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  "type": "article",
  "title": "देहरादून के सांस्कृतिक उत्सव में मध्य पूर्व के लजीज व्यंजनों की धूम, कुनाफा और बकलावा का जादू सिर चढ़कर बोला",
  "summary": "देहरादून में आयोजित सांस्कृतिक उत्सव में पारंपरिक अरबी मिठाइयों का अनोखा संगम देखने को मिल रहा है, जहां भारी संख्या में लोग इनका आनंद लेने पहुंच रहे हैं।",
  "content": "उत्तराखंड की प्रांतीय राजधानी में इन दिनों मिठास का एक बिल्कुल नया अंदाज चर्चा का विषय बना हुआ है। हिमालयन कल्चर ग्राउंड के विशाल प्रांगण में चल रहे विरासत उत्सव में इस मर्तबा पारंपरिक भारतीय पकवानों के साथ विदेशी मिठास भी लोगों को अपनी तरफ खींच रही है। यहां सजी एक खास दुकान पर दूर देश से पहुंचे जाहिद अपनी मशहूर अरबी मिठाइयों की सौगात परोस रहे हैं, जिसे आजमाने के लिए शौकीनों का हुजूम उमड़ पड़ा है। मेवों के कुरकुरेपन, ताजे मक्खन और कुदरती शहद से तैयार होने वाले इन लजीज व्यंजनों की खुशबू पूरे मेला परिसर में महक रही है।\n\nसांस्कृतिक मेले में सजा अरबी मिठास का संसार\nदुबई से तशरीफ लाए जाहिद देश के विभिन्न हिस्सों में आयोजित होने वाले खानपान उत्सवों में नियमित रूप से अपनी भागीदारी दर्ज कराते हैं। उनका कहना है कि इस पहाड़ी शहर के लोगों का मिजाज और उनका स्नेह वाकई बेमिसाल है। जाहिद के अनुसार यहां के बाशिंदों को मीठे पकवान बेहद भाते हैं, विशेषकर जब बात शुद्ध शहद और उच्च गुणवत्ता वाले सूखे मेवों के मेल की हो। इसी वजह से उनकी दुकान पर दिन ढलते ही खरीदारों की कतारें लंबी होने लगती हैं और हर वर्ग के लोग इस अनोखे स्वाद को चखने के लिए अपनी बारी का इंतजार करते दिखाई देते हैं।\n\nपरतदार बकलावा और उसकी खास बनावट\nमिडिल ईस्ट के सबसे प्रतिष्ठित पकवानों में शुमार बकलावा की तैयारी अपने आप में एक बारीक हुनर मानी जाती है। इसमें अत्यंत महीन फिलो पेस्ट्री की अनेक परतें बिछाई जाती हैं। इन तहों के बीच पिस्ता, बादाम, अखरोट और काजू की कतरन सलीके से भरी जाती है। इसके बाद पूरी पेस्ट्री को शुद्ध घी और मक्खन के मिश्रण में तब तक पकाया जाता है जब तक कि उसका रंग सुनहरा न हो जाए। आंच से उतारने के उपरांत इस पर शुद्ध शहद अथवा केसरिया चाशनी डाली जाती है, जो इसकी हर परत में समाकर एक लाजवाब मिठास घोल देती है।\n\nकुनाफा का शाही अंदाज और नरम बनावट\nदूसरी तरफ कुनाफा की अपनी एक अलग दास्तान है, जो देखने में महीन सेवइयों के जाल जैसी पेस्ट्री प्रतीत होती है। इसके भीतर गाढ़ी मलाईदार क्रीम अथवा मोज़ेरेला चीज़ का एक मोटा स्तर भरा जाता है। इस पूरी रचना को धीमी आंच पर दोनों तरफ से घी में आहिस्ता-आहिस्ता सेका जाता है ताकि बाहरी आवरण पूरी तरह करारा हो जाए। जब यह तैयार हो जाता है, तो इसके ऊपर मीठा शीरा छिड़ककर पिस्ते से सजावट की जाती है। मुंह में रखते ही इसका बाहरी हिस्सा खस्ता महसूस होता है जबकि अंदरूनी परत मखमली अहसास कराती है।\n\nशुद्ध सामग्री और अनोखा जायका\nजाहिद अपनी इन दोनों खासियतों में किसी भी तरह के समझौते से बचते हैं और केवल अव्वल दर्जे के घटकों का उपयोग करते हैं। उन्होंने बताया कि असली मक्खन, प्राकृतिक शहद और चुनिंदा मेवे ही इन मिठाइयों की जान हैं। अंजीर, बादाम, काजू, पिस्ता और साथ में गुलाब की पंखुड़ियों का मेल इनके स्वाद को लंबे समय तक जुबां पर बनाए रखता है। बकलावा जहां मेवों के क्रंच के लिए सराहा जा रहा है, वहीं कुनाफा का चीज़ से भरा रसीलापन युवाओं को दीवाना बना रहा है।\n\nकीमतें, पैकेजिंग और उपहार का विकल्प\nउत्सव में बिक रही इन शाही मिठाइयों की दरें आठ सौ रुपये से लेकर पंद्रह सौ रुपये प्रति किलोग्राम तक रखी गई हैं, जो उनकी किस्म और उपयोग की गई सामग्री पर निर्भर करती हैं। खरीदारी करने वाले लोग न सिर्फ मौके पर इनका स्वाद ले रहे हैं, बल्कि आधा किलो और एक किलो के डिब्बों में पैक कराकर घरों को भी ले जा रहे हैं। कई खरीदारों का मानना है कि आगामी त्योहारी सीजन में परिजनों और मित्रों को भेंट देने के लिए यह पारंपरिक मिठाइयों से हटकर एक बेहतरीन और शानदार विकल्प साबित हो रहा है।\n\nइसका आप पर असर\nइस खबर से देहरादून के निवासियों और मेले में जाने वाले लोगों को नई और अनोखी मिठाइयों का स्वाद चखने का सीधा मौका मिल रहा है।\n\n• देहरादून में: विरासत फेस्ट के दर्शक अब स्थानीय विकल्पों के अलावा प्रामाणिक अरबी मिठाइयों का लुत्फ उठा सकते हैं। मेले में जाने वाले लोग आठ सौ से पंद्रह सौ रुपये प्रति किलो की दर से ताजा कुनाफा और बकलावा खरीद सकते हैं।\n• त्योहारी खरीदारी पर: पारंपरिक मिठाइयों से हटकर उपहार देने के इच्छुक लोगों के लिए यह एक नया विकल्प बन गया है। खरीदार आधा किलो और एक किलो के विशेष डिब्बों में पैकिंग कराकर अपनों को अनोखा तोहफा दे सकते हैं।\n• स्वाद के शौकीनों के लिए: शहर के युवाओं और बच्चों को अंतरराष्ट्रीय स्तर के व्यंजनों का प्रामाणिक जायका स्थानीय स्तर पर ही मिल रहा है। चीज़ और मलाई वाली ताजा गर्म मिठाइयां खाने के लिए किसी बड़े महानगर या विदेश जाने की आवश्यकता नहीं है।\n• खानपान की जानकारी पर: आगंतुकों को फिलो पेस्ट्री और महीन सेवइयों से बनने वाले पारंपरिक अरबी व्यंजनों की तैयारी को करीब से देखने का अवसर मिल रहा है। इससे विदेशी खाद्य संस्कृति और उसकी सामग्रियों के प्रति लोगों की समझ बढ़ रही है।\n\nऐसा क्यों हुआ\nदेहरादून के सांस्कृतिक उत्सव में अरबी मिठाइयों की यह विशेष मौजूदगी देश भर के प्रमुख मेलों में अंतरराष्ट्रीय पाक कला को शामिल करने की बढ़ती प्रवृत्ति का परिणाम है।\n\n• कारीगर की वार्षिक यात्रा: दुबई से आए कारीगर जाहिद हर वर्ष भारत के विभिन्न शहरों में आयोजित प्रमुख फूड फेस्टिवलों में शिरकत करते हैं। इस बार उन्होंने देहरादून के विरासत फेस्ट को अपनी कला और मिठाइयों के प्रदर्शन के लिए चुना।\n• स्थानीय स्वाद की मांग: उत्तराखंड के लोगों में मेवों और शुद्ध शहद से बने मीठे व्यंजनों के प्रति विशेष रुचि देखने को मिलती है। इस पारंपरिक पसंद के चलते मेले में प्रामाणिक अरबी व्यंजनों को तुरंत बड़ा ग्राहक वर्ग मिल गया।\n• विदेशी व्यंजनों का बढ़ता आकर्षण: आधुनिक समय में युवाओं और परिवारों के बीच पारंपरिक भारतीय मिठाइयों के साथ-साथ नए वैश्विक स्वादों को आजमाने का चलन तेजी से बढ़ा है। कुनाफा और बकलावा जैसे सोशल मीडिया पर चर्चित व्यंजनों की उपलब्धता ने मेले में उत्सुकता पैदा की।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. विरासत फेस्ट कहां आयोजित हो रहा है?\nयह उत्सव उत्तराखंड के देहरादून स्थित हिमालयन कल्चर ग्राउंड में आयोजित किया जा रहा है।\n\n2. इस उत्सव में कौन सी खास मिठाइयां बेची जा रही हैं?\nयहां दुबई के जाहिद द्वारा तैयार ताजा बकलावा और कुनाफा जैसी प्रसिद्ध मिडिल ईस्ट मिठाइयां उपलब्ध कराई जा रही हैं।\n\n3. बकलावा को किस प्रकार तैयार किया जाता है?\nबकलावा को पतली फिलो पेस्ट्री की परतों में पिस्ता, बादाम, अखरोट और काजू भरकर घी-मक्खन में सेका जाता है और शहद या चाशनी डाली जाती है।\n\n4. कुनाफा की क्या विशेषता है?\nकुनाफा बारीक सेवई जैसी पेस्ट्री से बनता है, जिसके अंदर मोज़ेरेला चीज़ या गाढ़ी क्रीम भरकर धीमी आंच पर घी में सेका जाता है।\n\n5. इन मिठाइयों की कीमत क्या रखी गई है?\nस्टॉल पर बकलावा और कुनाफा की कीमत उनकी किस्म के अनुसार आठ सौ रुपये से पंद्रह सौ रुपये प्रति किलोग्राम तक तय की गई है।\n\n6. क्या वहां छोटे पैक उपलब्ध हैं?\nजी हां, लोग उपहार और व्यक्तिगत उपयोग के लिए आधा किलोग्राम और एक किलोग्राम के डिब्बों में भी खरीदारी कर रहे हैं।",
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  "publishedAt": "2026-10-31",
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      "answer": "जी हां, लोग उपहार और व्यक्तिगत उपयोग के लिए आधा किलोग्राम और एक किलोग्राम के डिब्बों में भी खरीदारी कर रहे हैं।"
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