# हल्द्वानी में सीएम पुष्कर सिंह धामी के एक बयान से आईएएस दीपक रावत के सियासी भविष्य पर शुरू हुई चर्चा

> हल्द्वानी आगमन पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कैबिनेट मंत्री से गुलदस्ता लेते हुए कुमाऊं कमिश्नर दीपक रावत पर एक टिप्पणी की, जिसके बाद प्रशासनिक अधिकारी के चुनावी मैदान में आने के कयास लगने लगे हैं।

**Type:** article · **Category:** उत्तराखंड · **Published:** 2026-11-03 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/uttarakhand/haldwani-men-cm-pushkar-singh-dhami-ke-eka-bayana-se-ias-deepak-rawat-ke-siyasi-bhavishya-para-shuru-hui-charcha-55483 · **Language:** Hindi
**Tags:** दीपक रावत, पुष्कर सिंह धामी, उत्तराखंड राजनीति, हल्द्वानी, कुमाऊं कमिश्नर, आईएएस अधिकारी

उत्तराखंड के प्रशासनिक गलियारों से लेकर राजनीतिक हलकों तक इस समय एक दिलचस्प घटनाक्रम की चर्चा तेजी से हो रही है। हल्द्वानी पहुंचे मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने खुले तौर पर एक ऐसा बयान दिया जिससे यह सवाल उठने लगा है कि क्या चर्चित आईएएस अधिकारी दीपक रावत सरकारी सेवा छोड़कर चुनावी राजनीति में कदम रखने जा रहे हैं। वर्तमान समय में कुमाऊं मंडल के आयुक्त और मुख्यमंत्री के सचिव की अहम दोहरी जिम्मेदारी संभाल रहे दीपक रावत अपनी सख्त कार्यशैली और जनता के बीच गहरी पैठ के लिए जाने जाते हैं। मुख्यमंत्री के इस अप्रत्याशित बयान के बाद मौजूद लोग मुस्कुरा उठे, लेकिन इस टिप्पणी पर अभी तक संबंधित अधिकारी की तरफ से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।

## हल्द्वानी के हेलीपैड पर क्या घटा पूरा वाकया
यह पूरा प्रसंग सोमवार को उस वक्त सामने आया जब मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी अपने निर्धारित दौरे पर हल्द्वानी पहुंचे थे। फॉरेस्ट ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट के स्पोर्ट्स ग्राउंड में तैयार किए गए हेलीपैड पर जैसे ही मुख्यमंत्री का हेलीकॉप्टर उतरा, वहां उनके स्वागत के लिए तमाम जनप्रतिनिधि और प्रशासनिक अधिकारी कतार में खड़े थे। इस स्वागत दल में राज्य के कैबिनेट मंत्री राम सिंह कैड़ा के अलावा कुमाऊं कमिश्नर दीपक रावत, आईजी निवेदिता कुकरेती और कई अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।

प्रोटोकॉल के तहत जब कैबिनेट मंत्री राम सिंह कैड़ा ने आगे बढ़कर मुख्यमंत्री को फूलों का गुलदस्ता भेंट किया, ठीक उसी पल मुख्यमंत्री ने बगल में खड़े आईएएस अधिकारी दीपक रावत की ओर इशारा करते हुए चुटकी ली। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कैबिनेट मंत्री के हाथों से बुके स्वीकार करते हुए टिप्पणी की कि आने वाले दिनों में कमिश्नर साहब को भी ऐसे ही आना है। मुख्यमंत्री के इतना कहते ही हेलीपैड पर मौजूद तमाम नेता और प्रशासनिक अधिकारी मुस्कुराने लगे। इसके फौरन बाद दीपक रावत ने भी मुख्यमंत्री को एक किताब भेंट कर उनका स्वागत किया। भले ही यह बात हल्के-फुल्के अंदाज में कही गई हो, लेकिन सियासी विश्लेषक इसे वरिष्ठ नौकरशाह के सक्रिय राजनीति में प्रवेश के स्पष्ट संकेत के रूप में देख रहे हैं।

## प्रशासनिक सफर: आईआरएस से कुमाऊं कमिश्नर तक
उत्तराखंड कैडर के 2007 बैच के आईएएस अधिकारी दीपक रावत का जन्म 14 सितंबर 1977 को हुआ था। उन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा मसूरी के प्रतिष्ठित सेंट जॉर्ज स्कूल से पूरी की। इसके बाद उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय के हंसराज कॉलेज से इतिहास विषय में स्नातक की डिग्री हासिल की। उच्च शिक्षा के लिए वह जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय पहुंचे, जहां से उन्होंने इतिहास में ही स्नातकोत्तर की पढ़ाई पूरी की। भारतीय प्रशासनिक सेवा में चयनित होने से पहले दीपक रावत आईआरएस अधिकारी के पद पर भी सेवाएं दे चुके थे।

आईएएस के रूप में उनका करियर बेहद विविध और महत्वपूर्ण पदों पर बीता है। वह बागेश्वर के जिलाधिकारी रहे, कुमाऊं मंडल विकास निगम में प्रबंध निदेशक की जिम्मेदारी निभाई, और इसके बाद नैनीताल तथा हरिद्वार जैसे संवेदनशील जिलों के जिलाधिकारी पद पर कार्य किया। इसके अतिरिक्त उन्होंने रुड़की विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष, हरिद्वार कुंभ मेला अधिकारी, उत्तराखंड पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (यूपीसीएल) के प्रबंध निदेशक, पावर ट्रांसमिशन कॉरपोरेशन ऑफ उत्तराखंड लिमिटेड (पिटकुल) के प्रबंध निदेशक और उरेडा के निदेशक के तौर पर प्रशासनिक व्यवस्था संभाली। वर्ष 2021 से वह कुमाऊं मंडल के आयुक्त और मुख्यमंत्री के सचिव पद की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।

## सोशल मीडिया पर जबरदस्त फैन फॉलोइंग और लोकप्रियता
दीपक रावत की पहचान केवल एक पारंपरिक नौकरशाह की नहीं है, बल्कि वह सोशल मीडिया के सबसे लोकप्रिय प्रशासनिक चेहरों में गिने जाते हैं। फेसबुक पर उनके 3 लाख से ज्यादा फॉलोअर्स हैं, जबकि उनके यूट्यूब चैनल पर फॉलोअर्स की संख्या 40 लाख का आंकड़ा पार कर चुकी है। इंस्टाग्राम पर भी उनकी लोकप्रियता तेजी से बढ़ रही है।

क्षेत्रीय निरीक्षणों या औचक छापों के दौरान उनके पहुंचते ही मीडिया और आम लोगों की भारी भीड़ जमा हो जाती है। इंटरनेट पर उनके ऐसे दर्जनों वीडियो उपलब्ध हैं जिनमें वह लापरवाह अधिकारियों को सख्त हिदायत देते और दफ्तरों से लेकर बाजार तक जमीनी हकीकत की पड़ताल करते दिखाई देते हैं। जनता की शिकायतों को सीधे सुनने और त्वरित निस्तारण करने के उनके अंदाज ने उन्हें युवाओं और स्थानीय निवासियों के बीच बेहद लोकप्रिय बना दिया है।

## मूल जड़ें और चुनावी क्षेत्र को लेकर संभावित समीकरण
यदि दीपक रावत भविष्य में चुनावी राजनीति का रुख करते हैं, तो उनकी क्षेत्रीय जड़ें और प्रशासनिक अनुभव चुनावी समीकरण तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं। वह मूल रूप से रुद्रप्रयाग जिले के लोली गांव से ताल्लुक रखते हैं, जबकि उनकी ननिहाल पौड़ी गढ़वाल के मंगला कोटी गांव में स्थित है। उनकी शुरुआती पढ़ाई मसूरी में हुई और प्रशासनिक सेवा का एक बड़ा हिस्सा उन्होंने कुमाऊं के विभिन्न जिलों में बिताया है। गढ़वाल मंडल से लेकर कुमाऊं तक फैली उनकी पहचान उन्हें पूरे राज्य में समान रूप से स्वीकार्य बनाती है। हालांकि, वह सचमुच राजनीति में कदम रखेंगे या नहीं और किस विधानसभा अथवा लोकसभा क्षेत्र को अपनी कर्मभूमि बनाएंगे, इस पर फिलहाल संशय बना हुआ है।

## इसका आप पर असर
वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी के राजनीति में आने की अटकलें राज्य के प्रशासनिक कामकाज और स्थानीय चुनावी समीकरणों दोनों को प्रभावित कर सकती हैं।

- **भारत में:** चर्चित नौकरशाहों का चुनावी राजनीति की ओर रुख करना राष्ट्रीय स्तर पर प्रशासनिक शुचिता और सेवा परिवर्तन की बहस को तेज करता है। इससे यह देखने को मिलता है कि लोकप्रिय प्रशासनिक चेहरों को राजनीतिक दल किस तरह नीति और जनसंपर्क के लिए आगे लाते हैं।
- **उत्तराखंड में:** कुमाऊं और गढ़वाल दोनों क्षेत्रों में व्यापक जनसंपर्क रखने वाले अधिकारी की संभावित राजनीतिक एंट्री से मौजूदा दलों के टिकट वितरण और क्षेत्रीय संतुलन पर सीधा असर पड़ सकता है। यदि वह सेवा छोड़ते हैं, तो कुमाऊं कमिश्नरी और सीएम सचिवालय में अहम प्रशासनिक फेरबदल होना तय है।

## ऐसा क्यों हुआ
यह घटनाक्रम हल्द्वानी में मुख्यमंत्री के आगमन के दौरान हुई एक सहज बातचीत और प्रतीकात्मक टिप्पणी से उपजा है, जिसने राज्य की राजनीति में नई चर्चा छेड़ दी है।

- **सीधा कारण:** हल्द्वानी हेलीपैड पर कैबिनेट मंत्री राम सिंह कैड़ा द्वारा पुष्पगुच्छ भेंट किए जाने के दौरान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पास खड़े दीपक रावत की ओर इशारा करते हुए कहा कि आने वाले दिनों में उन्हें भी इसी तरह आना है।
- **पृष्ठभूमि और स्थितियां:** दीपक रावत लंबे समय से सोशल मीडिया और सार्वजनिक निरीक्षणों के जरिए खासी लोकप्रियता हासिल कर चुके हैं और मुख्यमंत्री के सचिव के रूप में सत्ता के शीर्ष केंद्र से सीधे जुड़े हैं।
- **वर्तमान स्थिति:** इस टिप्पणी के बाद भी खुद दीपक रावत की ओर से राजनीति में शामिल होने को लेकर कोई सार्वजनिक पुष्टि या खंडन नहीं किया गया है, जिससे यह विषय अभी केवल राजनीतिक चर्चाओं तक सीमित है।

## सवाल-जवाब

### 1. मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हल्द्वानी में दीपक रावत को लेकर क्या टिप्पणी की?
कैबिनेट मंत्री राम सिंह कैड़ा से फूलों का गुलदस्ता लेते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि आने वाले दिनों में कमिश्नर साहब को भी ऐसे ही आना है।

### 2. वर्तमान में दीपक रावत कौन से प्रशासनिक पद संभाल रहे हैं?
दीपक रावत वर्तमान में कुमाऊं मंडल के आयुक्त और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के सचिव के रूप में कार्यरत हैं।

### 3. आईएएस अधिकारी दीपक रावत का शैक्षणिक और सेवा का क्या विवरण है?
वह 2007 बैच के उत्तराखंड कैडर के आईएएस अधिकारी हैं, जिन्होंने मसूरी के सेंट जॉर्ज स्कूल, दिल्ली विश्वविद्यालय के हंसराज कॉलेज और जेएनयू से पढ़ाई की है।

### 4. आईएएस बनने से पहले दीपक रावत किस सेवा में कार्यरत थे?
भारतीय प्रशासनिक सेवा में आने से पूर्व दीपक रावत भारतीय राजस्व सेवा (आईआरएस) के अधिकारी थे।

### 5. दीपक रावत मूल रूप से उत्तराखंड के किस जिले से संबंधित हैं?
वह मूल रूप से रुद्रप्रयाग जिले के लोली गांव के रहने वाले हैं और उनकी ननिहाल पौड़ी गढ़वाल के मंगला कोटी गांव में है।

### 6. सोशल मीडिया पर दीपक रावत के फॉलोअर्स की संख्या कितनी है?
फेसबुक पर उनके 3 लाख से अधिक और यूट्यूब चैनल पर 40 लाख से अधिक फॉलोअर्स हैं।

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