# दुबई से हल्द्वानी तक प्यार का सफर, बागेश्वर के नवीन परिहार ने थाईलैंड की मोरियां संग रचाई शादी

> दुबई में नौकरी के दौरान मिले बागेश्वर के नवीन परिहार और थाईलैंड की शेफ मोरियां ने हल्द्वानी में कुमाऊंनी रीति-रिवाजों के साथ सात फेरे लिए। इस अनूठी शादी में विदेशी मेहमान भी शामिल हुए।

**Type:** article · **Category:** उत्तराखंड · **Published:** 2026-10-22 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/uttarakhand/dubai-romance-to-haldwani-wedding-bageshwar-s-naveen-parihar-ties-the-knot-with-thailand-s-moriya-in-kumaoni-tradition-50537 · **Language:** Hindi
**Tags:** उत्तराखंड विवाह, बागेश्वर न्यूज, थाईलैंड दुल्हन, कुमाऊंनी शादी, हल्द्वानी समाचार, दुबई लव स्टोरी

प्यार की कोई सरहद नहीं होती और यह साबित कर दिखाया है उत्तराखंड के बागेश्वर जिले के उड़लगांव निवासी नवीन परिहार और थाईलैंड की रहने वाली मोरियां ने। दुबई की जमीन पर परवान चढ़ा इनका यह प्यार अब विवाह के पवित्र बंधन में बंध चुका है। विजयदशमी के पावन अवसर पर दोनों ने कुमाऊँ की पारंपरिक संस्कृति और वैदिक मंत्रों की गूंज के बीच सात फेरे लिए और उम्रभर एक-साथ रहने का संकल्प लिया। इस अंतरराष्ट्रीए विवाह की चर्चा अब हर तरफ हो रही है और शादी के बाद अपने पैतृक गांव पहुंचने पर इस जोड़े का जोरदार स्वागत किया गया है।

## दुबई में हुई थी मुलाकात और फिर परवान चढ़ा प्यार
बागेश्वर जिले के उड़लगांव के रहने वाले 32 वर्षीय नवीन परिहार पिछले लगभग 11 वर्षों से दुबई में रहकर नौकरी कर रहे हैं। उन्होंने अपनी शुरुआती शिक्षा रवाईखाल क्षेत्र से पूरी करने के बाद हल्द्वानी से होटल मैनेजमेंट में एक साल का डिप्लोमा किया और रोजगार की तलाश में विदेश का रुख किया था। इसी दौरान उनकी मुलाकात थाईलैंड की रहने वाली 27 वर्षीय मोरियां से हुई, जो पेशे से एक शेफ हैं। दोनों ने करीब दो साल तक एक साथ काम किया, जिसके चलते उनके बीच मेलजोल और बातचीत का सिलसिला शुरू हुआ। अंग्रेजी भाषा के जरिए एक-दूसरे की भावनाओं को समझते हुए उनकी यह दोस्ती धीरे-धीरे गहरे प्यार में बदल गई और दोनों ने शादी करने का फैसला कर लिया।

## हल्द्वानी में कुमाऊंनी परंपराओं के साथ संपन्न हुआ विवाह
नवीन और मोरियां ने अपने जीवन के इस खास दिन के लिए उत्तराखंड की पारंपरिक संस्कृति को चुना। नवीन का पैतृक गांव उड़लगांव में स्थित होने के बावजूद परिवार के सदस्यों और विदेश से आने वाले मेहमानों की सहूलियत को ध्यान में रखते हुए इस विवाह का आयोजन हल्द्वानी में किया गया। नवीन की बहन के आवास देवलचौड़ में विजयदशमी के दिन स्थानीय कुमाऊंनी पुरोहितों द्वारा वैदिक मंत्रोच्चार के साथ सभी रस्में पूरी कराई गईं। इस भव्य समारोह में शामिल होने के लिए विशेष रूप से थाईलैंड से मोरियां के पिता, भाई और भाभी भी भारत पहुंचे थे। विदेशी मेहमानों ने भारतीय विवाह की प्राचीन परंपराओं को बेहद करीब से अनुभव किया और इस पारिवारिक उत्सव का हिस्सा बने। कुमाऊंनी रीति-रिवाज मोरियां के लिए पूरी तरह नए थे, लेकिन उन्होंने पूरे उत्साह के साथ हर रस्म में हिस्सा लिया। परंपराओं और उनके गहरे अर्थ को समझाने के लिए एक अंग्रेजी अनुवादक की भी सहायता ली गई, जिससे दोनों परिवारों की उपस्थिति में दो अलग-अलग संस्कृतियों का अद्भुत मिलन देखने को मिला।

## गांव में भव्य स्वागत और जश्न की तैयारियां
हल्द्वानी में शादी की सभी रस्में पूरी होने के बाद नवीन अपनी दुल्हन मोरियां को लेकर अपने परिवार के साथ घर पहुंचे। अब उनके पैतृक गांव उड़लगांव में इस नवदंपती के स्वागत और एक बड़ी पारिवारिक पार्टी को लेकर जबरदस्त उत्साह का माहौल बना हुआ है। स्थानीय लोग इस शादी को दो अलग-अलग संस्कृतियों के अनूठे संगम के रूप में देख रहे हैं। दुबई की व्यस्त जिंदगी में शुरू हुआ यह रिश्ता अब उत्तराखंड की हसीन वादियों और पहाड़ों तक पहुंच चुका है। नवीन और मोरियां की यह प्रेम कहानी इस बात की एक खूबसूरत मिसाल पेश करती है कि यदि आपसी समझ, दोस्ती और अटूट विश्वास हो, तो अलग-अलग देशों और संस्कृतियों के लोग भी जीवनभर के लिए एक अटूट रिश्ते में बंध सकते हैं।

## इसका आप पर असर
यह अनोखी शादी क्षेत्रीय संस्कृति और पर्यटन के लिहाज से स्थानीय स्तर पर विशेष महत्व रखती है।

- **उत्तराखंड में:** इस विवाह समारोह ने पहाड़ी संस्कृति और पारंपरिक कुमाऊंनी रीति-रिवाजों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक नई पहचान दिलाई है। स्थानीय स्तर पर दो अलग-अलग संस्कृतियों के इस मेल से पर्यटन और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बढ़ावा मिलता है।
- **हल्द्वानी और बागेश्वर में:** इस भव्य आयोजन से स्थानीय स्तर पर पारंपरिक विवाह आयोजनों और मेहमाननवाजी की चर्चा जोरों पर है। विदेशी मेहमानों के आने से क्षेत्रीय स्तर पर मेहमानों के स्वागत और स्थानीय संस्कृति के प्रचार-प्रसार का एक सकारात्मक संदेश गया है।

## ऐसा क्यों हुआ
यह रिश्ता दो अलग-अलग देशों के नागरिकों के बीच कार्यस्थल पर पनपी आपसी समझ और विश्वास का परिणाम है।

- **दुबई में कार्यस्थल का मेल:** नवीन परिहार और मोरियां दोनों पिछले कई वर्षों से दुबई में कार्यरत थे और एक ही क्षेत्र में काम करते थे। साथ काम करने के दौरान भाषा की बाधा को पार करते हुए अंग्रेजी माध्यम से हुई बातचीत ने उनकी दोस्ती को मजबूत किया।
- **सांस्कृतिक जुड़ाव का निर्णय:** विदेशी संस्कृति से ताल्लुक रखने के बावजूद मोरियां ने भारतीय और कुमाऊंनी परंपराओं को अपनाने की इच्छा जताई। दोनों परिवारों की रजामंदी और मेहमानों की सहूलियत को ध्यान में रखते हुए इस विवाह को पारंपरिक विधि-विधान से संपन्न कराया गया।

## सवाल-जवाब

### 1. नवीन परिहार मूल रूप से कहां के रहने वाले हैं?
नवीन परिहार उत्तराखंड के बागेश्वर जिले के उड़लगांव के रहने वाले हैं।

### 2. मोरियां किस देश की रहने वाली हैं और उनका पेशा क्या है?
मोरियां थाईलैंड की रहने वाली हैं और पेशे से शेफ हैं।

### 3. नवीन और मोरियां की पहली मुलाकात कहां हुई थी?
दोनों की पहली मुलाकात दुबई में हुई थी जहां वे साथ काम करते थे।

### 4. यह विवाह किस स्थान पर संपन्न हुआ?
यह विवाह हल्द्वानी में नवीन की बहन के घर देवलचौड़ में संपन्न हुआ।

### 5. शादी में कौन-कौन सी परंपराएं अपनाई गईं?
इस विवाह में कुमाऊंनी रीति-रिवाजों और वैदिक मंत्रोच्चार के साथ सात फेरे लिए गए।

### 6. विवाह समारोह में थाईलैंड से कौन शामिल हुआ?
शादी में मोरियां के पिता, भाई और भाभी थाईलैंड से शामिल होने आए थे।

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