# उत्तर प्रदेश में 200 सीटों पर ताल ठोकने की तैयारी में असदुद्दीन ओवैसी, सपा और कांग्रेस की बढ़ी बेचैनी

> असदुद्दीन ओवैसी ने उत्तर प्रदेश में अकेले 200 सीटों पर प्रत्याशी उतारने की योजना बनाई है, जबकि श्रावस्ती में जनसभा के दौरान उन्होंने खुद को बीवी पगलू बताते हुए विरोधी दलों पर तीखा तंज कसा।

**Type:** article · **Category:** उत्तर प्रदेश · **Published:** 2026-10-06 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/uttar-pradesh/uttar-pradesh-men-200-siton-para-tala-thokane-ki-taiyari-men-asaduddin-owaisi-sp-aura-congress-ki-barhi-bechaini-44156 · **Language:** Hindi
**Tags:** असदुद्दीन ओवैसी, अखिलेश यादव, उत्तर प्रदेश चुनाव, सपा, कांग्रेस, उपचुनाव

चार राज्यों में एक लोकसभा और पांच विधानसभा सीटों पर उपचुनाव के लिए मतदान की प्रक्रिया पूरी हुई, जहां मतदाताओं ने बढ़-चढ़कर मतदान केंद्रों का रुख किया। पश्चिम बंगाल के नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा क्षेत्रों में हुई वोटिंग को लेकर खासा राजनीतिक शोर सुनाई दिया। इस सियासी हलचल के बीच मुख्यमंत्री ममता बनर्जी चुनावी दृश्य से पूरी तरह दूर रहीं, जबकि कांग्रेस के साथ-साथ खुद को बंगाल का ओवैसी बताने वाले नेता हुमायूं कबीर ने मतदान में गड़बड़ी और वोट लूट के आरोप लगाते हुए दोबारा चुनाव कराने की मांग उठाई। उधर दूसरी तरफ, उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी का मुकाबला करने का दावा कर रहीं समाजवादी पार्टी और कांग्रेस चुनावी तालमेल को लेकर आपसी खींचतान में उलझी नजर आ रही हैं। दिल्ली में भी राहुल गांधी और विपक्षी गठबंधन के घटक दल वोट चोरी के आरोपों को लेकर लगातार विरोध दर्ज करा रहे हैं।

## उत्तर प्रदेश में असदुद्दीन ओवैसी की 200 सीटों पर तैयारी
विपक्षी दलों के इस आंतरिक गतिरोध के बीच ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने उत्तर प्रदेश की सियासत में अपनी रणनीति को नई धार देनी शुरू कर दी है। राज्यसभा चुनाव के घटनाक्रम के बाद अखिलेश यादव पहले से ही दबाव में दिखाई दे रहे थे, और अब ओवैसी की इस नई तैयारी ने समाजवादी पार्टी के रणनीतिकारों की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। दरअसल असदुद्दीन ओवैसी ने समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के सामने गठबंधन को लेकर जो समय सीमा रखी थी, वह 2 अक्टूबर को समाप्त हो चुकी है। उस मियाद के बीत जाने के बाद अब उनकी पार्टी ने राज्य में अपने दम पर चुनावी मैदान में उतरने का खाका खींचा है।

तैयार की गई रणनीति के मुताबिक, असदुद्दीन ओवैसी उत्तर प्रदेश की कम से कम 200 विधानसभा सीटों पर अपने उम्मीदवार खड़े करने की योजना बना रहे हैं। इन 200 सीटों में से करीब 100 सीटें ऐसी हैं जो मुस्लिम बहुल आबादी वाले क्षेत्रों में आती हैं। इस कदम का सीधा असर उन इलाकों के पारंपरिक वोट समीकरणों पर पड़ सकता है, जहां समाजवादी पार्टी अपनी मजबूत पकड़ का दावा करती रही है।

## टिकट से वंचित नेताओं पर नजर और गठबंधन की नई पेशकश
असदुद्दीन ओवैसी का इरादा उन मुस्लिम चेहरों को अपनी पार्टी का टिकट थमाने का है, जिन्हें समाजवादी पार्टी की तरफ से दरकिनार किया जाएगा या जिनका टिकट अखिलेश यादव काटेंगे। ऐसे असंतुष्ट नेताओं को अपने पाले में लाकर मजलिस चुनावी लड़ाई को त्रिकोणीय बनाने की कोशिश में है। हालांकि इस व्यापक चुनावी तैयारी के बीच ओवैसी ने एक बार फिर अखिलेश यादव के सामने गठबंधन का विकल्प खुला रखा है। इसके साथ ही उन्होंने स्पष्ट शब्दों में यह चेतावनी भी दी है कि उनके इस समझौते के प्रस्ताव को किसी भी रूप में उनकी कमजोरी समझने की भूल न की जाए।

## श्रावस्ती की रैली में इंस्टाग्राम टिप्पणियों पर तंज
श्रावस्ती में आयोजित एक जनसभा को संबोधित करते हुए असदुद्दीन ओवैसी ने अपने चिरपरिचित अंदाज में विपक्ष और सत्ता पक्ष दोनों पर निशाना साधा। उन्होंने सोशल मीडिया मंच इंस्टाग्राम पर आने वाले कमेंट्स का उल्लेख करते हुए खुद को 'बीवी पगलू' करार दिया। ओवैसी ने इस टिप्पणी का सहारा लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव पर तीखे राजनीतिक हमले किए।

जनसभा में मौजूद समर्थकों से मुखातिब होते हुए ओवैसी ने कहा कि इंस्टाग्राम पर लोग उनसे अक्सर कहते हैं कि वह अपनी पत्नी के बारे में बहुत ज्यादा बात करते हैं। ओवैसी ने कहा कि किसी ने लिखा कि ओवैसी बीवी पगलू हो चुके हैं। इस पर उन्होंने मंच से ही लोगों से पूछा कि यहां कितने लोगों की शादी हो चुकी है, वे हाथ उठाएं। इसके बाद उन्होंने कहा, "हम यकीनन बीवी पगलू हैं और हम यह बात फख्र से कहते हैं।" उन्होंने आगे तंज कसते हुए कहा कि वे खुद अपनी पत्नी के लिए पगलू भले हों, लेकिन वे मोदी, बाबा और अखिलेश की तरह उत्तर प्रदेश और पूरे देश की जनता को पगलू नहीं बनाते हैं।

## इसका आप पर असर
उत्तर प्रदेश की राजनीति में ओवैसी के 200 सीटों पर उतरने से विपक्षी वोटों के विभाजन और चुनावी गणित पर बड़ा प्रभाव पड़ेगा।

- **उत्तर प्रदेश के मतदाताओं पर प्रभाव:** राज्य की 100 मुस्लिम बहुल सीटों पर मतदाताओं के सामने अब सपा और बसपा के अलावा मजलिस का भी खुला विकल्प रहेगा। इससे कई प्रमुख सीटों पर चुनावी मुकाबला त्रिकोणीय या बहुकोणीय रूप ले सकता है।
- **टिकट के दावेदारों के लिए असर:** प्रमुख विपक्षी दलों से टिकट न पाने वाले स्थानीय नेताओं को अपनी उम्मीदवारी बचाने के लिए नया राजनीतिक मंच मिल सकेगा। वे नेता बगावत कर सीधे चुनावी मुकाबले में बने रहने का प्रयास करेंगे।
- **विपक्षी गठबंधन की रणनीति पर दबाव:** सपा और कांग्रेस पर सीटों के तालमेल को जल्द से जल्द अंतिम रूप देने का दबाव बढ़ गया है। यदि दोनों दल सहमति नहीं बना पाते हैं तो भाजपा विरोधी मतों में बिखराव तय माना जा रहा है।
- **राष्ट्रीय राजनीतिक माहौल पर असर:** उपचुनावों में धांधली के आरोपों के बीच विपक्षी एकता की दरारें राष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा का विषय बनेंगी। इससे आने वाले बड़े चुनावी मुकाबलों से पहले विपक्षी मोर्चे की एकजुटता पर सवाल खड़े होंगे।

## ऐसा क्यों हुआ
यह राजनीतिक टकराव गठबंधन की समय सीमा समाप्त होने और विपक्षी दलों के बीच सीटों के तालमेल पर सहमति न बनने के कारण उत्पन्न हुआ है।

- **गठबंधन की मियाद खत्म होना:** असदुद्दीन ओवैसी ने सपा और कांग्रेस को चुनावी तालमेल के लिए 2 अक्टूबर तक की समय सीमा तय की थी। इस मियाद के बीत जाने के बाद भी कोई सकारात्मक जवाब न मिलने पर पार्टी ने स्वतंत्र रूप से आगे बढ़ने का फैसला किया।
- **वोट बैंक और सीटों का संघर्ष:** उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी अपने अल्पसंख्यक जनाधार पर किसी अन्य दल की हिस्सेदारी स्वीकार करने से बचती रही है। इसी राजनीतिक खींचतान के चलते सपा और कांग्रेस के बीच भी आंतरिक गतिरोध बना हुआ है।
- **उपचुनावों के दौरान उभरता तनाव:** हाल ही में चार राज्यों की पांच विधानसभा और एक लोकसभा सीट पर हुए उपचुनावों में वोट चोरी और अनियमितताओं के आरोपों ने राजनीतिक तनाव को और बढ़ा दिया। इससे विपक्षी खेमों के बीच आपसी अविश्वास और गहरा गया।

## सवाल-जवाब

### 1. असदुद्दीन ओवैसी उत्तर प्रदेश में कितनी सीटों पर चुनाव लड़ने की योजना बना रहे हैं?
ओवैसी कम से कम 200 विधानसभा सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारने की तैयारी कर रहे हैं, जिनमें से लगभग 100 सीटें मुस्लिम बहुल क्षेत्रों की हैं।

### 2. सपा और कांग्रेस के साथ गठबंधन के लिए ओवैसी की समय सीमा क्या थी?
ओवैसी ने चुनावी गठबंधन के लिए 2 अक्टूबर की डेडलाइन तय की थी, जो बिना किसी समझौते के समाप्त हो गई।

### 3. ओवैसी ने किन नेताओं को टिकट देने की बात कही है?
ओवैसी उन मुस्लिम नेताओं को अपनी पार्टी से चुनावी मैदान में उतारने की योजना बना रहे हैं, जिनका टिकट अखिलेश यादव काटेंगे।

### 4. श्रावस्ती की जनसभा में ओवैसी ने किन नेताओं पर निशाना साधा?
ओवैसी ने सोशल मीडिया टिप्पणियों का हवाला देते हुए नरेंद्र मोदी, योगी आदित्यनाथ और अखिलेश यादव पर तीखा हमला बोला।

### 5. हालिया उपचुनाव किन-किन सीटों और राज्यों में संपन्न हुए?
चार राज्यों में एक लोकसभा और पांच विधानसभा सीटों पर उपचुनाव हुए, जिनमें बंगाल की नंदीग्राम और रेजीनगर सीटें प्रमुख चर्चा में रहीं।

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