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  "type": "article",
  "title": "उत्तराखंड के बागेश्वर में महिला उद्यमियों के हुनर की महक, नुमाइशखेत में पारंपरिक उत्पादों और सांस्कृतिक रंगों का संगम",
  "summary": "बागेश्वर के नुमाइशखेत में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत तीन दिवसीय सरस मेले की शुरुआत हुई, जहां 35 स्टॉलों के जरिए स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को सीधा बाजार मिल रहा है।",
  "content": "पहाड़ी अंचल की आत्मनिर्भर महिलाओं के हुनर और उत्तराखंड की समृद्ध लोक विरासत का शानदार संगम बागेश्वर में देखने को मिल रहा है। शहर के ऐतिहासिक नुमाइशखेत मैदान में तीन दिवसीय सरस मेले का विधिवत आगाज़ हो चुका है, जो पांच नवंबर तक चलेगा। इस विशेष आयोजन की कमान ग्रामीण विकास विभाग ने राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत संभाली है। कार्यक्रम के उद्घाटन अवसर पर केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग राज्य मंत्री अजय टम्टा के साथ बागेश्वर विधायक पार्वती दास तथा कपकोट विधायक सुरेश गढ़िया ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर आयोजन की शुरुआत की। मेले का मुख्य केंद्र बिंदु स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी वे ग्रामीण महिलाएं हैं, जो अपने हाथों से तैयार विशिष्ट उत्पादों को सीधे उपभोक्ताओं तक पहुंचा रही हैं।\n\nनुमाइशखेत में सजी 35 दुकानें, पहाड़ी खानपान की भारी मांग\nइस ग्रामीण हाट में कुल 35 दुकानें सजाई गई हैं, जिनमें सरकारी विभागों और महिला समूहों का साझा प्रयास दिखाई दे रहा है। स्टॉल संचालक चांदनी कोरंगा के अनुसार, इन 35 स्टॉलों पर कृषि, उद्यान तथा उद्योग विभाग के समन्वय से तैयार उत्पाद प्रदर्शित किए गए हैं। मेलार्थियों की चहल-पहल से पूरा मैदान गुलजार है और लोग शुद्ध पहाड़ी अनाजों, मसालों और पारंपरिक हस्तशिल्प की जमकर खरीदारी कर रहे हैं। बिचौलियों की गैरमौजूदगी के कारण महिला कारीगरों को अपनी मेहनत का पूरा दाम सीधा मिल रहा है, जिससे उनके चेहरे खिले हुए हैं।\n\nस्टॉल संचालक सोनू धामी ने बताया कि मेले में आने वाले खरीदारों के बीच स्थानीय पहाड़ी खानपान, जैविक फल, ताजी सब्जियां और हाथ से बुने परिधान आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस तरह के मंचों का सीधा मकसद पर्वतीय उत्पादों को एक संगठित बाजार देना और गांव की महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है। लोग पहाड़ी दालों, मोटे अनाजों और पारंपरिक व्यंजनों का स्वाद चखने के साथ-साथ घर के लिए भी इन वस्तुओं को खरीद रहे हैं।\n\nलोकगीतों की गूंज, ऐपण और पारंपरिक खेल प्रतियोगिताओं की धूम\nमेला केवल व्यापार तक सीमित न रहकर उत्तराखंड की जीवंत संस्कृति का उत्सव बन गया है। स्वयं सहायता समूह की सदस्य दीपा नगरकोटी ने बताया कि खरीदारी के साथ-साथ रंगारंग सांस्कृतिक संध्याओं का आयोजन हो रहा है। मंच पर गूंजते लोकगीत और थिरकते लोकनृत्य दर्शकों को अपनी जड़ों से जोड़ रहे हैं। इसके साथ ही महिलाओं और युवाओं के लिए पारंपरिक ऐपण कला, मेहंदी प्रतियोगिता और कई देशी खेल गतिविधियां भी आयोजित की गई हैं। इन आयोजनों के माध्यम से मेले में पहुंचे पर्यटकों और स्थानीय नागरिकों को कुमाऊं की सदियों पुरानी रीति-रिवाजों और कला को नजदीक से समझने का अवसर मिल रहा है।\n\nबायर-सेलर मीट और लखपति दीदी पहल को रफ्तार\nस्थानीय उत्पादों को जिले से बाहर बड़ा बाजार दिलाने के लिए मेले में विशेष क्रेता-विक्रेता बैठक यानी बायर-सेलर मीट आयोजित की गई है। समूह की सदस्य रीता जोशी ने कहा, \n \"इसके माध्यम से स्वयं सहायता समूहों की महिलाएं सीधे खरीदारों और व्यापारियों से जुड़ रही हैं।\"\n इस पहल से महिलाओं को थोक खरीदारों से दीर्घकालिक आर्डर मिलने की राह खुली है। बड़े कारोबारियों के साथ सीधा संवाद स्थापित होने से महिला समूहों को पैकेजिंग, गुणवत्ता और बाजार की नई मांगों के अनुसार उत्पाद ढालने में भी मदद मिल रही है।\n\nप्रशासनिक स्तर पर इस पहल को महिला सशक्तिकरण की रीढ़ माना जा रहा है। जिलाधिकारी अपूर्वा पांडे ने बताया कि आयोजन की मूल भावना ग्रामीण महिलाओं को स्वरोजगार देकर वित्तीय रूप से स्वावलंबी बनाना है। उन्होंने जोर देकर कहा कि उत्पादों को उचित मंच मिलने से महिलाओं की मासिक आमदनी में उल्लेखनीय बढ़ोतरी होगी और सरकार के महत्वाकांक्षी लखपति दीदी मिशन को धरातल पर गति मिलेगी। समूह की सदस्य शालिनी ने साझा किया कि इस आयोजन से ग्रामीण कारीगरों को अपने ब्रांड की पहचान बनाने और व्यापक उपभोक्ता वर्ग तक पहुंचने का दुर्लभ अवसर मिला है।\n\nइसका आप पर असर\nबागेश्वर में लगे इस मेले से स्थानीय उपभोक्ताओं और ग्रामीण महिला उद्यमियों दोनों को सीधा आर्थिक व व्यावहारिक लाभ मिल रहा है।\n\n• बागेश्वर और उत्तराखंड में: स्थानीय नागरिकों को शुद्ध पारंपरिक पहाड़ी खाद्य सामग्री, जैविक फल, सब्जियां और हस्तशिल्प बिना किसी बिचौलिये के सीधे उत्पादकों से किफायती दरों पर मिल रहे हैं। इसके साथ ही लोग नुमाइशखेत मैदान में ऐपण प्रतियोगिता और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का निःशुल्क आनंद ले सकते हैं।\n• महिला उद्यमियों के लिए: स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को बायर-सेलर मीट के जरिए बड़े व्यापारियों से जुड़ने और थोक आर्डर पाने का सीधा अवसर मिला है। इससे उनकी मासिक आमदनी में सुधार होगा और लखपति दीदी योजना के लक्ष्य को हासिल करने में मदद मिलेगी।\n• कारीगरों के प्रचार-प्रसार में: दूरदराज के पर्वतीय गांवों की महिलाओं को अपने उत्पादों की ब्रांडिंग और पैकेजिंग का व्यावहारिक अनुभव मिल रहा है। यह अनुभव मेले के बाद भी उन्हें अपने व्यवसाय को आगे बढ़ाने और स्वतंत्र रूप से बाजार तलाशने में काम आएगा।\n• पारंपरिक कला के संरक्षण में: ऐपण जैसी लुप्तप्राय लोककलाओं और पारंपरिक पहाड़ी खेलों को नई पीढ़ी के सामने प्रदर्शित करने का मंच मिला है। स्थानीय युवाओं को अपनी पारंपरिक विरासत और कलात्मक कौशल को सीखने का व्यावहारिक मौका मिल रहा है।\n\nऐसा क्यों हुआ\nयह मेला पर्वतीय क्षेत्रों में आजीविका के अवसरों को बढ़ाने और ग्रामीण महिलाओं को संगठित बाजार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से आयोजित किया गया है।\n\n• सीधा बाजार उपलब्ध कराना: दूरदराज के गांवों में काम कर रहीं स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं के पास उत्पादों के निर्माण का कौशल तो है, लेकिन बड़े बाजारों तक उनकी सीधी पहुंच नहीं होती। सरकारी स्तर पर सरस मेले का आयोजन कर उन्हें बिना बिचौलियों के सीधे ग्राहकों से जोड़ने का वातावरण तैयार किया गया है।\n• लखपति दीदी योजना को समर्थन: सरकार का लक्ष्य ग्रामीण महिलाओं की वार्षिक आय को कम से कम एक लाख रुपये तक पहुंचाना है। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत ऐसे व्यापारिक मेले लगाए जा रहे हैं ताकि उत्पादों की नियमित बिक्री हो सके।\n• पारंपरिक संस्कृति को मंच देना: उत्तराखंड के हस्तशिल्प, पहाड़ी अनाजों और ऐपण कला को आधुनिक समय में पहचान की जरूरत है। मेले में सांस्कृतिक कार्यक्रमों और प्रतियोगिताओं को जोड़कर व्यापार के साथ-साथ लोक धरोहर के संरक्षण का माहौल बनाया गया है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. बागेश्वर में सरस मेला कब से कब तक आयोजित किया जा रहा है?\nयह मेला नुमाइशखेत मैदान में 3 नवंबर से शुरू हुआ है और 5 नवंबर तक चलेगा।\n\n2. मेले का उद्घाटन किन प्रमुख हस्तियों ने किया?\nमेले का शुभारंभ केंद्रीय राज्य मंत्री अजय टम्टा, बागेश्वर विधायक पार्वती दास और कपकोट विधायक सुरेश गढ़िया ने संयुक्त रूप से किया।\n\n3. सरस मेले में कुल कितने स्टॉल लगाए गए हैं?\nमेले में कुल 35 स्टॉल लगाए गए हैं, जिनमें स्वयं सहायता समूहों और सरकारी विभागों के उत्पाद शामिल हैं।\n\n4. मेले में खरीदारी के अलावा कौन से सांस्कृतिक आयोजन हो रहे हैं?\nमेले में लोकगीत, लोकनृत्य, ऐपण प्रतियोगिता, मेहंदी प्रतियोगिता और पारंपरिक खेल गतिविधियां आयोजित की जा रही हैं।\n\n5. मेले में आयोजित बायर-सेलर मीट का क्या फायदा है?\nबायर-सेलर मीट के जरिए महिला स्वयं सहायता समूह सीधे बड़े व्यापारियों से जुड़ रहे हैं, जिससे उन्हें थोक बाजार और नए खरीदार मिल रहे हैं।\n\n6. जिला प्रशासन के अनुसार इस मेले का मुख्य लक्ष्य क्या है?\nजिलाधिकारी अपूर्वा पांडे के अनुसार, मुख्य उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाना, उनकी आमदनी बढ़ाना और लखपति दीदी योजना को गति देना है।",
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  "publishedAt": "2026-11-04",
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