# उत्तर प्रदेश से संसद के उच्च सदन के लिए भाजपा के आठ प्रत्याशियों ने भरे पर्चे

> उत्तर प्रदेश में राज्यसभा की 10 सीटों पर सभी प्रत्याशियों का निर्विरोध निर्वाचन तय माना जा रहा है, जहां भाजपा के आठ प्रत्याशियों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मौजूदगी में पर्चे भरे।

**Type:** article · **Category:** उत्तर प्रदेश · **Published:** 2026-10-06 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/uttar-pradesh/uttar-pradesh-se-snsada-ke-uchcha-sadana-ke-lie-bjp-ke-atha-pratyashiyon-ne-bhare-parche-43851 · **Language:** Hindi
**Tags:** उत्तर प्रदेश, राज्यसभा चुनाव, भाजपा, योगी आदित्यनाथ, अखिलेश यादव, लखनऊ

लखनऊ में संसद के उच्च सदन की दस रिक्त सीटों के लिए चुनावी प्रक्रिया अपने निर्णायक पड़ाव पर पहुंच गई है। नामांकन के अंतिम दिन भारतीय जनता पार्टी के आठ नेताओं ने अपने आधिकारिक दस्तावेज निर्वाचन प्राधिकारी के समक्ष पेश किए। इस दौरान राज्य के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और संगठन के शीर्ष रणनीतिकार भी मौजूद रहे। नामांकन प्रक्रिया के बाद अब प्रदेश की सभी दस सीटों पर बिना किसी मतदान के सर्वसम्मत जीत की रूपरेखा लगभग साफ हो चुकी है।

## जातीय समीकरणों को साधते हुए मैदान में उतारे गए चेहरे
पार्टी की ओर से पर्चा दाखिल करने वालों में सामाजिक प्रतिनिधित्व को स्पष्ट रूप से प्राथमिकता दी गई है। अन्य पिछड़ा वर्ग से प्रदेश सरकार में काबीना मंत्री धर्मपाल सिंह, जो लोध समाज से आते हैं, उनके साथ प्रकाश पाल और कुर्मी समाज का प्रतिनिधित्व करने वालीं श्रुति गंगवार को स्थान मिला है। दलित समुदाय से विद्यासागर सोनकर तथा प्रियंका रावत को मौका दिया गया है। सामान्य वर्ग के अंतर्गत ब्राह्मण बिरादरी से राधाकांत ओझा और गोपी कृष्ण पांडे को टिकट दिया गया, जबकि क्षत्रिय समाज से राम प्रताप सिंह चौहान ने पर्चा भरा। सूची में दो महिला प्रतिनिधियों की मौजूदगी भी सांगठनिक संतुलन की रणनीति को दर्शाती है।

## दस्तावेजों की तकनीकी औपचारिकताएं और प्रक्रिया
निर्वाचन प्रक्रिया के संचालन की जिम्मेदारी संभाल रहे अधिकारी अजीत वर्मा ने बताया कि प्रत्येक प्रत्याशी ने अपने पर्चों के दो-दो प्रारूप पेश किए हैं। नियमानुसार हर प्रारूप पर दस विधायकों के प्रस्तावक के रूप में दस्तखत अनिवार्य थे, जिसे पूरा कर लिया गया है। इससे पहले समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ रणनीतिकार राम गोपाल यादव और रिलायंस इंडस्ट्रीज से जुड़े धनराज परिमल नाथवानी अपनी दावेदारी दर्ज करा चुके हैं। मंगलवार को प्रक्रिया की समयसीमा समाप्त होने के साथ ही यदि कोई अप्रत्याशित घटनाक्रम सामने नहीं आता, तो सभी दस उम्मीदवारों की जीत सुनिश्चित मानी जा रही है।

## सपा की रणनीति और सियासी बयानबाजी
चुनावी गणित को लेकर कयास लगाए जा रहे थे कि मुख्य विपक्षी दल तीसरा चेहरा उतारकर मुकाबले को रोचक बना सकता है। हालांकि समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया के माध्यम से इन अटकलों पर विराम लगा दिया। राजधानी दिल्ली में मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के विरुद्ध विपक्षी विरोध में भाग ले रहे अखिलेश यादव ने स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी तीन सीटों के फेर में पड़ने के बजाय राज्य विधानसभा की 403 सीटों के व्यापक लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित कर रही है।

इस रुख पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने दावा किया कि सपा ने अगले विधानसभा संग्राम से पहले ही पराजय स्वीकार कर ली है। वहीं नामांकन प्रक्रिया पूरी करने के बाद प्रकाश पाल ने कहा कि केवल भाजपा ही वास्तव में 'पीडीए' का सम्मान करती है। इससे पहले सभी आठों प्रत्याशी विधानभवन मार्ग स्थित प्रांतीय मुख्यालय पहुंचे थे, जहां उत्तर प्रदेश प्रभारी विनोद तावड़े सहित शीर्ष पदाधिकारियों से भेंट के उपरांत पारंपरिक ढोल-नगाड़ों की थाप के साथ वे नामांकन कक्ष के लिए रवाना हुए।

## इसका आप पर असर
उत्तर प्रदेश की दस सीटों पर निर्विरोध निर्वाचन से संसद के उच्च सदन में विधायी समीकरण और राज्य की राजनीति पर सीधा असर पड़ेगा।

- **भारत में:** संसद के उच्च सदन में नए सदस्यों के आने से केंद्र सरकार के विधायी एजेंडे और विधेयकों को पारित कराने में दलीय शक्ति संतुलन मजबूत होगा। इससे राष्ट्रीय स्तर पर विभिन्न नीतिगत फैसलों और संसदीय समितियों में प्रदेश का प्रतिनिधित्व बना रहेगा।
- **उत्तर प्रदेश में:** राज्य के विभिन्न सामाजिक और क्षेत्रीय वर्गों को संसद में प्रतिनिधित्व मिलने से स्थानीय मुद्दों को उच्च सदन में आवाज मिलेगी। साथ ही विधानसभा में बिना किसी टकराव के निर्वाचन संपन्न होने से सभी राजनीतिक दलों की ऊर्जा सीधे आगामी सांगठनिक अभियानों पर केंद्रित रहेगी।
- **मतदाताओं के लिए:** यह पूरी चुनावी प्रक्रिया केवल विधायकों के मतों पर आधारित अप्रत्यक्ष चुनाव है, इसलिए आम नागरिक को इसमें मतदान नहीं करना होता। मतदाता अपने निर्वाचित जन प्रतिनिधियों के माध्यम से संसद में जाने वाले इन चेहरों के संसदीय प्रदर्शन पर नजर रख सकते हैं।
- **राजनीतिक दलों के लिए:** बिना मतदान के फैसला तय होने से दोनों प्रमुख दलों के विधायकों के टूटने या क्रॉस वोटिंग का खतरा पूरी तरह टल गया है। दल अब सदन के गणित के आधार पर अपने भविष्य के गठबंधन और 2027 विधानसभा चुनाव की रणनीतियों पर काम कर सकेंगे।

## ऐसा क्यों हुआ
उत्तर प्रदेश में राज्यसभा की 10 सीटों पर चुनाव की स्थिति विधानसभा में मौजूदा दलीय ताकत और नामांकन के अंतिम दिन बने राजनीतिक समीकरणों के कारण पैदा हुई।

- **सीटों का दलीय गणित:** विधानसभा में मौजूदा संख्याबल के आधार पर आठ सीटें सत्ताधारी दल और दो सीटें अन्य प्रत्याशियों के खाते में जाना पहले से तय था। विधायकों की संख्या इतनी थी कि बिना अतिरिक्त उम्मीदवार उतारे सभी का जीतना गणितीय रूप से तय था।
- **विपक्ष द्वारा तीसरा प्रत्याशी न उतारना:** समाजवादी पार्टी ने अतिरिक्त प्रत्याशी नहीं उतारा क्योंकि उसके पास आवश्यक अतिरिक्त वोटों का अभाव था। पार्टी नेतृत्व ने टकराव टालते हुए अपना ध्यान आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों पर केंद्रित रखना उचित समझा।
- **नामांकन की अंतिम समयसीमा:** मंगलवार को पर्चे भरने की अंतिम तारीख होने के कारण केवल दस ही वैध दावेदार सामने आए, जिससे मतदान की नौबत नहीं आई। किसी निर्दलीय या अतिरिक्त उम्मीदवार के न होने से मुकाबला सीधे तौर पर निर्विरोध जीत में बदल गया।

## सवाल-जवाब

### 1. उत्तर प्रदेश से राज्यसभा के लिए भाजपा के कितने प्रत्याशियों ने पर्चा भरा?
भारतीय जनता पार्टी की तरफ से कुल आठ उम्मीदवारों ने अपने नामांकन पत्र दाखिल किए हैं।

### 2. भाजपा प्रत्याशियों के नामांकन के समय कौन-कौन प्रमुख नेता उपस्थित रहे?
नामांकन के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, पार्टी प्रभारी विनोद तावड़े और संगठन के अन्य वरिष्ठ नेता मौजूद थे।

### 3. उत्तर प्रदेश में राज्यसभा की कुल कितनी सीटों पर निर्वाचन हो रहा है?
प्रदेश में संसद के उच्च सदन की कुल 10 रिक्त सीटों के लिए यह निर्वाचन प्रक्रिया चल रही है।

### 4. सपा और अन्य खेमों से किन प्रमुख चेहरों ने पहले नामांकन किया था?
समाजवादी पार्टी के राम गोपाल यादव और रिलायंस इंडस्ट्रीज के अधिकारी धनराज परिमल नाथवानी पहले ही अपना पर्चा भर चुके हैं।

### 5. प्रत्येक प्रत्याशी ने नामांकन पत्र के कितने सेट जमा किए हैं?
निर्वाचन अधिकारी के अनुसार सभी उम्मीदवारों ने नामांकन पत्र के दो-दो सेट 10-10 विधायकों के हस्ताक्षरित प्रस्तावकों के साथ दाखिल किए हैं।

### 6. तीसरा उम्मीदवार न उतारने पर सपा प्रमुख ने क्या रुख अपनाया?
अखिलेश यादव ने स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी तीन सीटों के मुकाबले 403 विधानसभा सीटों के लक्ष्य पर ध्यान लगा रही है।

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