राखी सावंत को मिली कानूनी राहत, झांसी कोर्ट ने वापस लिया गैर-जमानती वारंट उत्तर प्रदेश के झांसी की एक अदालत ने अभिनेत्री राखी सावंत के खिलाफ जारी गैर-जमानती वारंट को खारिज कर दिया है। यह कानूनी पेंच साल 2010 के एक युवक की आत्महत्या से जुड़े मामले से ताल्लुक रखता है। अभिनेत्री राखी सावंत को उत्तर प्रदेश के झांसी जिले से एक बड़ी कानूनी राहत हासिल हुई है। स्थानीय अदालत ने उनके खिलाफ पूर्व में जारी किए गए गैर-जमानती वारंट को गुरुवार के दिन आधिकारिक रूप से रद्द कर दिया है। यह पूरा मामला साल 2010 के दौरान एक युवक द्वारा की गई आत्महत्या के मामले में कथित रूप से उकसाने के आरोपों से जुड़ा हुआ है। न्यायालय की कार्यवाही के दौरान, बचाव पक्ष के वकीलों ने इलाहाबाद हाई कोर्ट द्वारा जारी किए गए स्थगन आदेश की प्रति प्रस्तुत की। इसी दस्तावेज को आधार बनाकर अदालत के समक्ष वारंट को प्रभावहीन करने की गुहार लगाई गई थी, जिसे न्यायाधीश ने स्वीकार कर लिया। अदालत में पेश की गई हाई कोर्ट के आदेश की कॉपी राखी सावंत की कानूनी पैरवी कर रहे अधिवक्ता आशु सिंह ने इस संबंध में जानकारी देते हुए बताया कि सिविल जज (जूनियर डिवीजन) की अदालत ने गत 16 अक्टूबर को अभिनेत्री के नाम पर गैर-जमानती वारंट जारी किया था। इसके जवाब में, बचाव पक्ष की ओर से तुरंत एक प्रार्थना पत्र दाखिल किया गया जिसमें इलाहाबाद हाई कोर्ट के उस पुराने आदेश का विशेष रूप से हवाला दिया गया जिसके जरिए मामले की आगे की कानूनी कार्यवाही पर रोक लगाई जा चुकी है। सिविल जज (जूनियर डिवीजन), फास्ट ट्रैक कोर्ट ने उच्च न्यायालय के इस निर्देश को संज्ञान में लेते हुए अंततः गैर-जमानती वारंट को पूरी तरह से रद्द कर दिया है। वर्ष 2010 के आत्महत्या मामले से है पुराना नाता यह पूरा कानूनी विवाद झांसी के हंसारी इलाके में रहने वाले लक्ष्मण अहिरवार की दुखद मृत्यु से गहराई से जुड़ा हुआ है। मृतक लक्ष्मण की माता ने प्रेमनगर पुलिस थाने में अभिनेत्री राखी सावंत के खिलाफ औपचारिक शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायतकर्ता का गंभीर आरोप था कि एक टेलीविजन शो के प्रसारण के दौरान राखी सावंत द्वारा बोली गई कुछ कथित आपत्तिजनक और अपमानजनक बातों से गहरा आहत होकर उनके बेटे लक्ष्मण ने यह कदम उठाया था। उपलब्ध विवरणों के अनुसार, 24 वर्षीय लक्ष्मण अहिरवार ने 10 नवंबर 2010 के दिन आत्महत्या कर ली थी, जिसके बाद से यह कानूनी प्रक्रिया लगातार चल रही है। इलाहाबाद हाई कोर्ट से पहले ही मिल चुकी थी रोक अधिवक्ता आशु सिंह ने आगे स्पष्ट किया कि इलाहाबाद हाई कोर्ट ने इस संवेदनशील मामले में बहुत पहले ही 7 दिसंबर 2011 को आगे की सभी कार्यवाहियों पर अगले आदेश तक रोक लगाने का निर्देश दे दिया था। इसी उच्च न्यायालय के आदेश को मुख्य आधार बनाकर बचाव पक्ष ने झांसी की अदालत में याचिका लगाई थी, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया और राहत प्रदान की। इसका आप पर असर इस न्यायिक फैसले से जुड़े कानूनी मामलों और अदालती पेशियों का सामना कर रहे पक्षों को प्रत्यक्ष रूप से बड़ी राहत मिलती है। • भारत में: यह मामला सेलिब्रिटी बयानों और उससे जुड़े कानूनी दायित्वों पर अदालत की कार्यप्रणाली को रेखांकित करता है। • उत्तर प्रदेश में: झांसी और आसपास के स्थानीय न्यायिक मामलों में उच्च न्यायालय के आदेशों के पालन की प्रक्रिया स्पष्ट होती है। ऐसा क्यों हुआ अदालत द्वारा यह आदेश बचाव पक्ष द्वारा उच्च न्यायालय के पुराने स्थगन आदेश को पेश किए जाने के बाद दिया गया। • कानूनी आधार: बचाव पक्ष ने सिविल जज की अदालत में इलाहाबाद हाई कोर्ट के 7 दिसंबर 2011 के आदेश की कॉपी प्रस्तुत की। • वारंट निरस्तीकरण: हाई कोर्ट द्वारा मामले की आगे की कार्यवाही पर रोक लगाने के कारण निचली अदालत ने गैर-जमानती वारंट रद्द कर दिया। सवाल-जवाब 1. राखी सावंत के खिलाफ गैर-जमानती वारंट किसने रद्द किया? उत्तर प्रदेश के झांसी में सिविल जज (जूनियर डिवीजन) की अदालत ने यह वारंट रद्द किया। 2. यह मामला किस वर्ष की घटना से जुड़ा है? यह मामला वर्ष 2010 की एक घटना से संबंधित है। 3. इलाहाबाद हाई कोर्ट ने इस मामले में रोक कब लगाई थी? इलाहाबाद हाई कोर्ट ने 7 दिसंबर 2011 को इस मामले की आगे की कार्यवाही पर रोक लगाई थी। 4. राखी सावंत के अधिवक्ता का क्या नाम है? राखी सावंत के अधिवक्ता का नाम आशु सिंह है। https://trendkia.com/uttar-pradesh/rakhi-sawant-ko-mali-kanuni-rahat-jhansi-court-ne-wapas-liya-non-bailable-warrant-50677 TrendKia — Har trend, sabse pehle.