# देहरादून में क्रोशिया के धागों से गढ़ी जा रही आत्मनिर्भरता, नंदा स्वयं सहायता समूह के हैंडबैग्स ने खींचा सबका ध्यान

> देहरादून के रायपुर में नंदा स्वयं सहायता समूह की महिलाएं घर बैठे क्रोशिया की मदद से आकर्षक हैंडबैग और होम डेकोर उत्पाद तैयार कर रही हैं, जिनकी मांग प्रदर्शनियों से लेकर ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स तक तेजी से बढ़ रही है।

**Type:** article · **Category:** उत्तराखंड · **Published:** 2026-10-10 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/uttarakhand/dehradun-men-kroshiya-ke-dhagon-se-garhi-ja-rahi-atmanirbharata-nanda-svayn-sahayata-samuha-ke-haindabaigsa-ne-khincha-sabaka-dhya-46008 · **Language:** Hindi
**Tags:** देहरादून, उत्तराखंड, स्वयं सहायता समूह, क्रोशिएट हैंडबैग, महिला उद्यमिता, हस्तशिल्प

उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में महिलाओं का एक समूह पारंपरिक हस्तकला को आधुनिक फैशन ट्रेंड के साथ जोड़कर स्वरोजगार की नई इबारत लिख रहा है। रायपुर क्षेत्र में सक्रिय नंदा स्वयं सहायता समूह से जुड़ी महिलाएं अपने घरों में रहकर क्रोशिया और मजबूत धागों की मदद से उच्च गुणवत्ता वाले हैंडबैग और कपड़े के उत्पाद तैयार कर रही हैं। हाथ से बुने गए ये उत्पाद न केवल पर्यावरण के अनुकूल हैं, बल्कि अपने टिकाऊपन, प्रीमियम फिनिशिंग और आकर्षक डिजाइनों के चलते बाजार में उपलब्ध बड़े वाणिज्यिक ब्रांडों के उत्पादों के समक्ष भी एक मजबूत विकल्प बनकर उभर रहे हैं।

## घर बैठे हुनर से कमाई और उत्पादन की पूरी प्रक्रिया
इस रचनात्मक पहल से जुड़ी चेतना शर्मा के अनुसार, यह व्यवस्था विशेष रूप से उन महिलाओं के लिए आय का जरिया बन चुकी है जो पारिवारिक या अन्य कारणों से घर से बाहर जाकर नौकरी करने में असमर्थ हैं। कार्यप्रणाली के तहत समूह की महिला कारीगर अपने घर पर ही क्रोशिया तकनीक से अलग-अलग छोटे पैच बुनती हैं। इन सभी तैयार पैच को बाद में मुख्य कार्यालय में एकत्र किया जाता है, जहां उन्हें जोड़कर अंतिम उत्पाद का रूप दिया जाता है। इस संगठित प्रक्रिया के जरिए केवल हैंडबैग ही नहीं, बल्कि टी कोस्टर, कार्डिगन, मफलर, टेबल कवर और कुशन कवर जैसे कई उपयोगी और सजावटी घरेलू उत्पाद भी तैयार किए जा रहे हैं।

## मजबूत धागे, ट्रेंडी स्टाइल और आसान रख-रखाव
इन हस्तनिर्मित बैग्स के निर्माण में मुख्य रूप से एक्रेलिक और ब्रायलॉन सामग्री का उपयोग किया जाता है, जिससे उत्पाद लंबे समय तक टिकाऊ बने रहते हैं। बैग्स के डिजाइन को समकालीन पसंद के अनुसार ढाला गया है, जिसमें पिंटरेस्ट से प्रेरित ग्रेनी स्क्वायर, सनफ्लावर डिजाइन, टॉड बैग और कॉलेज जाने वाली युवतियों के लिए विस्कोस बैग शामिल हैं। इन उत्पादों की सबसे बड़ी विशेषता इनका लचीला उपयोग है, जिन्हें दफ्तर के औपचारिक परिधानों से लेकर वैवाहिक आयोजनों के पारंपरिक और भारी कपड़ों के साथ आसानी से इस्तेमाल किया जा सकता है। इसके अलावा, इन्हें घर पर सामान्य रूप से धोया जा सकता है और लंबे समय तक इस्तेमाल के बाद भी इनका रंग या धागा खराब नहीं होता है।

## प्रदर्शनियों और ऑनलाइन माध्यम से बिक्री का विस्तार
हस्तनिर्मित क्रोशिएट उत्पादों की बिक्री के लिए स्थानीय प्रदर्शनियों के साथ-साथ डिजिटल माध्यमों का व्यापक सहारा लिया जा रहा है। देहरादून में आयोजित होने वाले विभिन्न मेलों और प्रदर्शनियों में इन उत्पादों को प्रदर्शित किया जाता है, जहां ग्राहकों का अच्छा रुझान देखने को मिलता है। इसके अतिरिक्त, जो उपभोक्ता इन फैशनेबल और पर्यावरण के अनुकूल उत्पादों को खरीदना चाहते हैं, वे ‘Mini ‘s cozy knot’ के माध्यम से संपर्क स्थापित कर सकते हैं। यह प्रयास न केवल स्थानीय हस्तशिल्प को नया बाजार उपलब्ध करा रहा है, बल्कि महिलाओं को आर्थिक संबल प्रदान कर स्वावलंबन को भी मजबूती दे रहा है।

## इसका आप पर असर
यह पहल दर्शाती है कि पारंपरिक घरेलू हुनर को व्यवस्थित उत्पादन से जोड़कर महिलाओं के लिए स्थायी स्वरोजगार कैसे खड़ा किया जा सकता है।

- **देहरादून में:** रायपुर और आसपास की गृहिणियों को घर की जिम्मेदारियों के साथ नियमित आमदनी का साधन मिल रहा है। इसके साथ ही स्थानीय उपभोक्ताओं को मेलों और प्रदर्शनियों में पर्यावरण-अनुकूल स्थानीय उत्पाद आसानी से उपलब्ध हो रहे हैं।
- **भारत में:** देश भर के फैशन प्रेमी और पर्यावरण के प्रति जागरूक खरीदार ऑनलाइन माध्यम से हाथ से बने टिकाऊ बैग खरीद सकते हैं। यह मॉडल अन्य राज्यों के स्वयं सहायता समूहों के लिए भी लघु उद्योग स्थापित करने की व्यावहारिक प्रेरणा देता है।
- **खरीदारों के लिए:** एक्रेलिक और ब्रायलॉन धागों से बने ये बैग आसानी से धोए जा सकते हैं और सालों-साल खराब नहीं होते। ग्राहक इन्हें दफ्तर और शादियों दोनों में अपनी पोशाक के साथ पहन सकते हैं।
- **कारीगरों के लिए:** जो महिलाएं बाहर जाकर काम नहीं कर सकतीं, उन्हें घर पर ही पैच तैयार करके आर्थिक संबल मिल रहा है। इस व्यवस्था से उनके समय और हुनर का सही मूल्य सुनिश्चित हो रहा है।

## ऐसा क्यों हुआ
नंदा स्वयं सहायता समूह ने घर पर रहने वाली महिलाओं की रोजगार संबंधी जरूरतों और बाजार में इको-फ्रेंडली हस्तनिर्मित फैशन की मांग को देखकर यह कार्य शुरू किया।

- **घरेलू जिम्मेदारियों के बीच रोजगार की कमी:** कई महिलाएं पारिवारिक सीमाओं या आवागमन की कठिनाइयों के कारण नियमित नौकरी पर बाहर नहीं जा पाती थीं। घर पर ही क्रोशिया पैच बनाने की सुविधा ने उन्हें बिना बाहर निकले काम करने का व्यावहारिक अवसर दिया।
- **टिकाऊ और हैंडमेड फैशन की मांग:** आधुनिक बाजार में पर्यावरण-अनुकूल और विशिष्ट डिजाइनों वाले हस्तशिल्प उत्पादों के प्रति ग्राहकों की रुचि लगातार बढ़ रही है। समूह ने पिंटरेस्ट के लोकप्रिय पैटर्नों को अपनाकर इस मांग को भुनाया।
- **केंद्रीकृत असेंबलिंग मॉडल:** महिलाओं द्वारा अलग-अलग बुने गए पैच को मुख्य दफ्तर में एकत्र कर पूरा उत्पाद बनाने की व्यवस्था ने गुणवत्ता और बड़े पैमाने पर उत्पादन को संभव बनाया। इससे उत्पादन की गति और फिनिशिंग दोनों बेहतर हुई।

## सवाल-जवाब

### 1. नंदा स्वयं सहायता समूह की महिलाएं कौन से उत्पाद तैयार करती हैं?
महिलाएं क्रोशिया और धागों की मदद से हैंडबैग, टी कोस्टर, कार्डिगन, मफलर, टेबल कवर और कुशन कवर जैसे उत्पाद बनाती हैं।

### 2. इन क्रोशिएट बैग्स को बनाने में किन सामग्रियों का इस्तेमाल किया जाता है?
बैग्स को मजबूत और टिकाऊ बनाने के लिए मुख्य रूप से एक्रेलिक और ब्रायलॉन सामग्री का उपयोग किया जाता है।

### 3. क्या इन हस्तनिर्मित बैग्स को घर पर धोया जा सकता है?
हां, ये बैग पूरी तरह धोने योग्य हैं और लंबे समय तक इस्तेमाल के बाद भी इनका धागा या रंग खराब नहीं होता।

### 4. इन बैग्स में कौन-कौन से प्रमुख डिजाइन उपलब्ध हैं?
इनमें पिंटरेस्ट से प्रेरित ग्रेनी स्क्वायर, सनफ्लावर डिजाइन, टॉड बैग और कॉलेज छात्राओं के लिए विस्कोस बैग शामिल हैं।

### 5. ग्राहक इन बैग्स को कहां से खरीद सकते हैं?
ग्राहक देहरादून में लगने वाली प्रदर्शनियों के अलावा ऑनलाइन माध्यम ‘Mini ‘s cozy knot’ पर संपर्क करके इन्हें खरीद सकते हैं।

## प्रेरणा और सबक
देहरादून की इन महिला कारीगरों का सफर दिखाता है कि सीमित संसाधनों और पारंपरिक कला के सहारे भी स्वावलंबन का मजबूत रास्ता बनाया जा सकता है।

- **सीमित दायरे को ताकत बनाएं:** घर से बाहर न जा पाने की विवशता को बाधा मानने के बजाय महिलाओं ने घर को ही उत्पादन केंद्र बनाकर आत्मनिर्भरता हासिल की।
- **पारंपरिक कला में आधुनिकता का समावेश:** क्रोशिया जैसी पारंपरिक तकनीक को इंटरनेट और आधुनिक फैशन पैटर्नों से जोड़कर वैश्विक स्तर के ट्रेंडी उत्पाद तैयार किए जा सकते हैं।
- **सामूहिक शक्ति से बड़ा लक्ष्य:** अलग-अलग घरों में बैठकर छोटा काम करने वाली महिलाओं ने एकजुट होकर एक संगठित ब्रांड और टिकाऊ व्यवसाय खड़ा कर दिखाया।

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