वाराणसी: घाट तक पहुंचा गंगा का उफान, आरती इस साल पांचवीं बार छत पर शिफ्ट वाराणसी में गंगा का जलस्तर 64 मीटर के पार जाने और दशाश्वमेध घाट की सीढ़ियों तक पानी पहुंचने के बाद गंगा आरती इस साल पांचवीं बार घाट से हटाकर छत पर कराई गई, जबकि प्रशासन ने नावों के संचालन पर रोक लगा दी है। वाराणसी में गंगा नदी का जलस्तर लगातार ऊपर की ओर बढ़ रहा है और इसका सीधा असर शहर के घाटों पर होने वाले धार्मिक कार्यक्रमों पर पड़ने लगा है। दशाश्वमेध घाट पर पानी अब सीढ़ियों तक आ गया है, ठीक उसी जगह जहां हर रोज शाम को हजारों श्रद्धालु मशहूर गंगा आरती देखने पहुंचते हैं। बढ़ते खतरे को भांपते हुए आयोजकों ने एक बार फिर आरती की जगह बदलने का फैसला किया और इस साल यह पांचवां मौका है जब आरती को घाट से हटाकर ऊंचाई पर कराया गया। छत पर शिफ्ट हुई आरती, फिर भी उमड़े श्रद्धालु दशाश्वमेध घाट पर गंगा सेवा निधि हर साल की तरह इस बार भी आरती का आयोजन करती है, लेकिन अब यह कार्यक्रम घाट की जगह गंगा सेवा निधि के दफ्तर की छत पर हो रहा है। सोमवार को भी घाट के आसपास श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखी गई, हालांकि पानी बढ़ने की वजह से आरती के लिए बचा हुआ स्थान लगातार छोटा होता जा रहा था। भीड़ ज्यादा और जगह कम होने की स्थिति में आयोजकों के पास छत पर शिफ्ट होने के अलावा कोई और रास्ता नहीं बचा था। गंगा सेवा निधि के अध्यक्ष सुशांत मिश्रा ने इस बदलाव की वजह बताते हुए कहा, "जगह छोटी पड़ रही थी, लेकिन भीड़ काफी हो रही थी।" उनका कहना है कि हर साल की तरह इस बार भी मां गंगा का जलस्तर बढ़ा है और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए घाट की जगह कार्यालय की छत पर आरती कराने का निर्णय लिया गया। 64 मीटर के पार गंगा का जलस्तर, नावों पर रोक प्रशासन भी गंगा के बढ़ते जलस्तर को लेकर सतर्क हो गया है। दशाश्वमेध क्षेत्र के एसीपी डॉ. अतुल अंजन त्रिपाठी के मुताबिक, जल पुलिस की रिपोर्ट के अनुसार 15 अगस्त यानी शनिवार सुबह गंगा का जलस्तर 64 मीटर के आंकड़े को पार कर गया था और इसमें लगातार तेजी से बढ़ोतरी हो रही थी। हालात को देखते हुए प्रशासन ने अगले आदेश तक गंगा नदी में नाव चलाने पर पाबंदी लगा दी है। घाटों पर निगरानी की व्यवस्था पहले से ज्यादा सख्त कर दी गई है और नाविकों को सुरक्षा से जुड़े नियमों का पालन करने को कहा गया है। साथ ही श्रद्धालुओं और घूमने आने वाले पर्यटकों को भी सलाह दी गई है कि वे गंगा के गहरे पानी की तरफ जाने से बचें। गौरतलब है कि यह इस पूरे सीजन में ऐसा पांचवां मौका है जब गंगा के जलस्तर में उतार-चढ़ाव की वजह से आरती की जगह बदलनी पड़ी है। हर बार पानी घाट की तरफ बढ़ने के बाद आयोजकों को अंतिम समय में इंतजाम बदलने पड़ते हैं, जिससे न सिर्फ आयोजन की तैयारी पर असर पड़ता है बल्कि श्रद्धालुओं को भी नई जगह ढूंढनी पड़ती है। इसके बावजूद आरती देखने आने वाले भक्तों की संख्या में कोई खास कमी नहीं आई है और लोग नई व्यवस्था के तहत भी बड़ी संख्या में जुट रहे हैं। इसका आप पर असर • भारत में: गंगा किनारे बसे शहरों में बारिश के मौसम में जलस्तर बढ़ने पर धार्मिक और सार्वजनिक आयोजनों की व्यवस्था में इसी तरह अचानक बदलाव हो सकते हैं, इसलिए घाट किनारे यात्रा या दर्शन की योजना बनाते समय स्थानीय प्रशासन की सलाह जरूर देखें। • वाराणसी में: दशाश्वमेध घाट पर आरती देखने जा रहे श्रद्धालुओं को अब गंगा सेवा निधि कार्यालय की छत पर जाना होगा, और नाव की सवारी फिलहाल पूरी तरह बंद है, इसलिए गहरे पानी के पास जाने से बचें। सवाल-जवाब 1. वाराणसी में गंगा आरती की जगह क्यों बदली गई? गंगा का बढ़ता पानी दशाश्वमेध घाट की सीढ़ियों तक पहुंच गया, जिससे आरती के लिए जगह बहुत कम पड़ गई थी। 2. अब गंगा आरती कहां हो रही है? अब यह आयोजन घाट की जगह गंगा सेवा निधि कार्यालय की छत पर कराया जा रहा है। 3. इस साल कितनी बार आरती की जगह बदली गई है? इस साल यह पांचवीं बार है जब गंगा आरती का स्थान बदला गया है। 4. गंगा का जलस्तर कितना ऊपर पहुंच गया है? एसीपी डॉ. अतुल अंजन त्रिपाठी के अनुसार जल पुलिस की रिपोर्ट में 15 अगस्त की सुबह जलस्तर 64 मीटर के पार पहुंच गया था। 5. क्या वाराणसी में गंगा में नाव चलाना अभी बंद है? हां, प्रशासन ने अगले आदेश तक नावों के संचालन पर रोक लगा दी है। 6. दशाश्वमेध घाट पर आरती कौन आयोजित करता है? यह आयोजन गंगा सेवा निधि द्वारा कराया जाता है, जिसके अध्यक्ष सुशांत मिश्रा ने छत पर शिफ्ट होने की पुष्टि की। 7. प्रशासन ने क्या सुरक्षा कदम उठाए हैं? घाटों पर निगरानी बढ़ाई गई है, नाविकों को सुरक्षा नियमों का पालन करने को कहा गया है और श्रद्धालुओं व पर्यटकों को गहरे पानी से दूर रहने की सलाह दी गई है। https://trendkia.com/uttar-pradesh/varanasi-ghata-taka-pahuncha-gnga-ka-uphana-arati-isa-sala-panchavin-bara-chhata-para-shiphta-17795 TrendKia — Har trend, sabse pehle.