नकली जेवर गिरवी रखकर बैंक से उड़ाए 1.46 करोड़ रुपये, कविनगर थाने में 18 लोगों पर केस दर्ज गाजियाबाद के आरडीसी स्थित फेडरल बैंक शाखा में फर्जी सोने के आभूषणों के बदले लगभग 1.46 करोड़ रुपये का कर्ज बांटने का मामला सामने आया है। बैंक प्रबंधक की शिकायत पर पुलिस ने फिनटेक कंपनी के प्रतिनिधि और वैल्यूअर समेत 18 नामजद आरोपियों के खिलाफ आपराधिक साजिश और धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया है। उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिले में स्थित एक निजी बैंक की शाखा को नकली आभूषणों के सहारे करोड़ों रुपये का चूना लगाने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। राजनगर डिस्ट्रिक्ट सेंटर यानी आरडीसी स्थित फेडरल बैंक शाखा में कथित तौर पर फर्जी सोने के गहने गिरवी रखकर करीब 1.46 करोड़ रुपये का ऋण जारी करा लिया गया। आंतरिक पड़ताल में जब बैंक के लॉकर में रखे जेवरातों की दोबारा जांच कराई गई, तो अधिकांश खातों में जमा आभूषण नकली पाए गए। इस बड़े फर्जीवाड़े के सामने आने के बाद बैंक के वरिष्ठ प्रबंधक और शाखा प्रभारी शशिकांत वाणी ने कविनगर थाने में औपचारिक शिकायत दी, जिस पर कार्रवाई करते हुए पुलिस ने आपराधिक साजिश, जालसाजी और धोखाधड़ी की धाराओं में 18 नामजद आरोपियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर ली है। फिनटेक कंपनी और वैल्यूअर के नेटवर्क से खुला 20 खातों का खेल बैंक की शिकायत के अनुसार, कुल 20 अलग-अलग लोन खातों के माध्यम से इस पूरे गबन को अंजाम दिया गया। चौंकाने वाली बात यह है कि इनमें से 17 खाते ऐसे थे, जिनका लोन प्रोसेस फिनटेक कंपनी के प्रतिनिधियों के जरिए पूरा कराया गया था। इसके अलावा, सभी बीस खातों में गिरवी रखे गए आभूषणों की शुद्धता का आकलन और मूल्यांकन करने का काम भी एक ही निर्धारित एजेंसी के जिम्मे था। जांच में सामने आया कि गिरवी रखे जाने वाले सोने की जांच करने वाले वैल्यूअर और फिनटेक कंपनी के कर्मचारियों के बीच मिलीभगत थी। आरोपियों ने सुनियोजित तरीके से फर्जी गहनों को असली साबित कराया और बैंक को भारी वित्तीय क्षति पहुंचाई। रैंडम चेकिंग के दौरान भनक लगते ही भागे आरोपी इस बड़े घोटाले का खुलासा 10 जून 2026 को हुआ, जब आरोपी दीपांशु बंसल अपने एक अन्य साथी के साथ आरडीसी शाखा में आभूषण गिरवी रखकर नया गोल्ड लोन लेने पहुंचा था। प्रक्रिया के दौरान बैंक के सतर्क अधिकारियों ने जब रैंडम चेकिंग की, तो उन्हें पेश किए गए आभूषणों के असली होने पर गहरा संदेह हुआ। अधिकारियों ने तुरंत लोन की कार्यवाही रोकते हुए गहनों की बारीकी से जांच शुरू की, लेकिन भनक लगते ही दीपांशु बंसल और उसका साथी शाखा से भाग खड़े हुए। इस घटना के बाद बैंक प्रबंधन के कान खड़े हो गए और उन्होंने पहले से स्वीकृत सभी गोल्ड लोन खातों की व्यापक समीक्षा कराने का फैसला लिया। ऑडिट में पकड़ी गई गड़बड़ी और दोहराया गया पैटर्न प्रबंधन ने लॉकर में जमा आभूषणों का एक स्वतंत्र वैल्यूअर से विशेष ऑडिट कराया। जब सभी पुराने खातों के गहनों की दोबारा वैज्ञानिक व तकनीकी जांच हुई, तो कई खातों में जमा सोना पूरी तरह नकली निकला। दस्तावेजों के विश्लेषण से यह भी पता चला कि सभी 20 फर्जी लोन इसी वर्ष अप्रैल से जून के बीच महज तीन महीनों के भीतर मंजूर कराए गए थे। इतना ही नहीं, गिरोह के छह सदस्यों ने तो दो-दो बार नकली आभूषण बैंक में रखकर दोहरा लोन हासिल कर लिया था। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि क्या इस नेटवर्क में बैंक का कोई आंतरिक कर्मचारी भी सीधे तौर पर शामिल था। प्राथमिकी में इन 18 आरोपियों को किया गया नामजद कविनगर पुलिस ने बैंक शाखा प्रबंधक की तहरीर पर जिन 18 लोगों को आरोपी बनाया है, उनमें गाजियाबाद, दिल्ली और आसपास के इलाकों के लोग शामिल हैं। नामजद आरोपियों की सूची में दिल्ली गेट गाजियाबाद निवासी दीपांशु बंसल, कंबल वाली गली गाजियाबाद निवासी मयूर बंसल, पीलीभीत निवासी शहजाद खान, विजयनगर सेक्टर नौ निवासी सिद्धार्थ पांडे, प्रताप विहार निवासी अलीबिन हुसैन, मवाई विजयनगर निवासी विकास कुमार, शांतिनगर विजयनगर निवासी कविता, प्रताप विहार निवासी वसीम अब्बास, विजयनगर निवासी अश्वनी, ओल्ड विजयनगर निवासी मुकुल कुमार, शिवपुरी विजयनगर निवासी साहिल सिंह, दयालपुरी नई दिल्ली निवासी अंकुर राजपूत, सोनिया विहार ईस्ट दिल्ली निवासी धर्मवीर राम, शिवपुरी गाजियाबाद निवासी मौसीन खान, अजनारा होम्स ग्रेटर नोएडा निवासी कैफ नौमान, रुपीक फिनटेक कंपनी के रीजनल मैनेजर हर्ष, शास्त्रीनगर ईस्ट दिल्ली निवासी दीपक डल्ला और माता कॉलोनी गाजियाबाद निवासी अनुराग शामिल हैं। पुलिस की टीमें अब सभी आरोपियों की धरपकड़ और ठगी की रकम की बरामदगी के लिए दबिश दे रही हैं। इसका आप पर असर बैंकों में नकली सोना गिरवी रखकर करोड़ों का गबन आम ग्राहकों और वित्तीय संस्थानों की सुरक्षा प्रक्रियाओं को प्रभावित करता है। • भारत में: बैंक गोल्ड लोन वितरण के लिए थर्ड पार्टी फिनटेक एजेंटों और एकल वैल्यूअर पर अपनी निर्भरता की समीक्षा करेंगे। आने वाले समय में स्वतंत्र मूल्यांकन और औचक ऑडिट के नियम देश भर में और कड़े किए जा सकते हैं। • गाजियाबाद में: स्थानीय बैंक शाखाओं में अब आभूषण गिरवी रखने वाले ग्राहकों के दस्तावेजों और गहनों की कई स्तरों पर जांच की जाएगी। इसके चलते आम ग्राहकों के लिए तत्काल कर्ज स्वीकृत होने में पहले से थोड़ा अधिक समय लग सकता है। • गोल्ड लोन आवेदकों के लिए: किसी भी तीसरे पक्ष या मध्यस्थ के बजाय सीधे बैंक शाखा में जाकर ही आवेदन करना अधिक सुरक्षित रहेगा। लोन की मंजूरी के समय वैल्यूअर के अधिकृत प्रमाण पत्रों और बैंक की रसीद की सावधानीपूर्वक जांच जरूर करें। • फिनटेक सेवाओं के उपयोगकर्ताओं के लिए: डोरस्टेप गोल्ड लोन या ऑनलाइन लोन सुविधा का लाभ लेते समय अधिकृत प्रतिनिधियों की पहचान सत्यापित करें। किसी भी अनधिकृत व्यक्ति के हाथ में अपने कीमती गहने सौंपने से बचें। ऐसा क्यों हुआ यह धोखाधड़ी किसी एक व्यक्ति का तात्कालिक कदम नहीं, बल्कि बैंक के मूल्यांकन तंत्र में सेंध लगाने वाली एक सुनियोजित साजिश का परिणाम थी। • सीधा कारण: आरोपियों ने फिनटेक प्रतिनिधि और अधिकृत गोल्ड वैल्यूअर के साथ मिलीभगत करके नकली जेवरों को असली प्रमाणित करवाया। इस झूठे मूल्यांकन के आधार पर बैंक के सिस्टम से बिना किसी शुरुआती रुकावट के 1.46 करोड़ रुपये मंजूर हो गए। • सहूलियत देने वाली परिस्थितियां: अप्रैल से जून 2026 के बीच स्वीकृत हुए 20 में से 17 लोन फिनटेक कंपनी के जरिए आए थे और सभी का मूल्यांकन एक ही एजेंसी ने किया था। अलग-अलग या स्वतंत्र ऑडिट की व्यवस्था न होने के कारण एक ही नेटवर्क लगातार नकली जेवर खपाता रहा। • खुलासा कैसे हुआ: 10 जून 2026 को नए लोन के लिए पेश किए गए जेवरों की जब शाखा अधिकारियों ने रैंडम चेकिंग की, तो आरोपी घबराकर भाग गए। इस संदेह के बाद जब स्वतंत्र परीक्षक से सारे खातों का ऑडिट कराया गया, तो पूरा फर्जीवाड़ा खुलकर सामने आ गया। • आगे क्या होगा: कविनगर पुलिस ने 18 आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज कर उनकी तलाश शुरू कर दी है। जांच दल अब यह खंगाल रहा है कि इस नेटवर्क में अन्य शाखाओं के तार जुड़े हैं या नहीं और गबन की गई रकम कहां ट्रांसफर की गई। सवाल-जवाब 1. गाजियाबाद में किस बैंक की शाखा में यह फर्जीवाड़ा हुआ? यह फर्जीवाड़ा गाजियाबाद के राजनगर डिस्ट्रिक्ट सेंटर (आरडीसी) स्थित फेडरल बैंक की शाखा में हुआ है। 2. नकली सोने के बदले कुल कितने रुपये का लोन लिया गया? आरोपियों ने 20 अलग-अलग खातों के जरिए लगभग 1.46 करोड़ रुपये का गोल्ड लोन हासिल किया। 3. इस घोटाले का खुलासा कैसे हुआ? 10 जून 2026 को रैंडम चेकिंग के दौरान नए आभूषणों पर संदेह होने पर आरोपी भाग निकले, जिसके बाद ऑडिट कराने पर पुराना घोटाला पकड़ा गया। 4. पुलिस ने कितने लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है? कविनगर पुलिस ने बैंक शाखा प्रबंधक की शिकायत पर 18 नामजद आरोपियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है। 5. इस फर्जीवाड़े में किस फिनटेक कंपनी का नाम सामने आया है? शिकायत में रुपीक फिनटेक कंपनी के रीजनल मैनेजर हर्ष और कंपनी के प्रतिनिधियों की भूमिका का उल्लेख किया गया है। https://trendkia.com/uttar-pradesh/nakali-jevara-giravi-rakhakara-federal-bank-se-urae-1-46-karora-rupaye-kavinagar-thane-men-18-logon-para-kesa-darja-36941 TrendKia — Har trend, sabse pehle.