# यूपी के स्कूली पाठ्यक्रम में 'अकबर' को महान बताने पर भड़की शिवाजी सेना, दी बड़े आंदोलन की चेतावनी

> उत्तर प्रदेश के सरकारी स्कूलों में कक्षा 7 की इतिहास की किताब में मुगल शासक अकबर को 'महान' बताए जाने पर एक नया विवाद खड़ा हो गया है। मुजफ्फरनगर में शिवाजी सेना ने इस अध्याय को तत्काल हटाने की मांग करते हुए पूरे प्रदेश में उग्र प्रदर्शन करने की चेतावनी दी है।

**Type:** article · **Category:** उत्तर प्रदेश · **Published:** 2026-07-20 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/uttar-pradesh/up-ke-skuli-pathyakrama-men-akbar-ko-mahana-batane-para-bharaki-shivaji-sena-di-bare-andolana-ki-chetavani-8978 · **Language:** Hindi
**Tags:** उत्तर प्रदेश, शिवाजी सेना, अकबर, महाराणा प्रताप, स्कूली पाठ्यक्रम, मुजफ्फरनगर

उत्तर प्रदेश के सरकारी विद्यालयों में पढ़ाई जाने वाली पाठ्यपुस्तकों को लेकर एक बार फिर बड़ा विवाद जन्म ले चुका है। प्रदेश के शिक्षा विभाग द्वारा कक्षा सात के बच्चों को पढ़ाई जाने वाली पुस्तक में मुगल शासक अकबर से जुड़े एक अध्याय पर भारी आपत्ति दर्ज की गई है। मुजफ्फरनगर में रविवार को हिंदूवादी संगठन शिवाजी सेना के पदाधिकारियों ने एक विशेष प्रेस वार्ता का आयोजन किया, जिसमें उन्होंने राज्य सरकार और शिक्षा विभाग से पाठ्यक्रम में तत्काल संशोधन करने की मांग रखी। संगठन के नेताओं ने साफ तौर पर यह चेतावनी दी है कि यदि उनकी आपत्तियों को नजरअंदाज किया गया और जल्द से जल्द इस दिशा में कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया, तो वे पूरे प्रदेश भर में एक व्यापक और उग्र आंदोलन शुरू करने को बाध्य होंगे। फिलहाल इस पूरे विवाद पर उत्तर प्रदेश सरकार या बेसिक शिक्षा विभाग की तरफ से कोई भी आधिकारिक टिप्पणी या बयान जारी नहीं किया गया है, लेकिन जानकारों का मानना है कि आने वाले दिनों में यह मुद्दा राजनीतिक और सामाजिक तौर पर और अधिक तूल पकड़ सकता है।

## किस पुस्तक और अध्याय पर शुरू हुआ है यह नया विवाद

इस पूरे मामले की जड़ में कक्षा सात के छात्रों के लिए निर्धारित की गई एक विशेष पुस्तक है, जिसका नाम 'भारत की महान विभूतियां' है। शिवाजी सेना के जिला अध्यक्ष अर्चित आर्य ने इस विषय पर विस्तार से अपनी बात रखते हुए बताया कि इस पुस्तक के पाठ संख्या 12 में मुगल शासक अकबर का उल्लेख किया गया है और उसे एक महान व्यक्तित्व के रूप में महिमामंडित किया गया है। संगठन के पदाधिकारियों का स्पष्ट रूप से यह मानना है कि अकबर एक क्रूर और अत्याचारी शासक था, और उसे किसी भी दृष्टिकोण से महान नहीं कहा जा सकता। उनका तर्क है कि नौनिहालों को स्कूलों में जो इतिहास पढ़ाया जा रहा है, वह पूरी तरह से तथ्यात्मक और प्रामाणिक होना चाहिए। छात्रों के समक्ष केवल वही ऐतिहासिक जानकारियां प्रस्तुत की जानी चाहिए, जिन्हें समाज का एक बड़ा वर्ग सही और सच्चा इतिहास मानता है। इस तरह के महिमामंडन से नई पीढ़ी को गलत ऐतिहासिक संदेश जा रहा है।

## महाराणा प्रताप का जिक्र कर संगठन ने उठाए गंभीर सवाल

प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए जिलाध्यक्ष अर्चित आर्य ने अकबर के लंबे शासनकाल से जुड़े कई अहम ऐतिहासिक प्रसंगों का विशेष रूप से उल्लेख किया। उन्होंने अपना दावा पेश करते हुए कहा कि अगर हम इतिहास के पन्नों को पलट कर देखें, तो अकबर द्वारा बनाई गई नीतियां और उसके द्वारा किए गए कार्य ऐसे बिल्कुल भी नहीं थे, जिनके आधार पर उसे महान की उपाधि से नवाजा जाए। अपनी बात को और अधिक वजनदार बनाने के लिए उन्होंने शूरवीर महाराणा प्रताप के संघर्ष का उदाहरण भी दिया। आर्य ने शिक्षा विभाग से सीधा सवाल पूछा कि यदि अकबर वास्तव में इतना ही महान और न्यायप्रिय शासक था, तो फिर राष्ट्रगौरव महाराणा प्रताप को उसके विरुद्ध इतना लंबा और कड़ा संघर्ष क्यों करना पड़ा था। उन्होंने राज्य सरकार से यह पुरजोर मांग की है कि वर्तमान पाठ्यक्रम की समीक्षा की जाए और उसमें तुरंत संशोधन करके सभी ऐतिहासिक तथ्यों को एक नए और सच्चे सिरे से विद्यार्थियों के सामने रखा जाए।

## पूरे उत्तर प्रदेश में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन की तैयारी

पाठ्यक्रम में शामिल इस अध्याय से नाराज शिवाजी सेना अब आर-पार की लड़ाई के मूड में नजर आ रही है। संगठन ने अपनी आगे की रणनीति का खुलासा करते हुए प्रशासन को यह चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र ही कोई सकारात्मक कदम नहीं उठाया जाता है, तो वे सड़क पर उतरेंगे। उनकी योजना के मुताबिक, सबसे पहले मुजफ्फरनगर कलेक्ट्रेट परिसर में इकट्ठा होकर एक औपचारिक ज्ञापन सौंपा जाएगा। यदि इसके बावजूद भी सरकार के रुख में कोई बदलाव नहीं आता है, तो यह विरोध प्रदर्शन केवल एक जिले तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि संगठन पूरे उत्तर प्रदेश में राज्यव्यापी आंदोलन की शुरुआत करेगा। इस बीच, यह भी ध्यान देने योग्य बात है कि अकबर के पूरे शासनकाल और उसकी छोड़ी गई ऐतिहासिक विरासत को लेकर देश के विभिन्न इतिहासकारों और विद्वानों के बीच भी लंबे समय से मतभेद और अलग-अलग विचारधाराएं रही हैं। वहीं, स्कूलों में क्या पढ़ाया जाना चाहिए और क्या नहीं, इसका अंतिम निर्धारण आमतौर पर संबंधित शैक्षिक संस्थाओं और विषय विशेषज्ञों की एक विशेष समिति की सिफारिशों के आधार पर ही किया जाता है। अब देखना यह है कि इस नई मांग पर यह विशेषज्ञ समिति और सरकार क्या रुख अपनाती है।

## इसका आप पर असर
- **पूरे उत्तर प्रदेश में:** यदि पाठ्यक्रम में बदलाव की मांग को लेकर राज्यव्यापी प्रदर्शन होते हैं, तो इससे आम जनजीवन और स्थानीय प्रशासन के कामकाज पर असर पड़ सकता है।
- **छात्रों और अभिभावकों के लिए:** इस विवाद के कारण कक्षा 7 के इतिहास के पाठ्यक्रम में बदलाव होने की संभावना बन सकती है, जिससे बच्चों की पढ़ाई के तरीके में अंतर आएगा।

## सवाल-जवाब

### 1. कक्षा 7 की किस किताब को लेकर विवाद हो रहा है?
यह विवाद 'भारत की महान विभूतियां' नामक किताब के पाठ 12 को लेकर है, जिसमें मुगल शासक अकबर को 'महान' बताया गया है।

### 2. यह आपत्ति मुख्य रूप से किस संगठन ने दर्ज कराई है?
मुजफ्फरनगर में हिंदू संगठन शिवाजी सेना के जिलाध्यक्ष अर्चित आर्य ने प्रेस वार्ता कर इस पाठ्यक्रम पर अपनी कड़ी आपत्ति जताई है।

### 3. शिवाजी सेना का अकबर के बारे में क्या तर्क है?
संगठन का मानना है कि अकबर एक क्रूर शासक था। उन्होंने सवाल उठाया है कि यदि वह महान होता, तो महाराणा प्रताप को उसके खिलाफ इतना कड़ा संघर्ष क्यों करना पड़ता।

### 4. मांग पूरी नहीं होने पर संगठन ने क्या चेतावनी दी है?
शिवाजी सेना ने चेतावनी दी है कि वे पहले मुजफ्फरनगर कलेक्ट्रेट पर ज्ञापन सौंपेंगे और फिर पूरे उत्तर प्रदेश में उग्र विरोध-प्रदर्शन शुरू करेंगे।

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