# दीपावली पर ग्रीन पटाखों की अनदेखी, खरीदार और विक्रेता दोनों ही अनजान

> दीपावली पर प्रदूषण रोकने के लिए सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद ग्रीन पटाखे पेश किए गए थे, लेकिन आज भी देहरादून के बाजारों में इन्हें लेकर भारी जागरूकता की कमी है।

**Type:** article · **Category:** उत्तराखंड · **Published:** 2026-11-07 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/uttarakhand/dipavali-para-green-patakhon-ki-anadekhi-kharidara-aura-vikreta-donon-hi-anajana-57571 · **Language:** Hindi
**Tags:** ग्रीन पटाखे, दीपावली प्रदूषण, सुप्रीम कोर्ट, नीरी, अनूप नौटियाल, पर्यावरण प्रदूषण

दीपावली के मौके पर होने वाली आतिशबाजी को नियंत्रित करने के लिए सर्वोच्च अदालत ने कड़े निर्देश जारी किए हैं। वायु प्रदूषण की गंभीर स्थिति को ध्यान में रखते हुए राजधानी दिल्ली समेत कई इलाकों में पटाखों के इस्तेमाल के लिए समय तय किया गया है। प्रदूषण के इस संकट से निपटने के लिए करीब तीन साल पहले देश में पर्यावरण के अनुकूल ग्रीन पटाखों की शुरुआत की गई थी, लेकिन आज भी जमीनी स्तर पर स्थिति यह है कि न तो दुकानदारों को और न ही आम खरीदारों को इनके बारे में सही जानकारी है।

## बाजारों में स्थिति और नियमों का हाल
त्योहार के इस सीजन में बाजार रंग-बिरंगे पटाखों सेटे हुए हैं। स्थानीय प्रशासन ने इनकी बिक्री के लिए खास जगहें भी तय की हैं, हालांकि नियमों के पालन को लेकर सवाल बने हुए हैं। इन सबके बीच सबसे चिंताजनक पहलू ग्रीन पटाखों को लेकर लोगों में जागरूकता की कमी है। बाजार में पहुंचने वाले आम ग्राहकों को यह तक नहीं पता कि ग्रीन पटाखे आखिर क्या होते हैं, और यही हाल इन्हें बेचने वाले दुकानदारों का भी है जो इसके बारे में ज्यादा कुछ नहीं जानते। कई जगहों पर तो पटाखों के डिब्बों पर छपे क्यूआर कोड को स्कैन करने पर भी कोई पुख्ता जानकारी सामने नहीं आती है।

## क्या होती है ग्रीन पटाखों की खूबी
पारंपरिक पटाखों के मुकाबले पर्यावरण को कम नुकसान पहुंचाने के उद्देश्य से ग्रीन पटाखों को तैयार किया जाता है। इनके निर्माण में विशेष बदलाव किए जाते हैं ताकि धुएं का उत्सर्जन और खतरनाक गैसों का निकलना कम हो सके। वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद के अधीन आने वाली राष्ट्रीय पर्यावरण अभियांत्रिकी अनुसंधान संस्थान (नीरी) ने इन पटाखों के मानक तय किए हैं। इनमें सेफ वाटर रिलीजर, सेफ थर्माइट क्रैकर और सेफ मिनिमल एल्युमिनियम जैसी श्रेणियां शामिल हैं। खास बात यह है कि इन ग्रीन पटाखों के निर्माण में बेरियम नाइट्रेट का इस्तेमाल नहीं किया जाता है।

## प्रशासनिक पहलों की दरकार
पर्यावरण और प्रदूषण के मुद्दों पर काम करने वाले सामाजिक कार्यकर्ता अनूप नौटियाल का कहना है कि समाज में असली बदलाव तभी आ सकता है जब प्रशासन खुद आगे बढ़कर पहल करे। उनका मानना है कि इस दिशा में बड़े स्तर पर जागरूकता अभियान चलाने की सख्त जरूरत है ताकि आम जनता को ग्रीन पटाखों की पहचान हो सके। कुल मिलाकर स्थिति यह है कि ग्रीन पटाखों का जिक्र केवल कागजों तक ही सीमित होकर रह गया है, और आज भी लोगों को यह नहीं मालूम कि ये पटाखे असल में क्या हैं और इन्हें कहां से खरीदा जा सकता है।

## इसका आप पर असर
दीपावली के दौरान ग्रीन पटाखों की जानकारी न होने का सीधा असर आम जनता की सेहत और प्रशासनिक नियमों के पालन पर पड़ता है।

- **भारत में:** देशभर के खरीदारों को यह स्पष्ट होना चाहिए कि बाजार में बिकने वाले हर पटाखे पर्यावरण के अनुकूल नहीं होते हैं। यदि सही जानकारी न हो तो लोग अनजाने में अधिक प्रदूषण फैलाने वाले पारंपरिक पटाखों की खरीद जारी रखते हैं।
- **उत्तराखंड में:** देहरादून और आसपास के स्थानीय निवासियों को खरीदारी करते समय दुकानदारों से ग्रीन पटाखों के बारे में सख्ती से पूछताछ करनी चाहिए। जिला प्रशासन द्वारा तय की गई बिक्री की जगहों और नियमों का पालन करना हर नागरिक की जिम्मेदारी है ताकि हवा की गुणवत्ता को बचाया जा सके।

## ऐसा क्यों हुआ
बाजार में ग्रीन पटाखों की यह स्थिति कई प्रशासनिक और तकनीकी कारणों से उत्पन्न हुई है।

- **जागरूकता अभियानों की कमी:** पिछले तीन वर्षों में इन पर्यावरण-अनुकूल उत्पादों के प्रचार-प्रसार के लिए जमीनी स्तर पर कोई ठोस अभियान नहीं चलाया गया है।
- **विक्रेताओं की उदासीनता:** दुकानदारों और व्यापारियों को खुद इन उत्पादों के मानकों और पहचान के बारे में विधिवत प्रशिक्षित नहीं किया गया है।
- **तकनीकी खामियां:** कई उत्पादों पर बने क्यूआर कोड में सही और सत्यापित जानकारी का अभाव पाया गया है, जिससे उपभोक्ताओं का संदेह और बढ़ जाता है।

## सवाल-जवाब

### 1. ग्रीन पटाखे क्या होते हैं?
ग्रीन पटाखे वे आतिशबाजी उत्पाद हैं जिन्हें कम प्रदूषण फैलाने के उद्देश्य से बनाया जाता है और इनमें हानिकारक उत्सर्जन कम होता है।

### 2. ग्रीन पटाखों के मानक किसने तय किए हैं?
सीएसआईआर के तहत राष्ट्रीय पर्यावरण अभियांत्रिकी अनुसंधान संस्थान (नीरी) ने ग्रीन पटाखों के मानक तय किए हैं।

### 3. क्या ग्रीन पटाखों में बेरियम नाइट्रेट होता है?
नहीं, इन पटाखों में बेरियम नाइट्रेट का इस्तेमाल नहीं किया जाता है।

### 4. अनूप नौटियाल कौन हैं?
अनूप नौटियाल एक सोशल एक्टिविस्ट हैं जो प्रदूषण सर्वेक्षण पर काम कर रहे हैं।

### 5. बाजार में क्या समस्या देखने को मिल रही है?
बाजार में स्थिति यह है कि न तो खरीदारों को और न ही बेचने वालों को ग्रीन पटाखों के बारे में कोई जानकारी है।

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