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  "title": "नोएडा में शुरू हुआ दिल्ली-NCR का पहला AC स्काईवॉक, अब सेक्टर-51 से 52 मेट्रो स्टेशन की दूरी तय करने में लगेंगे सिर्फ 5 मिनट",
  "summary": "दिल्ली-एनसीआर का पहला एयर कंडीशंड स्काईवॉक नोएडा में शुरू हो गया है। इसके जरिए सेक्टर-51 और सेक्टर-52 मेट्रो स्टेशन के बीच की दूरी महज पांच मिनट में तय की जा सकेगी।",
  "content": "दिल्ली-एनसीआर का पहला एसी स्काईवॉक जनता के लिए शुरू कर दिया गया है। नोएडा अथॉरिटी ने रक्षाबंधन के मौके पर शुक्रवार को बिना किसी औपचारिक उद्घाटन के इस स्काईवॉक को यात्रियों के वास्ते खोल दिया। कई बार डेडलाइन चूकने के बाद आखिरकार यह परियोजना पूरी हो चुकी है। यह नया स्काईवॉक एक्वा लाइन के सेक्टर-51 मेट्रो स्टेशन और ब्लू लाइन के सेक्टर-52 मेट्रो स्टेशन को आपस में जोड़ता है, जिससे रोजाना सफर करने वाले लाखों यात्रियों को बड़ी राहत मिली है। रक्षाबंधन के दिन जब इसे पहली बार खोला गया, तो ब्लू लाइन के सेक्टर-52 से एक्वा लाइन के सेक्टर-51 तक जाने के लिए इस स्काईवॉक का 45 हजार से अधिक यात्रियों ने उपयोग किया।\n\nयात्रियों को मिलेगी भारी राहत और बारिश से बचाव\nनोएडा अथॉरिटी की एसीईओ वंदना त्रिपाठी ने इस संबंध में जानकारी देते हुए बताया कि स्काईवॉक के सभी जरूरी काम पूरे होने के बाद इसे फिलहाल ट्रायल बेस पर शुरू करने के निर्देश दिए गए थे। अभी इसका कोई औपचारिक उद्घाटन नहीं किया गया है ताकि लोगों को तुरंत इसकी सुविधा मिल सके। इस वातानुकूलित रास्ते के शुरू होने से खासतौर पर बारिश के मौसम में मेट्रो यात्रियों को बहुत मदद मिलेगी। अब सेक्टर-51 और सेक्टर-52 के बीच का यह पूरा सफर केवल पांच मिनट के भीतर सुरक्षित तरीके से पूरा हो जाएगा।\n\nसंरचना, लंबाई और निर्माण लागत की खास बातें\nइस आधुनिक एसी स्काईवॉक के निर्माण पर कुल लगभग 33 करोड़ रुपये की लागत आई है। इसकी कुल लंबाई लगभग 460 मीटर और चौड़ाई करीब छह मीटर है। यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए इसमें हर 50 मीटर की दूरी पर कुल 10 ट्रैवलेटर यानी स्वचालित सीढ़ियां और रैंप लगाए गए हैं। इस स्काईवॉक के बनने से पहले मेट्रो यात्रियों को दोनों स्टेशनों के बीच आने-जाने के लिए काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता था। उन्हें संकरे और भीड़भाड़ वाले पैदल रास्तों के अलावा ऑटो, ई-रिक्शा और सामान बेचने वाले वेंडरों से भरे तंग रास्तों से गुजरना पड़ता था। इस महत्वपूर्ण स्काईवॉक परियोजना का निर्माण कार्य मार्च 2023 में शुरू किया गया था।\n\nकई अड़चनों और बढ़ी हुई लागत का सफर\nनोएडा अथॉरिटी की एसीईओ ने आगे बताया कि ट्रायल के दौरान सफर करने वाले मुसाफिरों और तकनीकी टीम से मिलने वाले फीडबैक के आधार पर जरूरी सुधार किए जाएंगे, जिसके बाद इसका आधिकारिक उद्घाटन भी किया जा सकता है। मूल रूप से इस पूरे प्रोजेक्ट को महज छह महीने के भीतर पूरा करने का लक्ष्य तय किया गया था। हालांकि, इसके डिजाइन में लगातार बदलाव किए जाने, मेट्रो की केबल्स, भारी भरकम बीम की समस्याओं, एनजीटी के प्रतिबंधों और अन्य तकनीकी बाधाओं के चलते इस प्रोजेक्ट की एक के बाद एक कुल दस डेडलाइन निकल चुकी थीं। हालात यह रहे कि तीन साल पहले इस प्रोजेक्ट की अनुमानित लागत 25 करोड़ रुपये थी, जो विभिन्न कारणों से बढ़कर अंततः 33 करोड़ रुपये तक पहुंच गई।\n\nइसका आप पर असर\nनोएडा और दिल्ली-एनसीआर के लाखों मेट्रो यात्रियों के लिए आवागमन अब बेहद सुरक्षित, आरामदायक और तेज हो गया है।\n\n• भारत में: दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में सार्वजनिक परिवहन के बुनियादी ढांचे को बेहतर बनाने की दिशा में यह एक बड़ा कदम है, जिससे अन्य शहरों को भी ऐसे एकीकृत पैदल मार्गों के निर्माण की प्रेरणा मिलेगी।\n• नोएडा में: सेक्टर-51 एक्वा लाइन और सेक्टर-52 ब्लू लाइन के बीच रोजाना यात्रा करने वाले हजारों यात्रियों को भीड़भाड़ और बारिश से राहत मिलेगी, जिससे दोनों स्टेशनों के बीच का सफर अब सिर्फ 5 मिनट में पूरा हो जाएगा।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. दिल्ली-एनसीआर का पहला एसी स्काईवॉक कहां शुरू हुआ है?\nयह एसी स्काईवॉक नोएडा में शुरू किया गया है जो सेक्टर-51 और सेक्टर-52 मेट्रो स्टेशनों को जोड़ता है।\n\n2. इस स्काईवॉक को किस मौके पर जनता के लिए खोला गया?\nइस स्काईवॉक को नोएडा अथॉरिटी द्वारा रक्षाबंधन के अवसर पर शुक्रवार को जनता के लिए खोल दिया गया।\n\n3. इस स्काईवॉक की लंबाई और चौड़ाई कितनी है?\nइस स्काईवॉक की लंबाई लगभग 460 मीटर और चौड़ाई करीब छह मीटर है।\n\n4. इस परियोजना के निर्माण पर कुल कितनी लागत आई है?\nइस एसी स्काईवॉक के निर्माण पर लगभग 33 करोड़ रुपये की लागत आई है।\n\n5. दोनों स्टेशनों के बीच सफर करने में अब कितना समय लगेगा?\nइस स्काईवॉक के शुरू होने से सेक्टर-51 और सेक्टर-52 के बीच का रास्ता करीब पांच मिनट में पूरा हो जाएगा।\n\n6. यात्रियों की सुविधा के लिए स्काईवॉक में क्या लगाया गया है?\nयात्रियों की आवाजाही को आसान बनाने के लिए इसमें हर 50 मीटर पर कुल 10 ट्रैवलेटर यानी स्वचालित सीढ़ियां और रैंप लगाए गए हैं।\n\n7. इस प्रोजेक्ट की कुल कितनी डेडलाइन मिस हुई थीं?\nविभिन्न तकनीकी और प्रशासनिक कारणों से इस प्रोजेक्ट की एक के बाद एक कुल दस डेडलाइन निकल चुकी थीं।",
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  "category": "उत्तर प्रदेश",
  "publishedAt": "2026-08-29",
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    "मेट्रो कनेक्टिविटी"
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