# आशारोड़ी से मोहब्बेवाला के बीच 18 मौतों के बाद सड़क इंजीनियरिंग की होगी तकनीकी जांच

> दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे पर लगातार दुर्घटनाओं के बाद सेंट्रल रोड रिसर्च इंस्टीट्यूट की तकनीकी टीम सड़क की ढलान और सुरक्षा उपायों की समीक्षा करेगी। इस 3.5 किलोमीटर के हिस्से में अब तक 50 से अधिक हादसे दर्ज किए जा चुके हैं।

**Type:** article · **Category:** उत्तराखंड · **Published:** 2026-10-07 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/uttarakhand/asharodi-se-mohabbewala-ke-bicha-18-mauton-ke-bada-saraka-injiniyaringa-ki-hogi-takaniki-jancha-44487 · **Language:** Hindi
**Tags:** दिल्ली देहरादून एक्सप्रेसवे, सड़क सुरक्षा, आशारोड़ी, मोहब्बेवाला, देहरादून, सेंट्रल रोड रिसर्च इंस्टीट्यूट, उत्तराखंड

उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे का एक छोटा सा हिस्सा मुसाफिरों के लिए जानलेवा साबित हो रहा है। आशारोड़ी से मोहब्बेवाला के बीच पड़ने वाले लगभग 3.5 किलोमीटर के रास्ते पर लगातार हो रहे सड़क हादसों ने प्रशासनिक तैयारियों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय स्तर पर किए गए तमाम सुरक्षा प्रबंध नाकाम साबित होने के बाद अब सड़क के बुनियादी ढांचे और इंजीनियरिंग डिजाइन की गहन जांच कराने का फैसला किया गया है। इसके लिए देश के प्रतिष्ठित संस्थान सेंट्रल रोड रिसर्च इंस्टीट्यूट यानी सीआरआई के विशेषज्ञों की सीधी मदद ली जा रही है।

## सड़क सुरक्षा के वैज्ञानिक पहलुओं की पड़ताल करेगा सीआरआई
सेंट्रल रोड रिसर्च इंस्टीट्यूट देश का अग्रणी अनुसंधान एवं तकनीकी संस्थान है, जो राजमार्ग निर्माण, सड़क सुरक्षा, ट्रैफिक इंजीनियरिंग और सतह की गुणवत्ता पर वैज्ञानिक दृष्टि से काम करता है। सीआरआई के तकनीकी दल को इस प्रभावित हिस्से का मौके पर जाकर मुआयना करने की जिम्मेदारी दी गई है। यह विशेषज्ञ टीम सड़क की बनावट, ढलान के कोण, वाहनों की गति सीमा प्रबंधन और वर्तमान सुरक्षा इंतजामों का तकनीकी परीक्षण करेगी। इस विस्तृत वैज्ञानिक रिपोर्ट के आने के बाद ही आवश्यक ढांचागत सुधार अमल में लाए जाएंगे।

## साढ़े तीन किलोमीटर के हिस्से में 18 लोगों ने गंवाई जान
दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे के शुरू होने से राष्ट्रीय राजधानी और देहरादून के बीच का सफर भले ही काफी तेज हो गया हो, लेकिन आशारोड़ी और मोहब्बेवाला का यह दायरा गंभीर चिंता की वजह बन चुका है। एक्सप्रेसवे पर यातायात शुरू होने के बाद से अब तक इसी 3.5 किलोमीटर के दायरे में 50 से ज्यादा सड़क दुर्घटनाएं दर्ज की जा चुकी हैं। इन दर्दनाक हादसों में अब तक करीब 18 लोगों की जान जा चुकी है, जिसके चलते प्रशासन पर व्यवस्था सुधारने का भारी दबाव है।

## स्पीड ब्रेकर और रंबल स्ट्रिप लगाने के बाद भी नहीं थमी दुर्घटनाएं
हादसों पर लगाम लगाने के लिए प्रशासन ने पहले कई जमीनी प्रयोग किए, मगर कोई भी योजना मौतों का सिलसिला रोकने में सफल नहीं हो सकी। अंततः नेशनल हाईवे नियमों के विपरीत जाकर इस हिस्से में रंबल स्ट्रिप और स्पीड ब्रेकर भी स्थापित कर दिए गए। हालांकि, इस कदम से दुर्घटनाएं तो नहीं थमीं, उल्टे मार्ग पर भीषण जाम की नई मुसीबत खड़ी हो गई। जमीनी उपाय बेअसर साबित होने के बाद अब सड़क का निर्माण ढांचा सीधे तौर पर जांच के दायरे में आ गया है। सीआरआई की जांच मुख्य रूप से इस बात पर केंद्रित रहेगी कि कहीं इन हादसों के पीछे सड़क का अनुचित ढलान, डिजाइन में तकनीकी दोष या गति नियंत्रण की कमियां तो जिम्मेदार नहीं हैं।

## तीखी ढलान पर भारी वाहनों का अनियंत्रित होना मुख्य चुनौती
इस मार्ग के भूगोल का विश्लेषण करने पर सामने आता है कि आशारोड़ी से मोहब्बेवाला की तरफ आने वाली सड़क पर एक लंबी और तीखी ढलान मौजूद है। इस ढलान पर उतरते समय खासकर भारी मालवाहक गाड़ियां अत्यधिक रफ्तार पकड़ लेती हैं। ढलान पर गति अनियंत्रित होने के कारण चालकों के लिए वाहनों को संभालना बेहद कठिन हो जाता है, जो इन लगातार हादसों का सबसे बड़ा कारण बनकर उभरा है। इस पूरे मामले में एक समग्र रोड सेफ्टी ऑडिट की मांग उठ रही है, जिसके तहत भारी वाहनों की आवाजाही, लेन अनुशासन, स्पीड ब्रेकर की तकनीकी बनावट, चेतावनी बोर्ड, क्रैश बैरियर, स्ट्रीट लाइट व्यवस्था, सीसीटीवी नेटवर्क और आपातकालीन चिकित्सा सुविधाओं की संयुक्त समीक्षा अनिवार्य हो गई है।

## सीओ ट्रैफिक ने वैज्ञानिक रिपोर्ट के आधार पर सुधार की बात कही
स्थानीय यातायात प्रबंधन की चुनौतियों पर बात करते हुए सीओ ट्रैफिक जगदीश पंत ने स्पष्ट किया कि पुलिस और प्रशासन की ओर से इस प्रभावित इलाके का कई बार संयुक्त सर्वे कराया जा चुका है। इसके बावजूद जब दुर्घटनाओं के आंकड़ों में कोई कमी दर्ज नहीं की गई, तो सीआरआई की विशेषज्ञ तकनीकी टीम से संपर्क साधने का फैसला किया गया। जगदीश पंत के अनुसार, विशेषज्ञ टीम द्वारा तैयार की जाने वाली वैज्ञानिक रिपोर्ट से वास्तविक इंजीनियरिंग कमियों की पहचान होगी और उसी आधार पर आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाए जाएंगे।

## इसका आप पर असर
दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे के इस हिस्से पर आवागमन करने वाले मुसाफिरों और मालवाहक चालकों के लिए सड़क सुरक्षा व यात्रा के समय पर सीधा असर पड़ेगा।

- **उत्तराखंड में:** देहरादून आने-जाने वाले वाहन चालकों को आशारोड़ी से मोहब्बेवाला के बीच 3.5 किलोमीटर के रास्ते पर तीखी ढलान और लगे हुए स्पीड ब्रेकरों के चलते अत्यधिक सतर्क रहना होगा। इस क्षेत्र में तकनीकी सुधार कार्य पूरे होने तक भारी वाहनों को रफ्तार नियंत्रित रखने और जाम से बचने के लिए अतिरिक्त समय लेकर चलना होगा।
- **भारत में:** राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र और उत्तराखंड के बीच लंबी दूरी का सफर तय करने वाले यात्रियों को इस गलियारे में प्रवेश करते समय गति सीमा का विशेष ध्यान रखना पड़ेगा। ढलान वाले संवेदनशील हिस्सों पर सुरक्षा समीक्षा के बाद नेशनल हाईवे मानकों के तहत होने वाले बदलावों से भविष्य में सफर अधिक सुरक्षित और व्यवस्थित हो सकेगा।

## ऐसा क्यों हुआ
आशारोड़ी से मोहब्बेवाला के बीच लगातार हो रहे भीषण हादसों का मुख्य कारण सड़क की भौगोलिक ढलान और वाहनों की बेकाबू रफ्तार का खतरनाक तालमेल है। प्रशासनिक स्तर पर किए गए तात्कालिक उपाय वैज्ञानिक आधार की कमी के कारण विफल रहे हैं।

- **सीधे तौर पर जिम्मेदार कारण:** आशारोड़ी से मोहब्बेवाला की ओर जाने वाले हिस्से पर एक लंबा और तीव्र ढलान मौजूद है, जिस पर उतरते वक्त भारी वाहन अत्यधिक गति पकड़ लेते हैं। ढलान पर रफ्तार अनियंत्रित होने से चालकों का गाड़ी पर से नियंत्रण छूट जाता है, जिससे लगातार घातक टक्करें हो रही हैं।
- **परिस्थितियां और पूर्व उपाय:** हादसों को रोकने के लिए नेशनल हाईवे नियमों के विपरीत जाकर रंबल स्ट्रिप और स्पीड ब्रेकर लगाए गए थे। इन तात्कालिक उपायों से दुर्घटनाएं रुकने के बजाय मार्ग पर गंभीर जाम लगने लगा और समस्या का कोई स्थायी वैज्ञानिक समाधान नहीं निकल सका।
- **आगामी कदम:** पूर्व में किए गए कई संयुक्त सर्वेक्षण बेअसर रहने के बाद अब सेंट्रल रोड रिसर्च इंस्टीट्यूट की विशेषज्ञ टीम तकनीकी जांच कर रही है। यह वैज्ञानिक टीम सड़क के ढलान, गति नियंत्रण और क्रैश बैरियर की समीक्षा कर सुधारात्मक कार्यों की रूपरेखा तय करेगी।

## सवाल-जवाब

### 1. दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे पर किस हिस्से को संवेदनशील माना गया है?
देहरादून के आशारोड़ी से मोहब्बेवाला के बीच पड़ने वाले लगभग 3.5 किलोमीटर के हिस्से को हादसों के लिहाज से अत्यधिक संवेदनशील पाया गया है।

### 2. इस 3.5 किलोमीटर के दायरे में अब तक कितने हादसे और मौतें दर्ज हुई हैं?
एक्सप्रेसवे के इस हिस्से में 50 से अधिक दुर्घटनाएं हो चुकी हैं, जिनमें करीब 18 लोगों की जान जा चुकी है।

### 3. हादसों की तकनीकी जांच के लिए किस संस्थान की मदद ली जा रही है?
सड़क की इंजीनियरिंग और सुरक्षा खामियों की वैज्ञानिक पड़ताल के लिए सेंट्रल रोड रिसर्च इंस्टीट्यूट यानी सीआरआई की मदद ली जा रही है।

### 4. ढलान वाले हिस्से पर वाहन चालकों को क्या मुख्य परेशानी आ रही है?
लंबी ढलान के कारण खासकर भारी वाहन बहुत तेज रफ्तार पकड़ लेते हैं, जिससे उन पर नियंत्रण रखना कठिन हो जाता है।

### 5. स्पीड ब्रेकर और रंबल स्ट्रिप लगाने के बाद क्या समस्या पैदा हुई?
स्पीड ब्रेकर और रंबल स्ट्रिप लगाने से दुर्घटनाएं नहीं थमीं, बल्कि इलाके में भारी ट्रैफिक जाम की नई समस्या पैदा हो गई।

### 6. सीओ ट्रैफिक जगदीश पंत ने इस मामले में क्या जानकारी दी है?
सीओ ट्रैफिक जगदीश पंत ने बताया कि पहले कई संयुक्त सर्वे हुए लेकिन हादसे कम न होने पर अब सीआरआई की वैज्ञानिक रिपोर्ट के आधार पर खामियां सुधारी जाएंगी।

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