  "category": "उत्तर प्रदेश",
  "publishedAt": "2026-10-17",
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    "मेरठ",
    "फांसी की सजा",
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