{
  "type": "article",
  "title": "सुल्तानपुर के लोहरामऊ का 250 साल पुराना कुआं अब खंडहर में तब्दील, चार पीढ़ियों की धरोहर पर मंडराया खतरा",
  "summary": "सुल्तानपुर के लोहरामऊ गांव में रामदयाल सिंह का बनवाया करीब 250 साल पुराना कुआं देखभाल के अभाव में अब टूटे स्तंभों और झाड़ियों के बीच अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहा है।",
  "content": "कभी पूरे गांव का गला तर करने वाला एक कुआं आज सिर्फ बीते दिनों की एक धुंधली याद बनकर रह गया है। सुल्तानपुर के लोहरामऊ गांव में मौजूद यह कुआं अब न किसी की प्यास बुझाता है और न ही उसकी सुध लेने वाला कोई बचा है। करीब 250 साल पुरानी इस ऐतिहासिक विरासत की हालत यह है कि सहेजने और साफ-सफाई करने वाले के अभाव में इसका वजूद हर बीतते दिन के साथ मिटता जा रहा है।\n\nकहां है यह कुआं और किसने बनवाया\nयह प्राचीन कुआं सुल्तानपुर शहर मुख्यालय से तकरीबन 4 किलोमीटर की दूरी पर बसे लोहरामऊ गांव में स्थित है। एक दौर में यही कुआं इस पूरे इलाके की पहचान माना जाता था। इसे गांव के ही निवासी रामदयाल सिंह ने बनवाया था। कुएं के संरक्षक अच्छे लाल सिंह के मुताबिक यह उनके पूर्वजों की देन है, जिसे करीब चार पीढ़ी पहले खड़ा किया गया था। उनका दावा है कि कुएं की उम्र 250 साल से भी ज्यादा है।\n\nलखौरी ईंटों की कारीगरी आज भी कायम\nअच्छे लाल सिंह ने TrendKia से बातचीत में बताया कि इस कुएं के निर्माण में लखौरी ईंटों का इस्तेमाल किया गया था। पतली और चौड़ी बनावट वाली ये ईंटें आज भी कुएं की दीवारों में मौजूद हैं और उस दौर की कारीगरी की गवाही देती हैं।\n\nगांव की जीवनरेखा था यह कुआं\nआज भले ही पानी की जरूरतों के लिहाज से यह कुआं लगभग भुला दिया गया हो, लेकिन कभी यही लोहरामऊ गांव के लोगों के लिए जल का सबसे बड़ा सहारा था। ग्रामीण पीने के पानी से लेकर रोजमर्रा के तमाम कामों तक इसी कुएं के पानी पर निर्भर रहते थे। कुएं से थोड़ी ही दूरी पर बने डीह माता मंदिर में पूजा के समय जल चढ़ाने के लिए भी इसी कुएं से पानी लिया जाता था।\n\nआधुनिक सुविधाओं ने छीनी उपयोगिता\nअब इस कुएं की उपयोगिता लगभग खत्म हो चुकी है। इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि अब घर-घर तक नल के जरिए पानी पहुंच रहा है। हर घर में नल और समरसेबल जैसे आधुनिक साधनों से पानी आसानी से मिल जाता है, जिसके चलते कुएं की ओर किसी का ध्यान नहीं रहा।\n\nउपेक्षा से खंडहर बना ऐतिहासिक कुआं\nलगातार अनदेखी का नतीजा यह हुआ कि यह कुआं अब खंडहर में तब्दील हो चुका है। इसके चारों स्तंभ टूट चुके हैं और भीतर कटीली व जहरीली झाड़ियां उग आई हैं। स्थानीय लोगों का मानना है कि अगर इस कुएं को सुरक्षित और संरक्षित किया जाए तो यह सुल्तानपुर की एक अहम ऐतिहासिक धरोहर के तौर पर उभर सकता है।",
  "url": "https://trendkia.com/uttar-pradesh/sultanapura-ke-loharamau-ka-250-sala-purana-kuan-aba-khndahara-men-tabdila-chara-694",
  "category": "उत्तर प्रदेश",
  "publishedAt": "2026-06-14",
  "tags": [
    "सुल्तानपुर",
    "लोहरामऊ गांव",
    "प्राचीन कुआं",
    "ऐतिहासिक धरोहर",
    "लखौरी ईंट",
    "जल संरक्षण",
    "उत्तर प्रदेश"
  ],
  "language": "hi",
  "site": "TrendKia"
}