# देहरादून में एलिवेटेड रोड के खिलाफ 300 परिवारों का फूटा गुस्सा, बोले- पर्यटकों के लिए तोड़े जा रहे हमारे आशियाने

> देहरादून में प्रस्तावित आशारोड़ी-मोहकमपुर एलिवेटेड रोड के विरोध में करीब 300 परिवार सड़कों पर उतर आए हैं। प्रभावित लोगों का कहना है कि परियोजना के लिए उनके घरों को तोड़ा जा रहा है, जिससे उनके सामने बेघर होने का संकट खड़ा हो गया है।

**Type:** article · **Category:** उत्तराखंड · **Published:** 2026-10-16 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/uttarakhand/dehradun-men-elevated-road-ke-khilapha-300-parivaron-ka-phuta-gussa-bole-paryatakon-ke-lie-tore-ja-rahe-hamare-ashiyane-48281 · **Language:** Hindi
**Tags:** देहरादून, एलिवेटेड रोड, उत्तराखंड, एनएचएआई, आशारोड़ी, मोहकमपुर, ट्रैफिक

उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में बढ़ते ट्रैफिक को नियंत्रित करने और यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने के उद्देश्य से आशारोड़ी-मोहकमपुर फ्लाईओवर का निर्माण प्रस्तावित है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के दायरे में आने वाले स्थानीय रहवासियों ने आरोप लगाया है कि पर्यटकों की सहूलियत के नाम पर उनके सालों पुराने आशियाने उजाड़े जा रहे हैं। लोगों का कहना है कि इस निर्माण से उनकी बचपन की यादें और बुजुर्गों का जुड़ाव सीधे तौर पर प्रभावित हो रहा है, जबकि कई परिवारों की जीवनभर की जमापूंजी इस आशियाने में लगी हुई है। पूर्व में जारी गजट के प्रावधानों के मुताबिक सॉलिटेयर होटल के बाद आशारोड़ी तक पुराने हाईवे को ही चौड़ा किया जाना तय किया गया था, लेकिन योजना में बदलाव के कारण स्थिति पूरी तरह बदल गई है। इस करीब 13 किलोमीटर लंबे एलिवेटेड रोड प्रोजेक्ट पर अनुमानित लागत 2500 करोड़ रुपए से अधिक की है, जिसके चलते स्थानीय निवासियों के सिर से छत छिनने का खतरा पैदा हो गया है।

## अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे प्रभावित परिवार
इस निर्माण कार्य से सीधे तौर पर करीब 300 मकान प्रभावित हो रहे हैं, जिन्हें तोड़ने की नौबत आ गई है। बेघर होने के खौफ और भविष्य की अनिश्चितता के चलते स्थानीय लोगों ने ‘मोहकमपुर आशारोड़ी एलिवेटेड रोड संघर्ष समिति’ के नेतृत्व में खुला मोर्चा खोल दिया है। प्रभावित लोग अपने घरों को बचाने के लिए कड़ाके की ठंड और खुले आसमान के नीचे अनिश्चितकालीन धरने पर बैठने को मजबूर हो गए हैं। स्थानीय लोगों के मुताबिक, यह सिर्फ दीवारों और ईंटों का मामला नहीं है, बल्कि इससे उनकी पीढ़ियों की भावनाएं जुड़ी हुई हैं जो पलभर में मिट्टी में मिलने की कगार पर पहुंच गई हैं।

## बुजुर्गों और मध्यम वर्ग की संघर्ष भरी दास्तान
इस विरोध प्रदर्शन में शामिल करीब 50 साल पुराने मकान में रहने वाली बुजुर्ग महिला कमलेश ने अपना दर्द बयां करते हुए बताया कि उन्होंने और उनके पति ने एक-एक पाई जोड़कर और खुद गड्ढे खोदकर इस आशियाने का निर्माण किया था। वहीं एक अन्य स्थानीय निवासी नेहा पंडित ने जानकारी दी कि उन्होंने बेहद संघर्ष के बाद बमुश्किल एक साल पहले ही अपना मकान बनवाया था, जिसका काम अभी पूरी तरह से मुकम्मल भी नहीं हो पाया है। मध्यम वर्ग के परिवारों के लिए अपना खुद का घर तैयार करना जीवन का सबसे बड़ा सपना होता है, और यह प्रोजेक्ट उनकी पूरी गृहस्थी को उजाड़कर रख देगा।

## डीपीआर में बदलाव और लाल निशान से बढ़ा आक्रोश
पिछले 20 वर्षों से अपने परिवार के साथ यहां रह रहे टीएस नेगी ने बताया कि उन्होंने अपनी रिटायरमेंट की पूरी पूंजी लगाकर यह घर खड़ा किया था, लेकिन आज उन्हें इस उम्र में अपने बच्चों की छत बचाने के लिए सड़क पर उतरना पड़ रहा है। उनका मुख्य आरोप है कि शुरुआत में इस एलिवेटेड रोड को नेशनल हाईवे से ही बनाए जाने की योजना थी, लेकिन बाद में डीपीआर में चुपचाप बदलाव करके इसे घनी आबादी की तरफ मोड़ दिया गया। निवासियों को इस बदलाव की भनक तब लगी जब अचानक कुछ लोग उनके घरों पर आकर लाल निशान लगाने लगे। संघर्ष समिति का तर्क है कि आधिकारिक गजट में सॉलिटेयर होटल से आशारोड़ी तक पुराने मार्ग को चौड़ा करने का स्पष्ट प्रावधान था, जिसका पालन नहीं किया जा रहा है।

## दिहाड़ी मजदूरों की लाचारी और मुआवजे पर संशय
टीएस नेगी ने यह भी स्पष्ट किया कि इस परियोजना का असर केवल सीधे तौर पर जद में आने वाले मकानों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके आसपास के इलाकों में रहने वाले परिवार भी इसकी चपेट में आएंगे। इस धरने-प्रदर्शन में कई ऐसे दिहाड़ी मजदूर भी हैं जो चाहकर भी विरोध का हिस्सा नहीं बन पा रहे हैं, क्योंकि अगर वे एक दिन भी काम पर नहीं गए तो उनके घरों का चूल्हा नहीं जलेगा। आज के इस दौर में आसमान छूती महंगाई के बीच सरकार की तरफ से मिलने वाले मुआवजे की रकम से दोबारा वैसी जमीन और मकान खरीद पाना लगभग असंभव सा है। बाहरी पर्यटकों के आवागमन को सुगम बनाने के लिए स्थानीय जनता के आशियाने उजाड़ने के इस सरकारी फैसले को लेकर लोगों में गहरा आक्रोश व्याप्त है।

## भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण का पक्ष और प्रशासनिक बैठक
दूसरी तरफ, भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) के अधिकारी सौरभ सिंह का कहना है कि प्रिंस चौक से जोगीवाला तक वर्तमान में वाहनों का दबाव बेहद ज्यादा है। यदि पुराने अलाइनमेंट या मौजूदा हाईवे को चौड़ा किया जाता, तो सड़क के दोनों तरफ अत्यधिक घनी आबादी और बड़ी व्यावसायिक इमारतें होने के कारण नुकसान बहुत अधिक होता। इसी वजह से रेलवे लाइन के किनारे उपलब्ध खाली जमीन पर नए अलाइनमेंट का विकल्प चुना गया है। यह नया मार्ग रेलवे की भूमि को छोड़ते हुए मोहकमपुर बस्ती, कंपनी बाग, जोगीवाला फाटक, फ्रेंड्स कॉलोनी और रिस्पना नदी से गुजरते हुए अजाबपुर फ्लाईओवर से जाकर जुड़ेगा। इस पूरे विवाद का कोई ठोस समाधान निकालने के लिए देहरादून जिला प्रशासन की तरफ से 24 अक्टूबर 2026 को कलेक्ट्रेट में एक महत्वपूर्ण बैठक बुलाई गई है, जिसमें प्रभावित नागरिकों और NHAI दोनों पक्षों को अपनी बात रखने का पूरा अवसर मिलेगा।

## इसका आप पर असर
इस एलिवेटेड रोड परियोजना से देहरादून के स्थानीय नागरिकों और यातायात व्यवस्था पर सीधा प्रभाव पड़ेगा।

- **भारत में:** बुनियादी ढांचे के विकास और पर्यटन को बढ़ावा देने वाली ऐसी शहरी परियोजनाओं के दौरान स्थानीय विस्थापन और मुआवजे के मुद्दे अक्सर राष्ट्रीय स्तर पर बहस का विषय बनते हैं। इससे देश के अन्य सड़क विकास प्रोजेक्ट्स पर भी सामाजिक प्रभाव का आकलन करने का दबाव बनता है।
- **देहरादून में:** आशारोड़ी-मोहकमपुर क्षेत्र के करीब 300 परिवारों के सिर से छत छिनने का सीधा खतरा पैदा हो गया है, जिससे वे अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे हैं। प्रशासन द्वारा 24 अक्टूबर 2026 को होने वाली बैठक में तय होगा कि विस्थापित परिवारों को क्या राहत मिलेगी।

## ऐसा क्यों हुआ
देहरादून में इस एलिवेटेड रोड परियोजना को आगे बढ़ाने और उसके रूट में बदलाव के पीछे तकनीकी और भौगोलिक कारण बताए गए हैं।

- **याचतायात का भारी दबाव:** प्रिंस चौक से जोगीवाला मार्ग पर वाहनों की अत्यधिक आवाजाही और कंजेशन के कारण सड़क को चौड़ा करने की आवश्यकता महसूस की गई।
- **भौगोलिक बाधाएं:** मौजूदा हाईवे के दोनों तरफ घनी आबादी और बड़ी व्यावसायिक इमारतें होने के कारण पुराने रूट को चौड़ा करने पर बहुत अधिक नुकसान होने की आशंका थी।
- **नए अलाइनमेंट का चयन:** अधिक तबाही से बचने के लिए अधिकारियों ने रेलवे लाइन के साथ उपलब्ध खाली भूमि का उपयोग करते हुए नया वैकल्पिक रूट तैयार किया।

## सवाल-जवाब

### 1. देहरादून में कौन सी एलिवेटेड रोड बनाई जा रही है?
देहरादून में आशारोड़ी-मोहकमपुर फ्लाईओवर और एलिवेटेड रोड का निर्माण प्रस्तावित है।

### 2. इस परियोजना की कुल अनुमानित लागत कितनी है?
इस लगभग 13 किलोमीटर लंबे एलिवेटेड रोड प्रोजेक्ट की अनुमानित लागत 2500 करोड़ रुपए से अधिक है।

### 3. इस रोड प्रोजेक्ट से कितने मकान प्रभावित हो रहे हैं?
इस परियोजना की जद में लगभग 300 मकान आ रहे हैं, जिन्हें तोड़े जाने की नौबत आ गई है।

### 4. स्थानीय लोग क्यों विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं?
मूल डीपीआर में बदलाव करके रूट को बस्तियों की तरफ मोड़े जाने और घरों पर लाल निशान लगाए जाने के कारण लोग अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे हैं।

### 5. एनएचएआई ने नए रूट का विकल्प क्यों चुना?
पुराने हाईवे के दोनों तरफ घनी आबादी होने के कारण ज्यादा नुकसान से बचने के लिए रेलवे लाइन के पास की जमीन पर नया अलाइनमेंट चुना गया।

### 6. इस विवाद को सुलझाने के लिए प्रशासनिक बैठक कब तय की गई है?
देहरादून जिला प्रशासन ने इस मामले को सुलझाने के लिए 24 अक्टूबर 2026 को कलेक्ट्रेट में बैठक बुलाई है।

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