# उत्तर प्रदेश मतदाता सूची में 16.18 लाख रहस्यमयी नामों के दावों को चुनाव आयोग ने बताया निराधार

> सोशल मीडिया पर उत्तर प्रदेश की मतदाता सूची में 16.18 लाख फर्जी नाम जोड़ने के आरोपों पर मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने स्थिति स्पष्ट करते हुए इसे भ्रामक करार दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह नाम विशेष प्रगाढ़ पुनरीक्षण के तहत वैध प्रक्रिया से एकत्र फॉर्म-6 के जरिए जोड़े गए हैं।

**Type:** article · **Category:** उत्तर प्रदेश · **Published:** 2026-10-06 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/uttar-pradesh/up-matadata-suchi-men-16-18-lakha-rahasyamayi-namon-ke-davon-ko-election-commission-ne-bataya-niradhara-44162 · **Language:** Hindi
**Tags:** उत्तर प्रदेश, मतदाता सूची, मुख्य निर्वाचन अधिकारी, नवदीप रिणवा, भारत निर्वाचन आयोग, विशेष प्रगाढ़ पुनरीक्षण, फॉर्म 6, फर्जी खबर

सोशल मीडिया पर उत्तर प्रदेश की निर्वाचक नामावली को लेकर फैलाए जा रहे भ्रामक दावों पर प्रदेश के निर्वाचन तंत्र ने कड़ा रुख अपनाया है। प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने एक स्पष्टीकरण जारी करते हुए उन दावों को पूरी तरह तथ्यहीन और मनगढ़ंत करार दिया है, जिनमें कहा जा रहा था कि विशेष प्रगाढ़ पुनरीक्षण (SIR)-2026 के अंतर्गत मतदाता सूची में अचानक 16.18 लाख रहस्यमयी मतदाताओं को शामिल कर लिया गया। निर्वाचन अधिकारी ने स्पष्ट किया कि पूरी पुनरीक्षण कवायद लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1950, निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण नियम 1960 और भारत निर्वाचन आयोग के कड़े दिशा-निर्देशों के अनुरूप पूरी निष्पक्षता और खुलेपन के साथ संपन्न की गई है।

## घर-घर सत्यापन के दौरान वैध तरीके से जमा हुए थे फॉर्म-6
मतदाता सूची के इस पूरे घटनाक्रम की पृष्ठभूमि स्पष्ट करते हुए नवदीप रिणवा ने आंकड़ों का पूरा ब्योरा प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि आलेख्य मतदाता सूची के प्रकाशन की निर्धारित तारीख 06-01-2026 तय थी। इससे ठीक पहले 27-10-2025 से 06-01-2026 तक गणना का चरण संचालित किया गया था। इस चरण में बूथ लेवल अधिकारियों (BLO) ने घर-घर जाकर भौतिक सत्यापन का कार्य किया था। इसी सत्यापन प्रक्रिया के तहत कुल 16.18 लाख फॉर्म-6 एकत्र किए गए थे, जो नए मतदाताओं के नाम जोड़ने के लिए निर्धारित प्रारूप है।

यह कवायद भारत निर्वाचन आयोग द्वारा 27-10-2025 को जारी विशेष प्रगाढ़ पुनरीक्षण संबंधी निर्देशों के अनुपालन में की गई थी, जिसे उत्तर प्रदेश के साथ-साथ अन्य राज्यों में भी लागू किया गया था। आयोग के नियमों के मुताबिक, ऐसे कई योग्य नागरिक थे जिनके नाम 27-10-2025 को पुनरीक्षण अभियान शुरू होने के वक्त पुरानी मतदाता सूची में मौजूद नहीं थे। इस कारणवश उनके पूर्व-मुद्रित गणना प्रपत्र तैयार नहीं हो सके थे। ऐसे ही लगभग 16.18 लाख पात्र नागरिकों को बूथ लेवल अधिकारियों ने घर-घर भ्रमण के दौरान फॉर्म-6 उपलब्ध कराए और उन्हें विधिवत भरकर एकत्र किया।

## वेबसाइट पर नाम प्रदर्शित करने और नियमों के पालन की स्थिति
मतदाताओं के नाम छिपाने अथवा उन्हें सार्वजनिक न करने के संबंध में इंटरनेट पर लगाए जा रहे आरोपों का भी निर्वाचन अधिकारी ने खंडन किया। उन्होंने निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण नियम 1960 तथा आयोग के नियमावली का हवाला देते हुए बताया कि केवल वे फॉर्म-6 (आवेदन), जो 06-01-2026 को ड्राफ्ट वोटर लिस्ट प्रकाशित होने के बाद दावे और आपत्तियों के आधिकारिक दौर में हासिल हुए थे, उनकी सूची यानी फॉर्म-9 को ही मुख्य निर्वाचन अधिकारी, उत्तर प्रदेश के आधिकारिक वेब पोर्टल पर प्रदर्शित किया जाना अनिवार्य होता है।

प्रशासन ने साफ तौर पर कहा कि इस प्रक्रिया में किसी भी विधिक प्रावधान, नियमावली या आयोग के निर्देशों का कतई उल्लंघन नहीं हुआ है। इसके अतिरिक्त, वार्षिक संक्षिप्त पुनरीक्षण की सामान्य व्यवस्था का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि ड्राफ्ट वोटर लिस्ट के प्रकाशन से पहले एक निर्धारित समय-सारणी के अनुसार मतदाता सूची को ईआरओ नेट पर फ्रीज कर दिया जाता है। इस तकनीकी प्रक्रिया के कारण ड्राफ्ट सूची प्रकाशित होने से ठीक पहले प्राप्त कुछ फॉर्म-6 अनिस्तारित रह जाते हैं या ई-रोल अपडेट न होने से वे प्रारंभिक ड्राफ्ट में सीधे नहीं दिखते। इन सभी आवेदनों का वैधानिक निस्तारण दावा एवं आपत्ति अवधि के दौरान करते हुए अंतिम मतदाता सूची तैयार की जाती है।

## स्वीकृति दर पर मनगढ़ंत अटकलें और राजनीतिक दलों की सहभागिता
फॉर्म-6 स्वीकार किए जाने के प्रतिशत को लेकर चल रही चर्चाओं को खारिज करते हुए मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने कहा कि इस तरह के आरोप बिना किसी तार्किक समझ के केवल मनमानी कल्पना के आधार पर गढ़े गए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि फॉर्म स्वीकार करने के लिए किसी पूर्व-निर्धारित गणितीय फॉर्मूले या निश्चित प्रतिशत का कोई नियम नहीं होता है। हर फॉर्म का सत्यापन निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के तहत होता है और जांच पूरी होने के उपरांत ही पात्रता के आधार पर उसे स्वीकार या अस्वीकार किया जाता है।

नवदीप रिणवा ने रेखांकित किया कि उत्तर प्रदेश में विशेष प्रगाढ़ पुनरीक्षण-2026 की पूरी कार्यवाही पूरी तरह सहभागी, पारदर्शी और विधि सम्मत रही है। इस प्रक्रिया में सभी मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों को सक्रिय रूप से शामिल किया गया था। उन्होंने बताया कि इस पुनरीक्षण प्रक्रिया को लेकर अब तक किसी भी पंजीकृत राजनीतिक दल अथवा किसी व्यक्ति की तरफ से इस प्रकार का कोई औपचारिक आरोप या शिकायत दर्ज नहीं कराई गई है।

## इसका आप पर असर
मतदाता सूची के इस स्पष्टीकरण से उत्तर प्रदेश के लाखों नए मतदाताओं की सूची में प्रविष्टि और उनके मताधिकार की संवैधानिक सुरक्षा सुनिश्चित होती है।

- **उत्तर प्रदेश में:** राज्य के लगभग 16.18 लाख नए मतदाताओं को यह भरोसा मिला है कि उनके जमा किए गए फॉर्म-6 पूरी तरह विधिक प्रक्रिया के तहत दर्ज हैं। जिन्होंने घर-घर सत्यापन के दौरान आवेदन किया था, वे ड्राफ्ट और अंतिम सूची के सत्यापन समय सारणी के अनुसार अपना नाम बिना किसी संशय के देख सकते हैं।
- **भारत में:** देश भर के नागरिकों के बीच चुनाव आयोग की मतदाता पुनरीक्षण प्रणाली और ईआरओ नेट फ्रीजिंग प्रक्रिया को लेकर स्पष्टता आई है। फर्जी दावों और सोशल मीडिया अफवाहों से प्रभावित हुए बिना लोग पारदर्शी चुनावी प्रक्रियाओं के नियमों को समझ सकते हैं।
- **नए मतदाताओं के लिए:** 18 वर्ष या उससे अधिक उम्र के पात्र नागरिक जिनके नाम ड्राफ्ट सूची में तुरंत नहीं दिखे, उन्हें घबराने की आवश्यकता नहीं है। दावा एवं आपत्ति अवधि के दौरान इन सभी वैध फॉर्म-6 का निस्तारण कर अंतिम सूची में नाम दर्ज किया जाता है।
- **राजनीतिक सहभागिता:** सभी राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों को आश्वस्त किया गया है कि पुनरीक्षण में कोई भी गुप्त या अवैध प्रक्रिया नहीं अपनाई गई है। दल अपने बूथ स्तर के कार्यकर्ताओं के जरिए ड्राफ्ट व अंतिम सूची का मिलान पारदर्शी रूप से कर सकते हैं।

## ऐसा क्यों हुआ
सोशल मीडिया पर विशेष प्रगाढ़ पुनरीक्षण-2026 के आंकड़ों को गलत संदर्भ में प्रस्तुत किए जाने के बाद राज्य निर्वाचन आयोग को आधिकारिक तथ्य सामने रखने पड़े।

- **अधूरी जानकारी का प्रसार:** सोशल मीडिया मंचों पर घर-घर सत्यापन के दौरान एकत्र किए गए 16.18 लाख फॉर्म-6 को तकनीकी रूप से समझे बिना अचानक जुड़े रहस्यमयी मतदाता बता दिया गया। इस भ्रामक व्याख्या के कारण लोगों के बीच चुनावी सूची की विश्वसनीयता को लेकर संशय उत्पन्न हुआ।
- **ड्राफ्ट सूची और फ्रीजिंग प्रक्रिया:** आलेख्य मतदाता सूची के प्रकाशन से पूर्व ईआरओ नेट पर डेटा फ्रीज करने की अनिवार्य तकनीकी व्यवस्था लागू होती है। इसके चलते कई प्राप्त आवेदन तुरंत ड्राफ्ट सूची में नहीं दिखते, जिसे गलत तरीके से नाम छिपाने का आरोप बना दिया गया।
- **विधिक नियमों की गलत व्याख्या:** निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण नियम 1960 के तहत केवल दावा-आपत्ति अवधि में प्राप्त फॉर्म ही फॉर्म-9 पर प्रकाशित किए जाते हैं। नियमों की जानकारी के अभाव में आलोचकों ने इसे प्रक्रिया का उल्लंघन मानकर अफवाहें फैलाना शुरू कर दिया।

## सवाल-जवाब

### 1. उत्तर प्रदेश की वोटर लिस्ट को लेकर सोशल मीडिया पर क्या दावा किया जा रहा था?
सोशल मीडिया पर यह भ्रामक दावा किया जा रहा था कि विशेष प्रगाढ़ पुनरीक्षण-2026 के दौरान उत्तर प्रदेश की मतदाता सूची में 16.18 लाख रहस्यमयी वोटर जोड़े गए हैं।

### 2. मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने इन आरोपों पर क्या स्पष्टीकरण दिया?
उन्होंने कहा कि यह आरोप तथ्यहीन हैं और ये 16.18 लाख नाम घर-घर गणना चरण के दौरान बूथ लेवल अधिकारियों द्वारा वैध फॉर्म-6 के माध्यम से एकत्र किए गए थे।

### 3. यह 16.18 लाख फॉर्म-6 किस समयावधि में एकत्र किए गए थे?
यह फॉर्म 27-10-2025 से 06-01-2026 तक चले गणना चरण के दौरान पात्र नागरिकों से एकत्र किए गए थे।

### 4. वेबसाइट पर फॉर्म-9 के तहत कौन से नाम प्रदर्शित किए जाते हैं?
निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण नियम 1960 के अनुसार, केवल वही नाम फॉर्म-9 पर प्रदर्शित किए जाते हैं जो 06-01-2026 को ड्राफ्ट सूची प्रकाशन के बाद दावा और आपत्ति अवधि में प्राप्त होते हैं।

### 5. क्या फॉर्म-6 स्वीकार करने का कोई निश्चित प्रतिशत या फॉर्मूला होता है?
नहीं, फॉर्म स्वीकार करने का कोई निश्चित प्रतिशत नहीं होता; विहित कानूनी प्रक्रिया और पात्रता की जांच के बाद ही फॉर्म-6 स्वीकार किया जाता है।

### 6. क्या किसी राजनीतिक दल ने इस प्रक्रिया पर आपत्ति या औपचारिक शिकायत दर्ज कराई है?
नहीं, मुख्य निर्वाचन अधिकारी के अनुसार किसी भी राजनीतिक दल अथवा व्यक्ति ने इस संबंध में कोई आरोप या औपचारिक शिकायत दर्ज नहीं कराई है।

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