उत्तर प्रदेश में तीन दशक तक सत्ता से बाहर रहेगी समाजवादी पार्टी, केशव प्रसाद मौर्य का दावा डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने अखिलेश यादव के हमलों पर पलटवार करते हुए कहा कि 2027 में बीजेपी फिर सरकार बनाएगी और अगले 30 साल तक सपा की वापसी नहीं होगी। उत्तर प्रदेश की कानून-व्यवस्था को लेकर समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव द्वारा उठाए गए सवालों पर राज्य के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कड़ा पलटवार किया है। केशव प्रसाद मौर्य ने स्पष्ट किया कि 2012 से 2017 के दौरान रहे समाजवादी पार्टी के शासनकाल की समीक्षा प्रदेश की जनता पहले ही कर चुकी है। उन्होंने विश्वास जताया कि वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी भारी बहुमत के साथ राज्य में तीसरी बार अपनी सरकार बनाने जा रही है और अगले 30 वर्षों तक सपा सत्ता में वापसी नहीं कर पाएगी। कानून-व्यवस्था और समीक्षा की मांग पर पलटवार सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने मांग उठाई थी कि केंद्रीय गृह मंत्री को उत्तर प्रदेश की मौजूदा कानून-व्यवस्था की समीक्षा करनी चाहिए। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि सपा शासनकाल के दौरान प्रदेश में जो अपराध, गुंडागर्दी, माफियागिरी और दंगे देखने को मिले थे, उसका मूल्यांकन जनता भली-भांति कर चुकी है। गृह मंत्री ने भी इसकी समीक्षा काफी पहले पूरी कर ली थी। मौर्य के अनुसार, उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी की सरकार अंगद के पांव की तरह मजबूती से टिकी हुई है और आगे भी इसी तरह टिकी रहेगी। सत्ता से हटाने के दावों पर तंज अखिलेश यादव के उस बयान पर, जिसमें उन्होंने पहले राज्य और फिर केंद्र की सत्ता से बीजेपी को हटाने की बात कही थी, उपमुख्यमंत्री ने तीखा कटाक्ष किया। उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव मुंगेरीलाल के हसीन सपने देख रहे हैं और उन्हें ये सपने अपने मित्र राहुल गांधी को भी दिखाने चाहिए। मौर्य ने जोर देकर कहा कि न तो देश में राहुल गांधी की वापसी होने वाली है और न ही उत्तर प्रदेश में अखिलेश यादव सत्ता में आने वाले हैं। उन्होंने कहा कि भाजपा पहले भी थी, आज भी है और भविष्य में भी मजबूती से बनी रहेगी। भगवान राम पर टिप्पणी और चुनावी जवाब सपा के पूर्व सांसद एस. टी. हसन द्वारा भगवान राम के संदर्भ में दिए गए विवादित बयान पर भी केशव प्रसाद मौर्य ने अपनी बात रखी। उन्होंने आरोप लगाया कि समाजवादी पार्टी राम की नहीं बल्कि रामद्रोहियों की पार्टी बन चुकी है। मौर्य ने कहा कि सपा के किसी नेता की ओर से इस प्रकार का बयान सामने आने पर उन्हें कोई अचरज नहीं होता। हालांकि, 2027 के विधानसभा चुनाव में रामभक्त और राष्ट्रभक्त मतदाता इसका पूरा हिसाब चुकता करेंगे। उन्होंने कहा कि जनता सपा को उसकी वास्तविक स्थिति समझाएगी और चुनावी मुकाबले में उसकी साइकिल पंचर कर सैफई वापस भेज देगी। नागरिकता और वोटर लिस्ट पर सवाल का उत्तर अखिलेश यादव द्वारा चुनाव आयोग की निष्पक्षता और नागरिकता की मान्यता पर उठाए गए सवालों का जवाब देते हुए उपमुख्यमंत्री ने कानूनी स्थिति साफ की। उन्होंने कहा कि नागरिकता का प्रमाणपत्र चुनाव आयोग जारी नहीं करता, बल्कि यह जिम्मेदारी देश के गृह मंत्रालय के पास होती है। एक सांसद होने के नाते अखिलेश यादव को इस सामान्य नियम की जानकारी अवश्य होनी चाहिए। मौर्य ने आरोप लगाया कि जो लोग घुसपैठियों के साथ मिलकर मतदाता सूची में गड़बड़ी पैदा करने और धांधली करने का प्रयास कर रहे हैं, उनकी साजिशें अब सफल नहीं होने दी जाएंगी। उल्लेखनीय है कि हाल ही में एमएलसी चुनाव के नतीजों पर अखिलेश यादव ने टिप्पणी करते हुए कहा था कि बीजेपी केवल पांच सीटों पर नहीं, बल्कि 50 जिलों में पराजित हुई है। इसका आप पर असर इस राजनीतिक बयानबाजी से उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर मुख्य दलों के बीच रणनीतिक टकराव और तेज हो गया है। • उत्तर प्रदेश में: राजनीतिक दलों के बीच कानून-व्यवस्था और मतदाता सूची को लेकर बयानबाजी सीधे प्रशासनिक मुद्दों पर केंद्रित हो रही है। आम नागरिकों के लिए प्रशासनिक जवाबदेही और मतदाता सत्यापन से जुड़े नियमों पर नजर रखना जरूरी रहेगा। • भारत में: राष्ट्रीय स्तर पर विपक्षी गठबंधन और सत्तारूढ़ दल के बीच तीखे आरोप-प्रत्यारोप नीतिगत विमर्श को प्रभावित करेंगे। संसद और आगामी चुनावी मंचों पर नागरिकता और संवैधानिक संस्थाओं की भूमिका पर चर्चा और तेज होगी। • मतदाताओं के लिए: दोनों दलों की ओर से कानून-व्यवस्था और सुशासन के दावों की सीधी तुलना सामने आ रही है। स्थानीय स्तर पर नागरिक दोनों कार्यकाल के विकास और सुरक्षा रिकॉर्ड का स्वयं मूल्यांकन कर सकेंगे। • राजनीतिक समीकरण: आगामी 2027 विधानसभा चुनाव के लिए संगठनात्मक तैयारियां और गठबंधन की लामबंदी अभी से तेज होने के संकेत मिल रहे हैं। इससे जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं की सक्रियता और स्थानीय जनसंपर्क अभियानों में तेजी आएगी। ऐसा क्यों हुआ यह राजनीतिक टकराव समाजवादी पार्टी प्रमुख द्वारा कानून-व्यवस्था और प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर उठाए गए सवालों के जवाब में पैदा हुआ है। • कानून-व्यवस्था पर सवाल: सपा मुखिया अखिलेश यादव ने राज्य में अपराध की स्थिति का हवाला देते हुए केंद्रीय गृह मंत्री से समीक्षा की मांग की थी। इसके जवाब में सत्ता पक्ष ने पूर्ववर्ती सरकार के आपराधिक रिकॉर्ड को मुख्य मुद्दा बनाया। • संस्थागत क्षेत्राधिकार पर विवाद: अखिलेश यादव द्वारा चुनाव आयोग और नागरिकता को लेकर की गई टिप्पणी के बाद संवैधानिक नियमों पर बहस छिड़ गई। उपमुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि नागरिकता का दायित्व गृह मंत्रालय के अधीन आता है। • हालिया चुनावी परिणाम: राज्य में हाल ही में संपन्न हुए एमएलसी चुनावों के परिणामों को लेकर दोनों पक्षों के बीच पहले से तनाव बना हुआ था। दोनों दल इन परिणामों को अपने-अपने पक्ष में भुनाने का लगातार प्रयास कर रहे हैं। सवाल-जवाब 1. केशव प्रसाद मौर्य ने 2027 के चुनाव को लेकर क्या दावा किया? केशव प्रसाद मौर्य ने दावा किया कि 2027 में भाजपा प्रचंड बहुमत के साथ तीसरी बार सरकार बनाएगी और अगले 30 साल तक सपा सत्ता में नहीं आएगी। 2. सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने गृह मंत्री से क्या मांग की थी? अखिलेश यादव ने मांग की थी कि केंद्रीय गृह मंत्री को उत्तर प्रदेश की कानून-व्यवस्था की समीक्षा करनी चाहिए। 3. नागरिकता के सवाल पर उपमुख्यमंत्री ने क्या स्पष्टीकरण दिया? उपमुख्यमंत्री ने बताया कि नागरिकता का प्रमाणपत्र चुनाव आयोग नहीं बल्कि केंद्रीय गृह मंत्रालय जारी करता है। 4. भगवान राम को लेकर आए बयान पर क्या प्रतिक्रिया दी गई? मौर्य ने कहा कि 2027 के चुनाव में रामभक्त और राष्ट्रभक्त मतदाता सपा का पूरा हिसाब करेंगे और जनता उसे उसकी हैसियत दिखाएगी। https://trendkia.com/uttar-pradesh/uttar-pradesh-men-tina-dashaka-taka-satta-se-bahara-rahegi-samajwadi-party-keshav-prasad-maurya-ka-dava-53926 TrendKia — Har trend, sabse pehle.