# अमरोहा से हरिद्वार गंगा एक्सप्रेसवे के लिए भूमि रजिस्ट्री प्रक्रिया नवंबर से होगी शुरू, 52 गांवों का चयन

> अमरोहा और हरिद्वार के बीच प्रस्तावित 116.85 किलोमीटर लंबे नए गंगा एक्सप्रेसवे लिंक के लिए जमीन रजिस्ट्री का काम नवंबर से शुरू होने की संभावना है। इस परियोजना के दायरे में अमरोहा जिले के 52 गांव आ रहे हैं, जिससे धार्मिक पर्यटन और स्थानीय कारोबार को गति मिलेगी।

**Type:** article · **Category:** उत्तराखंड · **Published:** 2026-10-31 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/uttarakhand/amroha-se-haridwar-ganga-expressway-ke-lie-bhumi-rajistri-prakriya-navnbara-se-hogi-shuru-52-ganvon-ka-chayana-53836 · **Language:** Hindi
**Tags:** गंगा एक्सप्रेसवे, अमरोha, हरिद्वार, भूमि अधिग्रहण, सड़क परिवहन, उत्तर प्रदेश

अमरोहा और हरिद्वार के बीच यात्रा को तेज और सुगम बनाने की दिशा में प्रशासनिक स्तर पर बड़ी तैयारी शुरू हो चुकी है। प्रस्तावित अमरोहा-हरिद्वार गंगा एक्सप्रेसवे के निर्माण को गति देने के लिए जमीन अधिग्रहण की अंतिम औपचारिकताएं पूरी की जा रही हैं। राजस्व विभाग की अलग-अलग टीमें प्रभावित इलाकों में जाकर खेतों के दस्तावेज और किसानों के मालिकाना हक की गहन पड़ताल कर रही हैं। अधिकारियों को उम्मीद है कि अभिलेखों की जांच का काम पूरा होते ही नवंबर के महीने से किसानों से जमीन की रजिस्ट्री कराने का काम शुरू कर दिया जाएगा।

## परियोजना का रूट और अमरोहा का दायरा
इस पूरे एक्सप्रेसवे कॉरिडोर की कुल लंबाई 116.85 किलोमीटर तय की गई है। इस विस्तार में से लगभग 44 किलोमीटर लंबा मार्ग अमरोहा जिले की भौगोलिक सीमा के भीतर से गुजरेगा। यह संपर्क मार्ग प्रयागराज-मेरठ मुख्य गंगा एक्सप्रेसवे के मंगरौला टी-प्वाइंट से जुड़ेगा और वहां से सीधा हरिद्वार तक पहुंचेगा। इस सीधी सड़क कनेक्टिविटी के तैयार होने से अमरोहा के निवासियों को हरिद्वार पहुंचने के लिए एक वैकल्पिक और आधुनिक मार्ग मिलेगा। इससे दोनों धार्मिक और व्यावसायिक केंद्रों के बीच आवागमन का समय काफी घट जाएगा।

## दो तहसीलों के 52 गांवों में भूमि अधिग्रहण
सड़क निर्माण के लिए अमरोहा जिले की दो प्रमुख तहसीलों हसनपुर और धनौरा के कुल 52 गांवों को चिन्हित किया गया है। इन चिह्नित क्षेत्रों में हसनपुर तहसील के 17 गांव और धनौरा तहसील के 35 गांव शामिल किए गए हैं। जिला प्रशासन द्वारा प्राथमिक सर्वेक्षण का कार्य पहले ही संपन्न कराया जा चुका है और संबंधित क्षेत्रों के लिए सर्किल रेट भी प्रभावी कर दिए गए हैं। मुआवजे के वितरण और रजिस्ट्री के समय किसी विवाद से बचने के लिए अधिकारी जमीन की गाटा संख्या का विस्तृत सत्यापन कर रहे हैं। अब तक लगभग 150 किसान अपनी जमीन देने के लिए औपचारिक सहमति जता चुके हैं।

## प्रशासनिक सत्यापन और रजिस्ट्री की समयसीमा
विशेष भूमि अध्याप्ति अधिकारी करमेंद्र सिंह ने स्पष्ट किया है कि राजस्व विभाग वर्तमान में भूमि अभिलेखों और गाटा संख्याओं का आमने-सामने मिलान कर रहा है। क्षेत्रीय सत्यापन संपन्न होने के बाद पूरी रिपोर्ट अनुमोदन के लिए मंडलायुक्त के समक्ष प्रस्तुत की जाएगी। कमिश्नर से अंतिम स्वीकृति मिलते ही किसानों से विधिवत रजिस्ट्री कराने का सिलसिला शुरू हो जाएगा। प्रशासनिक अमले को भरोसा है कि नवंबर के भीतर इस रजिस्ट्री प्रक्रिया को जमीनी स्तर पर शुरू कर दिया जाएगा।

## क्षेत्रीय विकास, उद्योग और धार्मिक पर्यटन पर प्रभाव
इस मार्ग के निर्माण का सीधा असर केवल दूरी घटने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह अमरोहा के आर्थिक परिदृश्य को भी गति देगा। आधुनिक सड़क संपर्क स्थापित होने से जिले में नए उद्योगों की स्थापना और बाहरी निवेश के रास्ते खुलेंगे। स्थानीय व्यापारियों और उत्पादकों को अपने माल की ढुलाई के लिए तेज परिवहन व्यवस्था मिल सकेगी। इसके साथ ही पवित्र नगरी हरिद्वार जाने वाले तीर्थयात्रियों और पर्यटकों की यात्रा भी काफी आरामदायक हो जाएगी। जिलाधिकारी डॉ. नितिन गौड़ ने बताया कि परियोजना से जुड़े कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर आगे बढ़ाया जा रहा है ताकि जल्द से जल्द रजिस्ट्री का काम पूरा कर निर्माण शुरू कराया जा सके, जिससे पूरे जिले को दीर्घकालिक लाभ पहुंचेगा।

## इसका आप पर असर
इस एक्सप्रेसवे परियोजना से अमरोहा और हरिद्वार के बीच यात्रा करने वाले यात्रियों को तेज सफर की सुविधा मिलेगी और स्थानीय किसानों को उनकी अधिग्रहित जमीन का उचित मुआवजा प्राप्त होगा।

- **भारत में:** उत्तर भारत में धार्मिक पर्यटन और अंतरराज्यीय माल ढुलाई नेटवर्क को मजबूती मिलेगी। राष्ट्रीय राजमार्गों पर लगने वाले ट्रैफिक जाम से मुक्ति मिलेगी और विभिन्न शहरों के बीच यात्रा का समय घटेगा।
- **अमरोहा में:** हसनपुर और धनौरा तहसील के 52 गांवों के किसानों के लिए जमीन की रजिस्ट्री और मुआवजा वितरण प्रक्रिया नवंबर से शुरू होगी। बेहतर सड़क संपर्क बनने से जिले में नए उद्योगों और व्यावसायिक निवेश के बड़े अवसर पैदा होंगे।
- **तीर्थयात्रियों के लिए:** हरिद्वार जाने वाले श्रद्धालुओं को एक नया और सुगम वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध होगा। इससे त्योहारों और स्नान पर्वों के दौरान सफर अधिक सुरक्षित और तीव्र बन जाएगा।
- **व्यापारियों के लिए:** स्थानीय उत्पादकों और उद्यमियों को अपनी सामग्री अन्य शहरों तक भेजने के लिए तेज परिवहन नेटवर्क मिलेगा। माल ढुलाई का खर्च और समय दोनों कम होने से क्षेत्रीय व्यापार को लाभ होगा।

## ऐसा क्यों हुआ
अमरोहा और हरिद्वार के बीच यात्रा के समय को कम करने और प्रयागराज-मेरठ गंगा एक्सप्रेसवे से बेहतर संपर्क प्रदान करने के उद्देश्य से इस नए लिंक का निर्माण किया जा रहा है।

- **परियोजना की जरूरत:** मौजूदा मार्गों पर अधिक समय लगने और भारी यातायात के कारण एक तेज व सुव्यवस्थित संपर्क मार्ग की आवश्यकता लंबे समय से महसूस की जा रही थी। अमरोहा को सीधे हरिद्वार और मुख्य गंगा एक्सप्रेसवे से जोड़ने के लिए यह योजना तैयार की गई।
- **प्रशासनिक तैयारी:** हसनपुर और धनौरा तहसीलों में सर्वेक्षण कार्य पूर्ण कर सर्किल रेट लागू किए गए हैं। भूमि स्वामित्व के विवादों को टालने के लिए गाटा संख्याओं का राजस्व अभिलेखों से मिलान किया जा रहा है।
- **किसानों की रजामंदी:** लगभग 150 किसानों द्वारा शुरुआती सहमति पत्र दिए जाने के बाद रजिस्ट्री की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने का फैसला हुआ। कमिश्नर की औपचारिक स्वीकृति मिलते ही नवंबर में सीधे बैनामे शुरू किए जाएंगे।

## सवाल-जवाब

### 1. अमरोहा-हरिद्वार गंगा एक्सप्रेसवे की कुल लंबाई कितनी है?
इस प्रस्तावित एक्सप्रेसवे की कुल लंबाई 116.85 किलोमीटर है, जिसमें से लगभग 44 किलोमीटर का हिस्सा अमरोहा जिले से होकर गुजरेगा।

### 2. यह एक्सप्रेसवे मुख्य गंगा एक्सप्रेसवे से कहां जुड़ेगा?
यह नया लिंक प्रयागराज-मेरठ गंगा एक्सप्रेसवे के मंगरौला टी-प्वाइंट से जुड़कर हरिद्वार तक जाएगा।

### 3. अमरोहा जिले के कितने गांव इस परियोजना से प्रभावित होंगे?
अमरोहा जिले के कुल 52 गांव इस परियोजना के दायरे में आएंगे, जिनमें हसनपुर तहसील के 17 और धनौरा तहसील के 35 गांव शामिल हैं।

### 4. जमीन के बैनामे कब से शुरू होने की उम्मीद है?
अधिकारियों के अनुसार, अभिलेखों के सत्यापन और कमिश्नर से अनुमोदन मिलने के बाद नवंबर में बैनामे शुरू होने की संभावना है।

### 5. अब तक कितने किसानों ने जमीन अधिग्रहण के लिए सहमति दी है?
परियोजना के लिए अब तक लगभग 150 किसान अपनी जमीन देने की औपचारिक सहमति दे चुके हैं।

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