# उत्तर प्रदेश राज्यसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी नहीं उतारेगी अतिरिक्त प्रत्याशी, अखिलेश यादव ने 403 सीटों के लक्ष्य का दिया संदेश

> उत्तर प्रदेश में राज्यसभा की 10 सीटों के लिए नामांकन के अंतिम दिन अखिलेश यादव ने स्पष्ट संकेत दिया कि समाजवादी पार्टी तीसरा उम्मीदवार मैदान में नहीं उतारेगी।

**Type:** article · **Category:** उत्तर प्रदेश · **Published:** 2026-10-06 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/uttar-pradesh/uttar-pradesh-rajya-sabha-chunav-mein-samajwadi-party-nahin-utaregi-atirikt-pratyashi-akhilesh-yadav-ne-403-seeton-ke-lakshya-ka-d-43699 · **Language:** Hindi
**Tags:** राज्यसभा चुनाव, अखिलेश यादव, समाजवादी पार्टी, उत्तर प्रदेश राजनीति, राम गोपाल यादव, धनराज परिमल नाथवानी, भारतीय जनता पार्टी

उत्तर प्रदेश की 10 राज्यसभा सीटों के लिए जारी चुनावी प्रक्रिया के बीच समाजवादी पार्टी के संभावित अतिरिक्त प्रत्याशी को लेकर चल रही राजनीतिक अनिश्चितता अब समाप्त हो गई है। नामांकन के आखिरी दिन पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने सार्वजनिक मंच पर अपनी प्राथमिकताओं का संकेत देते हुए स्पष्ट किया कि उनका ध्यान केवल ऊपरी सदन की कुछ सीटों तक सीमित रहने के बजाय व्यापक विधानसभा स्तर पर केंद्रित है। सोशल मीडिया एक्स पर साझा किए गए अपने संदेश में उन्होंने संकेत दिया कि पार्टी की नजर अब तीन के बजाय पूरे चार सौ तीन विधानसभा क्षेत्रों पर टिकी है। इस बयान के सामने आते ही यह साफ समझा जाने लगा कि पार्टी इस बार तीसरे दावेदार को मैदान में उतारकर अतिरिक्त मुकाबला खड़ा करने के मूड में नहीं है।

## दो सीटों पर पहले ही पर्चा दाखिल कर चुके हैं प्रत्याशी
इस द्विवार्षिक चुनाव में राज्य की 10 सीटों में से सात पर भारतीय जनता पार्टी का संख्याबल पूरी तरह मजबूत दिखाई दे रहा है। दूसरी ओर, समाजवादी पार्टी ने अपने खाते की सुरक्षित सीटों पर पहले ही निर्णय ले लिया था। संगठन की ओर से वरिष्ठ नेता राम गोपाल यादव और रिलायंस इंडस्ट्रीज के अधिकारी धनराज परिमल नाथवानी को अधिकृत रूप से मैदान में उतारा गया। दोनों ही प्रत्याशी लखनऊ पहुंचकर अपने संबंधित नामांकन पत्र विधिवत जमा कर चुके हैं। इसके बाद से ही राजनीतिक गलियारों में कयास लगाए जा रहे थे कि क्या समाजवादी पार्टी किसी तीसरे नाम को भी पर्चा भरवाकर मुकाबले को रोचक बनाएगी।

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## नेताओं के बयानों से उपजी थीं तीसरे नाम की अटकलें
नामांकन की समयसीमा समाप्त होने से ठीक पहले पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं और प्रवक्ताओं के बयानों ने तीसरे उम्मीदवार की संभावनाओं को हवा दे दी थी। पार्टी प्रवक्ता फखरुल हसन चांद ने दावा किया था कि पर्याप्त समर्थन मिलने पर तीसरा दावेदार भी मैदान में आएगा और मंगलवार को अपना पर्चा दाखिल करेगा। हालांकि उन्होंने किसी व्यक्ति विशेष के नाम का खुलासा नहीं किया था। इससे पूर्व सांसद वीरेंद्र सिंह और विधायक रविदास मेहरोत्रा की ओर से भी इसी प्रकार के संकेत सार्वजनिक मंचों पर दिए गए थे। इन तमाम चर्चाओं के बीच अंतिम दिन अखिलेश यादव की स्पष्ट टिप्पणी ने सारी अटकलों पर विराम लगा दिया और यह तय कर दिया कि दल केवल दो घोषित प्रत्याशियों के साथ ही चुनाव प्रक्रिया में बना रहेगा।

## इसका आप पर असर
राज्यसभा चुनाव में तीसरे उम्मीदवार को न उतारने का यह निर्णय उत्तर प्रदेश की संसदीय राजनीति और चुनावी समीकरणों को सीधे प्रभावित करता है।

- **उत्तर प्रदेश में:** राजनीतिक जोड़-तोड़ और क्रास-वोटिंग की संभावना लगभग खत्म हो गई है। इससे बिना अतिरिक्त मतदान और टकराव के राज्यसभा सीटों का परिणाम तय समय पर स्पष्ट हो जाएगा।
- **भारत में:** संसद के उच्च सदन में विभिन्न दलों का संख्यात्मक संतुलन बिना किसी अप्रत्याशित उलटफेर के बना रहेगा। दोनों प्रमुख दलों के तय प्रत्याशी सुचारु रूप से संसद पहुंच सकेंगे।
- **पार्टी कार्यकर्ताओं के लिए:** समाजवादी पार्टी का प्राथमिक जोर अब स्थानीय विधानसभा क्षेत्रों और जमीनी संगठन को मजबूत करने पर रहेगा। नेता और कार्यकर्ता दीर्घकालिक चुनावी तैयारियों पर अपना ध्यान केंद्रित कर सकेंगे।
- **मतदाताओं के लिए:** प्रतिनिधियों के चयन की प्रक्रिया अनावश्यक राजनीतिक विवादों से मुक्त रहेगी। इससे विधायी प्रक्रियाओं में स्थिरता का संदेश जाता है।

## ऐसा क्यों हुआ
यह राजनीतिक कदम विधानसभा में दलों के मौजूदा संख्याबल और अनावश्यक जोखिम से बचने की व्यावहारिक रणनीति के तहत उठाया गया है।

- **संख्याबल की कमी:** भारतीय जनता पार्टी के पास सात सीटें जीतने का स्पष्ट बहुमत है और समाजवादी पार्टी केवल दो सीटें आसानी से जीत सकती है। तीसरे प्रत्याशी को जिताने के लिए पार्टी के पास आवश्यक विधायकों की संख्या पर्याप्त नहीं थी।
- **अनावश्यक टकराव टालना:** यदि तीसरा उम्मीदवार उतारा जाता तो क्रॉस-वोटिंग कराने के लिए भारी दबाव बनता। पार्टी नेतृत्व ने अपने विधायकों को सुरक्षित रखने और आंतरिक टूट के जोखिम से बचने के लिए इसे टालना बेहतर समझा।
- **विधानसभा पर दीर्घकालिक दृष्टि:** अखिलेश यादव ने स्पष्ट किया कि संगठन की वास्तविक ताकत 403 विधानसभा क्षेत्रों में है। पार्टी अल्पकालिक ऊपरी सदन के मुकाबले में ऊर्जा लगाने के बजाय भविष्य की चुनावी राजनीति पर ध्यान देना चाहती है।

## सवाल-जवाब

### 1. उत्तर प्रदेश में राज्यसभा की कितनी सीटों के लिए चुनाव हो रहा है?
उत्तर प्रदेश में राज्यसभा की 10 सीटों के लिए चुनाव की प्रक्रिया चल रही है।

### 2. समाजवादी पार्टी ने किन उम्मीदवारों को अधिकृत प्रत्याशी बनाया है?
पार्टी ने वरिष्ठ नेता राम गोपाल यादव और रिलायंस इंडस्ट्रीज के अधिकारी धनराज परिमल नाथवानी को अपना उम्मीदवार बनाया है।

### 3. अखिलेश यादव ने तीसरे प्रत्याशी को लेकर क्या संदेश दिया?
अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया पर कहा कि अब उनकी नजर तीन पर नहीं बल्कि चार सौ तीन सीटों पर है।

### 4. भारतीय जनता पार्टी के पास कितनी सीटें जीतने का संख्याबल है?
भारतीय जनता पार्टी के पास सीधे तौर पर सात सीटें जीतने के लिए पर्याप्त संख्याबल उपलब्ध है।

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