उत्तर प्रदेश के 70 हजार से अधिक आंगनवाड़ी केंद्रों का बदला स्वरूप, वाराणसी में 9वें राष्ट्रीय पोषण माह के मंच से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने साझा की सुधार की पूरी कहानी वाराणसी में 9वें राष्ट्रीय पोषण माह के शुभारंभ अवसर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश के आंगनवाड़ी केंद्रों के कायाकल्प का पूरा खाका पेश किया। उन्होंने 2017 से पहले शराब माफिया द्वारा पोषाहार आपूर्ति और जर्जर व्यवस्थाओं का जिक्र करते हुए बताया कि कैसे अब 70 हजार से ज्यादा केंद्र आधुनिक मॉडल के रूप में विकसित हो चुके हैं। उत्तर प्रदेश के वाराणसी में आयोजित 9वें राष्ट्रीय पोषण माह के शुभारंभ समारोह के दौरान राज्य के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश के आंगनवाड़ी केंद्रों के व्यापक कायाकल्प और प्रशासनिक बदलाव की विस्तृत जानकारी साझा की। उन्होंने वर्ष 2017 से पहले आंगनवाड़ी केंद्रों की बदहाल स्थिति, कुप्रबंधन और भ्रष्टाचार का उल्लेख करते हुए बताया कि कैसे बीते साढ़े नौ वर्षों के समर्पित प्रयासों से राज्य में 70 हजार से अधिक आंगनवाड़ी केंद्रों को आधुनिक और सुविधायुक्त मॉडल केंद्रों के रूप में नया स्वरूप दिया गया है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि वर्तमान में ये केंद्र न केवल बच्चों के समुचित पोषण का जरिया बन रहे हैं, बल्कि बुनियादी शिक्षा और शुरुआती देखभाल के उत्कृष्ट मॉडल के रूप में भी उभरे हैं। 2017 से पूर्व का दौर: शराब माफिया के हाथों में थी पोषाहार की सप्लाई मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में 2017 से पहले की स्थिति को याद दिलाते हुए कहा कि उस समय प्रदेश के अधिकांश आंगनवाड़ी केंद्र पूरी तरह जर्जर और गंदगी से भरे हुए थे। केंद्रों के भीतर बच्चों और कार्यकर्ताओं के लिए कोई उचित बुनियादी व्यवस्था उपलब्ध नहीं थी और बच्चों को समय पर पोषण आहार नहीं मिल पाता था। मुख्यमंत्री ने बताया कि जब उन्होंने 2017 में राज्य की कमान संभाली, तो आंगनवाड़ी केंद्रों की दयनीय हालत और लगातार मिल रही जन शिकायतों की विस्तृत समीक्षा की। जाँच के दौरान यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया कि आंगनवाड़ी केंद्रों के लिए जाने वाले पोषाहार की आपूर्ति एक शराब माफिया द्वारा नियंत्रित की जा रही थी। इस पर तुरंत गुणवत्ता जाँच के आदेश दिए गए। पूछने पर अधिकारियों ने स्वीकार किया कि पोषाहार की सप्लाई बेहद अनिश्चित थी और कभी तीन महीने में एक बार माल पहुंचता था, अन्यथा पूरी व्यवस्था भगवान भरोसे छोड़ दी गई थी। टूटते बुनियादी ढांचे और कम मानदेय की दोहरी मार पुरानी व्यवस्था का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि उस दौर में आंगनवाड़ी केंद्रों में आने वाले नन्हे-मुन्ने बच्चों को बैठने के लिए अपने घर से टाट-पट्टी (चटाई) खुद लेकर आनी पड़ती थी। केंद्रों में न तो पीने के शुद्ध पानी का इंतजाम था, न ही बच्चों के लिए बैठने की उचित व्यवस्था थी और न ही उन्हें गर्म दूध या भोजन देने का कोई प्रावधान था। लखनऊ में बैठे प्रशासनिक तंत्र और ठेकेदारों की लापरवाही का खामियाजा जमीन पर काम करने वाली आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को भुगतना पड़ता था। व्यवस्था की नाकामियों के लिए आंगनवाड़ी बहनों को जनता की गालियां और ताने सुनने पड़ते थे। इसके बावजूद, उन्हें दिया जाने वाला मानदेय बेहद निराशाजनक था। आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को प्रति माह मात्र 3,000 रुपये और उनकी सहायिकाओं को केवल 1,500 रुपये का मानदेय मिलता था, जिससे उनके जीवन-यापन में भारी कठिनाइयां आती थीं। स्मार्टफोन, टेक-होम राशन और आधुनिक सुविधाओं से लैस मॉडल केंद्र मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि राज्य सरकार के लगातार प्रयासों से पहली बार ऐसा ऐतिहासिक बदलाव हुआ है कि प्रदेश के आंगनवाड़ी केंद्र अब आधुनिक और देखने लायक बन रहे हैं। राज्य सरकार ने एक मानक मॉडल तय किया है जिसके तहत प्रत्येक केंद्र के निर्माण और जीर्णोद्धार पर योजनाबद्ध तरीके से बजट खर्च किया जा रहा है। आज प्रदेश की आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को सरकारी स्तर पर स्मार्टफोन दिए जा चुके हैं, जिनकी मदद से वे लाभार्थियों का रियल-टाइम डेटा तुरंत पोर्टल पर अपलोड करती हैं। इसके अलावा, पोषण वितरण व्यवस्था को पूरी तरह पारदर्शी और पौष्टिक बनाया गया है। केंद्रों पर बच्चों के लिए ताज़ा गर्म पका हुआ भोजन (हॉट मील) उपलब्ध कराया जा रहा है, जबकि टेक-होम राशन (टीएचआर) के जरिए पैक्ड पोषाहार का वितरण हो रहा है। इस पूरी व्यवस्था को आत्मनिर्भर बनाने के लिए उत्तर प्रदेश में टीएचआर के 204 मैन्युफैक्चरिंग प्लांट स्थापित किए गए हैं, जिनका पूरा संचालन ग्रामीण महिला स्वयं सहायता समूहों द्वारा किया जा रहा है। बजट में प्राथमिकता और 70 हजार से ज्यादा केंद्रों का कायाकल्प मुख्यमंत्री ने जानकारी दी कि पिछले साढ़े नौ वर्षों के दौरान राज्य सरकार ने प्राथमिकता के आधार पर 70 हजार से अधिक आंगनवाड़ी केंद्रों को पूरी तरह नया स्वरूप प्रदान किया है। सरकार ने यह सुनिश्चित किया कि चाहे राज्य वित्त आयोग का फंड हो, केंद्रीय वित्त आयोग का पैसा हो या फिर राज्य का अपना वार्षिक बजट हो, आंगनवाड़ी केंद्रों के इंफ्रास्ट्रक्चर विकास को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए। इसके तहत केंद्रों के पक्के भवनों का निर्माण, सुरक्षा के लिए चारदीवारी (बाउंड्री वॉल), बच्चों के लिए साफ टॉयलेट और पीने के शुद्ध पेयजल की पक्की व्यवस्था की गई है। इन केंद्रों में अब बाल वाटिकाएं संचालित की जा रही हैं, जहाँ नन्हे बच्चों को खेल-खेल के तरीकों से अक्षरों और अंकों का शुरुआती ज्ञान बहुत ही सहज और मनोरंजक माहौल में दिया जाता है। कानपुर का अनऔपचारिक निरीक्षण और नन्हे बच्चों का उत्साह अपने संबोधन के दौरान मुख्यमंत्री ने कानपुर के एक दूरदराज गांव में स्थित आंगनवाड़ी केंद्र के अपने औचक निरीक्षण का संस्मरण भी साझा किया। उन्होंने बताया कि वे बिना किसी पूर्व सूचना के अचानक उस गांव के आंगनवाड़ी केंद्र में पहुंचे थे। वहाँ उन्होंने देखा कि लगभग 20 से 22 बच्चे मौजूद थे और आंगनवाड़ी कार्यकर्ता पूरी लगन के साथ उन्हें पढ़ा रही थीं। मुख्यमंत्री चुपचाप एक कोने में खड़े होकर बच्चों और कार्यकर्ता की गतिविधियों को देखने लगे। उन्होंने पाया कि कुछ बच्चे बहुत सक्रिय थे तो कुछ थोड़े शांत थे, लेकिन सभी बड़े उत्साह के साथ सीखने की प्रक्रिया में शामिल थे। बच्चों के सामने कुछ लड्डू रखे हुए थे, जिन पर बच्चों की नजरें तो टिकी थीं, लेकिन उनका ध्यान पढ़ाई और खेल पर भी पूरी तरह केंद्रित था। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस तरह के जीवंत माहौल को देखकर उन्हें अत्यधिक प्रसन्नता हुई और यह स्पष्ट हुआ कि प्रदेश के आंगनवाड़ी केंद्र अब वास्तव में प्राथमिक शिक्षा और पोषण के प्रभावी केंद्र बन चुके हैं। प्रशासनिक मजबूती के तहत राज्य सरकार द्वारा हाल ही में 739 आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और 15,203 सहायिकाओं को नियुक्ति पत्र भी सौंपे गए हैं, जिससे जमीनी स्तर पर सेवा वितरण और अधिक सुदृढ़ हुआ है। इसका आप पर असर उत्तर प्रदेश में आंगनवाड़ी व्यवस्था के इस व्यापक सुधार का सीधा असर राज्य के लाखों छोटे बच्चों और उनकी माताओं पर पड़ रहा है। • भारत में: राष्ट्रीय पोषण अभियान के तहत बुनियादी ढांचे को मजबूत करने से बच्चों में कुपोषण दर में कमी आएगी। इससे स्वास्थ्य सुधार और प्राथमिक शिक्षा की नींव मजबूत करने का राष्ट्रीय लक्ष्य हासिल होगा। • उत्तर प्रदेश में: राज्य के 70 हजार से अधिक आंगनवाड़ी केंद्रों के आधुनिकीकरण से ग्रामीण और शहरी इलाकों के बच्चों को अब सुरक्षित परिसर, शुद्ध पेयजल और टॉयलेट जैसी सुविधाएं मिल रही हैं। • आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के लिए: स्मार्टफोन मिलने से रियल-टाइम डेटा अपलोड करना आसान हुआ है, जिससे कागजी कार्रवाई का बोझ घटा है और पारदर्शी योजना प्रबंधन सुनिश्चित हो रहा है। • महिला स्वयं सहायता समूहों के लिए: राज्य में लगे 204 टीएचआर (टेक-होम राशन) प्लांट का संचालन स्वयं सहायता समूहों को सौंपे जाने से स्थानीय महिलाओं को रोजगार और आत्मनिर्भरता का नया जरिया मिला है। • बच्चों के पोषण और स्वास्थ्य पर: केंद्रों में गर्म पका हुआ भोजन (हॉट मील) और पौष्टिक पैक्ड सामग्री वितरण से बच्चों के स्वास्थ्य और बौद्धिक विकास में बड़ा सुधार देखा जा रहा है। ऐसा क्यों हुआ आंगनवाड़ी केंद्रों में यह बड़ा प्रशासनिक बदलाव 2017 से पहले की चरमराती व्यवस्था, घटिया पोषाहार और व्यापक भ्रष्टाचार को खत्म करने के लिए शुरू किया गया था। • शराब माफिया का हस्तक्षेप: 2017 से पहले राज्य के आंगनवाड़ी केंद्रों में पोषाहार आपूर्ति का जिम्मा एक शराब माफिया के पास था, जिससे आपूर्ति बेहद अनियमित थी और गुणवत्ता पर गंभीर सवाल उठते थे। • बुनियादी सुविधाओं का अभाव: अधिकांश केंद्र जर्जर इमारतों में चल रहे थे, जहाँ पेयजल, शौचालय, बैठने के लिए चटाई और गर्म भोजन जैसी बुनियादी सुविधाएं तक उपलब्ध नहीं थीं। • मानदेय और व्यवस्थागत असंतोष: कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को बेहद कम मानदेय मिलता था, जबकि व्यवस्थागत खामियों के लिए उन्हें जन आक्रोश झेलना पड़ता था। • सरकारी प्राथमिकताओं में बदलाव: 2017 में सत्ता संभालने के बाद राज्य सरकार ने राज्य और केंद्रीय वित्त आयोग के बजट का उपयोग कर आंगनवाड़ी केंद्रों के कायाकल्प को सर्वोच्च प्राथमिकता दी। सवाल-जवाब 1. उत्तर प्रदेश में कितने आंगनवाड़ी केंद्रों का कायाकल्प किया जा चुका है? मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के अनुसार, पिछले साढ़े नौ वर्षों के दौरान राज्य के 70 हजार से अधिक आंगनवाड़ी केंद्रों को नया स्वरूप और मॉडल ढांचा दिया गया है। 2. 2017 से पहले आंगनवाड़ी केंद्रों में पोषाहार आपूर्ति की क्या स्थिति थी? 2017 से पहले पोषाहार की सप्लाय एक शराब माफिया के हाथ में थी, जिसके कारण आपूर्ति बेहद अनियमित रहती थी और कई महीनों तक राशन नहीं पहुंचता था। 3. मॉडल आंगनवाड़ी केंद्रों में बच्चों के लिए क्या नई सुविधाएं जोड़ी गई हैं? मॉडल केंद्रों में बच्चों के लिए साफ पानी, टॉयलेट, बाउंड्री वॉल, गर्म पका भोजन (हॉट मील), खेल-खेल में पढ़ाई के लिए बाल वाटिकाएं और टेक-होम राशन की व्यवस्था की गई है। 4. टीएचआर (टेक-होम राशन) प्लांट कौन संचालित कर रहा है? उत्तर प्रदेश में स्थापित 204 टीएचआर प्लांटों का संचालन महिला स्वयं सहायता समूहों द्वारा किया जा रहा है। 5. आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं का पुराना मानदेय कितना था? पूर्ववर्ती व्यवस्था के तहत आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को केवल 3,000 रुपये और सहायिकाओं को 1,500 रुपये प्रति माह मानदेय मिलता था। https://trendkia.com/uttar-pradesh/uttar-pradesh-ke-70-hajara-se-adhika-anganavari-kendron-ka-badala-svarupa-varanasi-men-9ven-rashtriya-poshana-maha-ke-mncha-se-muk-30233 TrendKia — Har trend, sabse pehle.