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  "type": "article",
  "title": "सरकारी भर्ती परीक्षाओं में बड़ी सेंधमारी नाकाम, यूपी एसटीएफ ने हाईटेक ब्लूटूथ सॉल्वर गैंग के 13 जालसाजों को दबोचा",
  "summary": "उत्तर प्रदेश के वाराणसी और प्रयागराज में एसटीएफ ने बड़ी कार्रवाई करते हुए परीक्षा में आधुनिक ब्लूटूथ डिवाइस से नकल कराने वाले एक बड़े गिरोह का पर्दाफाश किया है और 13 लोगों को गिरफ्तार किया है।",
  "content": "उत्तर प्रदेश में सरकारी नौकरियों के लिए होने वाली परीक्षाओं की सुचिता को प्रभावित करने वाले एक बेहद संगठित और आधुनिक गिरोह का भंडाफोड़ हुआ है। उत्तर प्रदेश पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने वाराणसी और प्रयागराज में एक साथ बड़ी कार्रवाई करते हुए इस नकल गिरोह के 13 सदस्यों को धर दबोचा है। गिरफ्तार किए गए आरोपियों में नकल कराने की योजना तैयार करने वाले मुख्य सूत्रधार, पेपर हल करने वाले सॉल्वर और 2 परीक्षार्थी भी शामिल हैं। हालांकि, इस गिरोह का मुख्य संचालक शिवजीत पटेल और उसका करीबी सहयोगी राजेंद्र यादव पुलिस को चकमा देकर फरार होने में सफल रहे, जिनकी गिरफ्तारी के लिए लगातार दबिश दी जा रही है।\n\n \n\nनकल कराने का आधुनिक और शातिर तरीका\n\nयह सॉल्वर गैंग परीक्षा केंद्रों में सुरक्षा व्यवस्था को धता बताने के लिए बेहद आधुनिक और सूक्ष्म उपकरणों का इस्तेमाल करता था। परीक्षा शुरू होने से पहले ही, गिरोह के सदस्य उम्मीदवारों के कपड़ों और उनके कानों के भीतर बेहद छोटे आकार के इलेक्ट्रॉनिक ब्लूटूथ डिवाइस छिपा देते थे ताकि वे तलाशी के दौरान पकड़े न जा सकें। जैसे ही परीक्षा हॉल में परीक्षा शुरू होती थी, गिरोह का एक सदस्य बाहर से किसी तरह प्रश्नपत्र का प्रबंध करता था। प्रश्नपत्र हाथ में आते ही उसे प्रयागराज के एक गुप्त ठिकाने पर मौजूद सॉल्वरों के पास भेजा जाता था। वहां बैठे सॉल्वर प्रश्नों को तेजी से हल करते थे और फिर फोन कॉल के माध्यम से परीक्षा हॉल में बैठे छात्रों को ब्लूटूथ पर सही विकल्प बोल-बोलकर लिखवाते थे। इस काम के बदले में प्रत्येक सॉल्वर को 20-20 हजार रुपये का भुगतान किया जाता था।\n\n \n\nसरकारी नौकरी के नाम पर लाखों की ठगी\n\nयह शातिर गिरोह सरकारी नौकरी की तलाश कर रहे बेरोजगार युवाओं की लाचारी का फायदा उठाकर उनसे मोटी रकम वसूलता था। पुलिस की पूछताछ के दौरान आरोपियों ने बड़े वित्तीय लेनदेन का खुलासा किया है। पकड़े गए उम्मीदवारों में से एक छात्र धर्मेंद्र ने परीक्षा पास करने के नाम पर इस गिरोह को 5 लाख रुपये दिए थे। वहीं, दूसरे छात्र विपिन ने इस धोखाधड़ी के लिए गिरोह को 5.25 लाख रुपये की बड़ी रकम का भुगतान किया था। यह गिरोह युवाओं को नौकरी का पक्का भरोसा देकर जाल में फंसाता था और उनसे लाखों रुपये ऐंठकर परीक्षा प्रणाली के साथ खिलवाड़ करता था।\n\n \n\nछापेमारी में जब्त सामग्री और परीक्षा केंद्र\n\nSTF की टीमों ने जब प्रयागराज के उस ठिकाने पर छापा मारा, जहां से सॉल्वर लाइव बोलकर नकल करवा रहे थे, तो पुलिस भी हैरान रह गई। मौके से पुलिस ने भारी मात्रा में आपत्तिजनक सामग्री बरामद की है। जब्त किए गए सामान में 11 मोबाइल फोन, 4 बारीक इलेक्ट्रॉनिक ब्लूटूथ डिवाइस, 2 प्रिंटर, 2 प्रवेश पत्र, 2 प्रश्नपत्र और 2 OMR शीट शामिल हैं। पुलिस की यह संयुक्त कार्रवाई वाराणसी के 'एंग्लो इंडियन मुस्लिम इण्टर कॉलेज' और 'हरिश्चन्द्र बालिका इण्टर कॉलेज' के साथ-साथ प्रयागराज के कई संदिग्ध ठिकानों पर की गई, जहां नकल का यह अवैध धंधा संचालित हो रहा था।\n\n \n\nगंभीर धाराओं में मुकदमा और फरार आरोपियों की तलाश\n\nइस मामले में पुलिस ने कठोर कानूनी कदम उठाए हैं। गिरफ्तार किए गए सभी 13 आरोपियों के खिलाफ वाराणसी के सिगरा और कोतवाली थानों में 'उत्तर प्रदेश सार्वजनिक परीक्षा अधिनियम' की अत्यंत गंभीर धाराओं के तहत आपराधिक मामले दर्ज किए गए हैं। पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि इस गिरोह ने अब तक कितनी परीक्षाओं में सेंध लगाई है। इसके साथ ही फरार चल रहे मुख्य सरगना शिवजीत पटेल और राजेंद्र यादव की धरपकड़ के लिए पुलिस की टीमें कई इलाकों में लगातार छापेमारी कर रही हैं ताकि इस रैकेट की जड़ों को पूरी तरह से उखाड़ा जा सके।\n\nइसका आप पर असर\n• भारत में: देश भर में सरकारी परीक्षाओं की शुचिता और सुरक्षा को लेकर सुरक्षा एजेंसियों और सरकारों की सतर्कता और अधिक बढ़ेगी।\n• उत्तर प्रदेश में: राज्य में सरकारी नौकरियों की परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं को निष्पक्ष परीक्षा माहौल मिलेगा, और प्रशासन द्वारा नकल विरोधी कड़े नियमों को अधिक कड़ाई से लागू किया जाएगा।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. यूपी एसटीएफ ने सॉल्वर गैंग के कितने लोगों को गिरफ्तार किया है?\nएसटीएफ ने कुल 13 लोगों को गिरफ्तार किया है, जिसमें मास्टरमाइंड, सॉल्वर और 2 परीक्षार्थी शामिल हैं।\n\n2. नकल कराने के लिए छात्रों से कितने पैसों की वसूली की गई थी?\nपकड़े गए दो छात्रों में से धर्मेंद्र ने 5 लाख रुपये और विपिन ने 5.25 लाख रुपये गिरोह को दिए थे।\n\n3. परीक्षा हॉल में नकल कराने के लिए किस तकनीक का उपयोग किया जा रहा था?\nआरोपी उम्मीदवारों के कपड़ों और कानों में बहुत छोटे इलेक्ट्रॉनिक ब्लूटूथ डिवाइस छिपा देते थे और फोन कॉल के जरिए उन्हें जवाब बताते थे।\n\n4. गिरोह के कौन से मुख्य आरोपी अभी भी फरार हैं?\nगिरोह का मुख्य सरगना शिवजीत पटेल और उसका साथी राजेंद्र यादव मौके से भागने में सफल रहे, जिनकी पुलिस तलाश कर रही है।",
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  "category": "उत्तर प्रदेश",
  "publishedAt": "2026-07-13",
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    "प्रयागराज न्यूज"
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