उत्तर प्रदेश के बहराइच में दिल दहला देने वाली घटना, बरामदे से सोते हुए ग्रामीण को उठा ले गया आदमखोर जानवर बहराइच जिले के महबूबनगर गांव में घर के बरामदे में सो रहे 30 वर्षीय राम सिंह को एक जंगली जानवर उठा ले गया, जिसके बाद झाड़ियों से उनका आधा खाया हुआ शव बरामद हुआ। घटना के बाद ग्रामीणों में भारी आक्रोश है और उन्होंने वन विभाग के खिलाफ प्रदर्शन किया है। उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले से एक बेहद डरावनी और झकझोर देने वाली घटना सामने आई है, जिसने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी है। जिले के कतर्नियाघाट वन्यजीव प्रभाग के अंतर्गत आने वाले ककरहा रेंज के महबूबनगर गांव में एक ग्रामीण को किसी जंगली जानवर ने अपना शिकार बना लिया। इस जानलेवा हमले में ग्रामीण की दर्दनाक मौत हो गई, जिसके बाद से पूरे गांव में मातम पसरा हुआ है और लोगों में भारी दहशत का माहौल बना हुआ है। मृतक की पहचान 30 वर्षीय राम सिंह के रूप में हुई है, जो मालती प्रसाद के पुत्र थे। यह दुखद घटना मंगलवार की सुबह सामने आई जब ग्रामीण अपने घर के बाहर आराम कर रहे थे। इस तरह दिया गया घटना को अंजाम परिवार के सदस्यों से मिली जानकारी के अनुसार, राम सिंह मंगलवार की भोर में करीब तीन बजे अपने घर के बरामदे में चैन की नींद सो रहे थे। इसी दौरान अंधेरे का फायदा उठाकर कोई खतरनाक जंगली जानवर वहां आ धमका और उसने सोते हुए राम सिंह पर अचानक हमला बोल दिया। जानवर उन्हें चारपाई से सीधे उठाकर घर के पास ही मौजूद घनी झाड़ियों में खींच ले गया। जब परिजनों की आंख खुली और उन्होंने राम सिंह को बिस्तर पर नहीं पाया, तो उनकी तलाश शुरू की गई। गांव वालों के साथ मिलकर जब परिजन लाठी-डंडे लेकर आसपास खोजबीन करने निकले, तो उन्हें झाड़ियों के पास राम सिंह का क्षत-विक्षत और आधा खाया हुआ शव मिला। इस भयानक दृश्य को देखकर परिजनों के होश उड़ गए और गांव में कोहराम मच गया। मौके पर पहुंची वन विभाग और पुलिस टीम इस दिल दहला देने वाली घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय प्रशासन और सुरक्षा तंत्र हरकत में आ गया। वन विभाग के कर्मचारियों के साथ-साथ मोतीपुर पुलिस थाने की टीम तुरंत घटनास्थल पर पहुंच गई। अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर हालात का जायजा लिया और पूरे क्षेत्र का मुआयना किया। जांच के दौरान वन कर्मियों को घर के आंगन में जंगली जानवर के पदचिन्ह यानी पगमार्ग भी मिले हैं, जिनकी बारीकी से जांच की जा रही है। शुरुआती पड़ताल में यह बात सामने आई है कि यह घटनास्थल पास के ही जंगल से लगभग 700 मीटर की दूरी पर स्थित है। वन विभाग के अधिकारी इस बात का पता लगाने में जुटे हैं कि आखिरकार यह कौन सा जानवर था जो इतनी हिम्मत जुटाकर रिहायशी इलाके तक आ पहुंचा। ग्रामीणों का फूटा गुस्सा और विभाग पर लापरवाही के आरोप इस भयानक हादसे के बाद स्थानीय ग्रामीणों का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया और उनका आक्रोश सीधे तौर पर वन विभाग के खिलाफ फूट पड़ा। बड़ी संख्या में ग्रामीण घटनास्थल पर जमा हो गए और विभाग के कर्मचारियों के खिलाफ जमकर नारेबाजी करने लगे। ग्रामीणों का स्पष्ट आरोप है कि उनके गांव के आसपास काफी लंबे समय से बाघ की मौजूदगी दर्ज की जा रही है, लेकिन इसके बावजूद वन विभाग द्वारा इलाके में न तो कोई प्रभावी निगरानी की जा रही है और न ही सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। ग्रामीणों का यह भी कहना है कि इस लापराही के कारण पूरे क्षेत्र में लगातार डर और भय का माहौल बना हुआ है। गौरतलब है कि हाल ही में यह आंकड़े भी सामने आए थे कि उत्तर प्रदेश में इंसान और जंगली जानवरों के बीच चल रहे इस टकराव में अब तक 4000 से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है। बाघ या तेंदुआ, जानवर की पहचान को लेकर असमंजस घटना के बाद वन विभाग की टीम ने प्राथमिक अनुमान जताते हुए इस हमले के पीछे तेंदुए का हाथ होने की आशंका व्यक्त की थी। हालांकि, आक्रोशित ग्रामीणों ने इस दावे को सिरे से खारिज कर दिया और पूरी दृढ़ता के साथ कहा कि यह हमला किसी और ने नहीं बल्कि एक बाघ ने ही किया है। गुस्से में भरे ग्रामीणों ने कतर्नियाघाट के डीएफओ को तुरंत मौके पर बुलाने की मांग की है। इसके अलावा उनकी मुख्य मांगों में बाघ की सही पहचान कर उसे जल्द से जल्द पकड़ना, गांव में सुरक्षा के लिए पिंजरे लगाना, नियमित गश्त शुरू करना और पुख्ता सुरक्षा प्रबंध करना शामिल है। फिलहाल वन विभाग के अधिकारी घटनास्थल की गहन जांच पड़ताल कर रहे हैं और अधिकारियों का कहना है कि जंगली जानवर की वास्तविक प्रजाति की पुष्टि केवल विस्तृत जांच पूरी होने के बाद ही की जा सकेगी। इसका आप पर असर यह घटना उत्तर प्रदेश के ग्रामीण इलाकों में बढ़ते मानव-वन्यजीव संघर्ष और सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोलती है। • भारत में: देश भर के जंगली इलाकों से सटे गांवों में रहने वाले लोगों को रात के समय सुरक्षा को लेकर अधिक सतर्क रहने की आवश्यकता है। इस तरह की घटनाओं से यह स्पष्ट होता है कि वन क्षेत्रों के पास मानव बस्तियों की सुरक्षा के लिए प्रशासन को और अधिक प्रभावी कदम उठाने की जरूरत है। • बहराइच में: महबूबनगर और आसपास के प्रभावित गांवों के लोगों को अगले कुछ दिनों तक रात के समय घरों से बाहर निकलने से बचना चाहिए और स्थानीय प्रशासन द्वारा सुरक्षा उपाय लागू होने तक सतर्क रहना चाहिए। ग्रामीणों को वन विभाग से पिंजरे लगाने और गश्त बढ़ाने की मांग पर दबाव बनाए रखना चाहिए ताकि भविष्य में ऐसे हमलों को रोका जा सके। सवाल-जवाब 1. यह घटना कहां पर हुई? यह घटना उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले के कतर्नियाघाट वन्यजीव प्रभाग के ककरहा रेंज अंतर्गत महबूबनगर गांव में हुई। 2. मृतक ग्रामीण का नाम क्या था? मृतक का नाम 30 वर्षीय राम सिंह था, जो मालती प्रसाद के पुत्र थे। 3. घटना के समय राम सिंह कहां थे? राम सिंह मंगलवार की भोर में करीब तीन बजे अपने घर के बरामदे में सो रहे थे। 4. शव कहां से बरामद हुआ? परिजनों और ग्रामीणों द्वारा तलाश किए जाने पर राम सिंह का आधा खाया हुआ शव घर के पास की झाड़ियों से मिला। 5. घटनास्थल जंगल से कितनी दूर था? घटनास्थल जंगल से लगभग 700 मीटर की दूरी पर स्थित था। 6. ग्रामीणों का गुस्सा क्यों फूटा? ग्रामीणों का गुस्सा वन विभाग के खिलाफ फूटा क्योंकि उनका आरोप था कि लंबे समय से बाघ की मौजूदगी के बावजूद विभाग ने सुरक्षा के कोई प्रभावी इंतजाम नहीं किए। 7. ग्रामीणों की मुख्य मांगें क्या थीं? ग्रामीणों ने कतर्नियाघाट के डीएफओ को मौके पर बुलाने, बाघ की पहचान कर उसे पकड़ने तथा गांव में पिंजरा और गश्त की व्यवस्था करने की मांग की। https://trendkia.com/uttar-pradesh/uttar-pradesh-ke-bahraich-men-dila-dahala-dene-vali-ghatana-baramade-se-sote-hue-gramina-ko-utha-le-gaya-adamakhora-janavara-25525 TrendKia — Har trend, sabse pehle.