देहरादून में बेटों की बेरुखी की शिकार 70 वर्षीय मीना देवी भरण-पोषण के लिए डेढ़ साल से काट रहीं डीएम दफ्तर के चक्कर देहरादून के राजपुर की रहने वाली 70 वर्षीय मीना देवी पति की मृत्यु के 10 साल बाद भरण-पोषण और इलाज के खर्च के लिए जिला प्रशासन से गुहार लगा रही हैं। उत्तराखंड की राजधानी देहरादून के राजपुर इलाके से एक बेहद भावुक और चिंताजनक मामला सामने आया है, जहां 70 साल की एक बुजुर्ग मां अपने ही बेटों की बेरुखी और उपेक्षा के चलते प्रशासनिक चौखट पर न्याय की आस लगाए खड़ी हैं। पति की मृत्यु के एक दशक बीत जाने के बाद बेसहारा हुईं मीना देवी पिछले डेढ़ वर्ष से नियमित तौर पर देहरादून जिलाधिकारी के कार्यालय में आयोजित होने वाली जनसुनवाई में पहुंच रही हैं। उम्र के इस नाजुक पड़ाव पर जब उन्हें अपनों के सहारे और सेवा की सख्त जरूरत थी, तब उन्हें अपने दैनिक भरण-पोषण और जीवन यापन के अधिकार के लिए सरकारी दफ्तरों की सीढ़ियां नापने को मजबूर होना पड़ रहा है। घरेलू कलह, मारपीट और आर्थिक तंगी का दंश पीड़िता ने अपनी व्यथा साझा करते हुए आरोप लगाया है कि जिन बेटों को उन्होंने लाड़-प्यार से पाला-पोसा, वही आज उन्हें बुनियादी सुविधाएं देने से कतरा रहे हैं। उनके अनुसार, बेटे और बहुएं आए दिन उनसे विवाद करते हैं और यह झगड़ा कई बार मारपीट तथा मानसिक प्रताड़ना तक पहुंच जाता है। मीना देवी के सामने संकट सिर्फ सिर छिपाने या दो वक्त के भोजन का ही नहीं है, बल्कि वह गंभीर आर्थिक तंगी से घिरी हुई हैं। वर्तमान में उनके पास न तो आजीविका का कोई नियमित साधन बचा है और न ही कोई सुरक्षित ठिकाना, जिसके चलते वह पूरी तरह असहाय महसूस कर रही हैं। स्वास्थ्य समस्याओं का बोझ और पुराने रोजगार का छूटना मीना देवी ने बताया कि करीब दस वर्ष पूर्व उनके पति का निधन हो गया था, जिसके बाद उन्होंने खुद मेहनत-मजदूरी करके घर चलाने की कोशिश की। पहले वह नवजात शिशुओं और प्रसूताओं की मालिश करके कुछ आमदनी जुटा लेती थीं, लेकिन अब बढ़ती उम्र, कमर दर्द और पैरों की गंभीर तकलीफ की वजह से वह यह शारीरिक मेहनत करने में पूरी तरह असमर्थ हो चुकी हैं। इसके अलावा, उनके छोटे बेटे की एक दुर्घटना में चोटिल होने के कारण वह कोई काम नहीं कर पाता, जिससे उसकी दवाओं और देखरेख का खर्च जुटाना भी एक गंभीर चुनौती बना हुआ है। इलाज के अभाव में ऑपरेशन टला, नाममात्र की मदद चिकित्सकों ने मीना देवी के पैरों की बीमारी को देखते हुए उन्हें ऑपरेशन कराने की सलाह दी है, परंतु उनके पास इसके लिए आवश्यक धनराशि उपलब्ध नहीं है। उन्होंने व्यथित होकर बताया कि बेटे यदि कभी पैसे देते भी हैं, तो वह तीन महीने में मात्र 1500 रुपये के करीब होता है। इतनी कम राशि में वह अपने लिए भोजन जुटाएं अथवा अपनी नियमित दवाओं का प्रबंध करें, यह उनके सामने एक बड़ा यक्ष प्रश्न है। इसी लाचारी के चलते उन्हें अपने ही संतानों के खिलाफ जिलाधिकारी के समक्ष शिकायत दर्ज करानी पड़ी है। प्रशासन की ओर से सख्त कदम उठाने की चेतावनी जनसुनवाई में लगातार अपनी आपबीती सुनाने के बाद भी बुजुर्ग महिला को अब तक केवल आश्वासन ही हाथ लगे हैं। हालांकि, जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि मीना देवी के बेटों को पहले भी पत्र भेजकर माता के लिए हर महीने भरण-पोषण का खर्च देने के निर्देश जारी किए गए थे। अधिकारियों के अनुसार, यदि बेटे अपनी बुजुर्ग माता के नियमित भरण-पोषण और देखभाल का दायित्व नहीं निभाते हैं, तो उनके खिलाफ कानून के तहत बेहद सख्त प्रशासनिक कदम उठाए जाएंगे। इसका आप पर असर यह मामला बुजुर्ग माता-पिता के कानूनी अधिकारों और भरण-पोषण नियमों से सीधे जुड़ा है। • भारत में: देश भर के वरिष्ठ नागरिकों के लिए यह समझना महत्वपूर्ण है कि माता-पिता एवं वरिष्ठ नागरिक भरण-पोषण अधिनियम के तहत बच्चों से गुजारा भत्ता पाना कानूनी अधिकार है। यदि बच्चे सहयोग न करें, तो स्थानीय अनुविभागीय या जिला मजिस्ट्रेट के समक्ष आवेदन देकर मासिक सहायता और सुरक्षा की मांग की जा सकती है। • देहरादून में: देहरादून और आसपास के क्षेत्रों में रहने वाले वरिष्ठ नागरिक जिला प्रशासन की जनसुनवाई व्यवस्था का उपयोग अपनी शिकायतें दर्ज कराने के लिए कर सकते हैं। पीड़ित नागरिक डीएम कार्यालय जाकर भरण-पोषण आदेशों के पालन में लापरवाही बरतने वाले परिजनों पर सीधी प्रशासनिक कार्रवाई की मांग उठा सकते हैं। • परिवारों के लिए: बुजुर्ग माता-पिता की देखभाल में कोताही बरतने वाले परिवारों को यह जानना जरूरी है कि प्रशासन की अनदेखी भारी जुर्माना या कानूनी कार्रवाई का कारण बन सकती है। तय मासिक भरण-पोषण न देने पर प्रशासन बैंक खातों या संपत्ति के संदर्भ में कड़े कदम उठा सकता है। • स्वास्थ्य सहायता: आर्थिक तंगी से जूझ रहे जरूरतमंद वरिष्ठ नागरिक सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य योजनाओं से निःशुल्क अथवा रियायती शल्य चिकित्सा व दवाओं का लाभ ले सकते हैं। जिला समाज कल्याण विभाग के माध्यम से वृद्धावस्था पेंशन और चिकित्सा सहायता के लिए पंजीकरण कराया जा सकता है। ऐसा क्यों हुआ यह स्थिति पारिवारिक उपेक्षा, शारीरिक असमर्थता और प्रशासनिक आदेशों के धीमे क्रियान्वयन के संयुक्त कारणों से उत्पन्न हुई है। • पारिवारिक उपेक्षा और विवाद: पति के निधन के बाद परिवार में आपसी कलह बढ़ गई और बेटों ने बुजुर्ग मां की आर्थिक व शारीरिक जिम्मेदारी उठाने से किनारा कर लिया। इस कारण वृद्धा को भोजन और दवा जैसी प्राथमिक जरूरतों के लिए भी भारी संघर्ष करना पड़ रहा है। • कमाई के साधन का अंत: पूर्व में मालिश का कार्य करके आजीविका चलाने वाली महिला शारीरिक पीड़ा और बढ़ती उम्र के कारण अब काम करने में असमर्थ हो चुकी हैं। घर में छोटे बेटे की दुर्घटना के चलते कोई वैकल्पिक आमदनी का साधन भी उपलब्ध नहीं रह गया। • प्रशासनिक निर्देशों की अनसुनी: जिला प्रशासन द्वारा पूर्व में बेटों को मासिक भरण-पोषण देने संबंधी पत्र भेजा गया था, लेकिन बेटों ने उस पर संतोषजनक अमल नहीं किया। प्रभावी कानूनी दबाव के अभाव में महिला को पिछले डेढ़ साल से लगातार दफ्तरों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। सवाल-जवाब 1. मीना देवी कहां की निवासी हैं और वह किस कार्यालय के चक्कर काट रही हैं? मीना देवी देहरादून के राजपुर क्षेत्र की रहने वाली हैं और वह पिछले डेढ़ साल से देहरादून जिलाधिकारी कार्यालय के चक्कर काट रही हैं। 2. मीना देवी के पति का निधन कब हुआ था? मीना देवी के पति का निधन लगभग 10 साल पहले हुआ था। 3. बुजुर्ग महिला ने अपने बेटों पर क्या मुख्य आरोप लगाए हैं? उन्होंने आरोप लगाया है कि उनके बेटे-बहू उन्हें भरण-पोषण नहीं देते, गाली-गलौज और मारपीट करते हैं तथा उन्हें बेसहारा छोड़ दिया है। 4. महिला को डॉक्टरों ने किस चीज की सलाह दी है और वह ऐसा क्यों नहीं करा पा रही हैं? पैरों की गंभीर समस्या के कारण डॉक्टरों ने उन्हें ऑपरेशन की सलाह दी है, लेकिन धन के अभाव में वह ऑपरेशन नहीं करवा पा रही हैं। 5. बेटे अपनी मां को आर्थिक सहायता के रूप में कितनी राशि देते हैं? मीना देवी के अनुसार, उनके बेटे यदि देते भी हैं तो तीन महीने में केवल 1500 रुपये देते हैं। 6. जिला प्रशासन ने इस पूरे मामले में क्या रुख अपनाया है? जिला प्रशासन ने कहा है कि बेटों को पहले भी पत्र भेजा गया था और यदि वे माता का भरण-पोषण नहीं करेंगे तो उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। https://trendkia.com/uttarakhand/dehradun-men-beton-ki-berukhi-ki-shikara-70-varshiya-meena-devi-bharana-poshana-ke-lie-derha-sala-se-kata-rahin-dm-daphtara-ke-cha-47916 TrendKia — Har trend, sabse pehle.