# मुजफ्फरनगर की दोना फैक्ट्री में दो साल तक चला बंधुआ मजदूरी का खेल, 12 मजदूर मुक्त और मालिक फरार

> मुजफ्फरनगर के मांडी गांव की एक दोना फैक्ट्री से पुलिस ने 12 मजदूरों को छुड़ाया, जिन्हें करीब डेढ़ से दो साल तक बंधक बनाकर पीटा और भूखा रखा गया। दो आरोपी गिरफ्तार हैं, फैक्ट्री मालिक फरार है और एसआईटी जांच कर रही है।

**Type:** article · **Category:** उत्तर प्रदेश · **Published:** 2026-06-25 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/uttar-pradesh/muzaffarnagar-ki-dona-phaiktri-men-do-sala-taka-chala-bndhua-majaduri-ka-khela-12-majadura-mukta-aura-malika-pharara-2848 · **Language:** Hindi
**Tags:** मुजफ्फरनगर बंधुआ मजदूरी, दोना फैक्ट्री छापेमारी, उत्तर प्रदेश पुलिस, मजदूरों की प्रताड़ना, पिटबुल कुत्ते, एसआईटी जांच, बंधक मजदूर

मुजफ्फरनगर जिले से बंधुआ मजदूरी का एक खौफनाक मामला सामने आया है, जहां एक दोना बनाने वाली फैक्ट्री में 12 मजदूरों को करीब डेढ़ से दो साल तक बंधक बनाकर रखा गया और उन पर बेरहमी से जुल्म ढाए गए। तितावी थाना क्षेत्र के मांडी गांव में पुलिस, प्रशासन और श्रम विभाग की संयुक्त टीम ने छापा मारकर इन सभी मजदूरों को आजाद कराया। मुक्त होने के बाद इन मजदूरों के चेहरे पर सुकून है और उनका कहना है कि पुलिस ने उन्हें नई जिंदगी दी है।

## एक मजदूर की हिम्मत से खुला पूरा राज
मंगलवार को एक मजदूर किसी तरह फैक्ट्री की चहारदीवारी से भागने में कामयाब हो गया। उसने सीधे पुलिस तक पहुंचकर अंदर चल रहे बंधुआ मजदूरी के पूरे गोरखधंधे की पोल खोल दी। सूचना मिलते ही पुलिस, प्रशासन और श्रम विभाग की टीम मौके पर पहुंची और फैक्ट्री पर छापा मारकर 12 मजदूरों को छुड़ाया। इन मजदूरों को बिहार, राजस्थान, उत्तराखंड, हरियाणा और नेपाल जैसी अलग-अलग जगहों से नौकरी और मोटी कमाई का लालच देकर यहां लाया गया था।

## सूखी रोटी, छिने मोबाइल और पिटबुल का पहरा
मुक्त कराए गए मजदूरों ने जो आपबीती सुनाई वो रूह कंपा देने वाली है। उनके मुताबिक उन्हें आए दिन मारपीट और प्रताड़ना झेलनी पड़ती थी। खाने में सिर्फ सूखी रोटियां मिलती थीं, वो भी चोकर की। उनके मोबाइल फोन और आधार कार्ड तक छीन लिए गए थे ताकि वे किसी से संपर्क न कर सकें। कोई भागने की हिम्मत न कर पाए, इसके लिए फैक्ट्री में दो पिटबुल कुत्ते पाल रखे थे जो लगातार मजदूरों पर नजर रखते थे।

## परिजनों से मुलाकात में छलक पड़े आंसू
बुधवार को एक भावुक कर देने वाला नजारा देखने को मिला, जब मुक्त कराए गए मजदूरों के परिजन उनसे मिलने मुजफ्फरनगर पहुंचे। कई महीनों और कुछ मामलों में तो सालों बाद अपनों को सामने देखकर मजदूरों की आंखें नम हो गईं। परिजनों ने भी पुलिस और प्रशासन का शुक्रिया अदा करते हुए कहा कि अगर समय रहते कार्रवाई न होती तो शायद उन्हें अपनों का पता तक न चल पाता।

## दो गिरफ्तार, फैक्ट्री मालिक की तलाश में जुटीं टीमें
पुलिस ने इस मामले में शिवा त्यागी और प्रदीप बालियान को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। फैक्ट्री संचालक अंकित बालियान फिलहाल फरार है, जिसे पकड़ने के लिए दो विशेष टीमें बनाई गई हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए एसआईटी गठित की गई है, जो पूरे प्रकरण की वैज्ञानिक तरीके से जांच कर रही है। पुलिस ने चार मजदूरों के बयान कोर्ट में दर्ज करा दिए हैं और बाकी मजदूरों के बयान भी कराए जा रहे हैं। सभी मजदूरों का मेडिकल परीक्षण कराया गया है और उनकी काउंसलिंग भी चल रही है।

## साथी की हत्या कर बोरे में भरा शव
जांच के दौरान एक और सिहरन पैदा करने वाला सच सामने आया। मजदूरों का आरोप है कि नवंबर 2025 में उनके एक साथी टोपी उर्फ अर्जुन की बेरहमी से हत्या कर दी गई थी और उसके शव को बोरे में भरकर फेंक दिया गया। इस खुलासे के बाद पुलिस ने हत्या का एक अलग मुकदमा दर्ज कर जांच और तेज कर दी है।

## 10 से 12 हजार के लालच में फंसते थे लोग
SSP मुजफ्फरनगर के मुताबिक आरोपी रेलवे स्टेशन, बस अड्डे और दूसरी जगहों से लोगों को 10 से 12 हजार रुपये, कभी-कभी 8 हजार रुपये की कमाई का लालच देकर नौकरी के नाम पर ले आते थे और फिर उन्हें बंधक बनाकर प्रताड़ित करते थे। प्रताड़ना के चलते तीन लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें से एक मृतक की पहचान कर ली गई है। इन मौतों के बाद मामले में धाराएं बढ़ा दी गई हैं। दो और आरोपियों की तलाश जारी है। पुलिस यह भी पता लगा रही है कि जिन मजदूरों की मौत हो जाती थी, उनके शवों को कैसे ठिकाने लगाया जाता था। छुड़ाए गए लोगों में बिहार, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, छत्तीसगढ़, हरियाणा और राजस्थान के निवासी हैं, साथ ही एक व्यक्ति नेपाल का भी है।

## गरम लोहे और फैन बेल्ट के कोड़े से जुल्म
मुक्त कराए गए 12 लोगों के शरीर पर गंभीर चोटों के निशान हैं। पूछताछ में उन्होंने बताया कि उन्हें डेढ़ से दो साल तक बंधक बनाकर जबरन काम कराया जाता था और दिन में सिर्फ एक बार चोकर की सूखी रोटी दी जाती थी। प्रताड़ना के लिए लोहे के औजारों को गरम करके इस्तेमाल किया जाता था, वहीं पंखे की बेल्ट को कोड़े की तरह बरसाया जाता था। कई मजदूरों की पसलियां तक टूटी हुई हैं और उनके शरीर पर कई गहरे जख्म मौजूद हैं।

## इसका आप पर असर
- **भारत में:** रेलवे स्टेशन और बस अड्डों पर मोटी कमाई का झांसा देकर नौकरी दिलाने वाले अनजान लोगों से सावधान रहें, क्योंकि ऐसे ही लालच के जरिए मजदूरों को फंसाकर बंधक बनाया जा रहा था।
- **मुजफ्फरनगर में:** स्थानीय फैक्ट्रियों और छोटी इकाइयों में मजदूरों के साथ ऐसा शोषण किसी के घर के पास भी हो सकता है, इसलिए संदिग्ध गतिविधि दिखे तो तुरंत पुलिस को सूचना देना जरूरी है।

## सवाल-जवाब

### 1. यह पूरा मामला कहां का है?
यह मामला उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले के तितावी थाना क्षेत्र के मांडी गांव स्थित एक दोना फैक्ट्री का है।

### 2. कितने मजदूरों को मुक्त कराया गया?
पुलिस, प्रशासन और श्रम विभाग की संयुक्त टीम ने छापा मारकर 12 मजदूरों को मुक्त कराया।

### 3. मजदूरों को कितने समय तक बंधक रखा गया था?
मजदूरों के मुताबिक उन्हें करीब डेढ़ से दो साल तक बंधक बनाकर रखा गया और जबरन काम कराया जाता था।

### 4. इस मामले में अब तक किसकी गिरफ्तारी हुई है?
पुलिस ने शिवा त्यागी और प्रदीप बालियान को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है, जबकि फैक्ट्री संचालक अंकित बालियान फरार है।

### 5. मजदूरों को किस तरह फंसाया जाता था?
आरोपी रेलवे स्टेशन, बस अड्डे और दूसरी जगहों से 10 से 12 हजार रुपये, कभी 8 हजार रुपये की कमाई का लालच देकर लोगों को नौकरी के नाम पर ले आते थे।

### 6. फैक्ट्री में मजदूरों को कैसे प्रताड़ित किया जाता था?
उन्हें दिन में एक बार चोकर की सूखी रोटी दी जाती थी, गरम लोहे के औजारों और पंखे की बेल्ट से पीटा जाता था और दो पिटबुल कुत्तों से उन पर निगरानी रखी जाती थी।

### 7. क्या इस मामले में किसी की मौत भी हुई है?
हां, प्रताड़ना के चलते तीन लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें एक मृतक की पहचान हो गई है। इसके अलावा नवंबर 2025 में टोपी उर्फ अर्जुन नाम के मजदूर की हत्या कर शव बोरे में फेंक दिया गया था।

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