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  "title": "उत्तर प्रदेश के देवरिया में गर्भवती महिला की हत्या का सनसनीखेज खुलासा, ननद ने 3 लाख की सुपारी देकर की थी वारदात",
  "summary": "उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले में 24 अक्टूबर को हुई गर्भवती महिला की हत्या के मामले का पुलिस ने पर्दाफाश कर दिया है। सीएचसी में तैनात स्टाफ नर्स ननद ने कम दहेज मिलने और पारिवारिक विवाद के चलते 3 लाख रुपए की सुपारी देकर इस वारदात को अंजाम दिलाया था।",
  "content": "उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले के रुद्रपुर इलाके में स्वास्थ्य विभाग के सरकारी आवास के भीतर 24 अक्टूबर को हुई एक पांच महीने की गर्भवती महिला की हत्या की गुत्थी पुलिस ने सुलझा ली है। इस जघन्य हत्याकांड के पीछे कोई और नहीं बल्कि मृतका की अपनी ही ननद, पति और देवर की साजिश सामने आई है। कम दहेज मिलने के विवाद और पारिवारिक कलह के कारण इस खौफनाक वारदात को अंजाम दिया गया। रुद्रपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में तैनात स्टाफ नर्स पूर्णिमा ने अपनी ही भाभी की हत्या के लिए तीन लाख रुपए की सुपारी दी थी। इस हाई-प्रोफाइल दहेज हत्या के मामले में मंगलवार सुबह पुलिस ने मुठभेड़ के बाद मुख्य सुपारी किलर को भी गिरफ्तार कर लिया है। देवरिया जिले के इतिहास में सुपारी किलर के जरिए दहेज हत्या कराने का यह अपनी तरह का पहला मामला सामने आया है।\n\n \n\nरुद्रपुर सीएचसी परिसर के सरकारी आवास में हुई थी वारदात\n गोरखपुर जिले के सहजनवां थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले चांदबारी गांव की रहने वाली पूर्णिमा देवरिया के रुद्रपुर में स्टाफ नर्स के पद पर कार्यरत है। वह रुद्रपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के कैंपस में बने सरकारी आवास में अकेली रहती थी और अभी अविवाहित है। मृतका गुड़िया देवी, जो चमन लाल की पत्नी थी, पांच महीने से गर्भवती थी। बेहतर चिकित्सकीय सुविधाओं और देखभाल के चलते गुड़िया कुछ समय से अपनी ननद पूर्णिमा के साथ ही इसी सरकारी आवास में रह रही थी। गुड़िया और चमन लाल की एक तीन साल की छोटी बेटी भी है। मृतका का मायका देवरिया जिले के ही एकौना थाना क्षेत्र के करहकोल गांव में स्थित था, जहां उसके परिवार के लोग रहते हैं।\n\n \n\nदहेज को लेकर ससुराल पक्ष में लगातार होती थी प्रताड़ना\n गुड़िया की मां लीलावती ने पुलिस को दिए बयानों में बताया कि उनकी बेटी के ससुराल में ननद पूर्णिमा देवी का काफी दबदबा था। इसका मुख्य कारण यह था कि पूरे परिवार की आर्थिक जरूरतें और खर्च पूर्णिमा की सरकारी नौकरी की कमाई से ही चलते थे। ससुराल पक्ष के लोग कम दहेज मिलने को लेकर गुड़िया के साथ अक्सर मारपीट और दुर्व्यवहार किया करते थे। गुड़िया ने यह सारी बातें कई बार अपनी मां को बताई थीं। इसके बाद परिवार के स्तर पर ससुराल वालों को समझाने और मामला शांत कराने की कई कोशिशें की गईं, लेकिन उनके रवैये में कोई सुधार नहीं आया और वे अपनी हरकतों से बाज नहीं आए।\n\n \n\nतीन लाख रुपए में तय हुआ था हत्या का पूरा सौदा\n पुलिस अधीक्षक अभिजीत आर शंकर ने मामले का खुलासा करते हुए बताया कि जब गुड़िया अपनी ननद के पास रहने आई, तो उसकी ननद, पति और सास ने मिलकर उसकी जान लेने की साजिश रच डाली। इस पूरी योजना में ननद पूर्णिमा ने सबसे अहम और मुख्य भूमिका निभाई। उसने अपने एक परिचित सत्य प्रकाश यादव के माध्यम से दो शातिर अपराधियों राम आशीष यादव और नरेश से संपर्क किया। गुड़िया की हत्या के एवज में तीन लाख रुपए में सौदा तय हुआ था। आरोपियों को ढाई लाख रुपए बतौर एडवांस पहले ही दे दिए गए थे, जबकि बाकी के पचास हजार रुपए हत्या की घटना को अंजाम देने के बाद दिए जाने तय हुए थे। तय योजना के मुताबिक 24 अक्टूबर की रात को पूर्णिमा के सरकारी आवास के अंदर ही दोनों सुपारी किलरों ने गला घोंटकर गुड़िया की हत्या कर दी।\n\n \n\nमुठभेड़ के बाद पुलिस की गिरफ्त में आए आरोपी\n इस पूरी घटना को एक साधारण लूट का रूप देने और पुलिस को गुमराह करने के लिए पूर्णिमा ने कमरे का सारा सामान अस्त-व्यस्त कर दिया और खुद ही पुलिस को सूचना दी। मृतका की मां लीलावती देवी की शिकायत पर पुलिस ने गुड़िया के पति, देवर, सास और ननद पूर्णिमा के खिलाफ दहेज हत्या और घरेलू हिंसा का गंभीर मुकदमा दर्ज कर लिया। जब पुलिस ने गहन छानबीन के दौरान ननद पूर्णिमा से सख्ती से पूछताछ की, तो उसने अपना जुर्म कबूल कर लिया। मंगलवार की सुबह पुलिस के साथ हुई मुठभेड़ के दौरान हत्या के मुख्य आरोपी राम आशीष के पैर में गोली लग गई, जिसके बाद उसे गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस अधीक्षक अभिजीत आर शंकर ने जानकारी दी है कि इस आपराधिक षड्यंत्र में शामिल सभी नामजद आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है और बाकी बचे फरार आरोपियों की तलाश सरगर्मी से की जा रही है।\n\nइसका आप पर असर\nयह घटना परिवार के भीतर बढ़ते विवादों और दहेज जैसी कुप्रथा के गंभीर परिणामों को उजागर करती है, जिसका सीधा प्रभाव पारिवारिक सुरक्षा और सामाजिक ताने-बाने पर पड़ता है।\n\n• भारत में: यह मामला देश भर में दहेज प्रताड़ना और घरेलू हिंसा के खिलाफ कड़े कानूनों और उनकी प्रभावशीलता पर सवाल खड़े करता है। ऐसे अपराधों में प्रशासनिक पदों पर बैठे लोगों की संलिप्तता समाज में गहरी चिंता का विषय बनती है।\n\n• देवरिया में: स्थानीय निवासियों और पुलिस प्रशासन के लिए यह घटना एक बड़ी चेतावनी है कि कैसे पारिवारिक रंजिशें जघन्य अपराधों में बदल सकती हैं। क्षेत्र में इस तरह की पहली सुपारी किलिंग की घटना के बाद स्थानीय सुरक्षा और पुलिस गश्त को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं।\n\nऐसा क्यों हुआ\nयह खौफनाक वारदात पारिवारिक कलह, कम दहेज मिलने से उपजे असंतोष और लालच के कारण अंजाम दी गई। मुख्य आरोपी ननद की सरकारी नौकरी और परिवार पर उसके प्रभाव ने इस साजिश को अमलीजामा पहनाने में बड़ी भूमिका निभाई।\n\n• पारिवारिक कलह और दबदबा: मृतका गुड़िया के ससुराल में ननद पूर्णिमा का पूरा नियंत्रण था क्योंकि घर का खर्च उसी की कमाई से चलता था, जिससे वह परिवार में हावी थी।\n\n• दहेज की मांग: कम दहेज मिलने को लेकर ससुराल वाले लगातार गुड़िया को प्रताड़ित करते थे, जिससे बात हत्या की साजिश तक पहुंच गई।\n\n• आपराधिक साजिश: पूर्णिमा ने अपने रसूख और जानकारों की मदद से पेशेवर अपराधियों को तीन लाख रुपए की सुपारी देकर इस सुनियोजित हत्या को अंजाम दिलवाया।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. यह घटना किस जिले में हुई है?\nयह घटना उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले के रुद्रपुर इलाके में हुई है।\n\n2. मृतक महिला कौन थी और उसकी क्या स्थिति थी?\nमृतक महिला गुड़िया देवी थी, जो पांच महीने की गर्भवती थी और उसकी एक तीन साल की बेटी भी थी।\n\n3. हत्या की साजिश किसने रची थी?\nहत्या की साजिश मृतका की ननद पूर्णिमा, उसके पति और सास ने मिलकर रची थी।\n\n4. सुपारी किलरों को कितनी रकम तय की गई थी?\nहत्या के लिए तीन लाख रुपए की सुपारी तय की गई थी, जिसमें से ढाई लाख रुपए एडवांस दिए गए थे।\n\n5. मुख्य आरोपी ननद क्या काम करती थी?\nमुख्य आरोपी ननद पूर्णिमा रुद्रपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में स्टाफ नर्स के पद पर तैनात है।",
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  "category": "उत्तर प्रदेश",
  "publishedAt": "2026-10-27",
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    "देवरिया मर्डर केस",
    "दहेज हत्या",
    "उत्तर प्रदेश अपराध",
    "रुद्रपुर सीएचसी",
    "पुलिस एनकाउंटर"
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