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  "type": "article",
  "title": "यूपी के इज्जतनगर स्टेशन की अनोखी कहानी, ब्रिटिश अफसरों की 3 पीढ़ियों ने मिलकर किया था तैयार",
  "summary": "बरेली का इज्जतनगर रेलवे स्टेशन अपनी ऐतिहासिक विरासत के लिए जाना जाता है, जिसे तीन ब्रिटिश पीढ़ियों ने विकसित किया था। 3.60 करोड़ रुपये की लागत से इस स्टेशन को अब एयरपोर्ट जैसी आधुनिक सुविधाओं के साथ नया रूप दिया गया है।",
  "content": "उत्तर प्रदेश राज्य में एक ऐसा अनोखा रेलवे जंक्शन स्थित है, जिसकी ऐतिहासिक विरासत बेहद असाधारण और दिलचस्प है। बरेली जिले में मौजूद इज्जतनगर रेलवे स्टेशन एक ऐसा ऐतिहासिक ट्रांजिट हब है, जिसे दशकों की कड़ी मेहनत के बाद ब्रिटिश अफसरों की लगातार तीन पीढ़ियों ने मिलकर विकसित किया था। 19वीं सदी में अपने सफर की शुरुआत करने वाले इस स्टेशन ने समय के साथ कई बड़े बदलाव देखे हैं। हाल ही में 3.60 करोड़ रुपये की भारी लागत से इस पूरे स्टेशन का शानदार कायाकल्प किया गया है। आज यह रेलवे स्टेशन अपनी पुरानी औपनिवेशिक विरासत और एयरपोर्ट जैसी अत्याधुनिक सुविधाओं का बेहतरीन संगम बन चुका है, जहां से रोजाना हजारों यात्री अपना सफर तय करते हैं।\n\nब्रिटिश अफसरों की तीन पीढ़ियों का अहम योगदान\nइस शानदार रेलवे डिवीजन का इतिहास साल 1875 से जुड़ा हुआ है, जब नैनीताल के पहाड़ी इलाकों को मैदानी क्षेत्रों से जोड़ने की बड़ी पहल की गई थी। उस दौरान ब्रिटिश रेलवे अधिकारी एलेग्जेंडर आइजेट इस विकास कार्य का पूरी तरह से नेतृत्व कर रहे थे। रेलवे के विस्तार में उनके अहम योगदान को देखते हुए शुरुआत में इस स्टेशन का नाम आइजेट नगर रखा गया था। एलेग्जेंडर आइजेट ने ही बरेली से लेकर लखनऊ तक की महत्वपूर्ण रेलवे लाइन बिछाने का भी काम किया था।\n\nइस रेलवे डिवीजन के साथ आइजेट परिवार का जुड़ाव सिर्फ एलेग्जेंडर तक ही सीमित नहीं रहा। आगे चलकर उनके बेटे लेफ्टिनेंट कर्नल डब्ल्यूआर आईजेट ने यह बड़ी जिम्मेदारी संभाली और इज्जतनगर रेल मंडल के विकास पर काफी काम किया। यह ऐतिहासिक विरासत तीसरी पीढ़ी तक भी पहुंची, जब उनके पोते सर जेआर आइजेट ने भी इसी रेलवे डिवीजन में अपनी सेवाएं दीं और इसके कामकाज को आगे बढ़ाया। इस तरह ब्रिटिश अधिकारियों की तीन पीढ़ियों ने मिलकर बरेली के इस रेलवे स्टेशन को उसका मौजूदा आकार और मजबूत स्वरूप देने में एक बहुत बड़ी भूमिका निभाई।\n\nइज्जतनगर नाम और स्टेशन की दिलचस्प कहानी\nहालांकि शुरुआत में इस स्टेशन का नाम एलेग्जेंडर आइजेट के नाम पर रखा गया था, लेकिन स्थानीय भाषा और उच्चारण के प्रभाव में यह नाम धीरे-धीरे बदल गया। हिंदी में इसे इज्जतनगर के नाम से जाना जाने लगा। ऐतिहासिक जानकारी के मुताबिक, अपने लंबे अस्तित्व के दौरान इस खास स्टेशन का नाम कुल तीन बार बदला गया था, जिसके बाद इसे इसकी मौजूदा पहचान मिली। आज यह स्टेशन आधिकारिक तौर पर आईजेडएन कोड के साथ संचालित होता है और पूरे क्षेत्र के लिए एक प्रमुख जंक्शन के रूप में मजबूती से खड़ा है।\n\nछोटी लाइन से लेकर एक बड़े रेल डिवीजन तक का सफर\nइज्जतनगर को 14 अप्रैल 1952 को उत्तर-पूर्वी रेलवे जोन के तहत एक पूर्ण रेलवे डिवीजन का आधिकारिक दर्जा प्राप्त हुआ था। अपने शुरुआती दिनों में यह डिवीजन मुख्य रूप से छोटी लाइन नेटवर्क पर संचालित होता था। जब यह डिवीजन अस्तित्व में आया, तो उस समय यहां भारी मात्रा में जमीन उपलब्ध थी। इतनी अधिक खाली जगह होने के कारण स्टेशन परिसर में ही एक विशेष रेलवे वर्कशॉप का निर्माण किया गया था, जो आज भी काफी उपयोगी है।\n\nजैसे-जैसे परिवहन की जरूरतें बढ़ती गईं, वैसे-वैसे स्टेशन के बुनियादी ढांचे में भी सुधार होता गया। साल 1988 में इस स्टेशन पर एक विशेष लोको शेड का निर्माण किया गया, और आखिरकार साल 2000 में यहां ब्रॉडगेज लाइन की शुरुआत की गई। वर्तमान समय में, कासगंज-बरेली-इज्जतनगर लाइन और पीलीभीत-टनकपुर मेन लाइन जैसे प्रमुख मार्ग सीधे इसी जंक्शन से होकर गुजरते हैं, जो इसे यात्रियों और माल ढुलाई दोनों के लिए एक बेहद महत्वपूर्ण केंद्र बनाते हैं।\n\n3.60 करोड़ रुपये से कायाकल्प और शानदार सुविधाएं\nअपनी स्थापना के दशकों बाद, इज्जतनगर रेलवे स्टेशन को आधुनिक यात्रा मानकों के अनुरूप ढालने के लिए 3.60 करोड़ रुपये का एक बड़ा नवीनीकरण प्रोजेक्ट सफलतापूर्वक पूरा किया गया है। नया और शानदार रेलवे स्टेशन अब यात्रियों की सुविधा के लिए एयरपोर्ट जैसी अत्याधुनिक सुविधाओं से पूरी तरह लैस है। यात्रियों के स्वागत के लिए एक भव्य प्रवेश द्वार बनाया गया है, और पूरे स्टेशन परिसर में एयर कंडीशंड वेटिंग रूम, लिफ्ट, एस्केलेटर और सुरक्षा के लिए हाई-टेक सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। इस बदले हुए स्टेशन का सबसे बड़ा आकर्षण इसका अनूठा रेल कैफे है, जिसे एक पुराने और बेकार हो चुके ट्रेन के डिब्बे को नया रूप देकर बेहद खूबसूरती से तैयार किया गया है।\n\nआज यह ऐतिहासिक रेलवे स्टेशन पहले से कहीं ज्यादा व्यस्त और आधुनिक है। इज्जतनगर रेलवे स्टेशन से रोजाना 50 से अधिक ट्रेनें गुजरती हैं, जो बरेली के लोगों को देश के प्रमुख महानगरों जैसे मुंबई, दिल्ली और कोलकाता से सीधे तौर पर जोड़ती हैं।\n\nइसका आप पर असर\n• भारत भर में: रेलवे का यह नवीनीकरण दिखाता है कि कैसे ऐतिहासिक महत्व वाले पुराने स्टेशनों को संरक्षित करते हुए उन्हें आधुनिक सुविधाओं से लैस किया जा रहा है।\n• बरेली में: स्थानीय निवासियों और यात्रियों को अब अपने शहर में एयरपोर्ट जैसी विश्व स्तरीय सुविधाएं और महानगरों तक सीधी रेल कनेक्टिविटी मिल रही है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. इज्जतनगर रेलवे स्टेशन कहाँ स्थित है?\nइज्जतनगर रेलवे स्टेशन उत्तर प्रदेश के बरेली जिले में स्थित है।\n\n2. इज्जतनगर स्टेशन को किसने बनवाया था?\nइस स्टेशन को एलेग्जेंडर आइजेट सहित ब्रिटिश रेलवे अधिकारियों की तीन पीढ़ियों ने मिलकर विकसित किया था।\n\n3. इज्जतनगर स्टेशन के नवीनीकरण में कितना खर्च आया?\nइस ऐतिहासिक स्टेशन को 3.60 करोड़ रुपये की लागत से आधुनिक सुविधाओं के साथ अपग्रेड किया गया है।\n\n4. इज्जतनगर को रेलवे डिवीजन का दर्जा कब मिला था?\nइस स्टेशन को 14 अप्रैल 1952 को उत्तर-पूर्वी रेलवे जोन के तहत एक पूर्ण रेलवे डिवीजन का दर्जा मिला था।\n\n5. इज्जतनगर स्टेशन का प्रमुख आकर्षण क्या है?\nस्टेशन पर एक अनूठा 'रेल कैफे' बनाया गया है, जिसे ट्रेन के एक पुराने डिब्बे को नया रूप देकर तैयार किया गया है।",
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  "category": "उत्तर प्रदेश",
  "publishedAt": "2026-07-20",
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