# मुरादाबाद जेल में सजायाफ्ता महिलाएं सीख रहीं हुनर, बैग और होम डेकोरेशन बनाकर हर महीने 12000 रुपये तक कमाई

> मुरादाबाद जिला कारागार में महिला कैदियों को गैर-सरकारी संगठन के जरिए सिलाई, दीये और गृह सज्जा का सामान बनाने का प्रशिक्षण देकर स्वावलंबी बनाया जा रहा है, जिससे वे प्रतिमाह 10 से 12 हजार रुपये तक कमा रही हैं।

**Type:** article · **Category:** उत्तर प्रदेश · **Published:** 2026-09-21 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/uttar-pradesh/moradabad-jela-men-sajayaphta-mahilaen-sikha-rahin-hunara-baiga-aura-homa-dekoreshana-banakara-hara-mahine-12000-rupaye-taka-kamai-35482 · **Language:** Hindi
**Tags:** मुरादाबाद जेल, महिला कैदी, कौशल विकास, आत्मनिर्भर भारत, जेल सुधार, कृष्णा कुमारी, हस्तशिल्प

मुरादाबाद जिला कारागार की चारदीवारी के भीतर बंद महिला कैदियों के जीवन में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहा है। जेल में सजा भुगत रहीं महिलाएं अब केवल समय ही नहीं बिता रहीं, बल्कि अपने समय का उपयोग विभिन्न प्रकार के हस्तनिर्मित उत्पाद तैयार करने में कर रही हैं। कारागार परिसर में महिलाएं आकर्षक डिजाइन और नई वैरायटी के फैशनेबल लेडीज बैग तैयार कर रही हैं। जेल प्रशासन और गैर-सरकारी संगठन के आपसी तालमेल से इन उत्पादों को बाहरी बाजारों में बिक्री के लिए भेजा जाता है, जिससे मिलने वाले लाभ से इन महिलाओं को सीधा आर्थिक संबल प्राप्त हो रहा है।

## प्रशिक्षण कार्यक्रम और महिला बंदियों की सहभागिता
कारागार की डिप्टी जेलर कृष्णा कुमारी के अनुसार वर्तमान समय में जेल परिसर में करीब 20 से 22 महिला बंदी इस स्वरोजगार से जुड़ी हुई हैं। यह समूह मुख्य रूप से सिलाई कार्य में लगा हुआ है और महिलाओं की पसंद के अनुसार विविध प्रकार के थैले सिल रहा है। पिछले दो से तीन महीनों से इस कार्यशाला के दायरे को और अधिक बढ़ाया गया है। अब बैग सिलाई के अतिरिक्त महिलाएं मिट्टी और मोम के सुंदर दीपक तथा गृह सज्जा से जुड़ी कई सामग्रियां बनाना भी सीख रही हैं।

## गैर-सरकारी संगठन की भूमिका और बाजार व्यवस्था
जेल अधीक्षक के पदभार संभालने के बाद कारागार प्रशासन ने एक गैर-सरकारी संगठन के साथ संपर्क स्थापित कर इस प्रशिक्षण अभियान की औपचारिक शुरुआत की थी। इस संस्था की प्रशिक्षिका नियमित रूप से कारागार पहुंचकर महिला बंदियों को बारीकी से सिलाई, कटाई और हस्तशिल्प की कला सिखाती हैं। तैयार किए गए माल की मार्केटिंग और बिक्री का जिम्मा भी संस्था और जेल प्रशासन मिलकर संभालते हैं। बिक्री से प्राप्त होने वाली शुद्ध राशि से प्रत्येक कामकाजी महिला हर महीने 10,000 से 12,000 रुपये तक का मुनाफा अर्जित कर रही है।

## रिहाई के बाद सम्मानजनक जीवन की राह
इस कौशल विकास कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य महिला कैदियों में आत्मनिर्भरता और आत्मविश्वास का संचार करना है। जेल में रहते हुए अर्जित की गई कमाई से ये महिलाएं अपने परिवारों की आर्थिक मदद भी कर पा रही हैं। पूर्व में इस केंद्र से प्रशिक्षण लेकर रिहा हो चुकी कई महिलाएं बाहर समाज में जाने के बाद भी स्वतंत्र रूप से इस काम को जारी रखकर अपनी आजीविका कमा रही हैं। जेल से छूटने के बाद समाज की मुख्यधारा से जुड़ने और सम्मानजनक जीवन जीने के लिए यह हुनर उनके लिए मजबूत आधार साबित हो रहा है।

## इसका आप पर असर
कारागार में संचालित यह कौशल विकास मॉडल अपराधियों के पुनर्वास और आर्थिक स्वावलंबन के क्षेत्र में व्यावहारिक बदलाव दर्शाता है।

- **उत्तर प्रदेश में:** मुरादाबाद जिला जेल का यह प्रशिक्षण मॉडल राज्य भर के सुधारात्मक संस्थानों में कैदियों के पुनर्वास के लिए एक अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत करता है। कारागार से रिहा होने के बाद पूर्व बंदी महिलाओं के लिए पुनः अपराध की ओर मुड़ने के बजाय सम्मानजनक स्वरोजगार अपनाने का मार्ग प्रशस्त होता है।
- **आर्थिक सुरक्षा:** जेल के भीतर काम करने वाली महिलाएं हर महीने 10,000 से 12,000 रुपये तक की सीधी आमदनी अर्जित कर रही हैं। यह रकम उनके आश्रित परिजनों के भरण-पोषण में मदद करने के साथ-साथ रिहाई के बाद नई शुरुआत के लिए पूंजी के रूप में काम आती है।
- **हस्तशिल्प बाजार:** स्थानीय उपभोक्ता बाजार को उचित मूल्य पर गुणवत्तापूर्ण हस्तनिर्मित बैग, डिजाइनर दीये और होम डेकोर सामान उपलब्ध हो रहे हैं। गैर-सरकारी संगठनों और जेल प्रशासन के इस संयुक्त प्रयास से सुधारात्मक श्रम को मुख्यधारा के व्यापारिक नेटवर्क से जोड़ने में मदद मिलती है।
- **कौशल हस्तांतरण:** प्रशिक्षण प्राप्त करने वाली 20 से 22 महिलाएं जेल से बाहर निकलने के बाद अपने गृह क्षेत्रों में अन्य महिलाओं को भी यह हुनर सिखाने में सक्षम हो रही हैं। इस तरह यह पहल समुदाय स्तर पर महिला सशक्तीकरण और गृह उद्योग को बढ़ावा देने का जरिया बनती है।

## ऐसा क्यों हुआ
मुरादाबाद जिला कारागार में महिला कैदियों के लिए यह व्यावसायिक प्रशिक्षण कार्यक्रम प्रशासन और नागरिक समाज की साझा पहल के कारण संभव हुआ है। इसका मुख्य उद्देश्य कैदियों को सजा के दौरान खाली बैठने के स्थान पर उत्पादक कार्यों में लगाना है।

- **प्रशासनिक पहल:** नए जेल अधीक्षक के पदभार ग्रहण करने के बाद सुधारात्मक और कल्याणकारी गतिविधियों को गति देने के लिए गैर-सरकारी संगठनों से संपर्क साधा गया। इस प्रशासनिक तत्परता ने कारागार के अंदर व्यवस्थित कार्यशालाएं स्थापित करने की अनुमति दी।
- **संस्थागत सहयोग:** एक गैर-सरकारी संस्था ने जेल के भीतर आकर महिला कैदियों को बुनियादी सिलाई और हस्तशिल्प प्रशिक्षण देने की जिम्मेदारी स्वीकार की। प्रशिक्षिका की नियमित कक्षाओं के चलते महिलाओं ने अल्प समय में ही व्यावसायिक स्तर के उत्पाद तैयार करने में महारत हासिल कर ली।
- **बाजार की मांग और पुनर्वास नीति:** हस्तनिर्मित बैग, दीये और गृह सज्जा की वस्तुओं की स्थानीय बाजार में निरंतर मांग बनी रहती है। जेल प्रशासन ने इस उपभोक्ता मांग को कैदियों के पुनर्वास और आर्थिक संबल के साथ जोड़ते हुए बिक्री की पुख्ता व्यवस्था तैयार की।

## सवाल-जवाब

### 1. मुरादाबाद जिला कारागार में महिला कैदी क्या-क्या सामान बना रही हैं?
महिला बंदी अलग-अलग डिजाइन और वैरायटी के लेडीज बैग, सुंदर दीये और होम डेकोरेशन का सामान तैयार कर रही हैं।

### 2. इस काम से महिला कैदियों को हर महीने कितनी कमाई हो रही है?
इस कार्य से प्रत्येक कामकाजी महिला बंदी को प्रतिमाह 10,000 से 12,000 रुपये तक का मुनाफा हो रहा है।

### 3. वर्तमान में कितनी महिलाएं यह काम सीख और कर रही हैं?
वर्तमान समय में लगभग 20 से 22 महिला बंदी बैग सिलाई और हस्तशिल्प का यह काम कर रही हैं।

### 4. महिला कैदियों को यह प्रशिक्षण किसके माध्यम से दिया जा रहा है?
जेल अधीक्षक के आने के बाद एक गैर-सरकारी संगठन के सहयोग से महिलाओं को यह व्यावसायिक प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जा रहा है।

### 5. तैयार सामान की बिक्री किस तरह की जाती है?
तैयार बैग और अन्य सजावटी वस्तुओं को गैर-सरकारी संगठन और जेल प्रशासन की मदद से बाहर बाजार में बिक्री के लिए भेजा जाता है।

### 6. दीपक और सजावटी सामान बनाने की शुरुआत कब से हुई है?
डिप्टी जेलर कृष्णा कुमारी के अनुसार पिछले दो से तीन महीनों से बैग सिलाई के साथ-साथ दीपक और होम डेकोरेशन का सामान बनाना भी सिखाया जा रहा है।

## प्रेरणा और सबक
कारागार की विषम परिस्थितियों और बंदिशों के बावजूद हुनर सीखकर अपनी जिंदगी को नई दिशा देने वाली इन महिलाओं का सफर हमें कई मूल्यवान सीख देता है।

- **परिस्थितियों से ऊपर उठना:** जीवन में कठिन मोड़ आने पर भी नए हुनर सीखने की ललक इंसान को कभी लाचार नहीं होने देती। मुरादाबाद जेल की महिला कैदियों ने दिखाया कि विपरीत हालातों को भी स्वावलंबन के अवसर में बदला जा सकता है।
- **कौशल ही सच्ची शक्ति है:** व्यावहारिक ज्ञान और मेहनत के दम पर किसी भी स्थान से आत्मनिर्भरता हासिल की जा सकती है। सिलाई और शिल्प कला सीखकर महिलाएं जेल के भीतर रहकर भी प्रति माह 10 से 12 हजार रुपये कमाने में सफल हुई हैं।
- **भविष्य की पुनर्रचना:** अतीत की गलतियों या कानूनी सजा को अपने भविष्य का अंत न मानते हुए सम्मानजनक पुनर्वास की तैयारी करना आवश्यक है। जेल में सीखी गई कला रिहाई के बाद महिलाओं को समाज में सर उठाकर जीने का संबल देती है।

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