उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027: क्या बुलंदशहर सीट पर भगवा दल फिर जमाएगा कब्जा या पलटेगा समीकरण उत्तर प्रदेश की महत्वपूर्ण बुलंदशहर विधानसभा सीट पर पिछले तीन चुनावों से भारतीय जनता पार्टी का दबदबा कायम है। आगामी 2027 के चुनावों से पहले यहां का राजनीतिक समीकरण और पिछले तीन दशकों का चुनावी इतिहास बेहद दिलचस्प हो गया है। उत्तर प्रदेश की चुनावी राजनीति में बुलंदशहर विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र को बेहद अहम माना जाता है। पिछले तीन लगातार मुकाबलों में जीत हासिल करते हुए भारतीय जनता पार्टी ने इस सीट पर अपनी मजबूत पकड़ बनाई है। वर्ष 1991 से लेकर 2022 तक के चुनावी परिणामों पर नजर डालें तो इस क्षेत्र में विभिन्न दलों के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिला है। राजनीतिक विश्लेषक आगामी 2027 के विधानसभा चुनावों को लेकर अभी से समीकरण खंगालने में जुट गए हैं। नब्बे के दशक में धर्मपाल यादव का दबदबा वर्ष 1991 के विधानसभा चुनाव में धर्मपाल यादव उर्फ डीपी यादव ने जनता पार्टी के टिकट पर जीत दर्ज की थी। इसके ठीक पहले वह जनता दल के उम्मीदवार के रूप में विजयी हुए थे। उस चुनाव में उन्होंने अपने निकटतम प्रतिद्वंदी भाजपा के सुखपाल को 11,126 मतों के अंतर से शिकस्त दी थी। धर्मपाल यादव को कुल 45,765 वोट मिले थे जबकि सुखपाल को 34,639 मतों से संतोष करना पड़ा था। जनता दल के प्रकाश चंदर यादव 8,536 वोट पाकर तीसरे स्थान पर रहे थे। इसके बाद 1993 के चुनावों में भी धर्मपाल यादव ने अपनी सियासी जमीन मजबूत रखी और समाजवादी पार्टी के बैनर तले मैदान में उतरे। पार्टी बदलने के बावजूद उनका प्रभाव कम नहीं हुआ और उन्होंने कुल 70,859 वोट हासिल किए। उन्होंने भाजपा प्रत्याशी सतीश को 12,058 मतों के अंतर से पराजित किया। सतीश को इस मुकाबले में 58,801 वोट मिले थे। जनता दल के मोहम्मद अली 9,029 वोट पाकर तीसरे स्थान पर रहे थे। भाजपा की पहली जीत और महेंद्र सिंह यादव का कार्यकाल वर्ष 1996 के चुनावी समर में भारतीय जनता पार्टी ने बुलंदशहर सीट पर पहली बार अपनी जीत का खाता खोला। पार्टी ने महेंद्र सिंह यादव को अपना प्रत्याशी बनाया था जिन्होंने 59,647 वोट हासिल किए। उन्होंने समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार इंसाद को 8,523 मतों के अंतर से हराया। इंसाद को जनता की तरफ से 51,124 वोट प्राप्त हुए थे। इस चुनाव में बहुजन समाज पार्टी ने कांग्रेस के साथ मिलकर चुनाव लड़ा था और उसका उम्मीदवार 26,448 वोट ही जुटा सका था। वर्ष 2002 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने एक बार फिर महेंद्र सिंह यादव पर भरोसा जताया और वह इस पर खरे उतरे। उन्होंने 36,634 वोट प्राप्त कर कड़े मुकाबले में जीत दर्ज की। उनके सामने बहुजन समाज पार्टी के शाहिद अली थे जो 31,882 वोट हासिल कर सके। इस प्रकार जीत का अंतर घटकर 4,752 वोटों का रह गया। समाजवादी पार्टी के जितेंद्र यादव 30,637 वोट पाकर तीसरे स्थान पर रहे। वहीं कल्याण सिंह की राष्ट्रीय क्रांति पार्टी के संजीव अग्रवाल उर्फ संजू भैया को 17,712 वोट मिले थे। बसपा की लहर और मोहम्मद अलीम खान की सफलता वर्ष 2007 में उत्तर प्रदेश में बहुजन समाज पार्टी के पक्ष में मजबूत लहर देखने को मिली जिसका असर बुलंदशहर सीट पर भी साफ नजर आया। बसपा के टिकट पर चुनाव लड़ रहे मोहम्मद अलीम खान ने 39,571 वोट हासिल किए। उन्होंने अपने निकटतम प्रतिद्वंदी महेंद्र सिंह यादव को 3,173 वोटों के अंतर से मात दी। दिलचस्प बात यह थी कि पिछले चुनावों में भाजपा से विधायक रहे महेंद्र सिंह यादव इस बार समाजवादी पार्टी के पाले में आकर चुनाव लड़ रहे थे और उन्हें 36,398 वोट मिले। भाजपा के सतीश शर्मा 22,389 वोट पाकर तीसरे स्थान पर रहे थे। बहुजन समाज पार्टी ने साल 2012 के विधानसभा चुनावों में भी अपनी विजय का सिलसिला जारी रखा। मोहम्मद अलीम खान एक बार फिर बसपा के टिकट पर मैदान में उतरे और 76,646 वोट प्राप्त किए। उन्होंने भाजपा के वीरेंद्र सिंह सिरोही को 6,947 मतों के करीबी अंतर से हराया जिन्हें 69,699 वोट मिले थे। इस चुनाव का एक और रोचक पहलू यह रहा कि उस समय प्रदेश में पूर्ण बहुमत की सरकार बनाने वाली समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी शुजाल आलम मात्र 10,542 वोट हासिल कर पाए और पांचवें स्थान पर रहे। वीरेंद्र सिंह सिरोही की वापसी और भाजपा का विजय रथ वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा के वीरेंद्र सिंह सिरोही ने शानदार वापसी करते हुए बसपा को लगातार तीसरी जीत दर्ज करने से रोक दिया। उन्हें कुल 1,11,538 वोट मिले, जबकि बसपा के मोहम्मद अलीम खान 88,454 वोटों पर सिमट गए। भाजपा ने यह मुकाबला 23,084 मतों के भारी अंतर से अपने नाम किया। समाजवादी पार्टी के शुजात आलम इस चुनाव में 24,119 वोट पाकर तीसरे पायदान पर रहे थे। मौजूदा विधायक वीरेंद्र सिंह सिरोही के असामयिक निधन के कारण वर्ष 2020 में यहां उपचुनाव कराना पड़ा। भारतीय जनता पार्टी ने सहानुभूति कार्ड खेलते हुए उनकी पत्नी ऊषा सिरोही को मैदान में उतारा। उन्होंने 88,645 वोट हासिल कर बहुजन समाज पार्टी के मोहम्मद यूनुस को 21,702 मतों के अंतर से परास्त कर दिया। मोहम्मद यूनुस को कुल 66,943 वोट मिले थे। आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के उम्मीदवार मोहम्मद यामीन 13,530 वोट पाकर तीसरे स्थान पर रहे थे। वर्ष 2022 के आम चुनावों में मुख्य मुकाबला भाजपा और राष्ट्रीय लोकदल के बीच देखने को मिला क्योंकि सीट शेयरिंग के समझौते के तहत यह सीट सपा के कोटे से रालोद के पास चली गई थी। भाजपा के प्रदीप कुमार चौधरी ने 1,27,076 वोट हासिल किए। उनके मुकाबले रालोद के मोहम्मद यूनुस 1,01,246 वोट ही प्राप्त कर सके। भाजपा ने यह सीट 25,830 मतों के अंतर से जीती। बहुजन समाज पार्टी के मोहम्मद मोबीन कल्लू कुरैशी 24,373 वोट पाकर तीसरे स्थान पर रहे, जबकि कांग्रेस प्रत्याशी काफी पीछे छूट गए। आगामी 2027 चुनावों के राजनीतिक समीकरण यदि बुलंदशहर विधानसभा क्षेत्र के वर्तमान सामाजिक और राजनीतिक ताने-बाने का विश्लेषण किया जाए तो यहां मुस्लिम, अनुसूचित जाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के मतदाता निर्णायक भूमिका निभाते हैं। आगामी 2027 के विधानसभा चुनावों में एक तरफ जहां भारतीय जनता पार्टी और राष्ट्रीय लोकदल का गठबंधन मैदान में होगा, वहीं दूसरी ओर समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के साथ आने की संभावना है। चूंकि बहुजन समाज पार्टी का इस सीट पर पुराना मजबूत आधार रहा है और वह पिछले चुनावों में भी अच्छी स्थिति में रही है, इसलिए उसे कमजोर आंकना भूल होगी। प्रत्याशियों के चयन और जातियों के समीकरण आगामी चुनाव के परिणामों को तय करने में सबसे बड़ी भूमिका निभाएंगे। इसका आप पर असर बुलंदशहर विधानसभा क्षेत्र के राजनीतिक समीकरणों और आगामी चुनावों का सीधा असर स्थानीय विकास कार्यों, प्रशासनिक नीतियों और क्षेत्रीय प्राथमिकताओं पर पड़ता है। • उत्तर प्रदेश में: इस सीट पर होने वाले चुनावी मुकाबले पूरे राज्य की राजनीतिक फिजा और क्षेत्रीय गठबंधनों की ताकत को प्रभावित करते हैं। राजनीतिक दलों की रणनीतियां सीधे तौर पर आगामी विधानसभा चुनावों के परिणामों को आकार देती हैं। • बुलंदशहर में: स्थानीय मतदाताओं के बीच बुनियादी सुविधाओं, रोजगार के अवसरों और क्षेत्रीय विकास से जुड़े मुद्दे सबसे आगे रहते हैं। चुनावी सरगर्मी बढ़ने से स्थानीय स्तर पर राजनीतिक चर्चाएं तेज हो जाती हैं और जनहित की मांगें मुखर होती हैं। ऐसा क्यों हुआ बुलंदशहर विधानसभा सीट पर पिछले तीन दशकों में हुए राजनीतिक बदलाव विभिन्न दलों की रणनीतियों और सामाजिक गठबंधनों के कारण हुए हैं। अलग-अलग चुनावों में स्थानीय समीकरणों और उम्मीदवारों की व्यक्तिगत लोकप्रियता ने परिणामों को तय किया है। • पारंपरिक दलबदल और समीकरण: नब्बे के दशक में नेताओं द्वारा दल बदलने और अपने व्यक्तिगत प्रभाव के आधार पर चुनाव जीतने की प्रवृत्ति प्रमुख रही थी। • सामाजिक और जातीय गोलबंदी: क्षेत्र में विभिन्न जातियों और समुदायों के मतदाताओं की संख्या निर्णायक रही है, जिसके चलते दलों ने उसी हिसाब से अपने उम्मीदवार उतारे हैं। • लहर और गठबंधन प्रभाव: समय-समय पर प्रदेश में चली राजनीतिक लहरों और दलों के बीच हुए गठबंधनों ने चुनावी परिणामों को सीधे तौर पर प्रभावित किया है। सवाल-जवाब 1. बुलंदशहर सीट पर पिछले तीन चुनावों से किस पार्टी का कब्जा है? पिछले तीन चुनावों में लगातार जीत दर्ज कर भारतीय जनता पार्टी ने इस सीट पर कब्जा जमाया है। 2. वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में बुलंदशहर से किस पार्टी के उम्मीदवार जीते थे? वर्ष 2022 के चुनाव में भाजपा के प्रदीप कुमार चौधरी ने यह सीट जीती थी। 3. किस वर्ष हुए उपचुनाव में ऊषा सिरोही ने जीत दर्ज की थी? वर्ष 2020 में हुए उपचुनाव में ऊषा सिरोही ने विजयी बढ़त हासिल की थी। 4. धर्मपाल यादव उर्फ डीपी यादव ने नब्बे के दशक में किन दलों से चुनाव जीता था? धर्मपाल यादव ने 1991 में जनता पार्टी और 1993 में समाजवादी पार्टी के टिकट पर जीत दर्ज की थी। 5. बुलंदशहर सीट पर बहुजन समाज पार्टी ने किन वर्षों में जीत हासिल की थी? बसपा ने वर्ष 2007 और वर्ष 2012 के विधानसभा चुनावों में इस सीट पर कब्जा जमाया था। https://trendkia.com/uttar-pradesh/uttar-pradesh-assembly-elections-2027-can-bjp-retain-bulandshahr-seat-or-will-political-equations-shift-50268 TrendKia — Har trend, sabse pehle.