देहरादून में 181 फीट का वाटरप्रूफ रावण तैयार, बारिश से बेअसर रहेगा इस बार का पुतला दहन देहरादून के परेड ग्राउंड में इस बार 181 फीट ऊंचा वाटरप्रूफ रावण खड़ा किया गया है, जिस पर बारिश का कोई असर नहीं पड़ेगा। हरियाणा के मशहूर कारीगर तेजिंदर सिंह चौहान की 40 सदस्यीय टीम ने 31 लाख रुपये की लागत से 45 दिनों में पुतलों का निर्माण पूरा किया है। उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में इस साल विजयादशमी का उत्सव बिल्कुल नए अंदाज में मनाया जा रहा है। पिछले वर्ष अचानक हुई बारिश की वजह से पुतला दहन के दौरान काफी अव्यवस्था का सामना करना पड़ा था। उसी अनुभव से सबक लेते हुए आयोजन समिति ने इस बार मौसम के मिजाज को देखते हुए पहले से पुख्ता तकनीकी कदम उठाए हैं। परेड ग्राउंड में पहली बार पूरी तरह वाटरप्रूफ रावण स्थापित किया जा रहा है, ताकि बूंदाबांदी या तेज बौछारें भी उत्सव के रंग में कोई खलल न डाल सकें। फाइबरग्लास और खास कपड़ों से तैयार हुआ ढांचा पुतलों को नमी और पानी से सुरक्षित रखने के लिए निर्माण सामग्री में बड़ा बदलाव किया गया है। कारीगरों ने इस बार पारंपरिक कागजों के स्थान पर उच्च गुणवत्ता वाले फाइबरग्लास और खास वाटरप्रूफ कपड़ों की कई परतें इस्तेमाल की हैं। इस सुरक्षात्मक आवरण के चलते बारिश का पानी पुतले के भीतरी हिस्से में नहीं जा सकेगा। अगर दहन के समय बारिश शुरू भी हो जाती है, तो भी पुतले को कोई नुकसान नहीं पहुंचेगा और आतिशबाजी तथा दहन की प्रक्रिया बिना किसी रुकावट के पूरी हो सकेगी। ऊंचाई में 50 फीट का इजाफा, मेघनाद और कुंभकर्ण भी तैयार इस बार रावण का कद भी पिछले वर्षों की तुलना में काफी बड़ा रखा गया है। बन्नू बिरादरी के महामंत्री और दशहरा कमेटी के प्रधान संतोख नागपाल के अनुसार, परेड ग्राउंड में पिछले 78 सालों से दशहरे का पारंपरिक आयोजन बेहद धूमधाम से किया जा रहा है। आम तौर पर यहां 131 फीट ऊंचा रावण बनाया जाता था, लेकिन इस बार इसकी ऊंचाई बढ़ाकर 181 फीट कर दी गई है। रावण के दोनों ओर मेघनाद और कुंभकर्ण के 70-70 फीट ऊंचे पुतले भी खड़े किए गए हैं, जिन्हें देखने के लिए पूरे शहर से दर्शकों की भारी भीड़ जुटने की उम्मीद है। 41 वर्षों का अनुभव और लिम्का बुक का रिकॉर्ड इन भव्य पुतलों को आकार देने का काम हरियाणा के जाने-माने शिल्पकार तेजिंदर सिंह चौहान और उनकी 40 कारीगरों की टीम ने संभाला है। तेजिंदर सिंह चौहान पिछले 41 साल से रावण के विशालकाय पुतले बनाने के क्षेत्र में सक्रिय हैं। उनकी कला और असाधारण ऊंचाइयों वाले पुतलों को कई रिकॉर्ड बुक्स में दर्ज किया जा चुका है। साल 2013 में उनके काम को लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में भी आधिकारिक रूप से शामिल किया गया था। इस बार देहरादून में तीनों पुतलों को तैयार करने में इस टीम को लगातार 45 दिनों तक कड़ी मेहनत करनी पड़ी है। सांझा भाईचारे और गंगा-जमुनी तहज़ीब की मिसाल पुतला निर्माण के इस बड़े प्रकल्प की एक खास खूबी इसका सामाजिक ताना-बाना भी है। तेजिंदर सिंह चौहान के दल में हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदायों के हुनरमंद कारीगर कंधे से कंधा मिलाकर काम करते हैं। वे सभी मिलकर इन विशालकाय आकृतियों को अंतिम रूप देते हैं। तेजिंदर सिंह चौहान के लिए यह कार्य केवल एक पेशेवर शिल्पकारी नहीं है, बल्कि वह इसे विभिन्न समुदायों के लोगों को आपस में जोड़ने और समाज में आपसी सौहार्द और भाईचारे का मजबूत संदेश देने का एक माध्यम भी मानते हैं। 31 लाख रुपये का कुल खर्च और 20 अक्टूबर को दहन रावण, मेघनाद और कुंभकर्ण के इन तीनों पुतलों के निर्माण पर कुल 31 लाख रुपये की लागत आई है। पुतलों के साथ ही मैदान में एक भव्य लंका का ढांचा भी तैयार किया गया है, जिसे जल्द ही मैदान में अंतिम रूप देकर स्थापित कर दिया जाएगा। तय कार्यक्रम के अनुसार 20 अक्टूबर को शाम 6:30 बजे पुतला दहन की मुख्य रस्म अदा की जाएगी। इस ऐतिहासिक और भव्य आयोजन के साक्षी बनने के लिए देहरादून शहर के अलावा उत्तराखंड के दूर-दराज के इलाकों से भी भारी संख्या में लोग परेड ग्राउंड पहुंचेंगे। इसका आप पर असर देहरादून में वाटरप्रूफ रावण बनने से दशहरे के मेले में आने वाले हजारों परिवारों और स्थानीय व्यवस्था को सीधा लाभ मिलेगा। • देहरादून में: पिछले साल बारिश की वजह से निराश लौटे दर्शकों को इस बार मौसम खराब होने पर भी अधूरा आयोजन नहीं देखना पड़ेगा। परेड ग्राउंड में 20 अक्टूबर को शाम 6:30 बजे बिना रुकावट के पुतला दहन संपन्न होगा, जिससे दर्शकों का समय और उत्साह सुरक्षित रहेगा। • उत्तराखंड में: राज्य के अन्य शहरों से देहरादून आकर दशहरे का विशाल मेला देखने वाले पर्यटकों और श्रद्धालुओं को तय समय पर मुख्य कार्यक्रम देखने को मिलेगा। आयोजकों द्वारा पुतले पर 31 लाख रुपये का खर्च किए जाने से आयोजन की भव्यता और सुरक्षा दोनों पहले से बेहतर सुनिश्चित हुई हैं। • आयोजन उद्योग में: धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों में जलरोधी सामग्री और फाइबरग्लास के प्रयोग का एक नया चलन शुरू होगा। अन्य शहरों की रामलीला और दशहरा समितियां भी मौसम के व्यवधान से बचने के लिए इस तकनीक को अपना सकती हैं। • दशहरा मेले के दर्शकों के लिए: 181 फीट ऊंचे रावण और 70-70 फीट के मेघनाद तथा कुंभकर्ण के पुतलों को देखने के लिए बड़ी भीड़ जुटेगी। परेड ग्राउंड पहुंचने वाले नागरिकों को समय से पहले पहुंचकर स्थान सुरक्षित करने की आवश्यकता होगी। ऐसा क्यों हुआ देहरादून में पहली बार वाटरप्रूफ और रिकॉर्ड ऊंचाई का रावण तैयार करने का फैसला पिछले साल के खराब अनुभव और तकनीकी सुधारों की जरूरत से प्रेरित है। • पिछले साल का मौसम संकट: पिछले वर्ष दशहरे के दिन हुई भारी बारिश के कारण पुतले भीग गए थे और दहन की रस्म ठीक से पूरी नहीं हो सकी थी। इस घटना से दर्शकों में निराशा फैली थी और आयोजकों को काफी आलोचना और मुश्किलों का सामना करना पड़ा था। • अग्रिम तकनीकी तैयारी: इस वर्ष भी मौसम के बदलते मिजाज और बारिश की आशंका को देखते हुए समिति ने पारंपरिक सामग्री बदलने का निर्णय लिया। कागजी ढांचों की जगह फाइबरग्लास और वाटरप्रूफ कपड़ों का उपयोग कर पुतलों को जलरोधी बनाया गया। • भव्यता और परंपरा का विस्तार: परेड ग्राउंड में 78 वर्षों से चल रहे इस उत्सव को और अधिक यादगार बनाने के लिए ऊंचाई 131 फीट से बढ़ाकर 181 फीट की गई। हरियाणा के अनुभवी शिल्पकार तेजिंदर सिंह चौहान की 40 सदस्यीय टीम को 45 दिन पहले ही इस बड़े कार्य के लिए अनुबंधित किया गया था। सवाल-जवाब 1. देहरादून में इस साल रावण के पुतले की ऊंचाई कितनी है? इस साल देहरादून के परेड ग्राउंड में रावण का पुतला 181 फीट ऊंचा बनाया गया है, जो पिछले 131 फीट के मुकाबले 50 फीट अधिक है। 2. रावण के पुतले को वाटरप्रूफ कैसे बनाया गया है? पुतले को बारिश से बचाने के लिए फाइबरग्लास और विशेष वाटरप्रूफ कपड़ों का इस्तेमाल कर तैयार किया गया है। 3. मेघनाद और कुंभकर्ण के पुतलों की ऊंचाई कितनी रखी गई है? रावण के साथ खड़े किए जा रहे मेघनाद और कुंभकर्ण दोनों के पुतलों की ऊंचाई 70-70 फीट है। 4. इन पुतलों को बनाने वाले प्रमुख कारीगर कौन हैं? पुतलों का निर्माण हरियाणा के प्रसिद्ध कारीगर तेजिंदर सिंह चौहान और उनकी 40 सदस्यीय टीम ने किया है। 5. तीनों पुतलों के निर्माण में कुल कितना खर्च आया है? रावण, मेघनाद और कुंभकर्ण के तीनों पुतलों को तैयार करने में करीब 31 लाख रुपये की लागत आई है। 6. देहरादून के परेड ग्राउंड में पुतला दहन किस तारीख और समय पर होगा? पुतला दहन का मुख्य कार्यक्रम 20 अक्टूबर को शाम 6:30 बजे परेड ग्राउंड में आयोजित किया जाएगा। https://trendkia.com/uttarakhand/dehradun-men-181-phita-ka-vataraprupha-ravana-taiyara-barisha-se-beasara-rahega-isa-bara-ka-putala-dahana-47431 TrendKia — Har trend, sabse pehle.