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  "type": "article",
  "title": "गंगा दर्शन के बाद हरिद्वार के ये पारंपरिक जायके बनाएंगे आपकी यात्रा यादगार",
  "summary": "हरिद्वार में हर की पैड़ी से लेकर कनखल और मोती बाजार तक दशकों पुराने ऐसे भोजनालय और दुकानें मौजूद हैं, जो अपने सात्विक भोजन, कचौरी, पेड़े और पारंपरिक नाश्ते के लिए पहचानी जाती हैं।",
  "content": "तीर्थनगरी हरिद्वार में गंगा स्नान और मंदिरों में पूजा-अर्चना के साथ-साथ यहां का खानपान भी सैलानियों के सफर को खास बनाता है। हर की पैड़ी के घाटों से लेकर अपर रोड, मोती बाजार और ऐतिहासिक कनखल क्षेत्र तक ऐसे कई पुराने भोजनालय और दुकानें हैं, जहां पीढ़ियों से पारंपरिक स्वाद परोसा जा रहा है। दर्शन के उपरांत सात्विक थाली की तलाश हो या सुबह के वक्त गरमागरम कचौरी और रसेदार सब्जी का नाश्ता, हरिद्वार की ये प्रसिद्ध दुकानें वर्षों से श्रद्धालुओं की पसंदीदा बनी हुई हैं।\n\nकनखल का अन्नपूर्णा भोजनालय: 1938 से कायम है सात्विक थाली की पहचान\nदक्षेश्वर मंदिर के समीप कनखल क्षेत्र में स्थित अन्नपूर्णा भोजनालय वर्ष 1938 से अपनी शुद्धता और सात्विक खानपान के लिए जाना जाता है। अंग्रेजी हुकूमत के समय स्थापित इस भोजनालय में पिछले 87 वर्षों से बिना लहसुन और प्याज का भोजन तैयार किया जाता है। वर्तमान समय में परिवार की तीसरी पीढ़ी इस भोजनालय की बागडोर संभाल रही है। यहां बनने वाले पारंपरिक भोजन की गुणवत्ता और शुद्धता आज भी अपने शुरुआती दिनों जैसी ही बनी हुई है, जिसे देश के अलग-अलग हिस्सों से आने वाले श्रद्धालुओं के अलावा विदेशी सैलानी भी खूब पसंद करते हैं।\n\nट्रेन के डिब्बे में भोजन का अनुभव: कपासा रेस्टोरेंट\nहरिद्वार रेलवे स्टेशन परिसर में बना कपासा रेस्टोरेंट अपने अनूठे माहौल और भोजन शैली के कारण पर्यटकों के बीच आकर्षण का केंद्र है। यह पूरा रेस्टोरेंट एक असली ट्रेन के कोच के भीतर तैयार किया गया है, जहां बैठकर भोजन करते हुए डिब्बे जैसा अहसास मिलता है। इस रेस्टोरेंट की दीवारों पर भारतीय रेल के इतिहास से जुड़ी विभिन्न तस्वीरें सजाई गई हैं। यहां किफायती कीमतों पर उत्तर भारतीय थाली, दक्षिण भारतीय डोसा और सांभर, बिरयानी, चाइनीज व्यंजन और पिज्जा उपलब्ध कराया जाता है। स्वादिष्ट भोजन के साथ-साथ यह स्थान तस्वीरें और सेल्फी लेने वाले यात्रियों का भी पसंदीदा ठिकाना बना हुआ है।\n\nअपर रोड पर भगवती छोले भंडार का तीखा स्वाद\nहर की पैड़ी की ओर जाने वाले अपर रोड मार्ग पर नगर कोतवाली से महज 20 कदम की दूरी पर भगवती छोले भंडार स्थित है। यह दुकान अपने तीखे और चटपटे छोले-भटूरे, छोले-पूरी और छोले-चावल के लिए पहचानी जाती है। यहां आने वाले ग्राहकों को मुख्य थाली के साथ चने का गरमागरम सूप और तीखा सलाद भी परोसा जाता है, जो इसके स्वाद को और अधिक बढ़ा देता है। दशकों पुराने नियमित ग्राहक यहां के मसालों और विशेष स्वाद के मुरीद हैं, जिसके चलते यहां दिनभर लोगों का तांता लगा रहता है।\n\nमोती बाजार में गोपाल जी पेड़े वाले: 20 दिनों तक खराब नहीं होते पेड़े\nहर की पैड़ी के निकट मोती बाजार में राम गिरि की हवेली के पास स्थित गोपाल जी पेड़े वाले की दुकान वर्ष 1954 से शुद्ध मिठाइयों के लिए विख्यात है। गंगा आरती स्थल से कुछ ही दूरी पर मौजूद इस दुकान पर शुद्ध दूध को घंटों तक कड़ाही में औटाकर पेड़े बनाए जाते हैं। इन पेड़ों की सबसे मुख्य खासियत यह है कि इन्हें बिना फ्रिज में रखे भी लगभग 20 दिनों तक पूरी तरह ताजा और स्वादिष्ट बनाए रखा जा सकता है। यात्रा से लौटते समय प्रसाद और घर ले जाने के लिए श्रद्धालु यहां से पेड़े खरीदना पसंद करते हैं।\n\nहर की पैड़ी के मुख्य द्वार पर मोहन जी पूरी वाले का नाश्ता\nहर की पैड़ी के मुख्य बड़े गेट के ठीक सामने मोहन जी पूरी वाले की दुकान सुबह के समय से ही कचौरी और पूरी-सब्जी के शौकीनों से घिर जाती है। यहां गरमागरम फूली हुई पूरियां और विशेष हींग व साबुत मसालों के तड़के से तैयार की गई रसेदार आलू की सब्जी परोसी जाती है। हरिद्वार में गंगा स्नान करने पहुंचे यात्री सुबह के समय नाश्ते के लिए यहां कतारों में खड़े नजर आते हैं, क्योंकि यहां का पारंपरिक सात्विक नाश्ता लंबे समय से लोगों की जुबान पर चढ़ा हुआ है।\n\nमोती बाजार की ब्रिटिश कालीन धरोहर: प्राचीन मथुरा वाले\nमोती बाजार क्षेत्र में ठंडे कुएं के निकट स्थित प्राचीन मथुरा वाले की दुकान ब्रिटिश काल से संचालित एक ऐतिहासिक स्वाद का केंद्र है। हर की पैड़ी से केवल 10 मिनट की दूरी पर स्थित यह दुकान अपने खस्ता समोसे, मलाई समोसा, आलू पूरी और शुद्ध मावे से तैयार पारंपरिक मिठाइयों के लिए दूर-दूर तक प्रसिद्ध है। दशकों का समय बीत जाने के बाद भी यहां के मसालों, बनाने की कारीगरी और पारंपरिक स्वाद में कोई बदलाव नहीं आया है। ब्रिटिश काल से चली आ रही इस दुकान पर हर मौसम में स्थानीय लोगों और पर्यटकों का हुजूम देखने को मिलता है।\n\nइसका आप पर असर\nहरिद्वार आने वाले तीर्थयात्रियों और भोजन के शौकीनों के लिए यह जानकारी यात्रा के दौरान शुद्ध, प्रामाणिक और बजट-अनुकूल खानपान चुनने में मदद करती है।\n\n• शुद्ध सात्विक भोजन: धार्मिक यात्रा के दौरान श्रद्धालु बिना लहसुन-प्याज के 87 साल पुराने अन्नपूर्णा भोजनालय में शुद्ध भोजन कर सकते हैं। इससे उन्हें बिना किसी संशय के धार्मिक नियमों के अनुसार सात्विक थाली मिल जाती है।\n• यात्रा का प्रसाद: मोती बाजार के गोपाल जी के पेड़े 20 दिनों तक बिना फ्रिज के सुरक्षित रहते हैं। लंबी यात्रा पर आए लोग इन्हें आसानी से अपने घर ले जाकर परिजनों और मित्रों में बांट सकते हैं।\n• रेलवे स्टेशन पर सुविधा: स्टेशन परिसर में बने कपासा रेस्टोरेंट में ट्रेन का इंतजार कर रहे यात्री किफायती दरों पर भोजन कर सकते हैं। यहां उत्तर भारतीय से लेकर दक्षिण भारतीय और फास्ट फूड के कई विकल्प उपलब्ध हैं।\n• हर की पैड़ी पर नाश्ता: सुबह गंगा स्नान के बाद घाट के ठीक सामने मोहन जी की दुकान से गरमागरम पूरी-कचौरी का नाश्ता किया जा सकता है। इससे श्रद्धालुओं को दूर भटके बिना घाट के पास ही ताजा भोजन मिल जाता है।\n\nऐसा क्यों हुआ\nहरिद्वार में इन पारंपरिक दुकानों की लोकप्रियता का मुख्य कारण इनकी दशकों पुरानी प्रामाणिकता, गंगा घाटों के समीप रणनीतिक स्थिति और बिना मिलावट के तैयार किया जाने वाला सात्विक स्वाद है।\n\n• पीढ़ियों की विरासत: इनमें से कई दुकानें ब्रिटिश काल और स्वतंत्रता के समय से संचालित हो रही हैं और उनके संचालन की जिम्मेदारी परिवार की नई पीढ़ियां संभाल रही हैं। निरंतर एक जैसी रेसिपी और मसालों के उपयोग के चलते इन दुकानों का स्वाद आज भी पहले जैसा बना हुआ है।\n• तीर्थयात्रियों की प्राथमिकता: धर्मनगरी में आने वाले अधिकांश श्रद्धालु सात्विक और बिना लहसुन-प्याज के तैयार भोजन को वरीयता देते हैं। इन दुकानों ने तीर्थयात्रियों की इसी धार्मिक भावना और आस्था का सम्मान करते हुए अपनी शुद्धता को कभी कम नहीं होने दिया।\n• प्रमुख स्थानों पर मौजूदगी: हर की पैड़ी, रेलवे स्टेशन, अपर रोड और प्रसिद्ध दक्षेश्वर मंदिर के पास स्थित होने के कारण यहां स्वाभाविक रूप से श्रद्धालुओं की आवाजाही अधिक रहती है। सुलभ स्थानों पर होने की वजह से मंदिर दर्शन के बाद लोग सीधे इन दुकानों पर पहुंच जाते हैं।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. कनखल का अन्नपूर्णा भोजनालय कब स्थापित हुआ था?\nअन्नपूर्णा भोजनालय की स्थापना वर्ष 1938 में हुई थी और यह पिछले 87 वर्षों से बिना लहसुन-प्याज का सात्वic भोजन परोस रहा है।\n\n2. हरिद्वार रेलवे स्टेशन परिसर में कौन सा अनोखा रेस्टोरेंट है?\nरेलवे स्टेशन परिसर में कपासा (KAPASAA) नाम का रेस्टोरेंट है, जो ट्रेन के डिब्बे के अंदर बनाया गया है और वहां भारतीय रेल का इतिहास भी दर्शाया गया है।\n\n3. गोपाल जी के पेड़ों की क्या खासियत है?\nमोती बाजार में मिलने वाले ये पेड़े शुद्ध दूध से बनाए जाते हैं और बिना फ्रिज के भी लगभग 20 दिनों तक पूरी तरह ताजा बने रहते हैं।\n\n4. भगवती छोले भंडार कहां स्थित है और वहां क्या खास मिलता है?\nयह दुकान अपर रोड पर नगर कोतवाली से 20 कदम दूर है, जहां छोले-भटूरे और पूरी के साथ गर्म चने का सूप और तीखा सलाद परोसा जाता है।\n\n5. हर की पैड़ी के मुख्य गेट के सामने नाश्ते के लिए कौन सी दुकान प्रसिद्ध है?\nहर की पैड़ी के मुख्य बड़े गेट के ठीक सामने मोहन जी पूरी वाले की दुकान है, जो सुबह के समय फूली हुई पूरियों और हींग-मसालेदार आलू की सब्जी के लिए जानी जाती है।\n\n6. प्राचीन मथुरा वाले की दुकान किस काल की है और वहां क्या मिलता है?\nयह ब्रिटिश काल की ऐतिहासिक दुकान है, जो मोती बाजार में ठंडे कुएं के पास स्थित है और अपने खस्ता समोसे, मलाई समोसा और शुद्ध मावे की मिठाइयों के लिए जानी जाती है।",
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  "category": "उत्तराखंड",
  "publishedAt": "2026-09-20",
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