# हल्द्वानी की पार्षद बीना चौहान ने डीएसबी परिसर में लिया दाखिला, बेटे भानु प्रताप के छात्रसंघ चुनाव प्रचार को मिली नई ताकत

> हल्द्वानी नगर निगम की पार्षद बीना चौहान ने नैनीताल के डीएसबी परिसर में एमए राजनीति विज्ञान में प्रवेश लिया है। वह छात्रसंघ चुनाव में अध्यक्ष पद के लिए उतरे अपने बेटे भानु प्रताप सिंह चौहान के समर्थन में प्रचार करने के साथ अपनी उच्च शिक्षा भी जारी रख रही हैं।

**Type:** article · **Category:** उत्तराखंड · **Published:** 2026-09-29 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/uttarakhand/haldwani-ki-parshada-beena-chauhan-ne-dsb-parisara-men-liya-dakhila-bete-bhanu-pratap-ke-chhatrasngha-chunava-prachara-ko-mili-nai-40046 · **Language:** Hindi
**Tags:** डीएसबी परिसर नैनीताल, बीना चौहान, भानु प्रताप सिंह चौहान, छात्रसंघ चुनाव, हल्द्वानी नगर निगम, उत्तराखंड राजनीति

उत्तराखंड के उच्च शिक्षण संस्थानों में छात्र राजनीति आमतौर पर युवा चेहरों और उनकी आपसी प्रतिस्पर्धा के इर्द-गिर्द घूमती है, परंतु कुमाऊं विश्वविद्यालय के नैनीताल स्थित डीएसबी परिसर में इस बार एक अनोखा दृश्य उभरकर सामने आया है। वहां एक मां ने अपने बेटे के चुनावी अभियान को जमीनी स्तर पर मजबूती देने के उद्देश्य से खुद उसी महाविद्यालय में नियमित विद्यार्थी के रूप में प्रवेश ले लिया है। हल्द्वानी नगर निगम के वार्ड नंबर 10 नवाबी रोड का प्रतिनिधित्व करने वाली पार्षद बीना चौहान ने परिसर में राजनीति विज्ञान विषय में स्नातकोत्तर (एमए) की पढ़ाई शुरू की है। वह कक्षाओं में उपस्थिति दर्ज कराने के साथ ही अध्यक्ष पद पर चुनाव लड़ रहे अपने पुत्र भानु प्रताप सिंह चौहान के पक्ष में छात्र मतदाताओं से संवाद भी कर रही हैं।

## नैनीताल के प्रतिष्ठित परिसर में दिलचस्प चुनावी समीकरण
डीएसबी परिसर में छात्रसंघ चुनाव की तिथि 29 सितंबर तय की गई है। इस चुनाव में अध्यक्ष पद के प्रत्याशी भानु प्रताप सिंह चौहान पूरे दमखम के साथ अपनी उम्मीदवारी पेश कर रहे हैं। उनके इस सफर में उनकी मां बीना चौहान का सहपाठी बनकर परिसर में मौजूद रहना चर्चा का विषय बना हुआ है। वह हर दिन कॉलेज पहुंचकर बेटे के प्रचार में हाथ बंटाती हैं और विभिन्न संकायों के विद्यार्थियों से संपर्क साधती हैं। उनका मानना है कि परिसर का विधिवत हिस्सा बनने से उन्हें अन्य छात्र-छात्राओं की समस्याओं और उनकी अपेक्षाओं को सीधे समझने का अवसर मिल रहा है, जिसका सीधा सकारात्मक असर चुनावी संवाद पर पड़ रहा है।

## विवाह के तेरह साल बाद शुरू हुआ था उच्च शिक्षा का नया सफर
सार्वजनिक जीवन में एक निर्वाचित जनप्रतिनिधि के रूप में सक्रिय रहने वाली बीना चौहान का अकादमिक रिकॉर्ड निरंतर सीखने की ललक को दर्शाता है। वर्ष 2001 में वैवाहिक बंधन में बंधने के पश्चात उनकी नियमित पढ़ाई में लंबा विराम आ गया था। इसके लगभग 13 वर्ष बीत जाने पर उन्होंने वर्ष 2014 में एमबीपीजी कॉलेज हल्द्वानी में एजुकेशन विषय से परास्नातक की उपाधि हासिल की। इसके बाद भी उनके अध्ययन का क्रम थमा नहीं और वर्ष 2025 में उन्होंने विधि स्नातक (एलएलबी) की डिग्री पूरी की। अब करीब 12 वर्षों के अंतराल के बाद उन्होंने डीएसबी परिसर में दोबारा दाखिला लेकर राजनीति विज्ञान से एमए करने का निर्णय लिया है।

बीना चौहान का स्पष्ट मत है कि ज्ञान अर्जित करने के मार्ग में उम्र कभी रुकावट नहीं बन सकती। उनका कहना है कि मतदान संपन्न हो जाने के उपरांत भी वह अपनी इस पढ़ाई को पूरे मनोयोग से जारी रखेंगी और इसे बीच में छोड़ने का कोई इरादा नहीं है।

## बेटे के प्रयासों को सम्बल और दोहरी जिम्मेदारियों का संतुलन
अध्यक्ष पद के उम्मीदवार भानु प्रताप सिंह चौहान के अनुसार, उनकी मां ने कला स्नातक (बीए) के अलावा दो अलग-अलग विषयों में एमए किया है, एलएलबी की पढ़ाई पूरी की है और उनके पास दो विशेष डिप्लोमा भी मौजूद हैं। उन्होंने रेखांकित किया कि उनकी मां के भीतर नए ज्ञान के प्रति सदैव गहरा आकर्षण रहा है, जिसने उन्हें दोबारा औपचारिक शिक्षण संस्थान में प्रवेश लेने को प्रेरित किया।

भानु प्रताप पिछले करीब पांच वर्षों से छात्र राजनीति के धरातल पर सक्रिय रहकर संघर्ष कर रहे हैं। अपने पुत्र के इस लंबे परिश्रम को देखकर बीना चौहान को महसूस हुआ कि उन्हें केवल घर से हौसला देने के बजाय सीधे मैदान में उतरकर उनका संबल बनना चाहिए। हालांकि, परिसर में एक सक्रिय छात्रा की भूमिका निभाने और साथ ही बेटे के खान-पान एवं दैनिक आवश्यकताओं की चिंता करने के बीच तालमेल बिठाना आसान नहीं रहा। इसके बावजूद वह इसे किसी कठिन बाधा के रूप में देखने के बजाय अपने बच्चे के लक्ष्यों में सहभागी बनने का एक दुर्लभ अवसर मानती हैं। उनका विश्वास है कि जब परिवार बच्चों के परिश्रम के पीछे मजबूती से खड़ा होता है, तो उनकी संकल्प शक्ति कई गुना बढ़ जाती है।

## इसका आप पर असर
यह घटना उच्च शिक्षा में प्रवेश के इच्छुक वयस्कों और छात्र राजनीति में सक्रिय युवाओं के लिए एक प्रेरणादायक व्यावहारिक उदाहरण प्रस्तुत करती है।

- **उत्तराखंड में:** नैनीताल के डीएसबी परिसर और आसपास के महाविद्यालयों में यह कदम उम्र की सीमा तोड़क साबित हुआ है। इससे कामकाजी महिलाओं और गृहिणियों में दोबारा कॉलेज जाकर उच्च शिक्षा हासिल करने को लेकर सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित होगा।
- **भारत में:** देश भर के अभिभावकों और छात्र नेताओं के लिए यह कहानी पारिवारिक समर्थन की नई मिसाल पेश करती है। यह दिखाता है कि डिग्री और कानूनी योग्यताएं हासिल करने के बाद भी किसी भी उम्र में नई विधा की पढ़ाई शुरू की जा सकती है।
- **छात्र राजनीति पर असर:** कॉलेज परिसरों में वरिष्ठ विद्यार्थियों और जनप्रतिनिधियों की सहभागिता से चुनावी विमर्श अधिक गंभीर होता है। मतदाताओं को यह समझने में मदद मिलती है कि स्थानीय नागरिक नेतृत्व और छात्र कल्याण एक-दूसरे से किस प्रकार जुड़े हैं।
- **वयस्क शिक्षा को प्रोत्साहन:** विवाह या घरेलू दायित्वों के कई वर्षों बाद डिग्री हासिल करने का यह उदाहरण समाज में निरंतर अध्ययन की प्रवृत्ति को बल देता है। उच्च शिक्षण संस्थानों में प्रौढ़ शिक्षार्थियों के लिए स्वीकार्यता बढ़ती है।

## ऐसा क्यों हुआ
बीना चौहान द्वारा कॉलेज में प्रवेश लेने का निर्णय अपने पुत्र के पांच वर्षों के राजनीतिक संघर्ष को सहारा देने और अपनी व्यक्तिगत अध्ययन यात्रा को आगे बढ़ाने की दोहरी आवश्यकता से प्रेरित हुआ।

- **बेटे के चुनाव प्रचार को प्रत्यक्ष समर्थन:** भानु प्रताप सिंह चौहान पिछले करीब पांच वर्षों से परिसर की राजनीति में सक्रिय रहे हैं और इस वर्ष अध्यक्ष पद के प्रत्याशी बने हैं। परिसर का नियमित छात्र बनने से उनकी मां को सीधे कॉलेज के भीतर रहकर प्रचार करने और विद्यार्थियों से रोज मिलने की आधिकारिक पात्रता मिल गई।
- **निरंतर अध्ययन की व्यक्तिगत अभिरुचि:** बीना चौहान ने विवाह के 13 वर्ष बाद 2014 में एमए और फिर 2025 में एलएलबी की उपाधि प्राप्त की थी। राजनीति विज्ञान में स्नातकोत्तर की उपाधि लेना उनके शैक्षणिक विस्तार और एक जनप्रतिनिधि के रूप में उनकी रुचि का स्वाभाविक हिस्सा था।
- **दोहरी भूमिकाओं के प्रबंधन का अवसर:** चुनाव के तनावपूर्ण दौर में बेटे के स्वास्थ्य, आहार और अभियान की व्यवस्थाओं को एक साथ संभालने के लिए कॉलेज में भौतिक उपस्थिति अनिवार्य थी। उन्होंने इसे चुनौती के रूप में लेने के बजाय बेटे के लक्ष्य को गति देने के अवसर के रूप में स्वीकार किया।

## सवाल-जवाब

### 1. बीना चौहान कौन हैं और उन्होंने किस कॉलेज में दाखिला लिया है?
बीना चौहान हल्द्वानी-काठगोदाम नगर निगम के वार्ड नंबर 10 नवाबी रोड से पार्षद हैं। उन्होंने नैनीताल के डीएसबी परिसर में राजनीति विज्ञान से एमए में दाखिला लिया है।

### 2. उन्होंने दोबारा कॉलेज में प्रवेश क्यों लिया?
उन्होंने छात्रसंघ चुनाव में अध्यक्ष पद के प्रत्याशी अपने बेटे भानु प्रताप सिंह चौहान के प्रचार में सहयोग करने और अपनी उच्च शिक्षा जारी रखने के लिए प्रवेश लिया है।

### 3. डीएसबी परिसर नैनीताल में छात्रसंघ चुनाव किस तिथि को प्रस्तावित हैं?
डीएसबी परिसर नैनीताल में छात्रसंघ चुनाव की तिथि 29 सितंबर प्रस्तावित की गई है।

### 4. बीना चौहान की पूर्व शैक्षणिक योग्यताएं क्या हैं?
उनके पास बीए, 2014 में एमबीपीजी कॉलेज से एजुकेशन में एमए, 2025 में पूरी की गई एलएलबी की डिग्री और दो डिप्लोमा हैं।

### 5. भानु प्रताप कितने वर्षों से छात्र राजनीति में सक्रिय हैं?
भानु प्रताप पिछले करीब पांच वर्षों से छात्र राजनीति में सक्रिय रहकर मेहनत कर रहे हैं।

### 6. क्या चुनाव समाप्त होने के बाद बीना चौहान अपनी पढ़ाई छोड़ देंगी?
नहीं, उन्होंने स्पष्ट किया है कि छात्रसंघ चुनाव संपन्न होने के बाद भी वह अपनी एमए की पढ़ाई पूरी करने के लिए कॉलेज में अध्ययन जारी रखेंगी।

## प्रेरणा और सबक
बीना चौहान का यह कदम साबित करता है कि पारिवारिक दायित्वों और सामाजिक पदों के बीच भी पढ़ाई और बच्चों के सपनों को पूरी निष्ठा से साधा जा सकता है।

- **शिक्षा में उम्र कभी बाधा नहीं बनती:** विवाह के 13 वर्ष बाद दोबारा पढ़ाई शुरू करके लगातार एमए और एलएलबी करना यह सिखाता है कि सीखने का कोई अंतिम पड़ाव नहीं होता। जब भी इच्छाशक्ति जागृत हो, नई डिग्री या ज्ञान की शुरुआत की जा सकती है।
- **संतानों के संघर्ष में वास्तविक भागीदारी:** केवल मौखिक प्रोत्साहन देने के बजाय बेटे के साथ धरातल पर खड़े होकर कठिनाइयों को साझा करना एक आदर्श अभिभावक का उदाहरण पेश करता है। पारिवारिक सहयोग बच्चों के आत्मविश्वास को कई गुना सुदृढ़ करता है।
- **जनसेवा और आत्मविकास का संतुलन:** वार्ड पार्षद के रूप में नगर निगम की जिम्मेदारियां निभाते हुए भी खुद को उच्च शिक्षित करना सिखाता है कि व्यस्तताओं के बावजूद अपने व्यक्तिगत विकास को कभी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

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