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  "title": "राम मंदिर चंदा मामला: चंपत राय का ट्रस्ट से इस्तीफा, वीएचपी में जिम्मेदारी अभी बरकरार है",
  "summary": "एसआईटी की प्रारंभिक रिपोर्ट में राम मंदिर चंदे में गड़बड़ी की पुष्टि हुई है, जिसके बाद ट्रस्ट ने महासचिव चंपत राय का इस्तीफा मंजूर कर लिया, हालांकि वे वीएचपी में अपने पद पर बने रहेंगे।",
  "content": "राम मंदिर में चढ़ावे के प्रबंधन को लेकर छिड़े विवाद ने अब बड़ा मोड़ ले लिया है। ट्रस्ट की सोमवार को हुई बैठक में महासचिव चंपत राय और सदस्य अनिल मिश्रा के इस्तीफे स्वीकार कर लिए गए, जबकि एसआईटी की शुरुआती रिपोर्ट में चंदे से जुड़ी गड़बड़ी की पुष्टि हो गई है। हालांकि इस्तीफे के बावजूद चंपत राय अभी वीएचपी में अपने पद पर बने रहेंगे।\n\nएसआईटी रिपोर्ट में क्या सामने आया\nउत्तर प्रदेश सरकार ने 25 जून को एसआईटी की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट की एक प्रति राम मंदिर ट्रस्ट को भेजी थी। इस रिपोर्ट के जरिए ट्रस्ट को जांच में सामने आए निष्कर्षों की जानकारी दी गई। यही रिपोर्ट सोमवार को हुई ट्रस्ट की बैठक के बाद जारी किए गए बयान के साथ भी संलग्न की गई। इसी बैठक में विवाद के बीच ट्रस्ट ने महासचिव चंपत राय और सदस्य अनिल मिश्रा के इस्तीफे मंजूर कर लिए। यह पूरा मामला राम मंदिर में आने वाले चढ़ावे के प्रबंधन को लेकर लंबे समय से चल रहे विवाद के बीच सामने आया है।\n\nसंजय सिंह ने खोले नए दस्तावेज, मांगा और समय\nराम मंदिर चंदा घोटाले पर आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने भी बयान दिया। उन्होंने बताया कि इससे पहले वे एसआईटी को 13 दस्तावेज़ सौंप चुके हैं। संजय सिंह ने बताया कि उन्होंने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में जमीन के सौदों से जुड़े कई और कागजात सार्वजनिक किए हैं और जांच एजेंसी से इसके लिए अतिरिक्त समय मांगा है। उनका कहना है कि यदि उन्हें समय दिया गया, तो वे ये सभी दस्तावेज़ भी एसआईटी को सौंप देंगे। संजय सिंह ने यह भी कहा कि मशहूर राम मंदिर का पूरा प्रबंधन धार्मिक नेताओं को सौंपा जाना चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि नरेंद्र मोदी वहां अपने ही करीबी लोगों को क्यों रखना चाहते हैं। उनका सुझाव है कि मंदिर की पूरी जिम्मेदारी उन धार्मिक नेताओं को दी जाए जो सनातन धर्म और सनातन परंपराओं का पालन करते हैं और जिन्होंने अपना पूरा जीवन इस काम में समर्पित कर दिया है।\n\nवीएचपी का रुख, चंपत राय पर अभी कोई फैसला नहीं\nवीएचपी ने साफ किया है कि चंपत राय ने राम मंदिर ट्रस्ट से इस्तीफा जरूर दिया है, लेकिन वे संगठन में अपने मौजूदा पद पर बने रहेंगे। संगठन के मुताबिक चंपत राय पर लगे आरोपों की जांच पुलिस और एसआईटी दोनों कर रही हैं। चंपत राय ने भी अपनी तरफ से कहा है कि आरोपों को लेकर उनके पास जवाब मौजूद है। वीएचपी ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि जांच पूरी होने से पहले संगठन में चंपत राय की जिम्मेदारियों को लेकर किसी तरह का कोई फैसला नहीं लिया जाएगा और न ही इस पर कोई विचार किया जाएगा।\n\nइसका आप पर असर\n• भारत में: राम मंदिर देशभर के करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा है, इसलिए चंदे के प्रबंधन में गड़बड़ी की पुष्टि से भक्तों के भरोसे और मंदिर की छवि पर सीधा असर पड़ सकता है।\n• अयोध्या में: ट्रस्ट में हुए इस्तीफे और चल रही जांच का असर मंदिर के स्थानीय प्रबंधन और आगे चढ़ावे की व्यवस्था पर पड़ेगा।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. राम मंदिर चंदा मामले में एसआईटी की रिपोर्ट में क्या पुष्टि हुई?\nएसआईटी की प्रारंभिक रिपोर्ट में राम मंदिर के चंदे से जुड़ी गड़बड़ी की पुष्टि हुई है, जिसकी एक प्रति उत्तर प्रदेश सरकार ने 25 जून को ट्रस्ट को भेजी थी।\n\n2. चंपत राय ने किस पद से इस्तीफा दिया है?\nचंपत राय ने राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव पद से इस्तीफा दिया है, जिसे सोमवार की बैठक में स्वीकार कर लिया गया।\n\n3. क्या चंपत राय वीएचपी में बने रहेंगे?\nहां, वीएचपी के मुताबिक ट्रस्ट से इस्तीफे के बावजूद चंपत राय संगठन में अपने मौजूदा पद पर बने रहेंगे।\n\n4. चंपत राय के अलावा और किसका इस्तीफा स्वीकार हुआ?\nट्रस्ट ने सदस्य अनिल मिश्रा का इस्तीफा भी स्वीकार किया है।\n\n5. संजय सिंह ने एसआईटी को कितने दस्तावेज़ सौंपे हैं?\nसंजय सिंह ने बताया कि वे पहले ही एसआईटी को 13 दस्तावेज़ सौंप चुके हैं और अब जमीन सौदों से जुड़े और कागजात सौंपने के लिए समय मांगा है।\n\n6. संजय सिंह की मुख्य मांग क्या है?\nसंजय सिंह चाहते हैं कि राम मंदिर का पूरा प्रबंधन उन धार्मिक नेताओं को सौंपा जाए जो सनातन धर्म और परंपराओं का पालन करते हैं।\n\n7. चंपत राय पर लगे आरोपों की जांच कौन कर रहा है?\nचंपत राय पर लगे आरोपों की जांच पुलिस और एसआईटी दोनों कर रही हैं।",
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  "category": "उत्तर प्रदेश",
  "publishedAt": "2026-07-07",
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    "राम मंदिर चंदा घोटाला",
    "चंपत राय इस्तीफा",
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    "अनिल मिश्रा"
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