# डांडिया की धुन पर जरूरतमंद बच्चों की मदद, नैनीताल में सजेगी चैरिटेबल गरबा नाइट्स की महफिल

> नैनीताल में यो पहाड़ फाउंडेशन 17 अक्टूबर को चैरिटेबल गरबा नाइट्स का आयोजन कर रहा है, जिसकी एंट्री फीस से गरीब बच्चों को किताबें और गर्म कपड़े दिए जाएंगे।

**Type:** article · **Category:** उत्तराखंड · **Published:** 2026-10-10 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/uttarakhand/dandiya-ki-dhuna-para-jaruratamnda-bachchon-ki-madada-nainital-men-sajegi-chairitebala-garba-naitsa-ki-mahaphila-46107 · **Language:** Hindi
**Tags:** नैनीताल, गरबा नाइट्स, डांडिया, यो पहाड़ फाउंडेशन, चैरिटी, सीआरएसटी इंटर कॉलेज

पर्वतीय पर्यटन नगरी नैनीताल में आगामी त्योहारी सीजन के दौरान संगीत और डांडिया की खास रौनक देखने को मिलेगी। नगर में पहली बार एक अनूठी चैरिटेबल गरबा नाइट्स का खाका तैयार किया गया है, जिसका मुख्य मकसद उत्सव के उल्लास को समाज सेवा के साथ जोड़ना है। इस सांस्कृतिक संध्या में शामिल होने वाले लोगों का उत्साह न केवल गरबा और डांडिया की ताल पर झलकेगा, बल्कि उनके सहयोग से वंचित पृष्ठभूमि के बच्चों की मदद भी संभव हो सकेगी। सामाजिक संस्था यो पहाड़ फाउंडेशन की ओर से यह पूरा कार्यक्रम 17 अक्टूबर को मल्लीताल में सीआरएसटी इंटर कॉलेज के मैदान में आयोजित किया जा रहा है।

## प्रवेश शुल्क से खरीदी जाएंगी किताबें और गर्म कपड़े
अक्सर गरबा आयोजनों को केवल मौज-मस्ती, नृत्य और संगीत के केंद्र के तौर पर देखा जाता है, परंतु इस बार नैनीताल में इस उत्सव को सामाजिक जिम्मेदारी से जोड़ने की अभिनव पहल की गई है। संस्था का मानना है कि त्योहारों का वास्तविक आनंद तभी सार्थक होता है जब उसकी खुशियां समाज के उन बच्चों तक भी पहुंचे जो बुनियादी सुविधाओं और आर्थिक अभावों से जूझते हैं। कार्यक्रम में आने वाले प्रतिभागियों से जो प्रवेश शुल्क लिया जाएगा, उसे आर्थिक रूप से कमजोर तबके के स्कूली विद्यार्थियों की सहायता में लगाया जाएगा। इन पैसों से आने वाली कड़ाके की सर्दियों में जरूरतमंद बच्चों को गर्म कपड़े तथा पढ़ाई के लिए आवश्यक पुस्तकें वितरित की जाएंगी।

## सीमित प्रवेश और 300 से अधिक प्रतिभागियों की उम्मीद
आयोजन की रूपरेखा साझा करते हुए यो पहाड़ फाउंडेशन के अध्यक्ष संतोष बिष्ट ने स्पष्ट किया कि चैरिटेबल गरबा नाइट्स को आयोजित करने के पीछे मनोरंजन के साथ-साथ जनकल्याण को बढ़ावा देने की स्पष्ट सोच है। मैदान में व्यवस्थित माहौल बनाए रखने के लिए एंट्री को सीमित रखा गया है और कार्यक्रम में 300 से अधिक लोगों के सम्मिलित होने की संभावना है। उन्होंने रेखांकित किया कि इस प्रकार के सामुदायिक उत्सव लोगों को एक मंच पर लाते हैं, जहां वे त्योहार की मिठास बांटने के साथ-साथ समाज के प्रति अपने कर्तव्यों का निर्वहन भी कर पाते हैं।

## टिकट की दरें, समूह छूट और कई आकर्षक पुरस्कार
कार्यक्रम के शुल्कों और प्रतियोगिताओं की जानकारी देते हुए संस्था के पदाधिकारी नीरज बिष्ट ने बताया कि बच्चों के लिए 99 रुपये की प्रवेश फीस तय की गई है। इसके अलावा महिलाओं के लिए यह शुल्क 199 रुपये तथा जोड़ों यानी कपल के लिए 349 रुपये रखा गया है। आयोजकों ने समूहों के लिए विशेष रियायत का प्रावधान भी किया है; यदि किसी ग्रुप में 50 प्रतिशत भागीदारी महिलाओं की होती है, तो उस पूरे दल को खास छूट दी जाएगी। केवल नृत्य ही नहीं, बल्कि सबसे बेहतर परिधान, मनमोहक मुस्कान और रील प्रतियोगिता जैसी कई अन्य श्रेणियों में भी प्रतिभागियों को आकर्षक उपहार और सरप्राइज इनाम देकर सम्मानित किया जाएगा।

## सोशल मीडिया के जरिए पंजीकरण की सुविधा
मौसम के करवट लेने के साथ ही पहाड़ों में इस तरह के सांस्कृतिक आयोजन नई ऊर्जा का संचार करते हैं। संस्था की महिला उपाध्यक्ष दीपा बिष्ट के अनुसार, गरबा और डांडिया पारंपरिक संस्कृति से जुड़ने का सशक्त जरिया हैं और जब यह सामाजिक उत्थान से जुड़ जाए तो इसका महत्व दोगुना हो जाता है। जो भी नागरिक इस चैरिटेबल गरबा संध्या में भाग लेना चाहते हैं, वे यो पहाड़ फाउंडेशन के फेसबुक और इंस्टाग्राम पेज पर जाकर पंजीकरण का ब्योरा देख सकते हैं। इसके अतिरिक्त संस्था के सोशल मीडिया हैंडल पर जारी संपर्क नंबरों से भी सीधे बात करके अपनी सीट आरक्षित कराई जा सकती है।

## इसका आप पर असर
इस चैरिटेबल आयोजन से स्थानीय स्तर पर वंचित बच्चों को सर्दी में राहत मिलेगी और नागरिकों को सामाजिक सहयोग का अवसर प्राप्त होगा।

- **नैनीताल में:** आर्थिक रूप से कमजोर पृष्ठभूमि के स्कूली बच्चों को ठंड के मौसम से पहले जरूरी गर्म कपड़े और किताबें मिल सकेंगी। इसके साथ ही नगरवासियों को उत्सव मनाने के साथ एक नेक काम में सीधे योगदान देने का अवसर मिलेगा।
- **भारत में:** यह आयोजन देश भर के सांस्कृतिक उत्सव आयोजकों को यह संदेश देता है कि त्योहारों के आयोजनों को जनकल्याणकारी कार्यों से कैसे जोड़ा जा सकता है। लोग केवल मनोरंजन तक सीमित न रहकर उत्सव के बजट को सामाजिक उत्थान की दिशा में मोड़ सकते हैं।

## ऐसा क्यों हुआ
यह पहल त्योहारों के उल्लास को समाज के वंचित तबकों तक पहुंचाने और ठंड के मौसम से पहले स्कूली बच्चों को जरूरी मदद देने के उद्देश्य से शुरू की गई है।

- **सामाजिक सहयोग का उद्देश्य:** सामान्यतः गरबा नाइट्स केवल मनोरंजन का केंद्र होती हैं, इसलिए संस्था ने वंचित वर्ग की सहायता के लिए एक परोपकारी ढांचा तैयार किया। इससे प्रतिभागियों द्वारा दी गई राशि सीधे जरूरतमंद बच्चों की शिक्षा और स्वास्थ्य सुरक्षा से जुड़ती है।
- **सर्दियों की जरूरतें:** नैनीताल जैसे पर्वतीय क्षेत्र में मौसम बदलने के साथ ठंड बढ़ जाती है, जिससे गरीब बच्चों को गर्म कपड़ों और पाठ्यपुस्तकों की तत्काल आवश्यकता महसूस होती है। इस समय पर की गई मदद बच्चों को कठिन मौसम में राहत देगी।
- **सामुदायिक भागीदारी:** आयोजक विभिन्न श्रेणियों में प्रतियोगिताएं और समूह छूट देकर अधिक से अधिक स्थानीय नागरिकों को इस सामाजिक मिशन से जोड़ना चाहते हैं। सीमित सीटों के माध्यम से एक संगठित सांस्कृतिक माहौल बनाकर सहयोग जुटाने का प्रयास किया जा रहा है।

## सवाल-जवाब

### 1. नैनीताल में चैरिटेबल गरबा नाइट्स का आयोजन कब और कहां होगा?
यह कार्यक्रम 17 अक्टूबर को मल्लीताल स्थित सीआरएसटी इंटर कॉलेज के मैदान में आयोजित किया जाएगा।

### 2. इस गरबा नाइट्स का आयोजन कौन सी संस्था कर रही है?
इस सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन यो पहाड़ फाउंडेशन की ओर से किया जा रहा है।

### 3. आयोजन से मिलने वाली धनराशि का इस्तेमाल किस काम में होगा?
प्रवेश शुल्क से जुटाई गई राशि से जरूरतमंद बच्चों को किताबें और सर्दियों के लिए गर्म कपड़े उपलब्ध कराए जाएंगे।

### 4. कार्यक्रम में प्रवेश के लिए टिकट की दरें क्या रखी गई हैं?
बच्चों के लिए 99 रुपये, महिलाओं के लिए 199 रुपये और कपल के लिए 349 रुपये की एंट्री फीस निर्धारित की गई है।

### 5. ग्रुप एंट्री के लिए क्या कोई विशेष छूट दी जा रही है?
हां, यदि किसी समूह में महिलाओं की भागीदारी 50 प्रतिशत या उससे अधिक होती है, तो उस ग्रुप को विशेष छूट दी जाएगी।

### 6. कार्यक्रम में शामिल होने के लिए पंजीकरण कैसे कराया जा सकता है?
इच्छुक प्रतिभागी यो पहाड़ फाउंडेशन के फेसबुक और इंस्टाग्राम पेज या वहां दिए गए संपर्क नंबर के जरिए पंजीकरण करा सकते हैं।

## प्रेरणा और सबक
त्योहारों के जश्न को जरूरतमंदों की सेवा से जोड़कर एक सकारात्मक और संवेदनशील समाज का निर्माण किया जा सकता है।

- **त्योहारों को दें सार्थक मकसद:** व्यक्तिगत मौज-मस्ती से आगे बढ़कर उत्सवों को वंचित तबकों की बुनियादी जरूरतें पूरी करने का माध्यम बनाया जा सकता है।
- **सामूहिक भागीदारी की शक्ति:** जब समुदाय के लोग छोटे-छोटे योगदान के साथ एक साथ आते हैं, तो बच्चों के जीवन में बड़ा बदलाव लाया जा सकता है।
- **सहानुभूति और संस्कृति का मेल:** सांस्कृतिक परंपराओं का सच्चा सम्मान तभी है जब उनकी खुशियों में समाज के हर वर्ग को साझीदार बनाया जाए।

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