सहारनपुर की कान्हा उपवन गौशाला ने गोबर से बनाए इको-फ्रेंडली तिरंगा बैच, स्वतंत्रता दिवस पर 5000 की भारी मांग सहारनपुर स्थित मां शाकंभरी कान्हा उपवन गौशाला में गाय के गोबर से 100 प्रतिशत बायोडिग्रेडेबल तिरंगा बैच तैयार किए जा रहे हैं, जो उपयोग के बाद मिट्टी में घुलकर पौधों के लिए जैविक खाद बन जाते हैं। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर देश भर में देशभक्ति का माहौल रहता है और नागरिक अपनी छाती पर तिरंगा चेस्ट बैच लगाकर 15 अगस्त का पर्व बड़े उत्साह के साथ मनाते हैं। हालांकि, समारोह संपन्न होने के उपरांत प्लास्टिक से बने ये चेस्ट बैच अक्सर सड़कों, कचरे के ढेरों और नालियों में बिखरे पड़े दिखाई देते हैं। इससे न केवल पर्यावरण को नुकसान पहुंचता है, बल्कि राष्ट्रध्वज के मान-सम्मान पर भी आंच आती है। इस गंभीर समस्या का समाधान निकालते हुए उत्तर प्रदेश के सहारनपुर स्थित मां शाकंभरी कान्हा उपवन गौशाला ने गाय के शुद्ध गोबर से बने बायोडिग्रेडेबल तिरंगा बैच तैयार करने की एक नई पहल की है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की पसंदीदा मानी जाने वाली इस गौशाला में बने ये बैच पर्यावरण संरक्षण और देशभक्ति का अनूठा उदाहरण पेश कर रहे हैं। मिट्टी में मिलते ही जैविक खाद बन जाएगा यह अनोखा बैच गोबर से तैयार किए गए इस तिरंगा चेस्ट बैच की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह पूरी तरह से बायोडिग्रेडेबल है। राष्ट्रीय पर्व का कार्यक्रम समाप्त होने के बाद लोगों को इसे सड़कों या कचरे में फेंकने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। नागरिक इस बैच को अपने घर के बगीचे, गमलों अथवा पौधों की क्यारियों में रख सकते हैं। पानी और मिट्टी के संपर्क में आने पर यह बैच कुछ ही समय में पूरी तरह घुलकर पौधों के लिए उच्च गुणवत्ता वाली ऑर्गेनिक फर्टिलाइजर यानी जैविक खाद के रूप में बदल जाता है। इस नवाचार के माध्यम से प्लास्टिक प्रदूषण को नियंत्रित करने में मदद मिल रही है और साथ ही राष्ट्रीय ध्वज का गरिमापूर्ण सम्मान भी सुरक्षित रहता है। तीन साल पहले पायलट प्रोजेक्ट से हुई थी शुरुआत, इस बार 5000 की डिमांड पशु चिकित्सा एवं कल्याण अधिकारी डॉ. संदीप मिश्रा के अनुसार, गौशाला में राष्ट्रवाद और पर्यावरण संरक्षण को जोड़ने का यह प्रयास पिछले तीन वर्षों से लगातार चलाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2024 में इस नवाचार को एक पायलट प्रोजेक्ट के रूप में प्रारंभ किया गया था, जिसके अंतर्गत पहले साल 1000 तिरंगा चेस्ट बैच बनाए गए थे। जनता की ओर से मिली शानदार प्रतिक्रिया को देखते हुए पिछले वर्ष इसकी मांग बढ़कर 3000 हो गई। वहीं इस वर्ष 15 अगस्त के स्वतंत्रता दिवस समारोह के लिए मांग इतनी अधिक बढ़ गई है कि लगभग 5000 तिरंगा चेस्ट बैच तैयार किए जा रहे हैं। अमेज़न और फ्लिपकार्ट पर भी उपलब्ध, ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों जगह बिक्री यह गोबर से निर्मित तिरंगा बैच देखने में काफी सुंदर, कलात्मक और उच्च फिनिशिंग वाला है। इसे इस तरह तैयार किया गया है कि इसका मूल्य अत्यंत किफायती रहे और आम नागरिक इसे सुलभता से खरीद सकें। स्थानीय बाजारों में बिक्री के साथ-साथ इस बैच की मांग देश के विभिन्न हिस्सों से आ रही है। नागरिकों की सुविधा के लिए इसे ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म जैसे अमेज़न और फ्लिपकार्ट पर भी बिक्री के लिए उपलब्ध कराया गया है, जिससे लोग इसे सीधे अपने घर मंगवा सकते हैं। वर्ल्ड रिकॉर्ड और GMP सर्टिफिकेट पाने वाली देश की पहली गौशाला नगर निगम सहारनपुर द्वारा संचालित मां शाकंभरी कान्हा उपवन गौशाला में वर्तमान समय में 547 गोवंश की देखभाल और संरक्षण किया जा रहा है। यह गौशाला अपने उत्कृष्ट प्रबंधन और नवाचारों के लिए राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ख्याति अर्जित कर चुकी है। यह दुनिया की एकमात्र ऐसी गौशाला है जिसके नाम वर्ल्ड रिकॉर्ड दर्ज है। इसके अतिरिक्त, भारत में पहली बार किसी गौशाला को गुड मैन्युफैक्चरिंग प्रैक्टिसेज यानी GMP का प्रमाण पत्र प्रदान किया गया है। यह संस्थान ISO सर्टिफाइड होने के साथ-साथ इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स की तरफ से IBR अचीवर अवार्ड से भी सम्मानित हो चुका है। गोबर और गोमूत्र से 20 से अधिक उत्पाद, प्रदेश की नंबर 1 आत्मनिर्भर गौशाला उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ स्वयं इस गौशाला का निरीक्षण कर चुके हैं और यहां के स्वावलंबी मॉडल तथा निर्मित उत्पादों की खुलकर प्रशंसा कर चुके हैं। कान्हा उपवन गौशाला में गाय के गोबर और गोमूत्र की सहायता से 20 से अधिक प्रकार के उत्पाद बनाए जाते हैं, जिनमें धूपबत्ती, कलात्मक मूर्तियां, पूजन दीये, जैविक खाद और प्राकृतिक कीटनाशक शामिल हैं। इन उत्पादों की बिक्री से प्राप्त होने वाली आय से गौशाला का दैनिक संचालन और रखरखाव का खर्च पूरा किया जाता है। इसी मॉडल के बल पर यह संस्थान उत्तर प्रदेश की नंबर 1 आत्मनिर्भर गौशाला बनकर उभरा है। इसका आप पर असर भारत में: प्लास्टिक कचरे को रोककर राष्ट्रध्वज का सम्मान बनाए रखने का यह इको-फ्रेंडली मॉडल देश भर के संस्थानों के लिए प्रेरणादायक उदाहरण है। उत्तर प्रदेश और सहारनपुर में: आत्मनिर्भर गौशाला मॉडल से स्थानीय स्तर पर पर्यावरण अनुकूल उत्पाद और स्वरोजगार के नए अवसर मजबूत हो रहे हैं। सवाल-जवाब 1. गोबर से बना यह तिरंगा बैच कहां तैयार किया जा रहा है? यह तिरंगा चेस्ट बैच उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में नगर निगम द्वारा संचालित मां शाकंभरी कान्हा उपवन गौशाला में तैयार किया जा रहा है। 2. उपयोग के बाद इस बायोडिग्रेडेबल तिरंगा बैच का क्या करना चाहिए? समारोह के बाद इसे फेंके बिना घर के गमलों या बगीचे की मिट्टी में रख दें, जहां पानी के संपर्क में आते ही यह घुलकर पौधों के लिए जैविक खाद बन जाता है। 3. इस वर्ष कितने तिरंगा चेस्ट बैच बनाए जा रहे हैं? इस वर्ष 15 अगस्त स्वतंत्रता दिवस के लिए लगभग 5000 तिरंगा चेस्ट बैच तैयार किए जा रहे हैं। 4. क्या यह तिरंगा बैच ऑनलाइन उपलब्ध है? हां, स्थानीय बिक्री के साथ-साथ यह बैच अमेज़न और फ्लिपकार्ट जैसे ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर भी उपलब्ध कराया गया है। 5. मां शाकंभरी कान्हा उपवन गौशाला को कौन-कौन से पुरस्कार मिले हैं? इस गौशाला के नाम वर्ल्ड रिकॉर्ड दर्ज है और यह GMP प्रमाण पत्र पाने वाली देश की पहली गौशाला है, जिसे ISO और IBR अचीवर अवार्ड भी मिला है। प्रेरणा और सबक पर्यावरण और राष्ट्रवाद का मेल: राष्ट्रीय पर्वों पर प्लास्टिक का उपयोग बंद करके प्राकृतिक विकल्पों को अपनाना सच्ची देशभक्ति को दर्शाता है। आत्मनिर्भरता का मॉडल: संसाधनों और गोवंश का सही उपयोग करके संस्थान अपने दैनिक खर्च खुद निकाल सकते हैं। नवाचार से समस्या का हल: कचरा बनने वाले कचरे या प्रदूषण को जैविक खाद जैसे उपयोगी उत्पादों में बदलना संभव है। https://trendkia.com/uttar-pradesh/saharanpur-ki-kanha-upvan-gaushala-ne-gobara-se-banae-iko-phrendali-tirnga-baicha-svatntrata-divasa-para-5000-ki-bhari-manga-16796 TrendKia — Har trend, sabse pehle.