# बागेश्वर आदिबद्री मंदिर अग्निकांड पर ग्लेशियर बाबा स्वामी चैतन्य आकाश का बयान, राजनीति छोड़कर क्षमा मांगने की अपील

> बागेश्वर के कपकोट तहसील के बदियाकोट गांव में ऐतिहासिक मां आदिबद्री मंदिर में आग लगने की घटना के बाद ग्लेशियर बाबा स्वामी चैतन्य आकाश ने दुख जताया है। उन्होंने देवीकुंड में मंदिर निर्माण से जुड़े पुराने विवाद का जिक्र करते हुए लोगों से राजनीति से दूर रहने और मां से क्षमा मांगने की अपील की है।

**Type:** article · **Category:** उत्तराखंड · **Published:** 2026-10-20 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/uttarakhand/glacier-baba-swami-chaitanya-akash-reacts-to-bageshwar-adi-badri-temple-fire-49852 · **Language:** Hindi
**Tags:** बागेश्वर, आदिबद्री मंदिर, ग्लेशियर बाबा, उत्तराखंड, कपकोट, बदियाकोट

बागेश्वर जिले के कपकोट तहसील के अंतर्गत आने वाले बदियाकोट गांव में स्थित ऐतिहासिक मां आदिबद्री मंदिर में हाल ही में आग लगने की दुर्घटना सामने आई है। इस दुखद घटना के बाद से ही धार्मिक और सामाजिक क्षेत्रों में लगातार प्रतिक्रियाएं आ रही हैं। इसी बीच देवीकुंड वाले ग्लेशियर बाबा स्वामी चैतन्य आकाश ने इस मामले पर अपना दर्द साझा किया है। उन्होंने देवीकुंड में मां भगवती के मंदिर को हटाए जाने को लेकर हुए पुराने विवाद को भी याद किया और क्षेत्रवासियों से आग्रह किया कि वे मां से क्षमा प्रार्थना करें। इसके साथ ही उन्होंने देवीकुंड में मां भगवती का एक भव्य मंदिर स्थापित करने और वहां आने वाले भक्तों के लिए नियमित पूजा-पाठ की व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग भी दोहराई है।

## काष्ठकला और सांस्कृतिक विरासत को भारी क्षति
कपकोट तहसील के बदियाकोट गांव में स्थित मां आदिबद्री भगवती मंदिर में हुई इस अग्निकांड की घटना से मंदिर की अमूल्य और ऐतिहासिक काष्ठकला को बहुत बड़ा नुकसान पहुंचा है। इस अप्रत्याशित घटना की वजह से पूरे इलाके के निवासियों और श्रद्धालुओं के मन में भारी शोक और चिंता का माहौल बना हुआ है। मंदिर की पारंपरिक लकड़ी की नक्काशी और उसके गहरे धार्मिक महत्व को देखते हुए जानकारों और स्थानीय लोगों द्वारा इस नुकसान को क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत के लिए एक बहुत बड़ी क्षति माना जा रहा है।

## ग्लेशियर बाबा स्वामी चैतन्य आकाश की तीखी प्रतिक्रिया
इस पूरे घटनाक्रम के बीच ग्लेशियर बाबा स्वामी चैतन्य आकाश ने अपनी तीखी प्रतिक्रिया देते हुए इस हादसे को अत्यंत पीड़ादायक करार दिया है। उन्होंने सवाल उठाया कि जिस शक्ति को पूरे ब्रह्मांड का रक्षक माना जाता है, उनके पवित्र मंदिर में इस प्रकार की दुर्घटना कैसे घटित हो सकती है। अपने बयान के दौरान उन्होंने अपनी बात रखते हुए धार्मिक आस्था के मामलों और देवीकुंड में मंदिर के निर्माण को लेकर अतीत में हुए विवाद का भी विशेष रूप से उल्लेख किया है।

## देवीकुंड मंदिर निर्माण और पुराना विवाद
ग्लेशियर बाबा ने पुरानी बातों को याद करते हुए बताया कि लगभग दो वर्ष पहले नवरात्रि के पवित्र दिनों के दौरान देवीकुंड में मां भगवती का एक अस्थायी मंदिर तैयार किया गया था। उनके अनुसार, जब वे देवीकुंड में अपनी तपस्या में लीन थे, तब उन्हें सपने में इस मंदिर के निर्माण का आदेश प्राप्त हुआ था। जिस स्थान पर उन्हें मंदिर बनाए जाने का स्वप्न आया था, बिल्कुल उसी स्थान पर स्वास्तिक पर्वत के प्रकट होने की बात भी उन्होंने कही। इसके बाद स्थानीय निवासियों के पूर्ण सहयोग से और उनके अपने मार्गदर्शन में उस मंदिर का निर्माण कार्य पूरा कराया गया था। हालांकि, कुछ समय बीतने के बाद इस मंदिर को लेकर काफी विवाद खड़ा हो गया और प्रशासनिक कार्रवाई के तहत उस अस्थायी मंदिर को वहां से हटा दिया गया था।

## धार्मिक स्थलों पर राजनीति से बचने की नसीहत
ग्लेशियर बाबा ने इस बात का कड़ा आरोप लगाया कि मंदिर के निर्माण से जुड़े इस पूरे मुद्दे को जानबूझकर राजनीतिक रंग दे दिया गया था। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि बीते कुछ वर्षों के दौरान जो कुछ भी अप्रिय घटा है, उस पर समाज के लोगों को गंभीरता से आत्ममंथन करने की आवश्यकता है और सभी को मां से अपनी भूल के लिए क्षमा मांगनी चाहिए। उनके बयानों के मुताबिक, देवी-देवताओं और आस्था के पावन स्थलों से जुड़े मामलों में हमेशा स्थानीय निवासियों की भावनाओं और सच्ची आस्था का पूरा सम्मान किया जाना चाहिए। इस तरह के पवित्र धार्मिक स्थानों पर किसी भी प्रकार की राजनीति नहीं की जानी चाहिए।

## ऐतिहासिक धरोहर के पुनर्निर्माण की उम्मीदें
अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए ग्लेशियर बाबा ने क्षेत्र में मां आदिबद्री के मंदिर के साथ-साथ देवीकुंड में मां भगवती के एक भव्य मंदिर की स्थापना किए जाने की पुरजोर वकालत की है। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि वहां आने वाले श्रद्धालुओं के लिए नियमित रूप से पूजा-अर्चना की उचित व्यवस्था की जानी बेहद जरूरी है। बदियाकोट के आदिबद्री मंदिर में आग लगने की दुर्घटना के बाद अब क्षेत्र के लोगों की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि इस ऐतिहासिक विरासत को कैसे सुरक्षित रखा जाए और इसका पुनर्निर्माण किस प्रकार हो। वहीं दूसरी तरफ, ग्लेशियर बाबा के इस हालिया बयान की वजह से देवीकुंड में मंदिर निर्माण का पुराना और चर्चित मुद्दा एक बार फिर से सार्वजनिक चर्चा के केंद्र में आ गया है।

## इसका आप पर असर
बागेश्वर जिले के कपकोट तहसील और आसपास के क्षेत्रों में हुई इस घटना का स्थानीय सांस्कृतिक और धार्मिक जीवन पर सीधा असर पड़ा है।

- **उत्तराखंड में:** ऐतिहासिक मंदिरों की सुरक्षा और उनके रखरखाव को लेकर राज्यभर में धार्मिक स्थलों की सुरक्षा व्यवस्था पर नए सिरे से चर्चा शुरू हो गई है।
- **बदियाकोट में:** स्थानीय निवासियों और श्रद्धालुओं की आस्था को ठेस पहुंची है और वे अपनी प्राचीन सांस्कृतिक विरासत के शीघ्र पुनर्निर्माण की मांग कर रहे हैं।

## ऐसा क्यों हुआ
आदिबद्री मंदिर में घटी इस अग्निकांड की घटना और उससे जुड़े विवादों के पीछे कई परिस्थितियां जिम्मेदार हैं।

- **लकड़ी की संरचना:** मंदिर पारंपरिक काष्ठकला और पुरानी लकड़ी की नक्काशी से बना था, जिसके कारण वहां आग तेजी से फैल सकती है।
- **पुराना विवाद:** देवीकुंड में दो साल पहले अस्थायी मंदिर के निर्माण और प्रशासन द्वारा उसे हटाए जाने को लेकर स्थानीय स्तर पर मतभेद रहे हैं।
- **राजनीतिक हस्तक्षेप:** धार्मिक स्थलों के निर्माण और उनकी स्थापना से जुड़े मामलों में राजनीतिक बयानबाजी और असहयोग का माहौल बना रहा है।

## सवाल-जवाब

### 1. बागेश्वर के किस गांव में मां आदिबद्री मंदिर स्थित है?
मां आदिबद्री मंदिर बागेश्वर जिले के कपकोट तहसील के बदियाकोट गांव में स्थित है।

### 2. आग लगने की इस घटना से मंदिर को क्या नुकसान हुआ है?
मंदिर में आग लगने से उसकी ऐतिहासिक काष्ठकला और पारंपरिक नक्काशी को भारी नुकसान पहुंचा है।

### 3. ग्लेशियर बाबा का पूरा नाम क्या है?
ग्लेशियर बाबा का पूरा नाम स्वामी चैतन्य आकाश है।

### 4. देवीकुंड में अस्थायी मंदिर का निर्माण कब हुआ था?
देवीकुंड में करीब दो वर्ष पहले नवरात्रि के दौरान अस्थायी मंदिर का निर्माण किया गया था।

### 5. ग्लेशियर बाबा ने अपने बयान में क्या अपील की है?
उन्होंने राजनीति से दूर रहने और क्षेत्रवासियों से मां से क्षमा मांगने की अपील की है।

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