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  "title": "देहरादून की संकरी गलियों में हजारों छात्रों की जान दांव पर, फायर सेफ्टी के बिना चल रहे सैकड़ों कोचिंग सेंटर",
  "summary": "देहरादून में 200 से 300 कोचिंग सेंटर चल रहे हैं, जिनमें से कई तंग गलियों में बिना वेंटिलेशन, बिना दूसरे रास्ते और बिना फायर सेफ्टी इंतजाम के संचालित हो रहे हैं. लखनऊ अग्निकांड के बाद इनकी सुरक्षा पर बड़े सवाल खड़े हो गए हैं.",
  "content": "‘एजुकेशन हब’ के तौर पर पहचान बना चुके देहरादून में आज हजारों छात्र-छात्राएं बेहतर भविष्य का सपना लेकर दिन-रात पढ़ाई कर रहे हैं, लेकिन जिन इमारतों में वे बैठते हैं, उनमें से कई किसी भी पल बड़े हादसे का कारण बन सकती हैं. शहर में इस वक्त करीब 200 से 300 कोचिंग सेंटर चल रहे हैं और इनमें से बहुत से सुरक्षा मानकों को पूरी तरह नजरअंदाज करके संचालित हो रहे हैं. हाल ही में लखनऊ में हुए अग्निकांड के बाद इन सेंटरों की सुरक्षा को लेकर चिंता और गहरा गई है.\n\nशहर के मुख्य बाजारों और संकरी गलियों में चल रहे ये संस्थान न तो ढंग के वेंटिलेशन वाले हैं और न ही इनमें आपातकालीन निकास का कोई पुख्ता इंतजाम है. हालत यह है कि कई जगह खिड़कियों और छतों पर लगे बड़े-बड़े विज्ञापन बोर्ड और बैनरों ने हवा और रोशनी के रास्ते तक बंद कर दिए हैं. ऊपर से इन सेंटरों के बाहर लटके बिजली के तारों के जंजाल ने खतरे को कई गुना बढ़ा दिया है. आग या किसी भी अप्रिय स्थिति में इन इमारतों से सुरक्षित बाहर निकलना अपने आप में एक बड़ी चुनौती बन जाएगा.\n\nतंग गलियां और इकलौता रास्ता\nदेहरादून के धर्मपुर और करनपुर जैसे प्रमुख इलाकों में चल रहे ज्यादातर कोचिंग सेंटर बेहद तंग और संकरी गलियों में बने हैं. कई संस्थान तो ऐसी जर्जर और छोटी जगहों पर चल रहे हैं, जहां एंट्री और एग्जिट के लिए सिर्फ एक ही संकरा रास्ता है. यानी अगर कभी आग लगी या भगदड़ मची, तो छात्रों के पास बाहर निकलने का कोई दूसरा विकल्प ही नहीं बचेगा.\n\nफायर सेफ्टी के नाम पर खानापूर्ति\nनियम कहते हैं कि हर कोचिंग सेंटर में आग से बचाव के पूरे और पुख्ता इंतजाम तथा उपकरण होने चाहिए. लेकिन जमीनी हकीकत इसके बिल्कुल उलट है. देहरादून के इन सेंटरों में वॉटर स्प्रिंकलर और फायर अलार्म जैसी सबसे बुनियादी चीजें तक नदारद हैं, जो किसी बड़े हादसे को सीधे न्योता दे रही हैं.\n\nक्या कह रहा है अग्निशमन विभाग\nदेहरादून के मुख्य अग्निशमन अधिकारी (CFO) अभिनव त्यागी के मुताबिक, फायर सीजन की शुरुआत से ही शहर में अग्नि सुरक्षा को लेकर लगातार अभियान चलाया जा रहा है. विभाग की टीम कोचिंग संस्थानों, होटलों और दूसरी व्यावसायिक इमारतों की बारीकी से जांच कर रही है. उन्होंने बताया कि पिछले महीने ही शहर की 200 से ज्यादा इमारतों का सेफ्टी ऑडिट कराया गया. जांच में जो भी संस्थान या इमारतें सुरक्षा मानकों पर खरी नहीं उतरीं, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की गई और नियम तोड़ने वाले कई संस्थानों की फायर NOC तक रद्द कर दी गई. प्रशासन का साफ कहना है कि छात्रों की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ करने वाले किसी भी संस्थान को बख्शा नहीं जाएगा.\n\nइसका आप पर असर\n• भारत में: अगर आपके शहर का कोचिंग सेंटर तंग गली में, एक ही रास्ते वाला या फायर अलार्म-स्प्रिंकलर के बिना है, तो दाखिले से पहले उसकी फायर NOC और निकास व्यवस्था जरूर जांच लें.\n• देहरादून में: धर्मपुर और करनपुर जैसे इलाकों में पढ़ रहे छात्रों और उनके परिवारों को संस्थान की सुरक्षा को लेकर खास सतर्क रहना चाहिए, क्योंकि यहां जांच के दौरान कई सेंटरों की NOC रद्द हो चुकी है.\n\nसवाल-जवाब\n\n1. देहरादून में इस समय कितने कोचिंग सेंटर चल रहे हैं?\nशहर में इस वक्त करीब 200 से 300 कोचिंग सेंटर चल रहे हैं, जिनमें हजारों छात्र-छात्राएं पढ़ रहे हैं.\n\n2. इन कोचिंग सेंटरों को लेकर चिंता अचानक क्यों बढ़ी?\nहाल ही में लखनऊ में हुए अग्निकांड के बाद देहरादून के इन सेंटरों की सुरक्षा को लेकर बड़े सवाल खड़े हो गए हैं.\n\n3. किन इलाकों के कोचिंग सेंटर सबसे ज्यादा खतरे में हैं?\nधर्मपुर और करनपुर जैसे प्रमुख इलाकों में चल रहे कई सेंटर बेहद तंग गलियों में हैं, जहां एंट्री और एग्जिट के लिए सिर्फ एक ही संकरा रास्ता है.\n\n4. इन सेंटरों में फायर सेफ्टी की क्या स्थिति है?\nनियमों के बावजूद इन सेंटरों में वॉटर स्प्रिंकलर और फायर अलार्म जैसी बुनियादी चीजें तक नदारद हैं.\n\n5. खिड़कियों और छतों पर लगे बैनर खतरा कैसे बढ़ा रहे हैं?\nबड़े-बड़े विज्ञापन बोर्ड और बैनरों ने हवा और रोशनी के रास्ते बंद कर दिए हैं और बाहर लटके बिजली के तारों ने खतरे को और बढ़ा दिया है.\n\n6. अग्निशमन विभाग ने अब तक क्या कार्रवाई की है?\nपिछले महीने 200 से ज्यादा इमारतों का सेफ्टी ऑडिट कराया गया और नियम तोड़ने वाले कई संस्थानों की फायर NOC रद्द कर दी गई.\n\n7. इस मामले पर अधिकारी क्या कह रहे हैं?\nमुख्य अग्निशमन अधिकारी अभिनव त्यागी के मुताबिक फायर सीजन की शुरुआत से ही कोचिंग संस्थानों, होटलों और व्यावसायिक इमारतों की लगातार जांच की जा रही है.",
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  "category": "उत्तराखंड",
  "publishedAt": "2026-06-24",
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