# पारंपरिक दस्तकारों के लिए वित्तीय मदद की पहल, आजमगढ़ में 10 लाख रुपये तक ब्याज मुक्त कर्ज की सुविधा

> उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ में उद्योग विभाग विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना के तहत पुश्तैनी कारीगरों को 15 प्रतिशत सब्सिडी के साथ 10 लाख रुपये तक का ब्याज मुक्त ऋण दे रहा है।

**Type:** article · **Category:** उत्तर प्रदेश · **Published:** 2026-10-10 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/uttar-pradesh/parnparika-dastakaron-ke-lie-vittiya-madada-ki-pahala-azamgarh-men-10-lakha-rupaye-taka-byaja-mukta-karja-ki-suvidha-45802 · **Language:** Hindi
**Tags:** विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना, आजमगढ़, कारीगर ऋण, ब्याज मुक्त लोन, उद्योग विभाग, जितेंद्र यादव

पुश्तैनी हुनर और पारंपरिक दस्तकारी से अपनी आजीविका चलाने वाले हुनरमंदों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में अहम कदम उठाया गया है। आजमगढ़ जिले में उद्योग विभाग विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना के जरिए स्थानीय कामगारों को आत्मनिर्भर बनाने में जुटा है। यदि कोई कामगार लोहार, बढ़ई, कुम्हार अथवा सिलाई जैसे पुश्तैनी पेशों में लगा है और अपने छोटे कारोबार को बड़े स्तर पर ले जाना चाहता है, तो यह सरकारी सहायता उसके लिए नए रास्ते खोल सकती है।

## प्रशिक्षित दस्तकारों को वित्तीय संबल और सब्सिडी
इस पूरी पहल का बुनियादी लक्ष्य पारंपरिक काम-काज से जुड़े लोगों के जीवन स्तर को ऊपर उठाना और उन्हें आर्थिक रूप से स्थिर करना है। मामले की रूपरेखा साझा करते हुए सहायक आयुक्त उद्योग जितेंद्र यादव ने स्पष्ट किया कि जिन कामगारों ने विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना अथवा पीएम विश्वकर्मा के तहत अपना प्रशिक्षण सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है और जिनके पास आधिकारिक प्रमाण पत्र मौजूद है, वे इस आर्थिक मदद के पात्र हैं। ऐसे दस्तकार अपना खुद का काम या छोटी औद्योगिक इकाई शुरू करने के लिए 10 लाख रुपये तक के ऋण के लिए आवेदन कर सकते हैं। इस वित्तीय व्यवस्था की सबसे अहम बात यह है कि इस पर सरकार 15 प्रतिशत की सीधी सब्सिडी मुहैया करा रही है और लाभार्थियों से इस कर्ज पर कोई ब्याज नहीं लिया जाता है।

## पात्रता की शर्तें और जातिगत अंशदान का ढांचा
यह योजना उन सभी कारीगरों के लिए खुली है जो पीढ़ी दर पीढ़ी चले आ रहे कामों से जुड़े हुए हैं। इस दायरे में लोहार, कुम्हार, बढ़ई, सुनार, मोची, राजमिस्त्री, नाई, ताला बनाने वाले, नाव निर्माण से जुड़े लोग और मछली पकड़ने का जाल बुनने वाले कारीगर शामिल हैं। योजना में सामाजिक समावेश का ध्यान रखा गया है और किसी भी समुदाय का पात्र व्यक्ति इसका लाभ उठा सकता है।

उम्र के लिहाज से आवेदक की आयु 18 वर्ष से 60 वर्ष के दायरे में होनी अनिवार्य है। व्यवसाय की लागत में हिस्सेदारी को लेकर भी साफ नियम तय किए गए हैं। अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के आवेदकों को कुल परियोजना लागत का केवल 5 प्रतिशत हिस्सा अपनी तरफ से लगाना होगा। वहीं सामान्य श्रेणी के आवेदकों के लिए यह स्वयं का अंशदान 10 प्रतिशत तय किया गया है।

## आवेदन के लिए जरूरी दस्तावेज और प्रोजेक्ट रिपोर्ट
इच्छुक दस्तकारों को अपने आवेदन के साथ कई आवश्यक कागजात संलग्न करने होंगे। इनमें एक शपथ पत्र, जन्मतिथि के सत्यापन के लिए आठवीं अथवा दसवीं कक्षा का अंकपत्र या समकक्ष शैक्षिक दस्तावेज शामिल हैं। पहचान और बैंक प्रक्रियाओं के लिए आधार कार्ड, पैन कार्ड तथा जाति प्रमाण पत्र प्रस्तुत करना जरूरी है। इसके अतिरिक्त कामगार का पासपोर्ट आकार का फोटो, चालू मोबाइल नंबर और संबंधित प्रशिक्षण का प्रमाण पत्र आवेदन में लगाना होगा।

परियोजना प्रस्ताव तैयार करने को लेकर भी प्रक्रिया को सरल बनाया गया है। यदि प्रस्तावित कारोबार का बजट 10 लाख रुपये से कम है, तो प्रणाली में कंप्यूटर के माध्यम से स्वतः प्रोजेक्ट रिपोर्ट तैयार हो जाती है। हालांकि, यदि कोई उद्यम 10 लाख रुपये से अधिक की लागत का है, तो उसके लिए चार्टर्ड अकाउंटेंट अथवा किसी अधिकृत विशेषज्ञ से विधिवत प्रोजेक्ट रिपोर्ट तैयार करवानी होगी।

## इसका आप पर असर
इस योजना से पारंपरिक कामगारों को बिना किसी ब्याज के बोझ के अपने छोटे कारोबार को विस्तार देने का सीधा अवसर मिल रहा है।

- **भारत में:** पारंपरिक शिल्पकारों को आधुनिक व्यापार से जोड़ने के लिए केंद्र और राज्यों द्वारा कौशल विकास और आर्थिक सहयोग के रास्ते खोले जा रहे हैं। इससे स्वरोजगार की दिशा में बढ़ रहे कामगारों को बाजार में बने रहने का सहारा मिलता है।
- **आजमगढ़ में:** जिले के प्रशिक्षित बढ़ई, कुम्हार, लोहार और दर्जी जैसे कारीगर 10 लाख रुपये तक की वित्तीय सहायता लेकर अपनी खुद की कार्यशाला स्थापित कर सकते हैं। 15 प्रतिशत सरकारी छूट और ब्याज मुक्त व्यवस्था के कारण मासिक किस्त का दबाव काफी घट जाता है।
- **वर्गवार अंशदान:** आरक्षित वर्गों के कामगारों को लागत का सिर्फ 5 प्रतिशत और सामान्य वर्ग को 10 प्रतिशत धन जुटाना होगा। इस मामूली शुरुआती पूंजी के साथ नए उपकरण और कच्चा माल खरीदना आसान हो जाता है।
- **कागजी प्रक्रिया में राहत:** 10 लाख रुपये तक के प्रस्तावों के लिए डिजिटल प्रणाली खुद रिपोर्ट बना देती है। कारीगरों को महंगे सलाहकारों के चक्कर काटे बिना तेजी से ऋण की मंजूरी मिल सकती है।

## ऐसा क्यों हुआ
पारंपरिक कारीगरों के पास अक्सर पीढ़ियों का हुनर होता है, लेकिन पर्याप्त पूंजी और औपचारिक प्रशिक्षण के अभाव में वे अपने काम को बड़े उद्यम में नहीं बदल पाते। आर्थिक तंगी और ब्याज वाले कर्जों के चक्र से बाहर निकालने के लिए प्रशासन ने इस योजना के तहत वित्तीय सहायता की व्यवस्था की है।

- **कार्यशील पूंजी की कमी:** स्थानीय कारीगरों को आधुनिक औजार और कच्चा माल खरीदने के लिए भारी ब्याज पर निजी कर्जदारों पर निर्भर रहना पड़ता था। इस निर्भरता को खत्म करने के लिए सरकार ने 15 प्रतिशत सब्सिडी के साथ शून्य ब्याज वाला ऋण मॉडल तैयार किया।
- **प्रशिक्षण को प्रोत्साहन:** सिर्फ कर्ज बांटने के बजाय योजना को कौशल विकास से जोड़ा गया है। पीएम विश्वकर्मा या श्रम सम्मान योजना में प्रमाणपत्र पाने वाले कारीगरों को प्राथमिकता देकर यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि ऋण का उपयोग सही उद्यम में हो।
- **डिजिटल सुगमता:** छोटे कारीगरों के लिए कागजी प्रक्रिया और सीए की फीस एक बड़ी बाधा बनती थी। इसे दूर करने के लिए 10 लाख रुपये तक के बजट पर कंप्यूटर द्वारा स्वतः रिपोर्ट तैयार करने का नियम लागू किया गया।

## सवाल-जवाब

### 1. विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना के तहत आजमगढ़ में कितना ऋण मिल सकता है?
प्रशिक्षित और प्रमाणित कारीगर अपने कारोबार की स्थापना या विस्तार के लिए 10 लाख रुपये तक का ब्याज मुक्त ऋण प्राप्त कर सकते हैं।

### 2. इस ऋण पर सरकार द्वारा कितनी सब्सिडी दी जा रही है?
इस योजना के अंतर्गत लाभार्थियों को परियोजना लागत पर सरकार की ओर से 15 प्रतिशत की सब्सिडी प्रदान की जाती है।

### 3. आवेदन करने के लिए उम्र की सीमा क्या रखी गई है?
आवेदक की आयु न्यूनतम 18 वर्ष और अधिकतम 60 वर्ष के बीच होनी चाहिए।

### 4. आरक्षित और सामान्य वर्ग के लिए लाभार्थी अंशदान के क्या नियम हैं?
एससी, एसटी और ओबीसी वर्ग के आवेदकों को परियोजना लागत का 5 प्रतिशत, जबकि सामान्य वर्ग के लाभार्थियों को 10 प्रतिशत अंशदान लगाना होता है।

### 5. कौन-से पारंपरिक व्यवसायों से जुड़े लोग इस योजना के पात्र हैं?
लोहार, कुम्हार, बढ़ई, दर्जी, सुनार, मोची, राजमिस्त्री, नाई, ताला निर्माता, नाव बनाने वाले और जाल बुनने वाले कारीगर इसके पात्र हैं।

### 6. क्या 10 लाख रुपये से कम के प्रोजेक्ट के लिए सीए से रिपोर्ट बनवानी होगी?
नहीं, 10 लाख रुपये से कम की परियोजनाओं के लिए कंप्यूटर प्रणाली स्वतः रिपोर्ट तैयार करती है, जबकि उससे अधिक के लिए विशेषज्ञ की आवश्यकता होती है।

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