# देहरादून में लगेगा वरिष्ठजन जीवनसाथी मेला, जाति और धर्म के बंधन तोड़कर उम्र के इस पड़ाव पर नई शुरुआत करेंगे बुजुर्ग

> देहरादून के अग्रवाल भवन में 25 अक्टूबर 2026 को अनुबंध फाउंडेशन की ओर से बुजुर्गों के लिए जीवनसाथी परिचय सम्मेलन आयोजित किया जा रहा है। इसका मकसद ढलती उम्र में अकेलेपन का सामना कर रहे वरिष्ठजनों को एक नया हमसफर दिलाना है।

**Type:** article · **Category:** उत्तराखंड · **Published:** 2026-10-24 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/uttarakhand/dehradun-me-senior-citizen-lifepartner-mela-caste-aur-religion-ke-bandhan-todkar-bujurg-karenge-nayi-shuruat-51341 · **Language:** Hindi
**Tags:** देहरादून समाचार, वरिष्ठ नागरिक, जीवनसाथी मेला, अनुबंध फाउंडेशन, अकेलापन, बुजुर्गों की शादी

जिंदगी के इस ढलते पड़ाव पर जब अकेलापन अक्सर खामोशियों और आंसुओं का कारण बन जाता है, तब किसी ऐसे हमसफर का मिल जाना जो हर सुख-दुख में साथ निभा सके, किसी वरदान से कम नहीं होता। जीवनसाथी को खो चुके, तलाकशुदा या अकेले जीवन बिता रहे वरिष्ठ नागरिकों को एक बार फिर से सम्मान, प्रेम और अपनापन दिलाने के लिए अनुबंध फाउंडेशन देहरादून में एक अनूठी पहल करने जा रहा है। आगामी 25 अक्टूबर 2026 को अग्रवाल भवन में होने वाला यह वरिष्ठजन जीवनसाथी परिचय सम्मेलन जाति और धर्म के सभी प्रकार के बंधनों से पूरी तरह परे है, जो बुजुर्गों को अकेलापन भुलाकर एक शांत और नई शुरुआत करने का अनूठा मौका देता है।

 

## देशभर के वरिष्ठ नागरिकों के लिए आवेदन प्रक्रिया
 अनुबंध फाउंडेशन के सदस्य ए. के. अग्रवाल ने जानकारी दी है कि लोगों ने आमतौर पर सामूहिक विवाह कार्यक्रमों के बारे में सुना होगा, जहां कई जोड़ों की एक साथ शादी कराई जाती है। इस तरह के आयोजनों को विभिन्न सामाजिक संगठन और सरकारें करती रहती हैं। लेकिन उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में उनकी संस्था ने विशेष रूप से बुजुर्गों के लिए अपना जीवनसाथी चुनने का एक समर्पित मंच तैयार किया है। इस अनूठी पहल के लिए देश के किसी भी कोने से वरिष्ठजन आवेदन कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि इससे पहले गुजरात के सूरत शहर में इस तरह के जीवनसाथी मेले का आयोजन किया गया था, जिसमें पूरे देश से 800 आवेदन प्राप्त हुए थे और उनमें से 10 लोगों के रिश्ते तय हो गए थे जिन्हें उनका जीवनसाथी भी मिल गया। उन्होंने यह भी बताया कि देश भर में उनकी संस्था अब तक ऐसे कई सम्मेलन आयोजित कर चुकी है जिससे कई बुजुर्गों का अकेलापन दूर हुआ है।

 

## धर्म और जाति के बंधनों से पूरी तरह मुक्त आयोजन
 ए. के. अग्रवाल ने बताया कि देहरादून के अग्रवाल भवन में होने वाले इस सम्मेलन की सबसे बड़ी खूबी यह है कि इसमें जाति या धर्म का कोई भी बंधन नहीं रखा गया है। उन्होंने कहा कि ढलती उम्र में केवल एक सच्चे साथी की जरूरत होती है जो हर दर्द में साथ निभा सके। जिंदगी के अंतिम चरण में हर किसी को एक सहारे की आवश्यकता महसूस होती है, इसीलिए इस प्रकार का आयोजन देहरादून में पहली बार किया जा रहा है। अनुबंध फाउंडेशन बुजुर्गों के लिए इस विशेष जीवनसाथी मेले का आयोजन कर रहा है ताकि बुढ़ापे में तन्हाई का जीवन जी रहे लोगों को एक बेहतर मंच मिल सके।

 

## अब तक दो सौ से अधिक जोड़ों को मिल चुका है साथी
 इस अनूठी पहल के लिए पूरे देश से आवेदन आमंत्रित किए जाते हैं। इस बार के आयोजन में 70 महिलाओं और 200 बुजुर्गों को सम्मेलन के लिए आमंत्रित किया गया था, जिनमें से 10 जोड़ों को उनका हमसफर मिल भी गया। उम्र के इस पड़ाव पर अकेलापन आज हर वरिष्ठ नागरिक की मुख्य समस्या बन चुका है। अनुबंध फाउंडेशन अपनी इस मुहिम के तहत अब तक लगभग 200 जोड़ों को उनके जीवनसाथी से सफलतापूर्वक मिला चुका है। संस्था ने इसके लिए एक सुनियोजित प्रक्रिया तैयार की है। इसके तहत सबसे पहले संस्था से संपर्क करना होता है, जिसके बाद तय चरणों और औपचारिकताओं को पूरा करके जोड़े एक नए बंधन में बंध जाते हैं।

 

## जिंदगी की सांझ में एक सच्चे साथी की तलाश
 अपने जीवन के अनुभवों को साझा करते हुए एक बुजुर्ग महिला सविता देवी ने बताया कि पति के निधन के पश्चात उनका बेटा नौकरी के सिलसिले में दिल्ली चला गया था और अब वह देहरादून में बिल्कुल अकेली रहती हैं। उनका मानना है कि यदि उन्हें कोई सही हमसफर मिल जाए तो उनकी बची हुई जिंदगी बहुत आसानी से कट जाएगी। उन्होंने अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए कहा कि उनकी दोनों किडनियां खराब हो चुकी हैं और दुनिया से जाने से पहले उनकी आखिरी इच्छा यही है कि उन्हें उनके पति के विचारों से मेल खाने वाला एक योग्य जीवनसाथी मिल जाए।

## इसका आप पर असर
यह अनूठी पहल देश भर के अकेलेपन से जूझ रहे वरिष्ठ नागरिकों और उनके परिवारों के लिए एक बड़ा सामाजिक बदलाव ला सकती है।

- **देशभर में:** यह आयोजन उन सभी बुजुर्गों के लिए एक नया रास्ता खोलता है जो जीवनसाथी के खोने या अकेलेपन के कारण तनाव में जीवन बिता रहे हैं। इस पहल से समाज में बुजुर्गों की मानसिक सेहत और पुनर्विवाह को लेकर सकारात्मक सोच को बढ़ावा मिलेगा।

- **देहरादून में:** देहरादून और आसपास के क्षेत्रों में रहने वाले अकेले बुजुर्गों को इस सम्मेलन के माध्यम से बिना किसी सामाजिक झिझक के अपना हमसफर तलाशने का सीधा अवसर मिलेगा। स्थानीय स्तर पर वरिष्ठ नागरिकों के लिए इस तरह का मंच पहली बार मिलने से कई लोगों का तन्हाई भरा जीवन आसान हो सकेगा।

## ऐसा क्यों हुआ
बढ़ती उम्र में परिवारों के बिखरने और बच्चों के दूसरे शहरों में बस जाने के कारण बुजुर्गों का अकेलापन एक गंभीर सामाजिक समस्या बनता जा रहा है।

- **अकेलेपन की समस्या:** जीवनसाथी के निधन, तलाक या बच्चों के दूर रहने के कारण वरिष्ठ नागरिकों को गंभीर तन्हाई और मानसिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

- **सामाजिक वर्जनाएं:** उम्र के अंतिम पड़ाव पर शादी या साथी तलाशने को लेकर समाज में मौजूद दबी हुई हिचकिचाहट को दूर करने के लिए ऐसे संगठित मंचों की आवश्यकता होती है।

- **अनुबंध फाउंडेशन की पहल:** संस्था ने इसी सामाजिक जरूरत को समझते हुए देश के विभिन्न हिस्सों में ऐसे सम्मेलनों के जरिए बुजुर्गों को जोड़ने की एक व्यवस्थित प्रणाली विकसित की है।

## सवाल-जवाब

### 1. देहरादून में वरिष्ठजन जीवनसाथी मेला कब आयोजित किया जाएगा?
यह सम्मेलन 25 अक्टूबर 2026 को देहरादून के अग्रवाल भवन में आयोजित होगा।

### 2. इस सम्मेलन का आयोजन कौन सी संस्था कर रही है?
इस अनूठे जीवनसाथी परिचय सम्मेलन का आयोजन अनुबंध फाउंडेशन द्वारा किया जा रहा है।

### 3. क्या इस सम्मेलन में भाग लेने के लिए कोई जाति या धर्म का बंधन है?
नहीं, यह सम्मेलन जाति और धर्म के सभी प्रकार के बंधनों से पूरी तरह मुक्त है।

### 4. इस पहल के लिए देश में इससे पहले कहां आयोजन हुआ था?
इससे पहले गुजरात के सूरत शहर में जीवनसाथी मेले का आयोजन किया गया था।

### 5. अनुबंध फाउंडेशन अब तक कितने जोड़ों को मिला चुका है?
अनुबंध फाउंडेशन अपनी इस प्रक्रिया के माध्यम से अब तक लगभग 200 जोड़ों को उनके जीवनसाथी से मिला चुका है।

### 6. सविता देवी कौन हैं और उनकी क्या स्थिति है?
सविता देवी एक बुजुर्ग महिला हैं जिनके पति का निधन हो चुका है, उनकी दोनों किडनियां खराब हैं और वह देहरादून में अकेली रहती हैं।

## प्रेरणा और सबक
यह प्रेरणादायक प्रसंग उन सभी लोगों के लिए एक मिसाल है जो उम्र के किसी भी पड़ाव पर हार मान लेते हैं और नई शुरुआत करने से डरते हैं।

- **जिम्मेदारियों से परे व्यक्तिगत खुशी:** यह कहानी सिखाती है कि जीवन के अंतिम पड़ाव पर भी अपनी मानसिक शांति और साथी की तलाश करने का अधिकार हर व्यक्ति को है।

- **सामाजिक बंधनों को तोड़ना:** जाति और धर्म की दीवारों को पार करके केवल मानवता और जरूरत के आधार पर रिश्ते जोड़ना एक प्रगतिशील सोच का प्रतीक है।

- **परिस्थितियों से लड़ना:** सविता देवी जैसे बुजुर्गों का यह दृढ़ संकल्प दर्शाता है कि कठिन से कठिन स्वास्थ्य समस्याओं और अकेलेपन के बावजूद जीवन में उम्मीद नहीं छोड़नी चाहिए।

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