उत्तर प्रदेश में आधुनिक खेती: मात्र 400 रुपये में ड्रोन से हो रहा फसलों का छिड़काव उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले में किसान इफको के सहयोग से खेतों में मात्र 400 रुपये प्रति एकड़ की दर पर ड्रोन से छिड़काव करा रहे हैं, जिससे समय और फसलों की काफी बचत हो रही है। उत्तर प्रदेश के कृषि परिदृश्य में आधुनिक तकनीक के प्रवेश से एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। बहराइच जिले के प्रगतिशील किसान अब फसलों की देखरेख के लिए पुरानी और अत्यधिक मेहनत वाली विधियों के बजाय डिजिटल ड्रोन तकनीक को अपना रहे हैं। खेतों में रासायनिक दवाओं और पोषक तत्वों के छिड़काव के लिए इस्तेमाल हो रहे इन आधुनिक उड़ने वाले उपकरणों (ड्रोन) की मदद से न केवल किसानों के कीमती समय की बचत हो रही है, बल्कि इससे फसलों को होने वाले प्रत्यक्ष नुकसान और खेती की कुल लागत में भी भारी गिरावट दर्ज की गई है। इस नई कृषि तकनीक ने पारंपरिक खेती के तरीके को पूरी तरह से बदल दिया है। आसमान से छिड़काव: समय और धन की अभूतपूर्व बचत किसान भाई इफको के माध्यम से अपने खेतों में इस उन्नत ड्रोन सेवा का संचालन बेहद आसानी से करवा सकते हैं। इस क्षेत्र में ड्रोन संचालन का जिम्मा संभाल रहे ऑपरेटर भीष्म पितामह के अनुसार, ड्रोन के माध्यम से खेतों में पोषक तत्वों का छिड़काव करने का शुल्क महज 400 रुपये प्रति एकड़ तय किया गया है। यदि इसकी तुलना पारंपरिक तरीकों से की जाए, तो पहले हाथ से या पीठ पर भारी मशीनें लादकर छिड़काव करने में किसानों का पूरा दिन और अत्यधिक शारीरिक श्रम नष्ट हो जाता था। इसके विपरीत, यह आधुनिक ड्रोन केवल 4 से 5 मिनट के भीतर ही पूरे 1 एकड़ खेत में दवा का छिड़काव सफलतापूर्वक संपन्न कर देता है। दवा का घोल तैयार करने से लेकर उड़ान की पूरी प्रक्रिया को समाप्त करने में कुल मिलाकर मात्र 10 से 15 मिनट का समय लगता है, जिससे किसानों का श्रम और समय दोनों बचता है। खड़ी फसल की सुरक्षा और भूमि की उर्वरता का संरक्षण हवाई छिड़काव की यह अनूठी तकनीक फसलों और खेतों की मिट्टी दोनों के लिए ही अत्यंत गुणकारी साबित हो रही है। जब कोई मजदूर या किसान हाथ से छिड़काव करने के उद्देश्य से घने खेतों के भीतर प्रवेश करता है, तो उसके कदमों के नीचे दबकर कई नाजुक पौधे टूट जाते हैं, जिससे फसल का नुकसान होता है। चूंकि ड्रोन हवा में ऊंचाई पर रहकर अपना काम करता है, इसलिए पौधों को छूने की नौबत ही नहीं आती और पूरी फसल एकदम सुरक्षित बची रहती है। इसके अतिरिक्त, ड्रोन के नोजल से निकलने वाली फुहारें इतनी महीन और सूक्ष्म होती हैं कि दवा सीधे और समान रूप से पत्तों पर फैल जाती है। इसके परिणामस्वरूप दवा की कुल खपत लगभग आधी रह जाती है। वर्तमान सीजन में धान की फसल अपनी गर्भावस्था यानी बालियां आने के संवेदनशील चरण में है। इस दौरान फसलों को विभिन्न रोगों से बचाने और उनका स्वास्थ्य बनाए रखने के लिए खेतों में नैनो यूरिया, पोटाश 0-50-30 और बोरॉन का विशेष छिड़काव किया जा रहा है। आमतौर पर पारंपरिक यूरिया के अत्यधिक उपयोग से फसलें बहुत ज्यादा हरी हो जाती हैं, जिससे उनमें कीट और रोग लगने की संभावना काफी बढ़ जाती है, परंतु नैनो यूरिया का नियंत्रित छिड़काव इस समस्या से पूरी सुरक्षा प्रदान करता है। मिट्टी की गुणवत्ता के लिहाज से भी यह तकनीक उत्कृष्ट है, क्योंकि खेतों में इंसानों के बार-बार न जाने से मिट्टी का भारी दबाव नहीं होता, जिससे वह कड़क होने से बच जाती है और उसकी प्राकृतिक उर्वरता बनी रहती है। तकनीकी विनिर्देश और प्रतिकूल मौसम में सावधानियां इस कार्य में प्रयुक्त होने वाले कृषि ड्रोन में 10 लीटर की धारिता वाली एक तरल टंकी लगी होती है, जो कि पूरे 1 एकड़ क्षेत्र में घोल के छिड़काव के लिए पर्याप्त मानी जाती है। इस ड्रोन को ऊर्जा प्रदान करने के लिए शक्तिशाली लिथियम बैटरी का उपयोग किया जाता है। इसकी एक सिंगल बैटरी को पूरा चार्ज करने पर लगभग 3 टंकी यानी कुल 3 एकड़ कृषि भूमि पर बिना रुके छिड़काव किया जा सकता है। मौसम के प्रभाव पर ऑपरेटर ने स्पष्ट किया कि इन ड्रोनों में अत्यधिक सुरक्षित वॉटरप्रूफ मोटर लगी होती है, जिसके कारण ये हल्की बूंदाबांदी में भी बिना किसी तकनीकी खराबी के लगातार काम कर सकते हैं। हालांकि, भारी बारिश होने की स्थिति में नैनो यूरिया और नैनो डीएपी जैसी संवेदनशील उर्वरकों के पानी के साथ बह जाने का गंभीर खतरा रहता है। इन पोषक तत्वों का पौधों पर सर्वश्रेष्ठ प्रभाव सुनिश्चित करने के लिए यह आवश्यक है कि छिड़काव किए जाने के बाद कम से कम 3 से 4 घंटे तक मौसम पूरी तरह से शुष्क और साफ बना रहे। इलाके के किसान इस आधुनिक सेवा को कैसे प्राप्त करें बहराइच जनपद और उसके आस-पास के क्षेत्रों में रहने वाले किसानों के लिए यह तकनीकी सुविधा प्राप्त करना अत्यंत सरल है। नानपारा, महसी, कैसरगंज और पड़ोसी गोंडा जिले की सीमा से सटे हुए ग्रामीण क्षेत्रों के किसान अपने खेतों में इस ड्रोन तकनीक का लाभ उठाने के लिए पूरी तरह स्वतंत्र हैं। इसके लिए उन्हें केवल अपने सबसे नजदीकी इफको सहकारी केंद्र पर जाकर संपर्क स्थापित करना होगा। वहां के अधिकारियों के साथ समन्वय करके वे बहुत ही कम खर्च पर अपने खेतों के लिए हवाई छिड़काव की इस बुकिंग को आसानी से पंजीकृत करा सकते हैं और अपने कृषि उत्पादन को बढ़ा सकते हैं। इसका आप पर असर इस तकनीक के अपनाने से किसानों के कृषि प्रबंधन और फसलों की उत्पादन लागत पर सीधा और सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। • उत्तर प्रदेश में: बहराइच, गोंडा और आस-पास के किसान बहुत कम खर्च पर फसल सुरक्षा सुनिश्चित कर सकते हैं। वे महज 400 रुपये प्रति एकड़ में आधुनिक तकनीक का लाभ ले सकते हैं। • देशभर में: अन्य राज्यों के किसान भी इस सफल मॉडल से सीखकर पारंपरिक तरीकों की तुलना में 50% तक दवाओं की बचत कर सकते हैं। हवाई छिड़काव से खड़ी फसल के नुकसान को पूरी तरह से टाला जा सकता है। • आर्थिक लाभ: दवा और यूरिया की बर्बादी आधी हो जाएगी, जिससे फसल उत्पादन की लागत काफी घट जाएगी। • समय प्रबंधन: घंटों का काम मिनटों में पूरा होने से किसान अपना बहुमूल्य समय अन्य जरूरी कृषि कार्यों में लगा सकेंगे। ऐसा क्यों हुआ कृषि क्षेत्र में ड्रोन तकनीक के इस बढ़ते चलन के पीछे लगातार बढ़ रही मजदूरी दर, श्रम की कमी और आधुनिक उर्वरकों का विकास मुख्य कारण हैं। • मजदूरी और समय की कमी: पारंपरिक रूप से खेतों में छिड़काव के लिए मजदूरों की कमी और बढ़ते श्रम शुल्कों के कारण किसानों को एक सस्ता और त्वरित विकल्प तलाशना पड़ा। • इफको की पहल: सहकारी संस्थाओं द्वारा नैनो यूरिया और नैनो डीएपी जैसी तरल खादों का विकास किया गया है, जो ड्रोन से छिड़काव के लिए सर्वाधिक अनुकूल हैं। • फसल की सुरक्षा की मांग: धान जैसी घनी फसलों में गर्भावस्था के दौरान अंदर घुसकर छिड़काव करने से होने वाले बड़े नुकसान को रोकने के लिए हवाई तकनीक एकमात्र प्रभावी समाधान बनकर उभरी। सवाल-जवाब 1. बहराइच में ड्रोन से छिड़काव का कितना खर्च आता है? बहराइच जिले में ड्रोन से छिड़काव का खर्च मात्र 400 रुपये प्रति एकड़ तय किया गया है। 2. ड्रोन से एक एकड़ खेत में छिड़काव करने में कितना समय लगता है? ड्रोन को एक एकड़ खेत में छिड़काव करने में केवल 4 से 5 मिनट लगते हैं। संपूर्ण घोल बनाने और छिड़काव करने की प्रक्रिया 10 से 15 मिनट में पूरी हो जाती है। 3. ड्रोन की तकनीकी क्षमता क्या है? इस ड्रोन में 10 लीटर की तरल टंकी होती है जो एक एकड़ के लिए पर्याप्त है। इसकी बैटरी को एक बार चार्ज करने पर 3 एकड़ खेत में छिड़काव किया जा सकता है। 4. क्या खराब मौसम या बारिश में ड्रोन काम कर सकता है? वॉटरप्रूफ मोटर होने के चलते ड्रोन हल्की बूंदाबांदी में उड़ सकता है। हालांकि, भारी बारिश होने पर यूरिया बह जाने की आशंका रहती है, इसलिए छिड़काव के बाद 3 से 4 घंटे सूखा मौसम जरूरी है। 5. बहराइच के कौन से इलाकों के किसान इस सेवा का लाभ ले सकते हैं? नानपारा, महसी, कैसरगंज और गोंडा सीमा से सटे इलाकों के किसान नजदीकी इफको केंद्र से संपर्क कर इस ड्रोन सेवा का लाभ उठा सकते हैं। प्रेरणा और सबक बहराइच के किसानों और ड्रोन ऑपरेटर भीष्म पितामह की यह सफलता कृषि क्षेत्र में आधुनिक सोच अपनाने की प्रेरणा देती है। • बदलाव को स्वीकार करना: पारंपरिक तरीकों को छोड़कर तकनीक को अपनाना ही प्रगति की पहली सीढ़ी है, जैसा कि इन स्थानीय किसानों ने कर दिखाया। • कम खर्च में बड़ी कुशलता: भीष्म पितामह की तरह ग्रामीण युवा ड्रोन ऑपरेटर बनकर न केवल स्वरोजगार पा सकते हैं, बल्कि किसानों को सस्ती सेवाएं भी दे सकते हैं। • संसाधनों का सही उपयोग: नैनो तकनीक और ड्रोन का सही तालमेल दिखाकर किसानों ने यह साबित किया है कि वैज्ञानिक तरीकों से खेती को अधिक लाभदायक बनाया जा सकता है। https://trendkia.com/uttar-pradesh/uttar-pradesh-men-adhunika-kheti-matra-400-rupaye-men-drone-se-ho-raha-phasalon-ka-chhirakava-32230 TrendKia — Har trend, sabse pehle.