उत्तर प्रदेश की संभल सीट पर सपा का दबदबा, जानिए 2027 के चुनाव में क्या रहेगा समीकरण पश्चिमी उत्तर प्रदेश की संभल विधानसभा सीट पर पिछले छह चुनावों से समाजवादी पार्टी का कब्जा है। बीजेपी और अन्य दलों के सामने यहां दशकों का सूखा खत्म करने की बड़ी चुनौती है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश का संभल विधानसभा क्षेत्र राजनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील और हॉट सीट माना जाता है। इस इलाके में पिछले छह विधानसभा चुनावों से लगातार समाजवादी पार्टी के इकबाल महमूद जीत दर्ज करते आ रहे हैं। इसके अलावा वह जनता दल के टिकट पर भी इस सीट का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। दूसरी ओर भारतीय जनता पार्टी ने आखिरी बार इस सीट पर साल 1993 में यानी करीब 33 साल पहले जीत हासिल की थी। पिछले तीन दशकों में बहुजन समाज पार्टी और कांग्रेस जैसी पार्टियों को यहां सफलता नहीं मिल पाई है। सामाजिक बनावट की दृष्टि से यह एक मुस्लिम बहुल निर्वाचन क्षेत्र है, जहां अनुसूचित जाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के मतदाताओं की संख्या भी काफी मजबूत है। आगामी 2027 के विधानसभा चुनावों को लेकर राजनीतिक गलियारों में इस सीट के समीकरणों पर खास चर्चा हो रही है। सपा के इकबाल महमूद का राजनीतिक सफर वर्ष 1991 का विधानसभा चुनाव अयोध्या में हुई गोलीबारी की घटना के ठीक बाद कराया गया था। उस चुनाव में जनता दल के उम्मीदवार के तौर पर इकबाल महमूद ने बाजी मारी थी। उन्होंने कुल 39,091 वोट प्राप्त किए थे, जबकि उनके निकटतम प्रतिद्वंद्वी भारतीय जनता पार्टी के विजय कुमार उर्फ विजय त्यागी 35,810 वोट ही हासिल कर सके थे। इस कड़े मुकाबले में इकबाल महमूद ने 3,281 वोटों के अंतर से जीत दर्ज की थी। उस चुनाव में शफीकुर्रहमान बर्क जनता पार्टी के टिकट पर मैदान में उतरे थे और 28,772 वोट पाकर तीसरे स्थान पर रहे थे। हालांकि इसके तुरंत बाद 1993 के चुनाव में राजनीतिक समीकरण बदले और भारतीय जनता पार्टी ने इस सीट पर खाता खोला। बीजेपी के सत्य प्रकाश ने 44,298 वोट हासिल किए, जबकि समाजवादी पार्टी के शफीकुर्रहमान बर्क को 39,496 वोट मिले। पार्टी ने 4,802 वोटों के मार्जिन से संभल सीट अपने पाले में कर ली। इस चुनाव में जनता दल की टिकट पर उतरे इकबाल महमूद को तीसरे स्थान पर संतोष करना पड़ा था जिन्हें 30,785 वोट मिले थे। वहीं कांग्रेस प्रत्याशी मोहम्मद सफीफ खान 21,132 वोट पाकर चौथे नंबर पर रहे थे। लगातार जीत का सिलसिला और बड़े मुकाबले वर्ष 1996 के चुनाव में समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी के रूप में इकबाल महमूद ने शानदार वापसी की। उन्होंने 57,979 वोट हासिल करके बीजेपी के सत्य प्रकाश को 17,509 वोटों के अंतर से पराजित किया। सत्य प्रकाश को उस चुनाव में 40,470 वोट प्राप्त हुए थे। उस साल कांग्रेस और बहुजन समाज पार्टी ने गठबंधन करके चुनाव लड़ा था और सीट शेयरिंग के तहत यह क्षेत्र बहुजन समाज पार्टी के खाते में गया था, जिसका उम्मीदवार रफत उल्लाह 33,083 वोट पाकर तीसरे स्थान पर रहा था। वर्ष 2002 के चुनावी रण में समाजवादी पार्टी ने अपनी पकड़ मजबूत बनाए रखी। पार्टी उम्मीदवार इकबाल महमूद ने 52,562 वोट बटोरे, जबकि उनके प्रतिद्वंद्वी शफीकुर्रहमान बर्क केवल 31,256 वोट ही जुटा पाए। इकबाल महमूद ने 21,306 वोटों के भारी अंतर से यह मुकाबला अपने नाम किया। इस दौरान बहुजन समाज पार्टी के मोहम्मद शफीक खान उर्फ हाजी कौसर खान 24,584 वोट पाकर तीसरे नंबर पर रहे। राष्ट्रीय लोक दल और भारतीय जनता पार्टी के गठबंधन के तहत राष्ट्रीय लोक दल ने मग्गू सिंह उर्फ मंगू सिंह त्यागी को टिकट दिया था, जिन्हें 19,452 वोट मिले थे। त्रिकोणीय मुकाबले और जीत की हैट्रिक वर्ष 2007 के विधानसभा चुनाव में सपा नेता इकबाल महमूद ने जीत की हैट्रिक पूरी की। उन्होंने 46,096 वोट अपने नाम किए, जबकि भारतीय जनता पार्टी के राजेश सिंघल को 34,436 वोट हासिल हुए। यह चुनाव उन्होंने 11,660 वोटों के अंतर से जीता था। यह मुकाबला काफी हद तक त्रिकोणीय रहा था क्योंकि बहुजन समाज पार्टी की उम्मीदवार तरन्नुम अकील भी 32,034 वोट हासिल करने में सफल रही थीं। इसके अलावा राष्ट्रीय लोक दल के उम्मीदवार ममलूकुर रहमान 12,112 वोट पाकर चौथे पायदान पर रहे थे। वर्ष 2012 के चुनाव में समाजवादी पार्टी के पक्ष में चली लहर का पूरा फायदा इकबाल महमूद को मिला। उन्होंने 30,047 वोटों के बड़े अंतर से जीत हासिल की। उन्होंने कुल 79,820 वोट पाए, जबकि भारतीय जनता पार्टी के राजेश सिंघल 49,773 वोटों पर सिमट गए। बहुजन समाज पार्टी ने इस बार रफतुल्लाह को मैदान में उतारा था जो 46,062 वोट पाकर तीसरे स्थान पर रहे। राष्ट्रीय लोक दल के उम्मीदवार आजम 10,512 वोट पाकर चौथे स्थान पर रहे थे। हार के बावजूद मजबूत स्थिति और नए समीकरण वर्ष 2017 में पूरे उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी की बड़ी लहर होने के बावजूद संभल सीट पर समाजवादी पार्टी के इकबाल महमूद ही विजयी रहे। उन्होंने 79,248 वोट हासिल करके बीजेपी के डॉक्टर अरविंद को 19,272 वोटों के अंतर से शिकस्त दी। डॉक्टर अरविंद को 59,976 वोट मिले थे। इस चुनाव में एआईएमआईएम के जियाउर्रहमान ने तीसरा स्थान हासिल किया था और उन्हें 59,336 वोट मिले थे, जिससे बीजेपी तीसरे नंबर पर खिसक गई थी। बहुजन समाज पार्टी के रफतुल्लाह को 36,705 वोट प्राप्त हुए थे। वर्ष 2022 के चुनाव में इकबाल महमूद ने अपने राजनीतिक करियर की सबसे बड़ी जीत दर्ज की। उन्होंने लगातार छठी बार जीत हासिल करते हुए 1,07,073 वोट प्राप्त किए और बीजेपी के राजेश सिंघल को 41,697 वोटों के भारी अंतर से मात दी। राजेश सिंघल को 65,376 वोट मिले थे। यह 1991 से लेकर अब तक का सबसे बड़ा जीत का अंतर रहा। बहुजन समाज पार्टी के शकील अहमद को 44,443 वोट और एआईएमआईएम के मोहम्मद मुशीर खान तरीन को 21,470 वोट मिले थे। 2027 के चुनाव की राजनीतिक चुनौतियां संभल विधानसभा सीट पर हुए पिछले आठ चुनावों में से छह बार समाजवादी पार्टी ने जीत दर्ज की है। व्यक्तिगत रूप से इकबाल महमूद इस क्षेत्र से सात बार विधायक बन चुके हैं। उन्होंने एक बार जनता दल और छह बार समाजवादी पार्टी के टिकट पर सफलता हासिल की है और पार्टी उन्हें कैबिनेट मंत्री बनाकर सम्मानित भी कर चुकी है। पिछले तीन दशकों में केवल एक बार 1993 में बीजेपी यहां जीती थी जब सत्य प्रकाश ने बाजी मारी थी। इस सीट का मुस्लिम बहुल होना समाजवादी पार्टी की एमवाई राजनीति के लिए हमेशा फायदेमंद साबित हुआ है। हालांकि असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम भी लगातार अपनी जमीन मजबूत करने की कोशिश कर रही है, जिसका असर 2017 के चुनाव में देखने को मिला था जब उनका उम्मीदवार तीसरे स्थान पर रहा था। आगामी 2027 के विधानसभा चुनाव में प्रत्याशियों के चयन, राजनीतिक गठबंधनों और स्थानीय मुद्दों के आधार पर ही परिणाम तय होंगे। साथ ही इकबाल महमूद के सामने लगातार सातवीं बार इस सीट को बचाने की बड़ी चुनौती होगी। इसका आप पर असर संभल विधानसभा सीट के राजनीतिक समीकरण आगामी उत्तर प्रदेश चुनावों में क्षेत्रीय विकास प्राथमिकताओं और स्थानीय प्रशासन की नीतियों को सीधे प्रभावित करेंगे। • भारत में: यह राजनीतिक मुकाबला राज्य स्तर पर विपक्षी दलों के रणनीतिक गठबंधनों और चुनावी समीकरणों की दिशा तय करता है। राजनीतिक दल इस क्षेत्र के परिणामों के आधार पर अपनी आगामी चुनावी नीतियों में बदलाव कर सकते हैं। • संभल में: स्थानीय मतदाताओं के लिए यह चुनाव क्षेत्रीय विकास कार्यों, बुनियादी सुविधाओं और प्रशासनिक प्राथमिकताओं को नई गति दे सकता है। स्थानीय निवासियों को चुनाव से पहले विभिन्न दलों के घोषणापत्रों और विकास योजनाओं पर विशेष ध्यान देना चाहिए। ऐसा क्यों हुआ संभल सीट पर समाजवादी पार्टी के लंबे समय से बने प्रभुत्व के पीछे सामाजिक बनावट और राजनीतिक समीकरण मुख्य कारण रहे हैं। पिछले तीन दशकों में विपक्षी दल इस किले को भेदने में पूरी तरह कामयाब नहीं हो पाए हैं। • जनसांख्यिकीय संरचना: इस निर्वाचन क्षेत्र में मुस्लिम मतदाताओं की बहुलता है, जो पारंपरिक रूप से एक खास राजनीतिक दल के पक्ष में मतदान करते आए हैं। इसके साथ ही अनुसूचित जाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के मतदाताओं की उपस्थिति भी चुनावी नतीजों को प्रभावित करती है। • नेतृत्व और पकड़: स्थानीय विधायक इकबाल महमूद का व्यक्तिगत जनाधार और क्षेत्र में लंबे समय से बना संपर्क उनकी जीत का एक बड़ा कारण रहा है। वह जनता दल के समय से लेकर लगातार सपा के टिकट पर जीत दर्ज करते आ रहे हैं। • विपक्ष की विफलता: पिछले तीन दशकों में भारतीय जनता पार्टी केवल एक बार 1993 में जीत दर्ज कर पाई है, जबकि बसपा और कांग्रेस जैसी पार्टियां इस सीट पर लंबे समय से बड़ा प्रभाव छोड़ने में नाकाम रही हैं। सवाल-जवाब 1. संभल विधानसभा सीट पर पिछले 6 चुनावों से लगातार कौन जीत रहा है? संभल सीट से पिछले छह विधानसभा चुनावों से लगातार समाजवादी पार्टी के इकबाल महमूद जीत रहे हैं। 2. भारतीय जनता पार्टी ने संभल सीट पर आखिरी बार कब जीत दर्ज की थी? बीजेपी ने संभल सीट पर आखिरी बार साल 1993 में जीत हासिल की थी जब सत्य प्रकाश विजयी हुए थे। 3. 2022 के चुनाव में इकबाल महमूद ने कितने वोटों से जीत दर्ज की थी? 2022 के चुनाव में इकबाल महमूद ने बीजेपी के राजेश सिंघल को 41,697 वोटों के अंतर से हराया था। 4. संभल सीट पर मुख्य रूप से किस वर्ग के मतदाता अच्छी संख्या में हैं? यह सीट मुस्लिम बहुल है और यहां एससी तथा ओबीसी वर्ग के मतदाता भी अच्छी संख्या में हैं। 5. इकबाल महमूद कुल कितनी बार संभल से विधायक बन चुके हैं? इकबाल महमूद जनता दल और समाजवादी पार्टी के टिकट पर कुल सात बार संभल से विधायक बन चुके हैं। https://trendkia.com/uttar-pradesh/sp-s-long-dominance-in-sambhal-assembly-seat-and-the-political-equation-for-the-2027-up-elections-48313 TrendKia — Har trend, sabse pehle.