# उत्तर प्रदेश के साहिबाबाद में दो बार रिकॉर्ड अंतर से जीती बीजेपी, 2027 चुनाव पर टिकी निगाहें

> गाजियाबाद की साहिबाबाद विधानसभा सीट पर बीजेपी ने पिछले दो चुनावों में पूरे प्रदेश में सबसे बड़ी जीत दर्ज की है। अमरपाल शर्मा और सुनील कुमार शर्मा के बीच की पुरानी सियासी जंग 2027 में नए समीकरणों की परीक्षा लेगी।

**Type:** article · **Category:** उत्तर प्रदेश · **Published:** 2026-09-25 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/uttar-pradesh/uttar-pradesh-ke-sahibabad-men-do-bara-rikorda-antara-se-jiti-bjp-2027-chunava-para-tiki-nigahen-38660 · **Language:** Hindi
**Tags:** साहिबाबाद विधानसभा, उत्तर प्रदेश चुनाव 2027, सुनील कुमार शर्मा, अमरपाल शर्मा, गाजियाबाद राजनीति, बीजेपी उत्तर प्रदेश

गाजियाबाद जिले के अंतर्गत आने वाली साहिबाबाद विधानसभा सीट पश्चिमी उत्तर प्रदेश के राजनीतिक परिदृश्य में एक बेहद महत्वपूर्ण और चर्चित केंद्र मानी जाती है। निर्वाचन क्षेत्र संख्या 55 वाली यह सीट पूरे सूबे में अपने असाधारण चुनावी नतीजों के लिए जानी जाती है, क्योंकि बीते दो विधानसभा चुनावों के दौरान पूरे उत्तर प्रदेश में सबसे बड़े मतों के अंतर से विजयी होने का कीर्तिमान इसी सीट पर दर्ज हुआ है। साहिबाबाद का चुनावी सफर बहुत पुराना नहीं है। वर्ष 2008 के परिसीमन के बाद यह विधानसभा क्षेत्र औपचारिक रूप से वजूद में आया था। इसके बाद वर्ष 2012 में इस सीट पर पहली बार आम चुनाव संपन्न कराए गए थे। अस्तित्व में आने के बाद से अब तक यहां कुल तीन विधानसभा चुनाव हुए हैं, जिनमें से एक बार बीएसपी और लगातार दो बार बीजेपी ने बाजी मारी है। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि 2027 के आगामी विधानसभा चुनाव में यहां कौन सा सियासी समीकरण उभरकर सामने आता है।

 

## 2012 के पहले चुनाव में बहुजन समाज पार्टी का परचम

साहिबाबाद सीट के गठन के बाद वर्ष 2012 में हुए पहले विधानसभा चुनाव की सियासी परिस्थितियां काफी रोचक थीं। उस चुनाव में पूरे उत्तर प्रदेश से बहुजन समाज पार्टी की सत्ता विदा हो गई थी और समाजवादी पार्टी ने पूर्ण बहुमत हासिल किया था। इसके बावजूद साहिबाबाद की जनता ने स्थानीय स्तर पर बीएसपी उम्मीदवार अमरपाल शर्मा पर भरोसा जताया था। इस तरह साहिबाबाद सीट के इतिहास में पहले विधायक बनने की उपलब्धि अमरपाल शर्मा के नाम दर्ज हुई थी।

निर्वाचन आयोग के आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, 2012 के मुकाबले में बीएसपी के अमरपाल शर्मा को कुल 1,24,332 वोट हासिल हुए थे। उनके मुख्य प्रतिद्वंदी के रूप में बीजेपी के सुनील कुमार शर्मा मैदान में थे, जिन्हें 99,984 वोट मिले और वे दूसरे पायदान पर रहे थे। इस पहले मुकाबले में अमरपाल शर्मा ने 24,348 वोटों के अंतर से सुनील कुमार शर्मा को शिकस्त दी थी।

दिलचस्प बात यह भी रही कि 2012 में कांग्रेस की ओर से सतीश चंद्र त्यागी प्रत्याशी बनाए गए थे और उन्हें 51,195 वोट मिले थे। वहीं पूरे सूबे में सत्ता बनाने वाली समाजवादी पार्टी ने प्रहलाद शर्मा को टिकट दिया था, लेकिन उन्हें केवल 36,266 वोट ही मिल सके थे। यानी प्रदेश भर में भारी बहुमत पाने वाली सपा इस सीट पर चौथे नंबर पर खिसक गई थी।

 

## 2017 में बीजेपी की ऐतिहासिक और रिकॉर्डतोड़ जीत

वर्ष 2017 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव तक आते-आते साहिबाबाद की सियासी फिजा पूरी तरह बदल चुकी थी। भारतीय जनता पार्टी ने एक बार फिर सुनील कुमार शर्मा पर अपना विश्वास जताया। इस चुनाव में सुनील कुमार शर्मा को जनता का भारी जनसमर्थन मिला और उन्होंने 2,62,741 वोट हासिल करके एकतरफा जीत हासिल की। यह जीत 2017 के चुनाव में पूरे उत्तर प्रदेश के भीतर मतों के अंतर के लिहाज से सबसे बड़ी जीत साबित हुई। सुनील कुमार शर्मा ने अपने निकटतम प्रतिद्वंदी को 1,50,685 वोटों के विशाल अंतर से परास्त किया था।

इस चुनाव की सबसे दिलचस्प बात यह थी कि 2012 में बीएसपी के टिकट पर जीतने वाले अमरपाल शर्मा इस बार कांग्रेस के टिकट पर मैदान में उतरे थे। 2017 में समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच चुनावी गठबंधन हुआ था, जिसके तहत यह सीट कांग्रेस के हिस्से में आई थी। अमरपाल शर्मा को इस चुनाव में 1,12,056 वोट मिले और वे दूसरे स्थान पर रहे। दूसरी तरफ, बीएसपी ने जलालुद्दीन को अपना उम्मीदवार बनाया था, लेकिन वे तीसरे नंबर पर खिसक गए और पार्टी का जनाधार घटकर केवल 41,654 वोटों पर सिमट गया था।

 

## 2022 में जीत का दायरा और बढ़ा, कायम हुआ नया कीर्तिमान

2022 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने तीसरी बार सुनील कुमार शर्मा को अपना प्रत्याशी बनाया। इस बार भी उनका सीधा मुकाबला अमरपाल शर्मा से ही हुआ, लेकिन इस चुनाव में अमरपाल शर्मा समाजवादी पार्टी के झंडे तले चुनाव लड़ रहे थे। चुनाव से करीब 1 साल पहले ही वे समाजवादी पार्टी में शामिल हुए थे, जहां अखिलेश यादव ने खुद उन्हें पार्टी की सदस्यता दिलाई थी।

चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार, 2022 के चुनाव में बीजेपी प्रत्याशी सुनील कुमार शर्मा को 3,22,882 वोट मिले। वहीं समाजवादी पार्टी के टिकट पर उतरे अमरपाल शर्मा के खाते में 1,08,047 वोट आए। सुनील कुमार शर्मा ने 2017 के अपने ही रिकॉर्ड को तोड़ते हुए 2,14,835 वोटों के ऐतिहासिक अंतर से अमरपाल शर्मा को पराजित किया। इसके साथ ही वे 2022 के उत्तर प्रदेश चुनाव में सबसे अधिक वोटों के अंतर से जीतने वाले विधायक बन गए।

सुनील कुमार शर्मा की जीत का अंतर 2017 की तुलना में 64,150 वोट और बढ़ गया। दूसरी तरफ, बहुजन समाज पार्टी का ग्राफ लगातार गिरता गया। बीएसपी के प्रत्याशी अजीत कुमार पाल को केवल 24,136 वोट मिले और पार्टी लगातार दूसरी बार तीसरे पायदान पर रही।

 

## साहिबाबाद के सियासी समीकरण और 2027 की रूपरेखा

साहिबाबाद सीट के राजनीतिक इतिहास का विश्लेषण करें तो यह साफ दिखता है कि 2012 में बीएसपी का पलड़ा भारी रहा था, लेकिन इसके बाद के दोनों चुनावों में बीजेपी ने यहां जबर्दस्त दबदबा कायम किया। पिछले तीनों चुनावों में चुनावी जंग मुख्य रूप से सुनील कुमार शर्मा और अमरपाल शर्मा के इर्द-गिर्द ही घूमती रही है। इन तीन मुकाबलों में दो बार सुनील कुमार शर्मा को विजय मिली, जबकि एक बार अमरपाल शर्मा जीतने में सफल रहे।

इस सीट की एक अनोखी बात यह भी है कि अमरपाल शर्मा ने तीनों बार अलग-अलग राजनीतिक दलों के सिंबल पर चुनाव लड़ा। वे 2012 में बीएसपी से, 2017 में कांग्रेस से और 2022 में समाजवादी पार्टी से मैदान में उतरे थे। वर्तमान में सुनील कुमार शर्मा योगी आदित्यनाथ सरकार में मंत्री पद की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं और वे चौथी बार साहिबाबाद से चुनावी ताल ठोकने की तैयारी में हैं। आने वाले 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए यह देखना बेहद अहम होगा कि यदि समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच भविष्य में कोई गठबंधन बनता है, तो सीट बंटवारे में साहिबाबाद किसके हिस्से में जाएगी और विपक्षी खेमा बीजेपी के इस मजबूत किले में किस तरह चुनौती पेश करेगा।

## इसका आप पर असर
साहिबाबाद सीट के चुनावी आंकड़े और आगामी 2027 की सियासी हलचल स्थानीय मतदाताओं और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के राजनीतिक माहौल पर सीधा असर डालते हैं।

- **पश्चिमी उत्तर प्रदेश में:** इस सीट का सियासी रुझान आसपास के शहरी और उपनगरीय विधानसभा क्षेत्रों में राजनीतिक दलों के गठबंधन और टिकट वितरण की प्राथमिकताओं को तय करता है। मजबूत प्रभाव वाले नेताओं के चयन से क्षेत्र के व्यापक चुनावी समीकरण प्रभावित होते हैं।
- **गाजियाबाद और साहिबाबाद में:** भारी मतदान और बड़े चुनावी अंतर से जीतने वाले जन प्रतिनिधियों पर क्षेत्र के बुनियादी ढांचे, सड़क, नागरिक सुविधाओं और कानून व्यवस्था के वादों को पूरा करने की अधिक जिम्मेदारी रहती है। स्थानीय मतदाता सीधे तौर पर यह तय कर सकते हैं कि आगामी चुनाव में वे विकास कार्यों और स्थानीय मुद्दों के आधार पर किस दल का समर्थन करेंगे।
- **मतदाताओं की भागीदारी:** रिकॉर्ड अंतर से होने वाले चुनावों में हर एक मतदाता की जागरूकता और मतदान प्रतिशत का सीधा महत्व होता है। नागरिक अपने मुद्दों को आगामी चुनावों से पहले राजनीतिक दलों के घोषणापत्रों में शामिल कराने के लिए संगठित दबाव बना सकते हैं।
- **विपक्षी दलों की रणनीति:** विपक्षी दलों द्वारा साहिबाबाद जैसी सीटों पर प्रभावी उम्मीदवार उतारने की कोशिशों से स्थानीय जनता को मजबूत विकल्प और चुनावी वादों की तुलना करने का मौका मिलता है। इससे जनता अपने क्षेत्र के लंबे समय से लंबित मसलों पर राजनीतिक दलों से ठोस जवाब मांग सकती है।

## ऐसा क्यों हुआ
साहिबाबाद विधानसभा सीट पर दो बार लगातार ऐतिहासिक अंतर से जीत दर्ज होने और बदलते सियासी समीकरणों के पीछे परिसीमन, मतदाता आधार और दल-बदल की एक स्पष्ट श्रृंखला रही है।

- **शहरीकरण और विशाल मतदाता वर्ग:** वर्ष 2008 के परिसीमन के बाद बनी साहिबाबाद सीट गाजियाबाद के तेजी से बढ़ते शहरी और औद्योगिक क्षेत्रों को समेटती है। यहां मतदाताओं की बड़ी संख्या के कारण चुनावी अंतर स्वाभाविक रूप से लाखों में पहुंच जाता है।
- **प्रत्याशियों का निरंतर आमना-सामना:** पिछले तीनों चुनावों में मुख्य मुकाबला सुनील कुमार शर्मा और अमरपाल शर्मा के बीच ही सीमित रहा है। दोनों नेताओं का व्यक्तिगत प्रभाव और स्थानीय पकड़ इस सीट पर होने वाले वोटों के ध्रुवीकरण की मुख्य वजह रही है।
- **विपक्ष का बार-बार बदलता मंच:** मुख्य प्रतिद्वंदी अमरपाल शर्मा ने 2012 में बीएसपी, 2017 में कांग्रेस और 2022 में सपा के टिकट पर चुनाव लड़ा। निरंतर दल बदलने और गैर-बीजेपी वोटों के बिखराव ने बीजेपी के पक्ष में अंतर को हर चुनाव में और व्यापक बना दिया।

## सवाल-जवाब

### 1. साहिबाबाद विधानसभा सीट कब अस्तित्व में आई थी?
साहिबाबाद विधानसभा सीट वर्ष 2008 के परिसीमन के बाद अस्तित्व में आई थी और यहां पहला चुनाव 2012 में हुआ था।

### 2. 2012 के पहले चुनाव में साहिबाबाद से कौन जीता था?
2012 में बीएसपी प्रत्याशी अमरपाल शर्मा 1,24,332 वोट पाकर 24,348 वोटों के अंतर से चुनाव जीते थे।

### 3. 2017 में सुनील कुमार शर्मा ने कितने वोटों के अंतर से जीत हासिल की थी?
2017 में बीजेपी के सुनील कुमार शर्मा ने 1,50,685 वोटों के अंतर से जीत दर्ज की थी, जो उस चुनाव में पूरे उत्तर प्रदेश में सबसे बड़ी जीत थी।

### 4. 2022 के विधानसभा चुनाव में जीत का क्या रिकॉर्ड बना?
2022 में सुनील कुमार शर्मा ने 3,22,882 वोट हासिल किए और अमरपाल शर्मा को 2,14,835 वोटों के रिकॉर्ड अंतर से हराया।

### 5. अमरपाल शर्मा ने तीनों चुनावों में किन पार्टियों से चुनाव लड़ा?
अमरपाल शर्मा ने 2012 में बीएसपी, 2017 में कांग्रेस और 2022 में समाजवादी पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ा था।

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