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  "type": "article",
  "title": "मेरठ में किसान नेताओं से बर्बरता के आरोपों के बाद जांच के आदेश, आईपीएस अविनाश पांडे का तबादला",
  "summary": "मेरठ में किसान नेताओं द्वारा पुलिस हिरासत में थर्ड डिग्री दिए जाने का आरोप लगाए जाने के बाद सहारनपुर डीआईजी को जांच सौंपी गई है और आईपीएस अविनाश पांडे का तबादला लखनऊ कर दिया गया है।",
  "content": "मेरठ जिले में वरिष्ठ पुलिस प्रशासनिक अधिकारियों पर गंभीर आरोप सामने आने के बाद हड़कंप मच गया है। भारतीय किसान यूनियन (बीआर अंबेडकर) के पदाधिकारियों ने पुलिस कस्टडी में बर्बरतापूर्वक मारपीट किए जाने का सनसनीखेज दावा किया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए उत्तर प्रदेश शासन ने सहारनपुर के डीआईजी को पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच का जिम्मा सौंपा है। इसके साथ ही प्रशासनिक स्तर पर बड़ा फेरबदल करते हुए तत्कालीन एसएसपी का स्थानांतरण लखनऊ कर दिया गया है।\n\nएसएसपी कार्यालय में वार्ता के दौरान विवाद और टॉरचर के गंभीर आरोप\nसंगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष दिग्विजय भाटी और जिलाध्यक्ष मोहित जाटव ने आरोप लगाया है कि 19 अगस्त को वे दलित छात्रा ललिता गौतम की हत्या के मामले में अपना पक्ष रखने के लिए मेरठ एसएसपी दफ्तर पहुंचे थे। दिग्विजय भाटी के अनुसार, वार्ता के दौरान तत्कालीन वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अविनाश पांडे क्षुब्ध हो गए। इसके बाद उन्हें एक बंद चैंबर वार्ता कक्ष में ले जाया गया, जहां लगभग डेढ़ घंटे तक उनके साथ शारीरिक मारपीट की गई।\n\nपीड़ित किसान नेता का कहना है कि कक्ष में मारपीट के उपरांत उन्हें एसओजी कार्यालय भेज दिया गया। वहां एसओजी इंस्पेक्टर अखिलेश गौड़ को बुलाकर उन्हें सौंप दिया गया। आरोप है कि एसओजी कार्यालय में दिग्विजय भाटी के पैर बांधकर उन्हें उल्टा लटकाया गया और लकड़ी के फट्टों तथा लाठियों से तलवों, पीठ और कमर पर लगातार वार किए गए। इस दौरान उनके साथ मौजूद संगठन के जिलाध्यक्ष मोहित जाटव को भी थर्ड डिग्री दी गई।\n\nदिग्विजय भाटी ने यह भी आरोप लगाया कि पुलिसकर्मियों ने बलपूर्वक एक सादे सफेद कागज पर उनसे यह लिखवा लिया कि उनके शरीर पर लगी चोटें किसी सड़क दुर्घटना का परिणाम हैं। उन्होंने पुलिस बल पर जूतों, घूंसों और लातों से हमला करने की बात कही है। पीड़ित के चेहरे और आंख पर गंभीर सूजन तथा चोट के स्पष्ट निशान देखे गए हैं।\n\nपुलिस प्रशासन की ओर से एक्सीडेंट का दावा\nदूसरी ओर, एसएसपी कार्यालय के सूत्रों ने पुलिस पर लगे आरोपों को सिरे से खारिज किया है। सूत्रों का कहना है कि 19 अगस्त को कार्यालय परिसर में केवल कहासुनी हुई थी, जिसके बाद किसान नेता वहां से रवाना हो गए थे। पुलिस पक्ष के अनुसार, दफ्तर से निकलने के बाद रास्ते में दिग्विजय भाटी का वाहन एक्सीडेंट हो गया था, जिससे उन्हें शरीर और आंख पर चोटें आई हैं।\n\n9 जुलाई की पुरानी घटना और ललिता गौतम हत्याकांड की पृष्ठभूमि\nयह पहला मौका नहीं है जब मेरठ में पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठे हों। इससे पूर्व 9 जुलाई को दलित छात्रा ललिता गौतम हत्याकांड के विरोध में प्रदर्शन के दौरान भी भारी बखेड़ा हुआ था। उस समय तत्कालीन एसएसपी अविनाश पांडे पर पुलिस पिकअप वाहन के भीतर प्रदर्शनकारी वकील रवि को पीटने का आरोप लगा था। वह मामला अभी पूरी तरह शांत भी नहीं हुआ था कि 19 अगस्त की यह नई घटना सामने आ गई।\n\nराजनीतिक हलचल और सपा नेताओं की कार्रवाई की मांग\nमामले की जानकारी मिलते ही राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इस पूरे प्रकरण का संज्ञान लिया। इसके बाद शुक्रवार को दिग्विजय भाटी और मोहित जाटव ने सरधना से सपा विधायक अतुल प्रधान के आवास पर पहुंचकर एक प्रेस वार्ता की।\n\nप्रेस के समक्ष अपनी आपबीती सुनाते हुए पीड़ित नेताओं ने पुलिस पर लगाए गए आरोपों को दोहराया। सरधना विधायक अतुल प्रधान और दिग्विजय भाटी ने संयुक्त रूप से मांग की कि तत्कालीन एसएसपी अविनाश पांडे और इसमें संलिप्त अन्य पुलिस कर्मियों के विरुद्ध आपराधिक मुकदमा दर्ज किया जाए। उन्होंने पूरे मामले की पारदर्शी तथा निष्पक्ष जांच की मांग उठाई है।\n\nसहारनपुर डीआईजी को सौंपी गई जांच और प्रशासनिक फेरबदल\nप्रकरण की संवेदनशीलता को देखते हुए स्थानीय डीआईजी ने अपर पुलिस महानिदेशक (एडीजी) भानु भास्कर को पूरे घटनाक्रम से अवगत कराया, जिसके बाद राज्य शासन को रिपोर्ट भेजी गई। शासन के निर्देशों के अनुसार, इस पूरे मामले की विस्तृत जांच सहारनपुर डीआईजी को सौंपी गई है। प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद तथ्यों के आधार पर आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।\n\nइस बीच उत्तर प्रदेश शासन ने प्रशासनिक फेरबदल करते हुए 2015 बैच के आईपीएस अधिकारी अविनाश पांडे (आईपीएस-आरआर-2015) को वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक मेरठ के पद से स्थानांतरित कर पुलिस अधीक्षक, संबद्ध मुख्यालय पुलिस महानिदेशक, लखनऊ के पद पर भेज दिया है। वहीं, 2015 बैच के ही आईपीएस अधिकारी बी.बी.जी.टी.एस. मूर्ति (आईपीएस-आरआर-2015) को वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक झांसी के पद से हटाकर मेरठ का नया वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक नियुक्त किया गया है।\n\nइसका आप पर असर\nभारत में: यह मामला पुलिस हिरासत में नागरिकों के अधिकारों और प्रशासनिक जवाबदेही को रेखांकित करता है।\n\nमेरठ और उत्तर प्रदेश में: स्थानीय नागरिकों और किसान संगठनों के लिए निष्पक्ष पुलिस जांच तथा क्षेत्रीय कानून व्यवस्था के सुचारू संचालन पर सीधा प्रभाव पड़ेगा।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. मेरठ पुलिस मामले की जांच किसे सौंपी गई है?\nइस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच सहारनपुर के डीआईजी को सौंपी गई है।\n\n2. किसान नेताओं ने पुलिस पर क्या आरोप लगाए हैं?\nभारतीय किसान यूनियन (बीआर अंबेडकर) के नेताओं ने 19 अगस्त को एसएसपी कार्यालय और एसओजी कस्टडी में डेढ़ घंटे तक मारपीट और उल्टा लटकाकर थर्ड डिग्री देने का आरोप लगाया है।\n\n3. पुलिस प्रशासन का इस मामले पर क्या कहना है?\nएसएसपी कार्यालय के सूत्रों का कहना है कि दफ्तर में सिर्फ कहासुनी हुई थी और किसान नेता को चोटें रास्ते में हुए एक्सीडेंट की वजह से लगी हैं।\n\n4. आईपीएस अविनाश पांडे को कहां स्थानांतरित किया गया है?\n2015 बैच के आईपीएस अधिकारी अविनाश पांडे को मेरठ एसएसपी के पद से हटाकर लखनऊ स्थित पुलिस महानिदेशक मुख्यालय से संबद्ध किया गया है।\n\n5. मेरठ के नए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) कौन बने हैं?\nझांसी से स्थानांतरित होकर आए 2015 बैच के आईपीएस अधिकारी बी.बी.जी.टी.एस. मूर्ति को मेरठ का नया एसएसपी बनाया गया है।",
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  "category": "उत्तर प्रदेश",
  "publishedAt": "2026-08-21",
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